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गर्मी में छतों पर पानी भर कर सोने वाला मोहल्ला || Water-Filled Rooftop Neighborhood in Summer ||

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00:00गर्मी में छटों की पानी भर कर सोने वाला महुला
00:03अजी आज कल गर्मी कितने ज़्यादा बढ़ गई है
00:06देख रहे हो उपर से एक गमबख़त पंखा
00:09हावा भी नहीं दे रहा है
00:11सही कह रही हो
00:12गर्मी से पूरे शरीर पसीने से भीग गई है
00:16कमबख़त हमने कौन से बुरे गर्म किये हैं
00:19कि बिजली को भी अभी ही जाना था
00:22अरे नीलम चलाओ मत सब जग जाएंगे
00:26रात का समय था
00:27पूरे महले में गर्मी का ऐसा कहर था
00:29कि लोग पसीने में नहा रहे थे
00:31बिजली जाते ही सबकी हालत और खराब हो चुकी थी
00:33कहीं बच्चे रो रहे थे तो कहीं पती पत्नी गर्मी में चड़-चड़ा रहे थे
00:37उसी बीच नीलम का गुसा बहुर बढ़ने लगा था
00:59सूरज अपनी पत्नी के हालत देखकर कमरे के कोने से पुराना हाथ वाला पंखा उठा लाता है
01:04वो नीलम के पास बैटकर धीरे धीरे पंखा से हवा देना शुरू करता है
01:08लो महरानी जी अब थोड़ा आराम मिलेगा
01:12हवा तो आ रही है लेकिन ये मच्छर को देखो ऐसा लग रहा है पूरा खांदन आज ही खून पीने
01:17निकला है
01:18तब ये एक बड़ा मच्छ नीलम के पैर में काट लेता है
01:22अई मा अब तो बस हो गया ना हवा ना बिज्री ना चैन मैं इस कमरे में एक मिनट भी
01:28नहीं रुकने वाली
01:30निलम घुसे में उठती और कमरे से बाहर आंगन में चली जाती है
01:33आंगन में उसकी साथ सुगंदा, ससुर भवेश और नंद टीना आराम से खराटे मार कर सो रहे थी
01:46वारे किसमत, यहां हम मरे जा रहे हैं और इन लोगों को देखो, ऐसे सो रहे हैं जिसे पाहड़ों के
01:51ठंडी हवा चल रही हो
01:53तब ही दूसरी तरफ कमरे का दर्वाजा खुलता है और श्वेत अभी परेशान हालत में बाहर निकलती है
01:58उसके बाल बिकरे हुए थे और चेहरे पर पसीना चमक रहा था
02:02यह बगवान, यह कैसी गर्मी है, ऐसे लग रहा है मैं कमरे में नहीं तंडूर में बैठी हूँ
02:06अरे जिजी, आपको भी गर्मी लग रही है क्या? तुम्हें भी लग रही है क्या? राहुल तो ऐसे सो रहे
02:12हैं, जैसे एस ही चल रहा हो कमरे में
02:20देखो न जिजी, पुरुष लोगों को कहीं भी निंद आ जाती है
02:23और एका में न गर्मी सेहन होती है न मच्छर, ओपर से बिजली भी जाने का टाइम देखती है
02:29दोनों देवरानी जिठानी अवांगन में बैठे बैठे खुद को हवा करने लगती है
02:33तब ही उनकी नजर साथ, ससुर और नंद पर पढ़ती है जो आराम से खराटे मार कर सो रहे थी
02:40बैठी ठंडी हवा आ रही है
02:42हाँ हाँ, आपको तो ठंडी हवाई लगेगी, हमारी हालत खराब हो रही है
02:45सच में, हमें बोल रही थी कि आदर डालो गर्मी की
02:49अब देखो खुद कैसे मज़े से सू रही है
02:52जी जी, चलो नज चट पर चलते हैं, वैसे भी गर्मी आ रही है, उपर हवा तो मिलेगी कम से
02:56कम
02:57हाँ, सही कहा, यहां तो दम खुट रहा है
02:59दोनों अपना अपना बिस्तर उठाती हैं, और धीरे धीरे सीड़ियां चड़कर चट पर पहुंच जाती है
03:04चट पर हलके हवा चल लई थी, जिसे महसूस करते ही दोनों के चहरे खिल जाते है
03:10अरे वा, नीचे से तो यहां, हजार गुनाचा है, सच में कम से कम सास सो ली जा रही है
03:16दोनों चादर बिछा कर लेट जाती है, कुछ देर तक उन्हें अच्छा लगता है, लेकिन तब यह मच्छरों का हमला
03:21शुरू हो जाता है
03:22यह भगवान यहां तो मच्छरों की सेना बैठी है, नीची गर्मी थी और यहां मच्छर, आखिर इंसान जाए तो जाए
03:29कहां
03:29लग रहा है आज पूरा मुहला हमारा खुन पीनी की प्लानिंग करके बैठा है
03:39अगली सुबा सूरज की तेज धूप दोनों की चहरे पर पढ़ती है
03:47अरे वाब हुए तो अभी तेक सो रही है
03:54अगर मुझे भी चहत पर ले जाती तो क्या चला जाता?
