00:00आप आज भी छोटे शहरों में राहा चलती किसी रड़की को देखिए
00:03तो आपको दिखा ही देगा कि वो अतना विशित तरा अनुभव कर रही है
00:07वो कभी अपना दुपट्टा समाल रही होगी, कभी देख रही होगी
00:29जहां आप हर समय अपने उपर निगाहा रख रहे हो जैसे कोई और आपको देख रहा हो
00:34जैसे आप अपने उपर स्वयम ही एक पुलिसमैन बनके बैठ गए हो
00:37यह वो अली इसमें फिर चेतना का विकास नहीं होने पाता है
00:42इसमें आप भीतर से कुंठित होकर रह जाते हो, यह हुआ है भारत में बहुत ज्यादा
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