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गर्मी में तीन तरह की रसोई||Three types of kitchens in summer||Hindi cartoon stories
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00:00गर्मी में तीन तरहा की रसोई
00:02सुबह के समय AC से ठंडी चमचमाती मॉडियोलर किचिन में हलकी सी म्यूजिक बजरी होती है
00:07फ्रीज, विदेशी फोलों और पैकिट से भरा हुआ होता है
00:10शिल्पा बड़ी स्टाइल से अवाकाडो काटते हुए नाश्टा तयार कर रही होती है
00:15राघव ये लो, तुम्हारा अवाकाडो टोस्ट और एडी डॉक्स जूस सुबह की हल्दी शुर्वात जरूरी है
00:22अरे वाँ शिल्पा, तुम तो पूरी न्यूट्रिशनेस्ट बन गई हो
00:25बेटा दिन कोई भी हो, ये तेरी प्रोटीन वाली डाइट कभी नहीं छोटती
00:29ममी आज कल मार्केट में कितने अनहेल्दी चीज़े आ रही है, इसलिए मैं सर्फ प्रोटीन और न्यूट्रिशन वाला खाना ही
00:35बनाती हो
00:36बाबी ये पैकेट फूर भी तो खराब होता है, नहीं अगर उसकी बारे में सही से पड़ो तो कुछ भी
00:41खराब नहीं होता
00:56क्या हुआ अगर पैसे नहीं है, मैं अपने घर में ही सबजियां उगा सकती हूँ
01:00सेच में नहा, ये खीरा तो बहुत ताजा लग रहा है
01:03देखो कितना हरा भरा है, अपने हादों की उगाई सबजी खाने में अलगी मज़ा आता है
01:08मेरी बहो ने तो इस चोटे से घर को भी बाग बना दिया
01:13इस रसूई में महनत की खुश्बू और सुकून का स्वाध हर कोने में बसा होता है
01:18गरम हवा से बरा चोटा सा किचेन, पंका भी रहाद नहीं दे पा रहा होता
01:21दीपाली फ्रिज खोल कर कुछ डून रही होती और चेहरे पर हलकी जुंजला हट होती है
01:30उसे दाल मिल जाती है और उसे निकाल कर गरम करने लगती है
01:34मैं रेका भी तो कुछ ताजा खाना बना लिया कर घर में ताजगी जैसे खतम ही हो गई है
01:39ममी, खाना बस पेट में जाना चाहिए, किस दिन का है इससे क्या फर्क पड़ता है
01:43लेकिन रोज-रोज बासी खाना खाना भी सही नहीं है
01:47उस रसूई में समय की कमी और आदूतों की लापरवाही साफ नजर आती है
01:52एक ही सुसाइटी में तीनों घरों से अलग-अलग खुश्बू और अलग-अलग माहौ
01:55कहीं एसी की ठंडक में महगे खानी के प्लेट सज रही होती है
01:59कहीं दूप में महनत से उगाई सबजियां पक रही होती है
02:01और कहीं बासी खाने को फिर से गरम किया जा रहा होता है
02:15तीनों बहुँ की सोच उनकी रसोई और उनका जीवन सब एक कुछ एक दोसे से बिलकुल अलग होता है
02:19दूपैर की तेज दोप बाहर सड़के तप रही होती है
02:22सुसाइटी में कोई भी घर के बाहर नहीं दिख रहा होता है
02:24सबके खिड़की दर्वाजे बंध होते है
02:26एसी से ठंडी, मॉडियोलर किचिन में शिल्पा, आराम से चिल होकर खाना बना रही होती है
02:31उसके चैरे पर गर्मी का कोई असर नहीं होता है
02:34इतनी गर्मी में अगर इन्सान के पास पैसा ना हो न तो सच में मर ही जाए
02:38पतानी बाहर लड़कियां बिना एसी पंके के कैसे खाना बना लेती है
02:41मैं तो अभी तक बेहोश हो जाती
02:43इसलिए तो मैंने तुम्हारी लिए पूरा सैट अप करवाया है मेरी जान
02:47मेरी बहू को कोई तकलीफ नहीं होनी चाहिए
02:50यहाँ खाना बनाना भी एक लक्शिरी जैसा लगता है
02:53ना पसीना न थकान, दूसरी तरफ कुलर की आवाज से भरी किचिन
02:56लेकिन गरम हवा फिर भी परिशान कर रही होती है
02:59दिपाली उदर उदर कुछ ढूंडते हुए चिड़ चड़ा रही होती है
03:02और यार इतनी गर्मी में कुछ भी बनाने का मन नहीं कर रहा
03:05और एक घंडा खड़े होकर सब के लिए खाना बनाना
03:08मेरे बस की तो बात नहीं है
03:10तब भी वो चुपचाप पड़ोस में चली जाती है और बोलती है
03:13आशात आई आपके पास उड़ी सबजी है क्या
03:15आज मेरा पेट भी दर्ट कर रहा है
03:16खाना बनाने का बिलकुल मन नहीं है
03:18अजे लेजा बेटा इसमें शर्माने वाली क्या बात है