03:56रात में खुद तो यहां हवा खा रही थी और नीची हमें छोड़ दिया
04:01ममी जी इतनी गर्मी लग रही थी कि जहां निकल गई थी
04:04अच्छा और रात में तुम बोल रही थी कि गर्मी बहुत लग रही है फिर यहां आकर खराटे बार कर
04:08सो रही थी
04:09ममी जी यहां भी मच्छरों ने सोने नहीं दिया
04:11तो क्या मच्छोरों से भी शिकायत करूगी अब गर्मी में यही सब होता है
04:17नीचे पूरे महले में यही हाल था
04:19हर घर में गर्मी की वज़ा से लोग परेशान थे
04:21महले के दूसरे घर में निहारी का रसोई में खाना बना रही थी
04:24गर्मी और चूले की आग से उसका चेरा लाल हो चुका था
04:28ये भगवान ये रसोई है ये बट्टी ऐसा लग रहा है मैं रोटी नहीं खुद पक रही हूँ
04:34बहू खाना बना की नहीं अभी तक भूग लग रही है
04:37हाँ बना रही हूँ सारा दिन बस भाहू भाहू भाहू करती रहती हो खुद जरा पांच मिनिट रसोई में आकर
04:43खड़े हो कर देखो
04:45अरे जल्दी बनाओ ना गर्मी में वैसे हालत खराब है
04:49हाँ तो मेरी हालत कौन सी अच्छी है मैं यहां तंदूरी चिकन बन रहा हूँ
04:55हमारी उमर में तो हम लकडी के चूले पर खाना बनाते थे तब इतना नाटक नहीं करते थे
05:00और उसी का बदला अब हमसे लिए जा रही है
05:03जैसे तैसे निहारी का खाना लगाते है पूरा परिवाद गर्मी में पसीना बहाते हुए खाना खाने बैठता है
05:09अरे दाल इतनी गर्म क्यों है
05:13क्योंकि मौसम ठंडा चल रहा है न
05:15यह सुनकर मिताली उसे घूरने लगती है
05:26महले के तीसरे घर में पारोल और गर्गन दोनों नौकरी करके लोटे थे दोनों गर्मी से बेहाल थे
05:31अरे ओफिस में एसी बन था और बाहर धूप अलक आज तो लग रहा है मैं सड़क पर ही बिखल
05:36जाओंगा
05:38मेरी बस में इतनी बीड़ती की सास लेना मुश्किल हो गया था
05:41चलो भई अब घर आ गई है थोड़ा आराम मिलेगा तब ही बिखली चली जाती है
05:46हे बगवान अब यहाँ भी बिखली चली गई
05:49अरे लगता है बिखली वालोंने कसम खा रखी है कि इंसानों को चैन से नहीं रहने देंगे
05:54मम्मी बहुत गर्मी लग रही है बिटा क्या करे मेरे खुद के प्राण निकल रहे है
06:00दूसी तरफ कंचन के घर में भी यही आलत थी
06:02अरे बबलू देखो न यह मचर मुझे जिन्दा नहीं छोड़ेंगे
06:07अरे यहाँ पापा की खराटे सुनूँ ऐसा लग रहा है ट्रेक्टर चल रहा है
06:18सच में ना गर्मी में सोपा रहे है ना मचरों में उपर से खराटे
06:22अरे बहु पंखा तेस करते
06:25बिजली ही नहीं है मम्मी जी पंखा कैसे देश करूँ
06:29पूरा मौला गर्मी से परेशान था कोई छट पर सो रहा था कोई आंगन में बच्चे रो रहे थे
06:33और से पसीना पोच रही थी और आदमी आत पाले पंखे से खुद को हवा कर रहे थे
06:37अरे इस बार की गर्मी तो पिछले साल से भी ज्यादा है
06:41हाँ बहन रात भर नींद ही नहीं आती है
06:44और ये मच्चर लगता है पूरे मौले का खुन पीकर ही वानेंगे
06:47अब तो लगता है कि सबको छट पर ही सोना पड़ेगा पूरी गर्मी भर
