00:00बड़ा अच्छा लगता है जो इनसान अपनी प्रजाती के लावा किसी और प्रजाती के पते संवेदना व्यक्त करता है।
00:05बड़ा अच्छा लग रहा है कि इतने सारे पशुपेमी हैं उसनकों पर भी आ गए है।
00:16इसमें कमी क्या है वो कहना भी बहुत जरूरी है।
00:20सिर्फ एक पजाती के पत्ती ही कितना प्रेम इतनी संवेदना क्यों है।
00:25भारत में ही हजारों पजाती हैं जो critically endangered और vulnerable हैं।
00:30वो विलुपति की कडार पर हो कभी देखने को नहीं मिलेंगे।
00:32पर हम उनकी बात ही नहीं करना चाहते हैं।
00:34कुल जो कुछ domesticated species हैं।
00:37सुटा, बिल्ली, बकरा, जाय, भैस।
00:40इनको तो हमने बढ़ा दिया हम इनकी परवाह भी करते हैं।
00:43इनकी सुरक्षा भी करते हैं।
00:44लेकिन जो बाखी प्रजातिया हैं वो करोरों में हैं।
01:02जो बाखी रेखने को नहीं मिलेगे प्रजातियां।
01:05साल में दोचार नहीं विलुप्थ हो रही हैं।
01:06ये प्रतिदिन विलुप्थ हो रही हैं।
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