03:21पड़ोसी ही तो एक दूसरे के काम आते हैं
03:24दिपाली अंदरी अंदर चालाकी से मुस्कुराती है
03:27और सबजी लेकर वापस आ जाती है
03:28ये बात तो सही है
03:30पड़ोसी पड़ोसी की मदद करते है
03:32घर आकर वो
03:33वही सबजी गरम करके सबको ROTI के साथ
03:36थोड़ा-थोड़ा परोस देती है
03:38बस इतनी ही सबजी है
03:39इसकी से काम चलाना पड़ेगा आप सबको
03:41समझे ला
03:42आज भीって coordinator कहीं से सबजी लेकर आया ना
03:45हाँ सही कहरे हो जब देखो
03:47यही चलता रहता है इसका
03:48तीसरे घर में तेज धूप के बीच
03:50नेहा अपने छोटे से गार्डन में जाती है
03:52वो अपने हाथों से उगाई सबजियां तोड़ती है
03:54और उन्हें लेकर रसूई में आ जाती है
03:56किचिन में ना पंखा ना कूलर
03:57सिर्फ गर्मी और पसीना
03:58यहाँ पसीने में तरबतर लाल चहरा लिए
04:00चूली के सामने खड़ी खाना बना रही होती है
04:06तब इसकी सास अंदर आती है
04:16थोड़ी देर बाद
04:17वो सब के लिए खाना तयार करके ले आती है
04:19घर में पंका भी नहीं होता
04:20सब लोग हाथ के पंके से हवा करते हुए खाना खारे होते है
04:32अगले दिन
04:32सुभा सुभा तीनों बहुए अपने घरों से बाजार जाने के लिए निकलती है
04:36शिल्पा अपने बड़े से घर के बहार खड़ी चमचमाती कार में बैठती है
04:39दर्वाजा खोलता है और अंदर ठंडी हवा चल रही होती है
04:42दूसी तरफ दिपाली और टो रिक्षा में बैठती है पसीना पोच्छते हुए
04:46और तीसी तरफ नहां सिर्पर दुपट्टा रखकर तेज धूम में पैदली निकल पड़ती है
04:50रास्ते में तीनों की निजरें आपस में ठकराती है
05:05यहां उनकी बातों को ज्यादा दिल पर नहीं लगाती
05:11बस हलकी मुस्कान के साथ आगे बढ़ जाती है
05:13गली के कोने पर कुछ और ते पानी की बाल्टियां भरकर घर ले जा रही होती है
05:41और तीनों को देख रही होती है
05:47शिर्पा कार में बैट कर हैटफोन लगा कर मस्ती से निकल जाती है
05:50दिपाली आटो में बैठी हुई पसीना पोचती हुई जाती है
05:53और निहा धूप में पैदल चलती हुई खुद से बड़बर आ रही होती है
05:56हाई ये गर्मी जान ही ले लेगी लेकिन क्या करे
05:58और तो को घर चलानी के लिए सब करना पड़ता है
06:01शाम को निहा का पती मुकोल खुशी-खुशी घर आता है
06:04ममी मेरी नौकरी लगी वी सजार की
06:07सच में बेटा आप घर की चिंता थोड़ी कम हो जाएगी
06:10देखा ममी जी महनत कभी बिकार नहीं जाती
06:13महनत कभल जरूर मिलता है
06:15बस अब एक कहा मकरना है
06:17मैं परसो ग्यारा औरतों की पिननी करूंगी घर में उसके लिए राशन चाहिए
06:21ठीक है ममी आप तैयारी कर लो मैं सारा समान लियाओंगा
06:25दो दिन बाद घर में हलचल होती है
06:27नहा और उसके सास रसोई में साथ मिलकर खाना बना रही होती है
06:30गर्मी की कारण दोनों पसीने में तर बतर होती है
06:32लेकिन चेहरे पर सुकून होता है
06:34ठाक गई होगी बेटा
06:36नहीं ममी जी आज तो दिल से काम कर रही हूँ
06:38घर में पंखा भी नहीं होता
07:05और इतना संदा गार्डन कोई सोच भी नहीं सकता
07:08और इतनी अच्छी सबजियां होगेंगी
07:10इतनी महंती बहु और कितनी क्रेटिव भी है
07:13इसे देख कर तो हमने भी घर में सबजियां गाने शिरु कर दी
07:17मेरी बहु बहुत समझदार है हर चीज का जुगार है इसके पास
07:28इसमें भी ऐसा क्या खास है गरीब है तो यह सब तो करेगी ही
07:32कर दो मैं भी लूँ लेकिन इतनी गर्मी में मुझे बहुत आलस आता है
07:35सुबा से ही शिर्पा बड़े मॉल में घूम रही होती है
07:38हर शेल्फ से ब्रांडेड और पैकेट वाला सामान उठाती जा रही होती है
07:46अज मैं ये नई डिश ट्राइ करूँगी देखना कितनी बढ़िया बनेगी
07:49लेकिन घर में जब भी वो खुद खाना बनाती है स्वाद वैसा नहीं आता और घर वाले अकसर परेशान हो
07:55जाते है
07:56पता नहीं इतने महंगे सामान के बाद भी खाना इतना फीका कैसे बनता है
