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Transcript
00:00तो इक कौन नासमझ लोग हैं जो कहते हैं कि अरे श्री कृष्ट ने भी तो हिंसा करी थी तो
00:03हम भी हिंसा करेंगे
00:04इन्होंने तो ये भी बता दिया कि शास्त्रों में लिखा हुआ है माभारत में लिखा हुआ है धर्म हिंसा तथायवचा
00:09जो कहीं लिखा ही नहीं है
00:10महाभारत सौ बार दोरा दोरा के बोलती है अहिंसा परमो धर्म
00:15तो इन्होंने कलपना से जोड़ दिया कि महाभारत में लिखा है धर्म हिंसा तथाय होचा
00:18सुचो ये कौन सा संस्कृत का विद्वान होगा जिसके पास ये गए होगे और क्या साजिश करी होगी कि जोड़ो
00:23इसमें धर्म हिंसा तथाय होचा
00:24इनके मन में महाभारत के लिए सम्मान नहीं ये ग्रंथों को विक्रत करने को तयार है
00:29मनुष्यों में एक दूसरे के प्रती हिंसा का निर्धारन ऐसे नहीं होता कि तूने मुझे मार दिया
00:33ये बहुत छोटी हिंसा है
00:35मनुष्यों में एक दूसरे के प्रती हिंसा का निर्धारन ऐसे होता है कि कहीं तूने मेरा मन कुंठित तो नहीं
00:41कर दिया
00:41कहीं तूने मेरा मन विशाक्त तो नहीं कर दिया
00:44ये हिंसा होती है
00:45आप मनुष्य हो, मनुष्य की पहचान चेतना है
00:47तो मनुष्य के लिए हिंसा का अर्थ है चेतना की हान
00:51अब बताओ, श्री कृष्ण हिंसक है
00:53गीता दे करके उन्होंने आपकी चितना जिहानी करी है या पूरी मानवता पर उत्कार करा है
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