06:53शाम होती पूरे मौले की ओरतें अपने अपने घरों से बिस्तर निकालने लगती है
06:57सबने तैक कर लिया था कि अब गर्मी भर छट पर ही सोया जाएगा
07:00अब पूरे मौले में लगबग हर घर की बहुए रात को छट पर ही सोने लगी थी
07:04लेकिन धीरी धीरी एक नई परेशानी शुरू हो गई
07:06दिन पर सूरज की तेज धूप छट को इतना गर्म कर देती थी कि रात में भी छट से आग
07:11जैसी तपन निकलती रहती
07:12उपर से गर्म हवा चलती और नीचे तपती छट शरीर जला देती
07:37दूसी तरफ महले की बागी बहुए भी ऐसे परिशानी से जूज रही थी
07:40रात को छट पर सब और ते बैठकर अपने दुख साजह करती है
07:43अरे बहनो अब तो छट पर भी चैन नहीं पचा देन भार धूप पड़ती है
07:48पूरी छट तंदूर बन जाती है
07:50सच में कर रात मेरे पैरों में इतनी गर्मी लग रही थी कि मुझे लगा चाले पड़ जाएंगे
07:55अफिस में गर्मी अलग जेलो और रात को घरा कर ये
07:59तपती छट अब तो नीन भी दुश्मन हो गई है
08:12अरे वाँ ये तो बड़ी आइडिया है
08:19अगले ही दिन मोहले की बहुए शाम होते ही बाल्टियां भर भर कर चट पर पानी डालने लगी
08:25जी जी जल्दी चलो आज दो बाल्टी ज़्यादा डालेंगे पूरी चट थंडी कर देंगे
08:30आज तो मज़ा आ जाएगा रात को राम से सोएंगे
08:39अरे वाँ अब तो आ रहा है मज़ा
08:42सच में लग रहा है किसी ही लिस्टेशन पर आ गए है
08:45तब ये पीछे से सुगंधा आ जाती है
08:49अच्छा तो आप समझ में आया है कि चाट थंडी ठंडी क्यों रहती है
08:52तम दोनों रोज या पानी डालती है
09:09लेकिन दोनों बहुएं उनकी बात को ज़्यादा गंभीरता से नहीं लेती
09:12अगले दिन फिर वो ही सिलसला शुरू हो जाता है
09:14जी जी आज तो पूरी चट पर पानी पहला देंगे
09:17मम्मी जी तो ऐसे डर रही ती जैसे चट आज ही तूट जाएगी
09:21कई दिन तक यही चलता रहता है
09:23रोज शाम को बहुएं चट पर पानी डालती और रात को ठंडी चट पर सोती
09:27एक दिन सुगंदा उपर पहुंचती हैं और देखती हैं कि पूरी चट पानी से भरी होई है
09:32अरे बस करो तुम दोनों कितनी बार समझाए कि इतना पानी मट डालो
09:35ममी ची अगर पानी नहीं डालेंगे तो गर्मी में मट जाएंगे हम लोग
09:39आपको तो आदत है गर्मी सेहने की हमारी हालत किराब हो जाती है
09:42मैं तुमारी भलाई के लिए ही बोल रही हूँ
09:45और हम अपनी जान बचाने के लिए कर रहे हैं
09:48बात इतनी बड़ जाती है कि सास बहु के बीच जोरदार बहस शुरू हो जाती है
09:52तब ही सुगंधा अचानक चुप हो जाती है और पुरानी बातों में खो जाती है
09:56सुगंधा की आँखों के सामने अपना पुराना समय घूमने लगता है
09:59सुगंधा अपनी जवानी में थी उस समय भी गर्मी बहुत पढ़ती थी
10:03और वो रोज छट पर खुब पानी डालती थी
10:06अरे बाहू, अब जाकर थोड़ी तंड़क मिली है
10:09आरे बाहू, इतना पानी मट डाल, छट खराब हो जाएगी
10:13अम्मा जी दो बाल्टी पानी से क्या होगा?