08:00अरे छोड़ो ममी कम सी कम इसने ट्राइ तो किया
08:03घर में शिल्पा के साथ ससुर की अनिवर्सरी होती है
08:06पूरे घर में लाइट्स चमक रही हैं और पड़ोस के सभी लोग आमंत्रे थे
08:09रसोई में तीन-तीन शेफ काम कर रही होते हैं
08:11गैस पर कई तरह के वियंजन बन रही हैं
08:13खुश्बू पूरे घर में फैल रही होती है
08:15बाहर छोटी-छोटी डाइनिंग टेबल पर चार-चार लोगों के ग्रूप बैट कर बाते कर रही होते है
08:19शिल्पा रसोई में एसी की ठंडी हवा में खड़ी होकर बस आदेश दे रही होती है
08:23खुद हाथ भी नहीं लगा रही होती है
08:25तुम इसमें थोड़ा सोया सॉस डालो और प्रेजनेशन भी क्लासी होनी चाहिए
08:29जो लिस्ट दी थी ना उसी के हिसाब से सीजनिंग डालना टेस्ट परफेक्ट चाहिए
08:35शिल्पा खुद आराम से कड़ी होकर सिर्फ गाइड कर रही होती है
08:37जबकि सारा काम शेफ कर रही होते है
08:39जैसी ताजा-ताजा खाना बनकर गेस्ट के पास पहुंचता है
08:42सबी औरते खुश होकर बाते करने लगती है
08:44पैसा हो तो इतना हो बहु को खाना बनाने की जरुवती नहीं बस हुकुम देने का काम है
08:49है सही का बेहन जब पैसा होता है न तो इंसान ऐसी कर्च करता है
08:53वा शेफ के हाथ का खाना कितना टेस्ट ही है
08:56हम भी थोड़े अमीर होते तो अपने घर में शेफ रख लेते
08:59कैम से कम इतनी घर्मी में खाना बनाने से चिटकारा तो मिल जाता है
09:03हमारी जिंदगी तो बस रसोई में ही गुजर जाती है पसीने में तर बतर
09:16शिल्पा की ससर और वाकी परिवार वाले भी गेस्ट के साथ बैठे होते हैं
09:19खाना सबको बहुत पसंद आता है लेकिन अंदर ये अंदर सब जानते हैं कि ये स्वाद शिल्पा का नहीं शेफ
09:24का है
09:25देखा जब खुद बनाती है तो कोई नहीं खाता और आज सब तारीफ कर रहे हैं
09:30क्योंकि आज मेहनत किसी और की है मम्मी
09:32दूसी ओर दोपैर की गर्मी किचिन में कूलर चल रहा होता है लेकिन दिपाली सोफे पर मोबाइल चलाती होए लेटी
09:37होती है
09:45दिपाली कभी पड़ोस से सबजी मांग कर तो कभी पुराना खाना गरम करके वो परिवार को खिला देती है
09:50गर और परिवार की जिमेदानियों से वो हमेशा बचती रहती है
10:05उसका पती आयूश भी अपनी आदितों में उलजह रहता है
10:08लेकिन दिपाली कभी उसे संभालने हैं संभालने की कोशिश नहीं करती
10:11उनका बच्चा बाहर खेलता रहता है और उसे घर बुलाने की भी उसे फिकर नहीं होती
10:15उसी समय पार्क में शिर्पा का बेटा बागी बच्चों के साथ खेल रहा होता है
10:19कुछ बच्चे उसे घेर कर उसका मजाग उड़ाने लगते हैं
10:22देखो देखो अमीर घर का बच्चा आया है
10:24इसे खेला भी नहीं आता
10:26तब भी नेहा ये सब देख लेती है और तुरंट वहां पहुंचती है
10:29ऐसे किसी को परिशान नहीं करते
10:31अगर दुबारा इस बच्ची को तंकी आना तो बहुत पिटाई करूँगी
10:34बच्चे पहले तो उसे घेरने की कोशिश करते हैं लेकिन नेहा के आगी डर कर भाग जाते हैं
10:42बेटा तुमें खुद के लिए खड़ा होना चाहिए दरना नहीं चाहिए
10:45अटी मैं डर किया था हो सब एक साथ थे
10:48कोई बात नहीं अगली बार हिम्मत से काम लेना
10:51घर जाकर बच्चा सारी बाद शिल्पा को बताता है
10:55क्या निहा ने तुमें बचाया
10:57पहली बार शिल्पा के मन में नेहा के लिए सम्मान और उसकी सूच के लिए थोड़ी नर्मी आती है
11:02अगर आज उसने मेरे बच्चे को नहीं बचाया होता तो पता नहीं क्या हो जाता
11:06कुछ दिन बाद दिपाली के बेटे का बस्डे होता है
11:08गर्में छोटी से पार्टी रखी जाती है आस-पास के लोग भी और बच्चे भी आते हैं
11:17वो रसोई में सिर्फ दिखावा करती है और सारा खाना बाहर से मुंगबा लेती है
11:21लेकिन आलस के कारण वो खाना फ्रेज में भी नहीं रखती
11:23शाम तक गर्मिय के कारण खाना सारा खराब हो जाता है
11:26और वही खाना महमानों को परोस दिया जाता है
