00:08कोटा में छात्रों की गूंच के नाम पर राहूल गांदी ने हजारों छात्रों को जुटाया लेकिन सवाल ये है कि
00:14आखिर अचानक छात्रों की याद क्यों आई
00:16क्या ये सिरफ मीट पेपर लीक का विरोत था या फिर युवाओ के गुसे को राश्नितिक ताकत में बदलने की
00:23तयारी और अगर मकसद सिरफ कोटा था तो फिर इलाबाद पटना और दिल्ली की तयारी क्यों चल रही है
00:30आईए समझते हैं कि चात्रों की गूंच के पीछे का फूरा खेल क्या है
00:34नमस्कार मैं हूँ जस्वी कौशिक
00:36आज कोटा में राहूल गांदी के निर्तित्व में चात्रों की गूंच नाम का बड़ा प्रदर्शन आयोजद किया गया
00:42हजारों चात्र जुटे युवाओ के मुद्दों पर चर्चा हुई और पूरे कारिक्रम को राश्यस्तर पर चर्चा मिली
00:49आज हम समझेंगे कि आखिर इस प्रदर्शन की ज़रत क्यों पड़ी
00:53कॉंग्रेस ने इसका नाम चात्रों की गूंच क्यों रखा
00:56और सबसे बड़ा सवाल अगर मकसद सिरफ कोटा था तो फिर इलाबाद
01:01पटन और दिल्ली में भी इस तरह के कारिक्रमों की तयारी क्यों की जा रही है
01:05क्योंकि किसी बियान दोलन को समझने के लिए इसके पीछे की वज़ा को समझना जरूरी होता है
01:10दरसल इस पूरे अभियान को समझने के लिए हमें इसके नाम पर ध्यान देना होगा
01:14छात्रों की गूच यानि ऐसी अवाज जो सिरफ खोटा तक सीमित ना रहे बलकी पूरी देश को सुनाई दे
01:21कॉंग्रेस का दावा है कि देश का यूवा आज कई सबस्याओं से जूच रहा है
01:25नीट पेपर लीक विवाद, भटी परिक्षाओं में गड़बढ़िया, नौकरी की कमी और बढ़ती प्रतिसपरदा जैसे मुद्दे लगातार चर्चा में है
01:33पार्टी का मानना है कि इन अलग-अलग मुद्दों को एक राष्ट्रे मंच पर लानी की जरूरत है
01:38यही वज़ा है कि इस अभ्यान का नाम किसी एक परिक्षा या किसी एक विवाद के नाम पर नहीं रखा
01:43गया
01:43बलकी इसे चात्रों की गुंच कहा गया
01:46यानि कॉंग्रेस सिरफ नीट की बात नहीं करना चाती बलकी देश भर के चात्रों और युवाव से जुड़े मुद्दे को
01:52एक बड़े आंदोलन का रूप देना चाती है
01:54अब सवाल आता है कि इसकी शुरुआत कोटा से ही क्यू हुई
01:57कोटा देश की कोचिंग कैपिटल माना चाता है हर साल लाखो चात्र यहां हर साल नीट और जैप चैसी परिक्षाओं
02:04की त्यारी करने आते हैं
02:06जब भी शिक्षा, प्रतियोगी परिक्षाओ या छात्रों के भविश्य की बात होती है तो खोटा अपने आप चर्चा का केंद्र
02:12बन जाता है।
02:13यानि अगर छात्रों की अवास को राश्य मुद्दा बनाना हो तो खोटा से बहतर प्रतीक शायद ही कोई हो सकता
02:19है।
02:19लेकिन इस पूरे अभियान के बीच एक और चर्चा भी तेज हो गई है।
02:59जात्रों की राश्य मुद्दे का सबसे बड़ा हतियार बनते जा रही है।
03:19और शायद इसी सवाल का जवाब तलाशने के लिए कॉंग्रेस ने चात्रों की गून जैसे राश्य व्याप्ती अभियान शुरू किये
03:26हैं।
03:27लेकिन कहानी सिरफ कोटा तक सीमित नहीं है। अगर ये सिरफ एक प्रदर्शन होता तो कारिक्रम यहीं खतम हो जाता।
03:33लेकिन कॉंग्रेस पहले ही साफ कर चुकी है कि चात्रों की गून जब एक राश्य अभियान का रूप लेने वाला
03:38है।
03:39पार्टी के अनुसार 10 जुलाए को इलाबार, 11 जुलाए को पटना और 14 जुलाए को दिल्ली में भी सी तरह
03:45के कारिक्रम आयोज़त किये जाएंगे।
03:47यानि कोटा, पहला अध्यायता, पूरी किताब अभी बाकी है। यही बात इस प्रदर्शन को राश्य नितिक रूप से महतोरपूर बनाती
03:54है।
03:54राशनितिक जानकार मानते हैं कि कॉंग्रेस आने वाले समय में यूवा और छात्रों के मुद्दों को अपनी राशनिती का एक
04:01बड़ा केंद्र बनानी की कोशिश कर रही है।
04:03जिस तरह किसाना अंदोलन और महंगाई जैसे मुद्दे राश्य बहस का हिस्सा बनते थे, उस तरह अपशिक्षा, परिक्षाएं और रोजकार
04:11भी बड़े राशनितिक मुद्दे बन सकते हैं।
04:13हालाकि BJP इस पूरे अभियान को राशनिती से प्रेरिद बता रही है। BJP ने ताओ का रोप है कि छात्रों
04:20की भावनाओं का इस्तमाल राशनितिक लाप के लिए किया जा रहा है।
04:23वही कॉंग्रेस का कहना है कि जब लाखो छात्रों का भविश्य दाओ पर हो तो उनकी अवास को राश्ट्रे मंच
04:29मिलना चाहिए।
04:30लेकिन राशनिती से अलग घटकर अगर इस पूरे घटना क्रम को देखा जाए तो एक बात तो बिल्कुल साफ दिखाई
04:36देती है।
04:36चात्रों की गून सिर्फ कोटा में हुआ एक प्रदर्शन नहीं। ये एक ऐसे अभियान की शुरुआत है जिसे देश के
04:42अलग-अलग शेरों तक ले जाने की त्यारी की जा रही है।
04:45अब देखना दिल्चस्प होगा कि गून सिर्फ सभाओ और मंचो तक्सीमित रहती है या फिर आने वाले दिनों में देश
04:52की राजनिती और नीतियों पर भी असर डालती है।
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