10:15बार-बार शट गर्म पर पानी डालोगी तो दरार पढ़ जाएगी
10:20लेकिन योवा सुगंधा उनके बात नहीं मानती
10:22कई महीनों तक यही चलता रहता है
10:24दीरे-दीरे शट में छोटी-छोटी दरारे आने लगती है
10:32एक दिन अचानक बरसात के बाद छट के बीच से पानी टपकने लगता है
10:43गर्मी के मौसम में ही पूरी छट तोड कर रिपेयर करवानी पड़ती है
10:46घर में धूल मिट्टी फैल जाती है
10:48मसदूरों का शोट, सेमेंट के बदबो और गंदगी से सुगंधा परिशान हो जाती है
10:52ए बगवान ये क्या मुसीबत करती मैंने
10:55अब समझाया? कितनी भी गर्मी हो लेकिन छट पर बार बार पानी नहीं डालते
11:00सुगंधा वर्तमान में लोटती है और अपनी बहुएं को समझाने लगती है
11:18अब बहुएं पानी डालना थोड़ा कम कर देती है
11:21उन्होंने गद्धे लाकर बिचाने शुरू किये लेकिन गर्मी फिर भी कम नहीं होती थी
11:24जी जी गद्धा भी गर्म हो गया है
11:27अब तो समझनी आता क्या करें
11:29दूसरी तरफ पूरे मोहले में भी यही चर्चा शुरू हो जाती है
11:33अरे बहनों ज्यादा पानी मत डालना
11:35सुगंधा जी बताय रहे थी कि छट तूट जाती है
11:39अरे बापरे फिर तो मैं आज से पानी बंद कर दूँगी
11:41लेकिन बिना पानी के गर्मी कैसे चेले है
11:45गर्मी दिन बदिन बढ़ती जा रही थी
11:47बहुमें पानी भरने जाती तो गर्मी लगती
11:48रसोई में खाना बनाती तो हालत खराब हो जाती
11:51हे बगवान गैस के सामने खड़े खड़े लग रहा है
11:54कि मैं खुद अंदूरी रोटी बन जाओंगी
11:57और ये पानी बरना
11:58दददस बाल्टी उपर ले जाओ
12:00तो जान निकल जाती है
12:02बच्चे भी स्कूल से परिशान थे
12:05ममी आज स्कूल में तक
12:06गर्म दाना के पंके से भी आग जेजियावा आ रही थी
12:09और पानी भी गर्म हो गया था बोदल में
12:12महले की बहुएं अब कभी आम के बाग में जाकर बैठती ही
12:15तो कभी नदी के नारे जाकर ठंडी हवा खाती थी
12:18अरे यहां तो कितना अच्छा लग रहा है
12:20सच में घर से ज़्यादा ठंड़क तो यहां है
12:23दूसरी तरफ सासे भी परेशान थी
12:27हमारी भहुएं तो दिन भर गर्मी कर्मी करती रहती है
12:29अरे बेहन गर्मी ने सबका दिमाग खराब कर दिया है
12:33एक दिन सब भी भहुएं नदी के नारे बैठी थी तबी
12:36ठंडी हवा चल लए थी और नदी का पानी देखकर सबको सुकून मिल रहा था
12:40काश इस नदी किदर हमारा घर भी ठंडा रहता
12:43और ये नदी कभी नहीं बोलती कि यहां से जाओ
12:45काश हमारा घर भी ठंडा रहता
12:48तो नदी अपने घर लेकर चली जा
12:51नहीं नहीं तो स्विमिंग पूल तो बना ही सक्ट है ना
12:53क्या चट पर स्विमिंग पूल बनाओगी
12:55तबी नीलम अचानक सोच में पढ़ जाती है
12:59अरे अगर हम चट पर पानी भर दे तो
13:02क्या क्या
13:04सोचो ना अगर चट पर पानी भरा रहेगा
13:06तो धूप सीधे छट पर नहीं पड़ेगी
13:08पानी गर्मी सोख लेगा
13:10और छट भी ठंडी रहेगी
13:11अरे हाँ और बारबा पानी डालने से भी
13:14जो दरार पड़ती है वो भी नहीं पड़ेगी
13:16अरे वा नीलम ये तो बहुत बढ़िया जुगार है
13:20सभी पहुँओं को ये आईडिया बहुत पसंद आता है
13:23बस अब घर चलकर ट्राय करते हैं
13:26घर पहुँचते ही नीलम के दिमाग में वो ही आईडिया घूमने लगता है
13:30कुछ भी हो जाए आज छट पर पानी भर कर ही रहूंगी
13:33वो घर में बड़ी प्लास्टिक की पनी ढूडने लगती है
13:36अरे ये पनी कहा गई
13:39काफी देर बाद उसे दो बड़ी बड़ी पनीया मिलती है
13:43बस यही काम आईगी
13:44वो चाकू गरम करती और दोनों पनीयों को जोडने लगती है