11:45बॉच्चे भी खाना खा कर मूँ बनाने लगते हैं
11:52देख तेरी मम्मी ने कितना खराब काना बनाया यह तो बिल्कुल भी अच्छा नहीं है
11:57रसोई संभालने की जरा भी अक्कल नहीं है पतानी कैसी बहु है
12:01दिपाली का बेटा उदास होकर एक कोने में खड़ा हो जाता है
12:05पूरी पार्टी का महुल खराब हो जाता है
12:06दोपैर को तपती सड़क धूप इतनी तेज की जमीन से आग निकलती हुई मैसूस हो रही होती है
12:12नहा सिर पर दोपटा रखकर दीरे दीरे चल रही होती है
12:14अचानक उसका पैर एक बड़ी से पत्था से टकड़ाता है और वो जोर से गिर जाती है
12:20उसका पैर मुर जाता है अंगोठे से खून निकलने लगता है
12:22वो सड़क के किनारे बैट जाती है दर्द से करा रही होती है
12:25तब भी शिल्पा की कार वहां से गुजरती है
12:27अंदर एसी चल रहा होता है शिल्पा की निजर नेहा पर पड़ती है
12:30यह हां क्या कर रही है
12:32तब ही उसे याद आता है
12:33जब नेहा ने उसके बेटे को बचाया था
12:35शिल्पा तुरंत गाड़ी रुखवाती और नीचे उतरती है
12:38नेहा क्या हुआ
12:39कुछ नहीं बस ठोकर लग गई
12:43शिल्पा उसे सहारा दे कर उठाती है
12:44और अपनी काड़ी में बिठाती है
12:46चलो मैं तुम्हें घर छोड़ देती हूँ
12:48दोनों की बीच हलकी खामोशी होती है
12:50लेकिन दिल में एक दूसरे के लिए नर्मी आ चुकी होती है
12:53अगले दिन तीनों बहुएं फिर आमने सामने आ जाती है
12:55कुछ लोग तो बस दिखावा ही करते है
12:58कम से कम मैं तुम्हारी तरह दूसरों के भरो से नहीं रहती
13:01दोनों आपस में बहस करने लगती है
13:03लेकिन नहा चुप रहती है
13:04चोड़ो हर किसी के अपनी सिंदगी है
13:07स्कूल में नहा का बेटा अपना टिफिन खोलता है
13:09उसमें ताजी और्गनिक सबजियां और ताजी रोटी होती है
13:13वाह आपकी ममी बहुत अच्छा काम करनी
13:15इतनी हल्दी और्गनिक सबजियां खिलाती है
13:18वाह
13:20ये मेरी ममी ने उगाई है
13:23वो गर्व से मुस्कराता है
13:25अगले दिन टीवी पर न्यूस चल रही होती है
13:28इस बार गर्मी का ताप मान पचास डिगरी तक पहुं सकता है
13:32जरूरत हो तब ही घर से बाहर निकले
13:34शिर्पा के घर में तीन तीन एसी चल रहे होते है
13:47दिपाली के यहाँ एक ही कमरे में एसी चल रहा होता है
13:50पूरा परिवार वहीं जमा होता है
13:55अरे चही कह रही हो
13:57सब यहीं सोजाओ
13:58बेटा यहीं सोजा
14:00बाहर तो पागल हो जाएंगे गर्मी में
14:02और आज खाना बाहर से मंगा लेते हैं
14:05तुझे तो बस भाना चाहिए काम से बशने का
14:07मुझे गर्मी से मरना नहीं है
14:10नियहा के छोटे से गार्डन में
14:11सबजियां गर्मी से मुर्झाने लगती है
14:13ममी ची सबजियां सोख रही है
14:15मेरी गुल्लक में कुछ पैसे हैं
14:17चल मंधी से ले आते हैं
14:19दोनों दूब में मंडी जाती हैं और सब्जियां लेकर वापस आती हैं
14:22दोनों पसीने में भीगी होती हैं घर पहुंचते ही विमला चक्कर खाकर खाट पर गिर जाती है
14:28यह गर्मी जान ले लेगी
14:29हम गरीब हो की गर्मी कैसे कटेगी
14:32निहा तुरंत रसोई में जाती है और शिकंजी बना कर लाती है
14:35मम्मी ये पीलो आपको ताकत मिलेगी
14:38विमला धीरे धीरे शिकंजी पीती है
14:41गरीब है तो क्या हुआ जुगार तो हमारे पास बहुत है
14:45दुपेर की चिल्चलादी दूप सड़ के तपरे ही होती है
14:58काश घर में एक टंकी होती तो रोज-रोज ये पानी भने का जिंजट कतम हो जाता
15:02सर्दियों में तो सब ठीक लगता है लेकिन गर्मियों में हालत कराब हो जाती है
15:05बड़ी मुश्किल से वो पानी से भरी बाल्टी उठाती है और धीरे-धीरे घर की ओचल पड़ती है
15:10दूसरी तरफ दिपाली के घर में समर्सिबल चल रहा होता है
15:13पाइप से पानी भर भर कर बाल्टियां भरी जा रही होती है
15:16उफ बाल्टी तो बहुत भारी है लेकिन चलो
15:18खाना तो मुझे वैसे भी नहीं बनाना होता
