00:04धर्मनगरी वारनसी में बन रहा इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम अब दुनिया भर में चर्चा का विश्य बन चुका है।
00:30महादेव की नगरी काशी की सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान को ध्यान में रखते हुए स्टेडियम के डिजाइन तयार की गई
00:37है।
00:37स्टेडियम में त्रशूर, डमरू और शिवलिंग से प्रेरित वास्तु शिल्प तत्व देखने को मिलेंगे।
00:44जो इसे देश और दुनिया के अन्य क्रिकेट स्टेडियमों से अलग बना रहे है।
00:51बता दें कि बनारस में बन रहा ये स्टेडियम सिर्फ एक क्रिकेट का मैदान नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति की एक
00:59जहलक भी है।
01:02इसकी फ्लड लाइट को त्रशूल का आकार दिया गया है, जो इसकी खुबसूर्थी को और जादा बढ़ाता है।
01:09लगवग 92% काम कम्प्लीट हो चुका है, और आशा है कि अगले 2-3 मेने में काम कम्प्लीट हो
01:16जाएगा।
01:21इसमें 9 पीचेज हैं, अलग-अलग मिट्टी के बने हुए है, कुछ ब्लैक कोटन है, कुछ यल्लो है, कुछ मिक्स्ट
01:29है, ऐसा करके।
01:30तो इस खास पीच को बनाने के लिए ये मिट्टी कहां से खासों से लाई गई है।
01:34ये अलग-अलग जगह से आया है, हिंदुस्तान का ही मिट्टी है, महरास्टा से है, हैधराबाद से ऐसा।
01:41इसमेच को क्या चोड़ाई है, क्या इसमें इटरनेश्टन समेच पर ये इसमेच के मैच होगी है।
01:48ये ICCA स्टैंडर्ड पे टोटल डिजाइंड है, ग्राउंड और नर्मल स्टैंडर्ड 65 मिटर को होता है, 76 मिटर है रेडियस
01:56इसका।
01:57तो कितने सीट्स होंगे जहां पर दर्शक बैठ कर देख सकेंगे।
02:01और खास बात यह है जो महादेव के उसके थीम पर बनाया जालता है।
02:04तक क्या क्या खास रिसम में आप लोग खायारी कर रहे हैं।
02:07इसमें ऐसा है टोटल 32 जार कैप सिटी है, सिटिंग कैप सिटी।
02:11और महादेव के थीम पर जैसे भगवान भोले को आपने जानते ही आप चंद सेखर नाव है।
02:18जिसके उपर जिसके सर पर चंदमा हो।
02:23तो क्रिसेंट के रहा पर रूप सिटिंग है और त्रिशूल उनको चाहिए।
02:28त्रिशूल के हिसाब से अपना लाइट है, जो हाई मास्ट लाइट है, जिसको फ्लर लाइट बोलते है, जिसमें मैच होता
02:36है रात में, तो त्रिशूल के अकार का लाइट है, और बाकी दोई चीज है, और बेल पत्र है, डमरू
02:43है।
02:45स्टेडियम का मुख्य पवेलियन शिव के प्रतीक चेन डमरू के आकार का है, इस पवेलियन में मीडिया सेंटर के अलावा
02:53ब्रोडकास से जुड़े लोग बैठेंगे, साथ ही दर्शकों के बैठने के लिए बनाया गया पवेलियन वारनसी के आधार चंदरकार घाटों
03:02की
03:02याद दिलाता है, स्टेडियम की दिवारों पर जगा जगा बेल पत्र के डिजाइन बनाया गये है, स्टेडियम का नभ्य फीज़ी
03:11काम पूरा हो चुका है, मांसुन के बाद इसका उद्गाटन होने की उमीद है, स्टेडियम में 32 से 35 हजार
03:19दर्शकों के बैठने की शमता ह
03:21स्टेडियम का मुख्य ग्राउंड बेहद खास तकनीक से बनाया गया है, इसका ड्रेनिज सिस्टम बेहद आधुनिक है, अगर मैच के
03:30दौरार यहां पहले से 2-3 घंटे तक बारिश भी होती है, तो महज आदे घंटे में ग्राउंड फिर से
03:38मैच के लिए तयार हो जाएगा
03:40बारिश का पूरा पानी ग्राउंड से बाहर निकल जाएगा, इस स्टेडियम को बनाने में लगभग 450 करोड की लागत आई
03:50है
04:10जुलाई एंड तक कम्प्लेट हो जाना चाहिए
04:40झालई एंड एंड जाएगा
Comments