00:00एक था दरोगा का बेटा, वो बादार में निकले, और लोगों से गए पता है मेरा बाप को नहीं, लोगों
00:05को पता है जो भई दरोगा का बेटा है, तो लोग दबें, कोई चीज मुफ्त मिल जाए, किसी पर हेकड़ी
00:10जमा दे, ये सब करें अपना, ये सब वो कर लेता था अ�
00:28पता है मेरा बाप को नहीं, पीछे से बाप ने एक जन्नाटेदार दिया, जब तक बाप का नाम लेके चलते
00:33थे, तब तक बढ़ियां मुंफलियां मिलती थी, और आज वही हरकत करी, जब साक्षात बाप साथ था, तो पीछे से
00:39पड़ा एक तिल्कुल जन्जनाता हुआ, �
00:42ये अंतर होता है गुरू की छवी में और साक्षात गुरू में, गुरू की छवी बनाके तो तुम किसी को
00:47भी लूट लो, और कोई भी मनमर्जी कर लो, मेरे साथ तो मेरा गुरू है, पता है मेरा गुरू को
00:52ने, लेकिन जब वास्ताव में गुरू साथ होता है, तो वो सब
00:55भरकतें नहीं कर पाऊगे इसलिए गुरु की छवी गुरु का नाम बड़े काम का होता है इसलिए सबसे ज्यादा काम
01:03का होता है मरा हुआ गुरु जिन्दा गुरु तो बड़ी आफ़त होता है
Comments