15:21वो हस्ते हुए बाल्टी रख देती है
15:23बिना ज़ादा महनत के पानी मिल जाता है
15:25शिल्पा अपने मौडिलर किचिन में खड़ी
15:27एक्वो गर्ट से पानी की बोतल भर रही होती है
15:30हाई इसमें भी इतना गरम पानी आ रहा है
15:33लग रहा है जैसे किसी ने उबाल कर डाल दिया हो
15:35वो सारी बोतले फ्रिज में रख देती है
15:38उफ ये गर्मी
15:39अगले दिन शिल्पा कार्ड से बजार्ज में उतरती है
15:42डबी उसकी नजर फुटपाद पर बैठी नेहा पर पड़ती है
15:45जो गर्ने का जूस पी रही होती है
15:56अगले दिन शिल्पा सोफे पर एसी में बैठी होती है
16:08वो फोन से सबजियां ओनलाइन ओर कर देती है
16:11दूसरी तरफ दिपाली रसोई में एक साथ बहुत सारा खाना बना रही होती है
16:15अभी बना कर रख देती हूँ तीन चार दिन का
16:18फिर मैं फ्री हो जाओंगी इतनी महनत की है तो फाइदा भी तो होना चाहिए
16:22वो खाना डिब्बों में पैक करके फ्रिज में रख देती है
16:25वही नहा अपने छोटे से गार्डन में जाती है ताजी सबजियां तोड़ती है और रसोई में जाकर खाना बनाना शुरू
16:30करती है
16:30फसीने में भीगी होई लेकिन चेहरे पर सुकून होता है
16:34मेहनत तो लगती है लेकिन अपने परिवार को ताजा खिलाने का मज़ा ही अलग है सेहत भी ठीक रहती है
16:40दोपैर की गर्मी लेकिन शिलपा के घर में ठंडी हवा और शान्ती होती है
16:44ड्रोइंग रूम में मेहमान बैठे होते हैं और शिलपा आराम से सोफे पर टांग पर टांग रखकर बैठी होती है
16:49अरे आप लोग रिलाक्स करो सब इंतजाम हो जाएगा
16:52बीच बीच में वो उट कर किचिन में जाती है जहां शेफ काम कर रहे होते है
16:56चल्दी से चाय लेकर आओ और तुम नाश्टा ट्रे में सजा कर बाहर ले जाओ
17:01जी मैडम
17:02कुछ ही दिर में चाय नाश्टा महमानों के सामने आ जाता है
17:12शिल्पा हलकी मुस्कान के साथ उनकी बाते सुनते है
17:15उसी समय बजार में भीड और गर्मी दोनों चरम पर होते है
17:18लोग पसीने में तर बतर सामान खरीद रहे होते हैं
17:20नेहा भी सबजिया चाट रहे होते है
17:26सबजी वाली की आवाज सुनकर उतरी चली जाती है
17:29कुछ लोग जल्दी जल्दी खरीदारी कर रहे होते हैं
17:31तो कुछ चाओं ढून कर खड़े होते हैं
17:33गर्मी हर किसी की परिक्षा ले रही होते है
17:35अगले दिन नेहा के घर उसके ममी पापा आते हैं
17:38छोटा सा घर है गर्मी से भरा हुआ
17:40लेकिन निहा रसोई में खड़ी पसीने में भीगी खाना बना रही होती है
17:43अरे बेटा इतनी गर्मी में क्यों मेहनत कर रही है
17:46ममी आपने ही तो सिखाया है
17:48महमान भगवान समान होते हैं
17:50उन्हें भूखा थोड़ी ना भीजूगी
17:51तु सच में बहुत समस्दार हो गई है बेटा
17:54साजबी पास खड़ी गर्व से देख रही होती है
17:57बेहन जी आपकी बेटी बहुत अच्ची
17:59ऐसी बहु भगवान सब को दे
18:01निहा थकान के बावजूद प्यार से खाना बना कर सब को परोस्ती है
18:05उदर शिल्पा सुपर मार्केट में समान ले रही होती है
18:09मैम देखिए सारी चीज़ अक्तम फ्रेश आई है
18:12कली नया आइस टॉक आया है
18:13दोपैर की तेज गर्मी घर के अंदर पंखा और कोलर दोनों चल रही होते है
18:17फिर भी गर्मी कम नहीं होती
18:24अएए आईए बैठिये दिपाली बेटा जरा चाय बना कर ले कर आओ
18:35पहली बात तो इतनी गर्मी में चाय कौन पीता है
18:37और वैसे भी मुझे क्या करना गरम करके दे देती हूँ
18:41वो उसी चाय को गरम करती है और कब में डाल कर ट्रे में रख लेती है
18:44जैसे मेहमान चाय पीते हैं उनके चैरी का भाव बदल जाता है
18:47अरे बेहन जी आपके घर में चाय भी ताजी नहीं बनती क्या
18:51कितने दिन की पुरानी है ये चाय
18:53क्यों वह कई दिन की रख्यों चाय दे दी एकदम कड़ भी लग रही है
19:01अरे नहीं बेहन जी मौसम ही ऐसा शाय इसीलिए सुहाद बदल गया होगा
19:06महमान चाय दोरी छोड़ देते हैं और थोड़ी देर बाद उठकर चले जाते हैं
