00:00मीरा का मीरा के पती से जो संबंध था हर विवाहिता का उसके पती से वही संबंध होना चाहिए
00:04एक मात्र उचित संबंध पत्नी का पती से वही है जो मीरा का उसके पती से था
00:09उसके पती ने भी दो-चार बाते सीख लियोंगी
00:12और पत्मिया क्या करती हैं पती के सामने लेट जाती हैं समर्पित हो जाती हैं देह दे देती हैं बच्चे
00:16दे देती हैं पती को भुष्ट कर देती हैं वो तो पहले ही गरहित्था गिरा हुआ तुमने उसके सामने देह
00:22बनके और मा बनके उसको और गिरा दिया मीरा ने कम से कम
00:25अपने पती को कुछ सिखा दिया
00:26मीरा गुरू थी अपने पती के लिए
00:28कृष्ण की तरफ जा करके मीरा ने अपने पती को बता दिया
00:31कि देखो ऐसे भी जिया जा सकता है
00:33कि पत्नी तो तुम्हारी हूँ
00:35कहने को लेकिन जीटी इस सत्य के लिए हूँ
00:37उसके पती ने उसके देवर ने भले कितना विरोध किया हो
00:41लेकिन भीतर ही भीतल कायल हो गए होंगे मीरा के
00:44उपर उपर से उसको जहर देते होंगे भीतर भीतर उसके पाउच देते होंगे
00:47मीरा ने वास्तों में अपने पती से प्रेम किया है
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