13:49अरे निलम तुम सच में ये करने वाली हो
13:52हाँ जी जी अब या तो गरमी भागेगे या हम
13:56दोनों छट पर जाती है और पूरी छट पर बड़ी पनीय फैला देती है
13:59किनारों पर इठे रख देती है ताकि पनी ओड़े नहीं
14:02अब देखना कमाल
14:04वो मोटर का पाइप छट पर लाती है और पूरी छट पर पानी भरना शुरू कर देती है
14:09अरे वा सच में छट तलाब बन गई है
14:12तब ही सुगंदा उपर जाती है और ये सब देखकर हैरान रह जाती है
14:16अरे ये लड़की पागल हो गई है
14:18ये क्या कर रही है
14:28अरे बहू ने तो सच में छट पर तलाब बना दिया है
14:31अब इसमें मचली भी पा लेना
14:34आप लोग मजाक उड़ाइए
14:35लेकिन आज रास सबसे ठंडी छट हमारी होगी
14:40नीलम ने पूरी छट पर बड़ी पनी बिचा कर उसमें पानी भर दिया था
14:43शाम की दूप धीरे धीरे कम हो रही थी और पानी की वज़ा से छट से ठंडी हवा आने लगी
14:48थी
14:48लेकिन घर के बाकी लोग ये सब देखकर हैरान भी थे और नीलम की अलोचना भी कर रहे थे
14:54ये भगवान नीलम ये तुमने क्या कर डाला पूरी छट को तलाब बना दिया अब हम लोग सोएंगे कहां
15:00सच में मौलेवाले कहेंगे इस गर में खेती शुरू हो गई है
15:04वा भाबी अब उपर बतक भी पाल लो
15:07अरे बहु ये सब करने से अगर छट तूट गई तो तुम लोगों को बस नया नया प्रियोग करना रहता
15:12है
15:13मैंने पहले ही कहा था कि ये लड़की एक दिन पूरा घर डुबो देगी
15:18अब लोग अभी मजा कोड़ाई है लेकिन रात में जब ठंडी हवा लगी की न तब सब को मजा आएगा
15:23हाँ ममी जी एक बार ट्राय करके तो देखिए हर वक डाटती ही रहती हो
15:27बाबी पानी में सोने का लगी मजा होता है क्या
15:35दीरे दीरे शाम होने लगी नीचे कमरों में अभी भी गरम हवा भरी होई थी
15:38लेकिन उपर छट पर पानी की वज़ा से हलकी ठंड़क मैसूस हो रही थी
15:43अरे आज नीचे इतनी गर्मी क्यों लग रही है
15:46और उपर से बिजली भी चली गई
15:49कुछ दिर बाद सुगंदा चुपके से अपनी खाट उठाती है और सेडियां चड़कर छट पर चली जाती है
15:58जैसी सुगंदा चट पर पहुंचती है उसके चैरे पर ठंडी हवा पढ़ती है
16:01पानी से भरी चट पूरी तरह ठंडी हो चुकी थी
16:05अरे यहां तो सच में ठंड़क है
16:07सुगंदा तुरंत अपनी खाट चट के कोने में लगा लेती है और आराम से बैठ जाती है
16:11अरे वा नीचे से तो हजार गुना अच्छा है
16:14थोड़ी दिर बाद नीलम और श्वेता चाय लेकर उपर आती है
16:19अरे ममी ची आप तो कह रहे थी यह सब बिकार है
16:22और अब कुछ छत पर मज़े कर रही है
16:25अरे मैं तो बस देखने आय थी नीचे बहुत गर्मी थी तो थोड़ी दिर बैठ गई
16:28हाँ हाँ देखने आय थी यह ठंडी हवा खाने
16:33तब ही भवेश भी उपर आ जाते है
16:52अरे तुम्हारे घर में आज इतनी थंड़क कैसे है
16:54सच में ऐसा लग रहा है किसी कूलर वाले कमरे में आ गए है
16:57जल्दी बताओ क्या किया तुम लोग उने
17:01नीलम मुस्कुराते हो उने चछत पर ले जाती है
17:03अरे बापरे तुम लोगों ने सच में चछत पर पानी बढ़ दिया
17:07हाँ नदी वाले आइडिया को सच कर दिया
17:09देखो पानी की वज़े से धूप सीधे चछत पर नहीं पढ़ती
17:12इसलिए कर ठंड़ा रहता है
17:13अरे ये तो कमाल का जुगार है
17:15हम भी आज ही अपने घर पर करेंगे
17:18अगले ही दिन पूरे महले में यही चर्चा फैल जाती है
17:22एक एक करके हर बहु अपनी चछत पर बड़ी पनी बिच्छाने लगती है
17:26अजे जल्दी मोटे चालू करो
17:27हमारी चछत भी तलाब बनेगी
17:29अरे तुम लोगों ने तो पूरा महला इंजीनियर बना दिया
17:33अरे जरा इते पकड़ाओ
