सवाईमाधोपुर. दिल्ली के मालवीय नगर में आग की भयावह घटना ने 21 जिंदगियों को निगल लिया, लेकिन इस त्रासदी से सबक लेने के बजाय सवाईमाधोपुर में होटल, कोचिंग सेंटर और स्कूल संचालक अब भी लापरवाह बने हुए हैं। शहर की बहुमंजिला इमारतों में बिना फायर एनओसी के संस्थान खुलेआम संचालित हो रहे हैं। आदेश जारी होने के बावजूद न तो सर्वे हुआ और न ही जिम्मेदारों पर कोई कार्रवाई। प्रशासन व नगरपरिषद की चुप्पी और संचालकों की उदासीनता ने हालात को और खतरनाक बना दिया है। भीड़भाड़ वाले इलाकों में संचालित इन संस्थानों में किसी भी समय आगजनी जैसी आपदा मौत का जाल साबित हो सकती है। सवाल यही है कि क्या सवाईमाधोपुर को दिल्ली जैसी त्रासदी का इंतजार है।
सरकारी आदेश, लेकिन कार्रवाई नदारद
दिल्ली की घटना के बाद प्रदेश में भी स्वायत शासन विभाग के निदेशक एवं विशिष्ट सचिव ने एक आदेश जारी कर नगर निकाय, नगरपरिषद व नगरपालिकाओं को अपने क्षेत्र के व्यवसायिक प्रतिष्ठानों का सर्वे कराने के निर्देश दिए थे लेकिन अब तक अग्निशन की ओर से ना कोई को सर्वे किया गया है और ना ही बहुमंजिला इमारत व होटलों के मालिकों को कोई नोटिस दिया गया है। स्वायत शासन विभाग ने 6 जून से 20 जून तक विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए थे। इसमें सभी व्यावसायिक प्रतिष्ठानों का भौतिक सत्यापन और सर्वे होना है। होटलों, मैरिज गार्डन, मल्टीप्लेक्स, कोचिंग संस्थानों और पेइंग गेस्ट हाउस की सुरक्षा जांच की जानी थी। लेकिन सवाईमाधोपुर में अब तक न तो सर्वे हुआ और न ही नोटिस जारी किए गए। आदेश कागजों तक सीमित रह गए और जमीनी स्तर पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। जांच के मानक, सिर्फ फाइलों में दर्ज अभियान के तहत फायर एनओसी की वैधता, आपातकालीन निकास मार्ग, अग्निशमन उपकरणों की उपलब्धता व कार्यशीलता, विद्युत सुरक्षा, भवन स्वीकृति और पार्किंग व्यवस्था की जांच होनी थी। बहुमंजिला इमारतों में आपातकालीन स्थिति में सुरक्षित निकासी के इंतजामों को परखना था। लेकिन इन मानकों की जांच सिर्फ फाइलों में दर्ज रह गई। उधर, शहर और जिले में 90 फीसदी से अधिक होटल, कोचिंग सेंटर और स्कूल बिना फायर एनओसी के संचालित हो रहे हैं। भीड़भाड़ वाले इलाकों में चल रहे इन संस्थानों पर कार्रवाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति नोटिस दिए जाते हैं। हकीकत यह है कि सुरक्षा मानकों की अनदेखी कर रहे इन प्रतिष्ठानों पर किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है।
खतरे की दस्तक, कब जागेगा प्रशासन
दिल्ली हादसे के बाद राज्य सरकार ने सुरक्षा व्यवस्था की व्यापक जांच का निर्णय लिया था। लेकिन सवाईमाधोपुर में न तो अभियान चला और न ही जिम्मेदारों पर कार्रवाई हुई। शहर की बहुमंजिला इमारतें, होटल और कोचिंग सेंटर आगजनी जैसी आपात स्थिति में सबसे बड़े खतरे का कारण बने हैं। सवाल यही है कि प्रशासन कब जागेगा और कब तक जनता की जान खतरे में डाली जाएगी। सुरक्षा पर खड़े हो रहे सवाल दिल्ली हादसे ने यह साफ कर दिया कि बहुमंजिला इमारतों में आगजनी की स्थिति में सबसे बड़ा संकट सुरक्षित निकासी का होता है। सवाईमाधोपुर में भी होटल, गेस्ट हाउस, कोचिंग सेंटर और स्कूल ग्राउंड फ्लोर से ऊपर संचालित हैं। भीड़भाड़ वाले इलाकों में बिना फायर एनओसी के चल रहे इन संस्थानों पर प्रशासन की चुप्पी गंभीर सवाल खड़े करती है।
........................... सुरक्षा मानकों की करेंगे जांच
जारी आदेशों के बाद अभियान चलाकर फायर एनओसी, अग्निशमन उपकरणों की उपलब्धता, फायर अलार्म सिस्टम, आपातकालीन निकास मार्ग, विद्युत सुरक्षा, भवन स्वीकृति तथा पार्किंग व्यवस्था सहित विभिन्न बिन्दुओं की जांच की जाएगी। बहुमंजिला इमारतों में आपतकालीन िस्थति में सुरक्षित निकासी के लिए किए गए इंतजामों की जांच की जाएगी। इसके लिए सर्वे कराया जा रहा है। कृष्णकांत मीना, सहायक अग्निशमन अधिकारी, नगरपरिषद सवाईमाधोपुर
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