00:0015 साल की उम्र में जब कोई खिलाडी देश भर में सुर्खियां बटोरने लगे, IPL में बड़े बड़े गेंद बाजों
00:06की धुनाई कर दे और टीम इंडिया के भविश्य के सितारे के तौर पर देखा जाने लगे, तब उससे उम्मीदे
00:11भी बहुत बढ़ जाती हैं।
00:13वैभव सूर्यवंशी के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ है, लेकिन श्रीलंका में खेली जा रही ट्राइनेशन सीरीज में उनका
00:19प्रदर्शन अब चर्चा का विशय बन गया है। लगातार चार मैचों में वे बड़ी पारी नहीं खेल पाए हैं। और
00:25अब सवाल उठने लगे ह
00:26कि क्या वैभव उम्मीदों के दबाव से जूज रहे हैं या फिर ये सिर्फ एक सामाने दौर है, जिससे हर
00:32युवा खिलाडी गुजरता है। अफगानिस्तान एके खिलाफ खेले गए मुकाबले में एक बार फिर वैभव अच्छी शुरुवात को बड़ी पारी
00:39में नहीं
00:56खेली थी। चार मैचों में उनके खाते में कुल 117 रन आये हैं और उनका सर्वस्रेष्ट स्कोर 44 रन रहा
01:02है। यही आकड़े अब बहस की वजह बन रहे हैं। कुछ लोग कह रहे हैं कि वैभव लगातार फ्लॉप हो
01:07रहे हैं जबकि दूसरी तरफ कई क्रिकेट जानकार मा
01:24इल्चस बात ये है कि वैभव पूरी तरह संगर्श करते हुए भी नजर नहीं आये हैं। उन्होंने लगभग हर मैच
01:29में शुरुआत हासिल की है। उनकी स्ट्राइक रेट भी खराब नहीं रही है। समस्या सिर्फ इतनी रही कि वे अपनी
01:34शुरुआत को बड़े स्कोर मे
01:35नहीं बदल पाए। क्रिकेट में अक्सर युवा खिलाडियों के साथ ऐसा होता है। शुरुआत करना एक कला है और उसे
01:41लंबे समय तक जारी रखना दूसरी कला। वैभव अभी इसी दूसरे चरण को सीख रहे हैं। कुछ महीने पहले तक
01:46यही खिलाडी IPL में धमाल मचा
01:48रहा था। उसकी आकरामक बल्लेबाजी ने सभी का ध्यान खीचा था। यही वज़े रही कि चैन करताओं ने उन्हें सीनियर
01:54भारतिये टीम के लिए भी संभावित विकल्पों में शामिल करना शुरू कर दिया। लेकिन IPL का T20 प्रारूप और लिस्टे
02:00क्रिकेट तो अल�
02:15भारत ए टीम का मकसद ही युवा खिलाडियों को अंतराश्ट्रिय स्तर के माहौल में तयार करना होता है। चैन करता
02:20सिर्फ रन नहीं देखते बलकि खिलाडी का स्वभाव, तकनीक, दबाव जेलने की क्षमता और सीखने की गती भी देखते हैं।
02:26इन सभी मामलों में वैभ
02:43अभी सीखने और खुद को ढालने के दौर में हैं। फिलहाल तस्वीर यही कहती है कि वैभव सूर्यवंशी फॉर्म से
02:48नहीं, बलकि बड़े स्कोर से दूर हैं। उनके पास प्रतिभा है, मौके हैं और समय भी है। अब सबकी नजर
02:53इस बात पर रहे की कि अगले मैचों मे
02:55वे इस दबाव का जवाब कैसे देते हैं। क्योंकि बड़े खिलाडी वही बनते हैं जो मुश्किल दौर से निकल कर
02:59और मजबूत होकर वापस आते हैं।
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