Skip to playerSkip to main content
🧔🏻‍♂️ आचार्य प्रशांत से समझे गीता और वेदांत का गहरा अर्थ, लाइव ऑनलाइन सत्रों से जुड़ें:
https://acharyaprashant.org/hi/enquiry-gita-course?cmId=m00021

📚 आचार्य प्रशांत की पुस्तकें पढ़ना चाहते हैं?
फ्री डिलीवरी पाएँ: https://acharyaprashant.org/hi/books?cmId=m00021

📲 आचार्य प्रशांत की मोबाइल ऐप डाउनलोड करें:
Android: https://play.google.com/store/apps/details?id=org.acharyaprashant.apbooks
iOS: https://apps.apple.com/in/app/acharya-prashant/id1603611866

📝 चुनिंदा बोध लेख पढ़ें, खास आपके लिए: https://acharyaprashant.org/en/articles?l=1&cmId=m00021
➖➖➖➖➖➖
पूरा वीडियो : आवारा कुत्तों पर विवाद: जिस बात से हम चूक रहे हैं || आचार्य प्रशांत, इंटरव्यू (2025)
➖➖➖➖➖➖
#acharya prashant
#आचार्य प्रशांत
#animaldiscrimination
#speciesism
#animalrights
#जानवरोंमेंभेदभाव
#whyanimalsmatter

Category

📚
Learning
Transcript
00:00बड़ा अच्छा लगता है जो इनसान अपनी प्रजाती के लावा किसी और प्रजाती के पते संवेदना व्यक्त करता है।
00:05बड़ा अच्छा लग रहा है कि इतने सारे पशुपेमी हैं उसनकों पर भी आ गए है।
00:16इसमें कमी क्या है वो कहना भी बहुत जरूरी है।
00:20सिर्फ एक पजाती के पत्ती ही कितना प्रेम इतनी संवेदना क्यों है।
00:25भारत में ही हजारों पजाती हैं जो critically endangered और vulnerable हैं।
00:30वो विलुपति की कडार पर हो कभी देखने को नहीं मिलेंगे।
00:32पर हम उनकी बात ही नहीं करना चाहते हैं।
00:34कुल जो कुछ domesticated species हैं।
00:37सुटा, बिल्ली, बकरा, जाय, भैस।
00:40इनको तो हमने बढ़ा दिया हम इनकी परवाह भी करते हैं।
00:43इनकी सुरक्षा भी करते हैं।
00:44लेकिन जो बाखी प्रजातिया हैं वो करोरों में हैं।
01:02जो बाखी रेखने को नहीं मिलेगे प्रजातियां।
01:05साल में दोचार नहीं विलुप्थ हो रही हैं।
01:06ये प्रतिदिन विलुप्थ हो रही हैं।
Comments

Recommended