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00:00आप जब पेड़ काटते हो तो पता है न क्या होता है
00:04पेड़ों ने ही मिट्टी को पकड़ रखा होता है
00:06पेड़ों ने ही परवतों को बचा रखा होता है
00:08पेड़ गया नहीं कि वो मिट्टी धीली हो गई
00:10अब उसको पकड़ने वाला जो एडिसिफ था वो नहीं रहा
00:13तो जैसे उसमें पानी पड़ेगा बह जाएगी
00:15पेड़ों को काट काटके परवतों को नंगा कर दिया गया
00:18तीन हजार प्रतिशत वृद्धी हुई है लैंड स्लाइट्स में
00:22और पिछले 20 सालों में चंडी गढ़ के कुल क्षेत्र से बाच गुना ज्यादा
00:28क्षेत्र के वन खो दिये हैं 500 स्कूर किलोमीटर
00:31उस पूरे एरिया में पेड थे वन थे और वो सब काट दिये गए हैं
00:36इतने पेड काटे गए हैं
00:37जो तुम विकास के नाम पे कर रहे हो रोक दो बिलकुल
00:40इन पहाडों में ये सामर्थे नहीं है कि तुम्हारे विकास को बरदाश्ट कर पाएंगे
00:43आधी शतापदी पहले ये बाकाइदा एक कमिटी ने अनुशनसा कर रखी है
00:49कि मत करो पहाडों के साथ हले भी एक कमिटी बैठी थी उसने भी कहा था
00:52और वो कोट के आदेश पर बैठी थी उसने भी कहा था कि रुख जाओ मत करो ये सब
00:56लेकिन हमको विकास चाहिए
00:57और पहाड सिर्फ पहाड नहीं होते हैं
01:00पहाड मैदानों की जान होते हैं भाई, दोनों अर्थों में, स्थूल अर्थ में भी सूक्षम अर्थ में भी, इसलिए समझदार
01:07लोगों ने इतने तीर्थों की स्थापना परवतों पर करी थी कि परवतों को पूज्य मानना, आंतरिक द्रिष्टी से भी मैदानों
01:14का प्रा�
01:15होते हैं पहाड और भौतिक द्रिष्टी से भी
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