17:35उड़ गई तो पूरा पानी निचा आजएगा
17:37जल्दी करो आज रात अराम से सोना है
17:41दीरे दीरे पूरे महले की चछतों पर पानी भर जाता है
17:44कुछी घंटों में हर घर ठंडा होने लगता है
17:47अरे हमारी बहुए तो सच में पागल हो गई है
17:49पता नहीं क्या क्या करती रहती है
17:51काई पूरा घर खराब न करते
17:53अब देखना कलको चछत पर नाव भी चलाएंगी
17:56लेकिन दो-चार दिन बाद हालात बदलने लगते हैं
17:58पानी से भरी चछते हमेशा ठंडी रहती थी
18:00अब साथ ससुल भी वहां आराम महसूस करने लगे
18:04औरे यहां तो कितनी अच्छी हवा आती है
18:06नीचे जाने का मन ही नहीं करता
18:08और नीचे कमरे में घुसते ही पसीना आने लगता है
18:11मैं तो अब यहीं बैठूंगा
18:14भाबी मैं भी उपर बढ़ाई करूंगी यहां दिमांग शान्त रहता है
18:17दिर दिरे हर घर में यही हाल हो जाता है
18:21बहन अब तो मैं पूरा दिन चछत पर रहती हूँ
18:24नीचे गर्मी से जान निकल जाती है
18:25हाँ बहुए काम करें और हम लोग उपर धंडी हवा खाए
18:29अब हर घर की चछत पर पूरा परिवार डेरा डालने लगा
18:33बहुच आय उपर ही दे जाना नीचे आने का मन नहीं है
18:37और हाँ खाना भी आ चछत पर ही लगा देना
18:40अब तो पूरा घर उपर ही शिफ्ट हो गया है
18:43पहले गर्मी से परशान थे और आप चछत पर सेवा करते करते परशान हो गया है
18:47उपर चछत पर सासे आपस में बैटकर गपे मारती
18:51अरे बहन नीचे क्यों बैटना उपर कितना मज़ा है
18:54सच में अब तो दोपैर की नीद भी है ले लेती हो
18:57मेरी बहुवने अच्छा जुगार निकाला है
19:00पहले इन्हे पागल बोल रही थी और अब खुद मज़े ले रही हो
19:03अरे बहुवे कभी कभी काम की चीज़े भी सोच लेती है
19:07नीचे रसोई में बहुवों की हालत खराब हो चुकी थी
19:10जिजजी अब तो दिन पर सीडियां ही चरते उतरते रहते है
19:15अभी ममे जी ने उपर नहीं बुबानी मंगाया है
19:18हमारी सास भी अब नीचे नहीं आती है
19:20हर पांच मिनट में आवाज लगाती रहती है
19:22बीदी सास तो कह रही थी कि उपर एक छोटा सा गैस चुला लगा दो
19:25अरे बापरे
19:27अब पूरा महॉला ही बदल चुका था
19:29हर घर की चट पर खाटे लगी रहती
19:31सासे मोबाइल पर भजन सुनती
19:33ससोरा ख़वार पढ़ते और बच्चे खेलते
19:35अब तो लगता है भावी की पूरा महॉला चट पर बस गया है
19:39हाँ नीचे घर खाली और उपर नया महॉला बन गया है
19:43लेकिन बहुओं की परेशानिया बढ़ने लगी थी
19:45पहले सिर्फ खाना बनाओ
19:47पानी बरो और गर्मी जेलो
19:49अब उपर चट पर भी सबकी सेवा करो
19:51सेच में हमने ठंड़क का जुगार के निकाला समने चट पर ही कबजा कर लिया
19:56उपर चट पर सासे मजे से बैठी थी और नीचे बहुओं रसोई में पसीने से तरबतर होकर काम कर रही
20:01थी
20:01लेकिन पूरे महले में अब एक ही चर्चा थी
20:04पानी वाली ठंडी चट
20:05अब पूरे महले की चटे पानी से भरी रहती थी
20:08पानी की वज़ा से हर घर एकदम ठंडी रहने लगे थे
20:11लेकिन जिस ठंडी चट को बहुओं ने अपने आराम के लिए बनाया था
20:14अब वहां उनका आराम पूरी तरह से खतम हो चुका था
20:17सुबा होते ही सासों के हुकम शुरू हो जाते
20:21नीलम जरा उपर चाय दे जा नीचे आने का मन नहीं कर रहा है
20:25और हाँ बहू साथ में नमकीन भी ले दिया ना
20:29भापी मेरे ले ठंडा शर्वत भी बना देना अत्ती गर्मी में पढ़ाई नहीं हो रही है
20:33ये भगवान उपर होटल खुल गया है क्या
20:36सच में सुबा से दस बार सीड़िया चड़ चुकी हो
20:39सिर्फ नीलम और शुएता के घर में नहीं पूरे महले में यही हाल था