19:09दर्वाजा बंद होते ही सास का गुसा फूट पड़ता है
19:31सुनीता सिर्पकड़कर बैट जाती है उसके चेरे पर दोख और गुस्सा दोनों साफ नजर आते हैं
19:35दोपैर को घर में गर्मी और सनाटा होता है
19:38तब यह अचानक दरवाजे पर जोड से दस्ता कोती है
19:40दिपाली का पती आयूश कुछ अजनवी लोगों के साथ अंदर आता है
19:44उसके चेरे पर घबराहट साफ नजर आ रही होती है
19:48अब यह घर हमारे नाव हो चुका है
19:51अरे भई आपके पती ने यह घर निलाम कर दिया है
19:53अब आपको यह घर खाली करना होगा
19:55यह सुनते ही पूरे घर में सन्ना टचा जाता है
19:58सास और ससुर एक दूसर को हैरानी से देखने लगते है
20:01क्या बोल रहा हो तुम
20:02यह घर हमारा है
20:03मैंने और इनके पापा ने अपने पूरी जिंदगी की मेहनत से बनाया है
20:08अरे मेरे पास इस घर के अलावा कुछ भी नहीं है
20:10इसमें मेरी खून पसी नकी कमाई लगी है
20:13हा ममी यह घर जूए में चला गया
20:15अब हमारा इस पर कोई हग नहीं है
20:17यह सुनते ही दिपाली के पैरो तले जमीन खिसक जाती है
20:21आप पागल हो गया हो क्या
20:22कितनी बार आपको समझाय था कि कोई धंका काम कर लो
20:25सास का गुसा अब दिपाली फर फूट पड़ता है
20:28यह सब तेरी ही कमी के कारण हुआ
20:30अगर तु पहले ही इस पर ध्यान देती
20:33इसे रोकती तो आजे दिन नहीं देखना पड़ता
20:35एक पतनी ही अपने पती को गलत रास्ते से रोक सकती है
20:38लेकिन तेरी लापरवाही और आलस ने हमारा घर बरबाद कर दिया
20:41ममी जी मैंने इने समझाय था लेकिन इनों ने कभी मेरी बात नहीं मानी
20:45यह सब इनकी गलती है
20:46वो अपने पती की तरफ देखती है
20:49अब क्या करेंगे हम
20:51खाने के भी लाले पड़ जाएंगे और छट भी आपने हमसे चीन ली
20:55मुझे माफ कर दो
20:56मुसे बहुत बड़ी खलती होगी
20:57अब मैं कभी जुआ नहीं खेलूँगा
20:59सास गुसे में आकर उसे जोर से थपड़ मार देती है
21:06पुरा परिवार तूट चुका होता है
21:10एक तरफ पच्टावा दूसरी तरफ गुस्सा और बीच में बिखरता हुआ घर
21:13घर में सन्नाटा जो घर कभी लोगों की आवाजों से भरा रहता था अब खाली सा लगने लगता है
21:18दिपाली एक कोने में बैठी होती है बाल बिखरे हुए आंके सूजी हुई कई घंटों से एक ही जगा पर
21:24कमर लगाई बैठी होती है
21:25अब हम क्या करेंगे सब खत्म हो गया
21:28उसके दिमाग में एक ही बात बार बार घूम रही होती है लोग क्या कहेंगे
21:32अगर ये बात महले में पहल गई तो मेरी क्या इस्थ रह जाएगी निया और शिल्पा वो तो मेरा जीना
21:37ही मुश्किल कर देंगे
21:38वो खुद की तुलना करने लगती है
21:55दिन बीटते जाते हैं एक दिन, दो दिन, तीन दिन, दिपाली उसी हालत में रहती है
22:00न ठीक से खाना खाती है, न किसी से बात करती है
22:03उसका मन और दिमाग दोनू धीरे-धीरे तूटते जा रहे होते है
22:07बेटा, थोड़ा कुछ खा ले
22:09लेकिन दिपाली कोई जवाब नहीं देती, बस खाली नजरों से देखती रहती है
22:12चौते दिन उसकी हालत और बिगड़ जाती है, वो खुद से बाते करने लगती है
22:16सब मेरी गलती है, अगर मैंने पहले ध्यान दिया होता, तो आज ये सब नहीं होता
22:20घरवाली उसके हालत देखकर घबरा जाते है
22:23ये तो बिलकुल टूट गई है
22:25शाम को सड़क पर हलकी भीड होती है, दिपाली बिना को सोचे समझे चलती जा रही होती है
22:30उसकी आँखे सूनी होती है, दिमाग पूरी तरह उलजा हुआ
22:32चलते चलते वो एक पुल पर पहुंच जाती है और रेलिंग के पास खड़ी हो जाती है
22:37अब मेरी बेज़िती हो जाएगी, मैं किसी को मूँ दिखाने लाइक नहीं रही, सब खत्म हो गया
22:41वो दीरे दीरे रेलिंग पकड़ कर आगे जुगती है, जैसे कूदने वाली हो
22:45तब ही बहां से शिल्पा और नेहा गुजर रही हो थी, उनकी नजर दिपाली पर पढ़ती है
22:50दिपाली, अरी ये क्या कर रही है?
