00:00प्राइवेट हों, सरकारी हों, दफ्तरों में जाकर देखो न, फर्ष बिलकुल साफ होते हैं, उन पे लगातार पुछा पड़ा होता
00:07है, जितने मातहत कर्मचारी हैं सब लगातार चाट रहे होते हैं, जी सर, जी सर, जरूर सर, अब फिर कहते
00:15हो कि जीवन में डर बहुत है, �
00:19जीवन में लालाच और स्वार्थ बहुत है, घरों में भी है, सिर्फ इसलिए कि कोई उम्र में बढ़ा आ गया
00:25है, तुरन जी ताउजी, ताउजी किस लायक हैं, थोड़ा पहले देख तो लो, मैंने ही कह रहा हूँ ताउजी को
00:32डंडा मारो, लेकिन उन्हें बढ़ा क्यों
00:34मान लिया है, उम्र तो अपने आप बढ़ जाती है, उम्र के बढ़ने से कोई बढ़ा हो जाता है, क्या
00:38उसमें कोई उपलब्धी है, तुम साट साल सोते भी रहो या साट साल नशे में पढ़े रहो बेहोश, तो भी
00:44साट साल के हो जाओगे, उम्र तो बढ़ी जाएगी, त
01:01किसी की उम्र बड़ी हो जाए वो बड़ा हो गया किसी का पैसा बड़ा हो गया वो बड़ा हो गया
01:05किसी की सत्ता बड़ी हो गया किसी की प्रसिद्धी बड़ी हो गया वो बड़ा हो गया
01:11पूछो तो किसको बोलू बड़ा, डरो जरूर डरो पर जो सचमुच बड़ा है सिर्फ उससे डरो, और डरो ये कि
01:19जो सचमुच बड़ा है कहीं मैं इतना चोटा न रह जाओं कि उसको पाही न पाओं, ये डर होना चाहिए,
01:26जिंदगी में ये एक डर बैठालो बाकी सारे डर
01:30छूमंतर हो जाएंगे
01:31डर होना चाहिए बस
01:32सचमुछ बड़ा है कहीं
01:34उससे दूर न रह जाओं
01:36इस डर में जीओ
01:38इस डर में जीओगे तो संसार के सामने
01:40पूरे निडर हो जाओगे
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