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महाराष्ट्र की राजनीति में ठाकरे ब्रांड को कभी अपराजेय माना जाता था। एक दौर था जब उद्धव ठाकरे और शिवसेना का नाम ही राजनीतिक ताकत की पहचान था, लेकिन आज हालात बदलते नजर आ रहे हैं। सांसदों और नेताओं की नाराजगी, लगातार बगावत और संगठनात्मक चुनौतियों ने शिवसेना UBT को मुश्किल दौर में ला खड़ा किया है। क्या कुछ रणनीतिक गलतियों ने उद्धव ठाकरे की राजनीतिक पकड़ को कमजोर कर दिया? क्या ठाकरे ब्रांड अपनी पुरानी ताकत खो रहा है? इस वीडियो में जानिए शिवसेना UBT संकट, उद्धव ठाकरे की चुनौतियां और महाराष्ट्र की बदलती राजनीति का पूरा विश्लेषण।

Once considered one of the most influential political forces in Maharashtra, the Thackeray brand is now facing its toughest test. Shiv Sena (UBT) has been hit by defections, internal challenges, and growing questions about its future direction. Many political observers believe a series of strategic decisions may have weakened Uddhav Thackeray’s hold over the party and its leaders. How did a movement that once commanded immense loyalty reach this point? In this video, we examine the Shiv Sena UBT crisis, the challenges facing Uddhav Thackeray, and what it means for Maharashtra’s evolving political landscape.

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00:00कि हमेशा उद्धो गुट के साथ ही ऐसा क्यों हो रहा है टीमसी के साथ चलो हमने माल लिया कि
00:05उनके हाँ सत्ता गई और बंगाल के राद निती ही वैसी है कि सब लोग सत्ता से चिपके रहना चाहते
00:09हैं तो वहां पर उनको डर सताया उनके बहुत सारे टीमसी की नेताओं पर �
00:14जनता बहुत आकुरुशित थी अंडे फेके जाने लगे तो उन्हें अपनी जनता से डर था इसलिए उपाला बजलने हैं तमाम
00:19और वजाए गिनाई जा रही हैं लेकिन उद्धो ठाकरे तो सत्ता में रहते हुए पार्टी तूट गई थी उनकी वो
00:23जब मुख्यमंत्री थ
00:24और चार साल के बाद फिर से तूट गई इसके पीछे क्या वजा हो सकती अभी मैं संजनी रूपम का
00:29बयान सुन रहा था वो पहले बाला साथ ठाकरे की जमान में शियुसेना में थे वो कह रहे थे कि
00:33अभी जिनके हाथों में शियुसेना उबाटा की कमान है उद्धो ठाकरे
00:53लेकिन क्या इसी फॉर्मूले से पार्टी यां टूट रही है इसी फॉर्मूले से क्या आमाधी पार्टी टूटी है इसी फॉर्मूले
00:58से क्या त्रेंड मूल कॉंगर्स टूटा है इन फाक्ट शिवेंद्र जी जो विचार भारा वाली बात कह रहा है आज
01:03अगर आज की रा
01:22वाली पार्टी थी जब तक बाला सहाब ठाकरे थे तब तक वो हिंदुत की रेखा पर चलती रही उद्धव ठाकरे
01:28ने अपनी अलग रहा बनाने की कोशिस की तो लोगों में असंतो सुभरा और उससे लोग अलग हो गे लिकिना
01:33आमादी पार्टी के साथ क्या हुआ उनकी तो
01:47वो उगरतर तरीके से आगे बर रहे थे और तो और देखिए टीमसी की अगर कोई विचारधारा होगी चाहे आप
01:53उसे अलपसंख्यक तुष्टी करन कहें तो उसका सबसे बड़ा ब्रांड एमबेस्डर इस चुनाव में कौन बन करके उपरा था आफकोर्स
02:00वो ब्रांड ए
02:17उसी तरह उनके साथ टीमसी का निशान और उनका नाम रहे लेकिन सायोनी घोष्ट चाहती थी कि टीमसी की कोई
02:23छाया भी ने गुट पर ना रहे बिल्कुने एंसी पी जैसी पार्टी का सुझाब दिया और यह सब कुछ हो
02:29गया तो मुझे लगता है कि आज की राजनीत में �
02:31विचारधारा जैसी कोई चीज बची भी नहीं रहेगी अब सब सबाल यह है कि अब कल को अगर संजय राउत
02:37भी आ जाये भारतिय जनता पार्टी में ता असर ने क्यों होगा जब सायोनी घोष्ट आ सकती हैं संजय राउत