20:43यहारी का नाश्ता उपर ही बेश दना नीचे गर्मी बहुत है
20:46ममी ची नीचे भी अब ठंडक रहने लगी है
20:49अरे लेकिन उपर ज्यादा मज़ा आता है
20:51कंचन मेरे ले निम्बू पानी बना देना
20:54अभी लाई ममी जी
20:57बहुया बुरी तरह से परेशान हो चुकी थी
20:59चाय, नाश्ता, खाना, पानी सब कुछ छट पर ही पहुँचाना पड़ता
21:03सुभा से ऐसा लग रहा है जैसे हम लोग घर में नहीं किसी डाबे में काम कर रहे है
21:07अरे ग्राहक भी ऐसे हैं जिने हर पांच मिनट में कुछ ना कुछ चाहिए
21:12एक दिन सभी बहुया आम के बाग में बैठी थी, सब के चैरे पर थाकान साफ दिखाई दे रही थी
21:17अपने ठंडी चत अपने हराम के लिए बनाए थी लेकिन अब तो हमारी हालत और कराब हो जाएगी
21:23उपपर बैठे बैठे बस हुकुम चलाते रहते हैं चाय ले आओ, खाना ले आओ, पंका चलो
21:29मेरी सास तो अब नीचे उतरती ही नहीं, पूरा दिन चत पर ही राज करती रहती हैं
21:33और मेरी सास कहा लिए थी कि उपर ही छोटा फ्रुज रख दो
21:38कुछ ना कुछ करना पड़ेगा नहीं, तो हम लोग नौकरानी बन कर रह चाहेंगे
21:50अगले ही दिन से पूरा महला हैरान रह गया, नीलम और शुएता सुबा सुबा गैस, चूला बरतन और राशन लेकर
21:59चट पर चड़ने लगी
22:01अरे बहु, ये सब उपर क्यों ले जा रही हो, ममी जी जब आपको ठंड़क चाहिए तो हमें भी तो
22:06चाहिए, इसलिए हमने सोचा अब हम भी चट पर रहेंगे
22:10नीचे गर्मी में काम करती करते जान निकल जाती है
22:13अरे लेकिन खाना उपर बनेगा
22:20जिन घरों में सास नहीं थी, वहाँ पतियों ने बहुँओं को परेशान करना शुरू कर दिया था
22:26अरे उपर ही खाना बना लो ना, नीचे बहुत गर्मी लगती है
22:30अहा, अब मैं होटल वाली बन गई हुँ ना
22:34उपर खाना खाओ तो कितना अच्छा लगता है
22:38अच्छा लगता है तो खुद बनाओ
22:39दिरे दिरे पूरे महले की बहुँओं अपनी अपनी चटों परी खाना बनाने लगी
22:43कोई चट पर बर्तन धो रही थी, कोई कपड़े धो रही थी, कोई बच्चों को नहला रही थी
22:53दोपेर तक दोप पढ़ने से चट का पानी हलका गरम हो जाता है, बहुँओं वसी पानी से नहा लेती है
22:58चेलो कम से कम नीचे बातरूम से घुटना तो नहीं पड़ता और बच्चों को भी मजा आ रहा है
23:05लेकिन पानी धीरे धीरे गंदा होने लगा था, कहीं सबजी धोल रही थी, कहीं बर्तन
23:09अरी ये पानी तो पूरा गंदा हो गया है, ममी जी जब पूरा घर उपर रहेगा तो यही होगा न
23:15फिर भी सासे चट छोड़ने को तयार नहीं थी
23:18नीचे क्यों जाए बहन, उपर धंडी हवा आती है
23:21हाँ, भहुए काम करती रहे और हम लोग अराम करे
23:25भहुए और परिशान हो चुकी थी, रात को सबी कठा होकर बाते करने लगी
23:43अब भहुए सच में पूरी तरह चट पर रहने लगी
23:46पानी में ही चूला रखकर खाना बनता, वहीं तीन टाइम का नाश्टा और खाना बनता
23:51अरे भहुए उपर खाना खाने में अलग ही मज़ा आता है
23:54हाँ, नीचे तो अब जाने कमन ही नहीं करता
23:58ऐसी कुछ दिन बीट गए, अब पूरा महला चट पर रहने लगा था
24:01नीचे घर ठंडे होने के बावजूद भी सब उपर ही रहते
24:04लेकिन एक रात बड़ा हाथसा हो गया
24:06पूरी रात महले वाले चट पर सोते रहे और नीचे घर खाली पड़े रहे
24:09उसी रात चोर महले में घोसाई, सुबह होते ही पूरे महले में हरकंप मच गया
24:15अरे हमारे घर से राशन की डिबबे गाया वै
24:18मेरे घर से पैसे चोरी हो गए, ये बगवान हमारे घर का मोबाइल भी नहीं मिल रहे
24:22जरूर चोर रात में आये होंगे
24:25अरे हम लोग तो उपर मज़े कर रहे थे और नीचे चोर घर साफ कर गए