22:51दोनों तुरंत दोड़ते हुए उसके पास पहुँचती हैं और उसका हाथ पकड़ देती है
22:55तुम पागल हो क्या, मरना चाहती हो, इतनी उचाई से कूदने जा रही थी
23:00ऐसा भी क्या हो गया कि तुम अपनी जान देने की सोच रही हो?
23:02देपाली उनकी बाते सुनकर फूट फूट कर रोने लगती है
23:18शिल्पा और नेहा एक दूसरे को देखते हैं, फिर देपाली को समभालती है
23:21हर चीज का सोल्यूशन होता है, मरने के बाद तुम कुछ नहीं कर पाऊगी, जिंदगी खत्म करना कोई हल नहीं
23:27है
23:27हाँ हम है ना, हम तुम्हारी मदद करेंगे, तुम अकेली नहीं हो, लेकिन मैं अपने बच्चों को कैसे बालूँगी
23:34बच्चों के लिए ही तुम्हें जीना पड़ेगा, अब तुम्हारी सिम्मेदारी है कि तुम उन्हें अच्छा जीवन दो
23:39तुम दोनों तुम मुझे हमेशा ताने देती थी, फिर भी मेरी मदद कर रही हो
23:44ताने किसी की जिन्दगी से जादा बड़े नहीं होते, तुम हमारी पडोसी हो, और तुम्हारी मदद करना हमारा फर्ज है
23:50आज से हम तीनों साथे, कोई अकेला नहीं है
23:54अगले ही दिन सुबा कल की घटना के बाद तीनों बहुए एक साथ बैठी होती है
23:57दिपाली के आँखों में अभी भी डर और उदासी होती है, लेकिन शिल्पा और नहा के चेहरे पर एक नई
24:03उमीद दिख रही होती है
24:21दिपाली पहली बार हलका सा मुस्कुराती है, अगले ही दिन शिल्पा एक फूट ट्रक मंगवाती है, नहा अपने गार्डन से
24:27ताजी-ताजी सबजियां तोड़ कर लाती है
24:29ये लो, आज का सारा सामान फ्रेश है
24:32तीनों रसोई में मिलकर खाना बनाना शुरू करती है, पसी नबहरा होता है, लेकिन इस बार महनत में खुश ही
24:37होती है
24:37आज मैं पूरी महनत करूगी, अब मुझे भी बतलना होगा
24:42सुसाइटी के बाहर फूर्ट ट्रक खड़ा होता है, बोर्ट पर लिखा होता है घर जैसा स्वाद
24:46शुरुआद में कुछ लोग आते हैं फिर दीरे भीड बढ़ने लगती है
24:49अरे वाँ, कितना स्वादिष्ट खाना है
24:53इतनी गर्मी में भी इतना ताजा और अच्छा खाना कमाल है
24:56ट्रक फूड पर फास्ट फूड भी होता है और हेल्दी खाना भी
24:59हर किसी के लिए कुछ न कुछ दिन खतम होने पर अच्छी कमाई होती है शिल्पा
25:03सारे पैसे दिपाली के हाथ में रख देती है
25:06ये, ये सब मुझे
25:08अभी सबसे ज़ादा जरूरत तुम्हें है
25:11हाँ, तुम्हारा परिवार इस से अपना घर चला सकेगा
25:14बाद में जब तुम स्टेबल हो जाओगी
25:17तब हम तीनों बराबर बराबर बाट लेंगे
25:20दिपाली के आँखों में आसू आ जाते हैं
25:21लेकिन इस बार ये आसू दुख के नहीं
25:23बलकि खुशी के होते हैं
25:25मैंने कभी नहीं सोचा था कि तुम दोनों में लेतना करोगी
25:28अब हम सिर्फ पडोसी नहीं है, एक टीम है
25:31और ये तो बस शुरुवात है
25:33उस दिन के बाद से तीनों बहों की जिन्दगी पूरी तरह से बदल जाती है
25:37सुबा सूरा जुगने से पहले ही उनकी दिन चरिया शुरू हो जाती है
25:40पहले जहां हर किसी की रसोई अलग-अलग सूच और आधितों में बटी होई थी
25:43अब वो ही तीनों एक साथ खड़ी होकर एक ही चूले पर काम कर रही होती है
25:47सुबा सुबा नेहा अपने चोटे से गार्डन में जाती है
25:49अब वो पहले से भी जादा महिनत करती है
25:52सूखी पतियों को हटाना, पौदों में पानी डालना, नई बीज बोना, हर काम में उसका मन लगा होता है