02:42का तो ऐसा हाड लाइन भी नहीं रहा है जिस तरह
03:01उनका काबा और मदीना हट गया और हिंदुतों का तिवर प्रवाह शुरू हो गया आप जाईए 2022 के पस्चिम मेंगाल
03:10सिक्षक भरती घोटाला की फाइल देखिए उसमें सायोनी घोष्ट भी पूछताच की गई थी क्या ये डर है हो सकता
03:19है आखिर अजित पवार 24 घंटे क
03:24अंदर पाला बदल के वापस नसीपी में चले जाते हैं आते हैं भारतिय जनता पार्टी के साथ सरकार बनाते हैं
03:30उक मुखमंतरी बनते हैं और इन पर केस क्लोज हो जाता है और अगले दिन वे वापस चले जाते हैं
03:37नसीपी में बिलकुल अखिर क्या वजह होती है विचार
03:46अधारा वाली इस्थिती नहीं है दूसरी बात भारती जनता पार्टी एक वो पार्टी थी संसद में इसके प्रधान मंत्री कहा
03:54करते थे कि ऐसे इस तरीके से अगर सत्ता मिलती है तो उस सत्ता को मैं चिम्टे से भी छूना
04:02पसंद नहीं करूंगा अब तो यह है कि सत्ता किसी
04:16करें थे कि चिम्टे से चुना पसंद नहीं करूंगा तब बीजेपी कभी दोसों के पार पहुझ भी नहीं पाई थी
04:20लोगसभा में बिल्सों बैयासी उनका सबसे हाइस नंबर था लोगसभा में लेकिन जब मोद्य की वीजेपी आई तो पहली बार
04:27में है इनको लोगसभा
04:43कर चुके हैं कई नई चीजे उसमें और होंगी हमारे सहयोगी है शिवेंद्र जी वो कह रहे है थे कि
04:48उतरप्रदेश का चुनाव भी निशाने पर होगा हो सकता है और क्यों नहीं हो सबसे बड़ा प्रदेश है देश का
04:55और यहां तक कि आप यह समझे कि उतरप्रदेश अ�
05:11को हमेशा प्रवावित करता है ना केवल उससे राजसभा के संख्या पर असर परता है बलकि एक देश के एक
05:20बड़े जनसंख्या वर्ग का वो प्रतिनिश्यत करती है ज्यादा तक परदान मंत्री भी वही सहीं आये हैं तो हैं गुजरात
05:29से लेकिन चुनाव लगे आते हैं क
05:41विचारधारा की वज़ा से अभी आये हैं अगर विचारधारा की वज़ा होती तो यह 2021 में ही आ गए होते
05:482020 में ही आ गये होते 2020 में जब उधर ठाकरे सब्टा चला रहे थे और एकनात्चिंदे को लगाए कि
05:55यह बाला शाहाब के सिधान्त पर नहीं चल रहे हैं तो जितने �
05:59लोग इनके साथ है थे वो भी आ गए होते दोहजार चौविस में तो कम से कम आहीं गए होते
06:03लोग सभा चुनाओ हो रहा है वह चलो यह गैर रास्टवादियों को छोड़ो भारतिय जनता पार्टी के साथ मिल जाते
06:08एक नाच सिंदे जी के साथ आ जाते हैं लेकिन आज यह क्
06:15कखेल है यह बिछाया जाता है भारतिय जनता पार्टी के द्वारा इसे संचालित भी किया जाता है भारतिय जनता पार्टी
06:20के द्वारा और अलग-अलग जग होपर अलग-अलग मोहरे होते हैं जैसे पश्चि महंगावल के लिए भूपेंदर यादव मोहरे
06:27थे सायोनी घो
06:42मास्टर एक ही है और वह बहुत ही सफलता पर उनकी का दुनिया लोहा मांती है इस मावले में पॉलिटिकल
06:50जोड तोर की जो विशेशगिता है वह भारतिय जनता पार्टी के इसका दावर नेता में भर भर के दी है
06:58उपर वाले ने और उसका वह बखुवी इस्तमाल भी करते है
07:02अपनी पार्टी के हित के लिए अपने सरकार को बचाने और उसे और मजबूत करने के लिए हलाकि सरकार पर
07:07पिछले बारह सालों में कोई संकट नहीं रहा है पिछले दस साल जो थे वो तो उनके बहुमत की सरकार
07:13थी भारते जनता पार्टी अपने दम पर इतनी सारी सीटे �
07:16जीत कराये थे उनको कोई हिला नहीं सकता था पिछले दो-धाइ साल से
07:19जो सरकार है केंद्र में हलाकि वो गठबंधन की सरकार है लेकिन
07:24सरकार की सेहत पर कभी कोई कमजोरी दिखी नहीं कभी कोई प्रश्म उठा
07:45बहुत सारी चीजे हैं जो इस सरकार के टुडू लिस्ट में थी बकेट लिस्ट में थी जो कर पाई जैसे
07:53धारा 370 का है मामला जैसे राम मंदिर का मामला ऐसी यह हो गया लेकिन अनेक ऐसी चीजे भी है