24:29पूरा महला परिशान हो जाता है, सब भी लोग पच्टाने लगते है
24:33सच में हम लोग जरूर से ज़ाद अलाल्ची हो गए थे
24:36घर ठंडा हो गया था, फिर भी हम लोग बहू को परिशान करते रहे
24:40सासे नीचे उतर कर घर देखने लगती है
24:42अरे नीचे तो अब सच में ठंडक रहती है
24:45हाँ, पानी वाली छट की वज़ा से पूरा घर ठंडा हो गया
25:06अब नीचे घर ठंडे रहती और सासे नीचे आराम से रहने लगे
25:18वहीं बहुएं उपर पानी वाली ठंडी छट पर अपने बच्चों के साथ खोशी से रहने लगी
25:22ममी हमारी छट सबसे अची है
25:24हाँ बेटा, यह हमारी मेहनत की ठंडी छट है
25:27अब पूरे महले में एक नई सीख फैल चुकी थी
25:30आराम सब को चाहिए लेकिन दोसरों को परेशान करके नहीं
25:33अब पूरे महले में पानी वाली छटों का अलग ही माहौल बन चुका था
25:36उपर ठंडी हवा चलती, बच्चे पानी में खेलते और बहुएं शाम होते ही
25:39अपनी अपनी छटों पर बैठ कर बात ही किया करती थी
25:42अब पहले जैसे लड़ाई और चर्चर आपन नहीं रहा था
25:45एक शाम नीलम, शेता, रंजीता, कंचन और बाकी बहुएं पानी वाली छट पर पैर डाले बैठी थी
25:50हलकी हवा चल रही थी और पानी में आस्मान का प्रतिवें मुदिख रहा था
25:54याद है तुम लोगों को एक दिन हम सब नदी किनारे बैठे थे और सोच रहे थे कि काश हमारा
25:58घर भी नदी जैसा ठंडा होता
25:59और पिर तूने बोला था कि चटपर पानी भर देते हैं
26:02उस समय तो मुझे लगा था कि तू घर्मी में पागल हो गई है
26:06लेकिन माना पड़ेगा निलम
26:07तेरे इस जुगार ने पूरे मौले की जिंदगी बतल दी
26:10अब कम से कम रात को चैन की नीन तो आती है
26:12हाँ पहले तो लगता था कि घर्मी में जानी निकल जाएगी
26:15वो बड़ से सासों का होकुम अलग
26:17और याद है कैसे सब सासे हमारी बुराई करती थी
26:20कि बहुए पागल हो गई है
26:22अब भई सासे सबसे जाद मज़े ले रही हैं हमारी ठंडी छतों के
26:26तबी नीचे से सुगंदा की आवाज आती है
26:41अब महले की छते आपस में जैसे जोड़ गई थी
26:43अगर किसी घर में कुछ अच्छा बनता तो बहुए एक दूसे की छत पर पास कर देती
26:48अरे नीलम मैंने ठंडी खीर बनाई है तुम लोग भी खाओ
26:52वाओ रुको मैं भी तुम्हारे लिए आम का शर्बत भेसी हूँ
26:55सच में अब तो यसा लगता है पूरा महला एक ही परिवार बन गया है
26:59नीचे सासें भी आप अपनी बहुएं की तारीफ करने लगी थी
27:01हमारी बहुएं किती समझदार है गर्मी में इतना अच्छा जुगार निकालिया है
27:05हाँ बहन पहले लगता था बस वो उन चलाना आता है ने
27:08लेकिन अब ये देखो किता अच्छा सोचती है
27:10और सबसे बड़ी बाद आप घर में पहले जैसे जगड़ा भी नहीं होता है
27:16उपर च्छत पर बैठी बहुएं नीचे की बाते सुन रही थी
27:20अगर उस दिन चोरी ना होई होती न तो शायद हमारी सासों को भी कभी समझ नहीं आता
27:25सच में वना हम लोग तो नीचे काम करते रहते और सब लोग मज़े करते रहते
27:29कभी-कभी इंसान को गलती का एसास कराने के लिए जटका देना जरूरी होता है
27:33लेकिन अब सब सही हो गया है ओपर हम लोग अराम से रहते हैं नीचे सासो सुर
27:37तब ही सोनू और पिंकी पानी में खेलते हुए दोड़ते हैं
27:41मम्मे हमारी चा सबसे वड़ी आए हाँ पुरी महले में सबसे ठंडी
27:45सब भी बहुए बच्चों को देखकर मुस्कुरा देती हैं
27:48हवा दीरे दीरे चल रही थी और पानी वाली चट पर अब सिर्फ गर्मी से राहत नहीं पूरे महले की
27:53खोशियों की जगहा बन चुकी थी
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