25:58अब ये सिर्फ मेरा गार्डन नहीं, हमारा बिजनेस है
26:00ताजी ताजी सब्जियां तोड़ कर वो टोकरी में भढ़ती है, उसकी आँखों में चमक होती है
26:05दूसी तरफ शिल्पा सुबा सुबा सुबा फोन पर ओर चेक कर रही होती है
26:08खर्चे का हिसाव रखती है और फूड ट्रक की प्लानिंग करती है
26:15जो शिल्पा पहले सिर्फ ओर देना जानती थी, अब खुद हर चीज में हिस्सा लेने लगी है
26:19वो सिर्फ मैनेजर नहीं बलकि टीम का हिस्सा बन चुकी है
26:22और दिपाली जो पहले रसोई से भागती थी, अब सबसे पहले किचिन में खड़ी होती है
26:26वो आटा गूत रही होती है, सबजियां काट रही होती है
26:28और हर काम में पूरी लगन दिखा रही होती है
26:31रसोई ही वो जगा है जो घर बसाती है
26:33अगर मैं यहां भी आलस करूंगी तो मैं किसी काम की नहीं हूँ
26:37दीरे दीरे तीनों का food truck पूरी society में मशूर हो जाता है
26:41घर जैसा स्वाद अब लोगों की पहली पसंद बन चुका होता है
26:44शाम होते होते food truck के सामने लम्मी लाइन लग जाती है
26:47बच्चे बुज़र्ग और ते हर कोई उनके खाने का इंतजार करता है
26:58दिन खतम होता है और जब कमाई गिनी जाती है तो पहले से कई गुना ज़ादा होती है
27:02शिल्पा और निहा हमेशा की तरह सारे पैसे दिपाली के हाथ में रख देती है
27:06तुम तोनों हर बाह ऐसा क्यों करती हो क्योंकि अभी तुम्हें इसकी सबसे ज़ादा जरूरत है
27:10जब तुम पूरी तरह संभल जाओगी तब हम तीनों बराबर बराबर बाट लेंगे
27:17दिपाली की जिन्दगी अब पूरी तरह से बदल चुकी होती है
27:19उसकी रसोई जो कभी खाली और बासी खाने से भरी होती थी
27:23अब ताजी सबजी और खुश्बुदार खाने से महकने लगती है
27:25वो रोज अपने बच्चों के लिए ताजा खाना बनाती है
27:28उनके साथ बैट कर खाना खिलाती है
27:30पती के लिए भी प्यार से खाना परोस्ती है
27:32आयुश अब अपनी गलती समझ चुका होता है
27:34वो भी महनत करने लगता है और धीरे धीरे अपने परिवार का भरोसा वापस जीतने की कोशिश करता है
27:44अब हम दोनों मिलकर सब संभाल लेंगे लेकिन इस बार कोई गलती नहीं होगी
27:49साथ ससुर के चेरे पर भी अब सुकून नजर आता है
27:52कई महीनों की महनत के बाद वो देना आता है जिसका सब को इंतिजार था
27:58तीनों बहुए मिलकर पैसे जोड़ती है और आखर कार दिपाली का घर वापस खरीद लेती है
28:02वही घर जो कभी उनके हाथ से निकल गया था
28:04दिपाली दर्वाजे पर खड़ी होती है उसकी आखों में आसू होते है
28:08आज मेरा घर फिरसे मेरे हाथ में है
28:11वो मुलकर शिल्पा और नेहा को देखती है
28:24तीनों हस पड़ती है और एक दूसरे को गले लगा लेती है
28:26तीन रसोई तीन सूच
28:28एक में पैसा था एक में महनत और एक में लापरवाई
28:31लेकिन जब ये तीनों एक साथ आई तो उन्होंने एक नई राह बना दी
28:35जहां महनत समझदारी और सहयोग तीनों साथ चलते हैं
28:38अब तीन अलग अलग रसोई नहीं बलकि एक रसोई बन गई थी
28:41जब हालात मुश्किल हो जाते हैं
28:44तो आपके हिसाब से कौन सी रसोई सबसे ज़्यादा सही है
28:47महनत से उगी हुई पैसों से खरीदी हुई दूसरों पर निर्भर रहने वाली
28:51या फिर इन तीनों का साथ मिलकर बनाया गया नया रास्त
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