08:00जो इनको करनी थी और इसी लिए इन्होंने 2024 में अब की बार 400 पार का न
08:12भूला हुआ 2026 में घर आ जाता है तो उसे भूला हुआ नहीं कहेंगे शायद इनके टार्गेट पर वही 400
08:20पार है अभी भी
08:21बिल्कुल मेरा एक सवाल अभी शिवसेना यूविट्टी को लेकर ही है केशो जी शिवेंजी आप दों से उसके बाद फिर
08:27हम इन सवालों पर भी आगे चलेंगे कि किंदलों में तूट हो सकती है और इन सारी तूट की पीछे
08:31की कहानी इसली क्या है ठाकरे परिवार के बार
08:51बेटे दूसरे भाई की लड़के जो है राज ठाकरे तमाम ऐसे लोग कहा जाता था कि मातोश्री से ही सब
08:58कंट्रोल होता था अगर मातोश्री में बैठक बुलाई जा रही है तो हर विधायक सांसत का पहुचना जरूरी होता था
09:04कोई ना पहुचे ऐसा सवाल भी अकल्पनी
09:06था उस वक्त लेकिन वही ठाकरे परिवार का दबदबा पिछले 5 से सालों में इतना कम हो गया है कि
09:12अभी 14 जून को बैठक बुलाई गई थी मातोश्री में ही चार सांसत आई लोगसवा के 5 सांसत वो ऑनलाइन
09:18जुड़े थे वो उन्होंने तमाम हवाला दे दिया किसी ने क
09:39परिवार का इतना ज्यादा प्रभाव कम होना इसके पीछे कि आपको क्या वजह लगती है केश्व जी आपसे फिर श्युमें
09:45जी के पास लेंगे देखिए जब तक ये परिवार अपने आपको सत्ता से ऊपर रख रहा था तब तक इसका
09:51दवदवा था केवल महरास्त की बा
10:04परिवानी तो ये भी बाला सहाब ठाकरे से मिलने के लिए मुंबई जाया करते थे आपने कभी इसा सुना नहीं
10:10होगा कभी समाचार पत्रों में पढ़ा नहीं हुगा कि बाला सहाब ठाकरे इन से मिलने के लिए दिल लिया रहे
10:15हैं ये उनका रुत्वा था और ये इसलिए �
10:18था कि उन्होंने अपने आपको सत्ता से उपर रखा था सत्ता की रैट रेस में सत्ता की भागदोर में वो
10:24शामिल नहीं थे लेकिन जैसे ही आपकी महत्वाकांग्छा आपको सत्ता की रेस में ले आती है वैसे ही आप प्रतिदुन्दी
10:31हो जाते हैं उससे पहले वो सनरक्षक �
10:33इसलिए वो उस तरह का रिस्पेक्ट उन्होंने हासिल किया था और उनका उनकी अपनी एक साफगोई वाले राजनीती थी अगर
10:44बात करें उनिस्व ब्रान्बे की वावरी विध्वन्स की बात करें तो उसमें तमाम इकाई सामिल थी लेकिन आगे बरकर कौन
10:52कह रहा है कि मेरे
10:53शिवस्यानिकों का हाथ नहीं पाऊ है उसमें बिल्कुल बाला साहब ठाकरे कह रहे हैं तो लोग उनकी इस राजनीती को
11:01कोई इसका श्रे लेना भी नहीं चाहता था कि मैंसा नहीं चाहता था कि तूट जाए
11:29इसको स्विकार कर रहे हैं कि हमने ऐसा किया है अगर उनको दक्षिन भारतियों से
11:34प्रॉब्लेम थी मुंबई में महारास्टा में तो उन्होंने खुल कर कहा लुंगी हटाओ पुंगी बजाओ उत्तर भारतियों से प्रॉब्लेम थी
11:43तो उन्होंने खुल कर कहा तो उनका एक बेलोस अंदाज था लेकिन इस सब से इन सब के ऊपर था
11:49सक्ता से अपने आपको
11:51उपर रखना सक्ता में भागिदारी सक्ता की लिपसा उन्होंने कभी नहीं दिखाए यह हर व्यक्ति के साथ हर परिवार में
11:58भी होता है जब आप अत्यधिक महत्वा कांग्शी हो जाते हैं जब चाहते हैं कि आपको सारा स्रे मिले सारे
12:04पावर आप तक सिमट में क्या है तब �
12:06फिर से डिस्ट्रैक्शन होता है फिर वो पावर भागने लगता है उद्धव ठाकरे की राजनीती वहीं पर आकर के फिशली
12:13अगर ये भी अगर वो सूपर पावर बनना चाहते तो लोग इनको स्विकार कर रहे थे लेकिन जैसे ही ये
12:20खुद फुत्र मुह में फसे सत्ता के
12:22लालच में आए फिर ये एक आम शिवसेनिक या फिर एक आम नेटा की तरह ही हो गए शिवसेनिक भी
12:28नहीं एक देश में जो आम नेता होता है जो सारी राजनेतिक लड़ाईयां ही इसलिए लड़ता है कि उसे सत्ता
12:33का स्वाद मिल सके
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