00:00मेरा प्रश्न औरतों को लेके हैं, जैसे कि हम लोग कहीं भी निकलते हैं, हम लोग को बोल दिया जाता
00:06है एक टाइम लिआओ, जैसे अभी साड़ेनों बज रहे हैं, मेरे घर से मैसे जा रहा है, बहुत दूर अगर,
00:11जल्दी आ जाओ, अकेले आना है, तुम्हें इतना दिर र
00:24सवस्था ऐसी होनी चाहिए, महिलाओं के खिलाफ अपराधिक घटनाएं घटे नहीं, लेकिन कितना भी अच्छा समाज बना लीजिए, कुछ न
00:33कुछ तो उसमें अपराध का स्तर रहे गाई, कभी न कभी ज्यादा नहीं तो कम घटनाएं घटेंगी ही, ये जो
00:43घटनाएं ह
00:54तो फलानी चीज तुमारे साथ बुरी हो सकती है, तो आप कहोगे कि पहली बात तो ये कि मेट्रो सिटी
01:02है, जो आप बोल रहे थे, लॉइन ओर ठीक है, आप जिस तरह की घटना या आशंका कर रहे हो,
01:09वैसी घटना घटने की संभावना बहुत कम है, लेकिन अगर वैसी घ�
01:18अगर बुलाना भी होगा, तो एजनसी इसको बुला लेंगे, खत्रे की बात है, तो पुलिस को बुला लेंगे, और किसी
01:26पर बोज नहीं बनेंगे, जब किसी पर बोज नहीं बनेंगे, तो फिर किसी को टुका टाकी का हक भी नहीं
01:31है, सबसे जरूरी है मनुष्य की स्वतंत
01:36मैं एक इंसान हूँ, किसी पर आश्रित नहीं, ना आर्थिक रूप से, ना सामाजिक रूप से, जैसे मेरी उम्र का
01:44कोई भी वयस्क पुरुष जीता है, वैसे ही मैं भी जी सकती हूँ, और अगर मैं वैसे जी सकती हूँ,
01:51तो फिर कोई क्यों हस्तक्षेब करें मेरे मसलों में
01:54यह मजबूरी हटनी चाहिए, यह मजबूरी हट गई तो उसके बाद कोई बोलता रहे, बाहर से हमें क्या फर्क पड़ता
02:01है, और जब आपको फर्क पड़ना बंद हो जाएगा, तो लोगों का बोलना भी कम हो जाएगा
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