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  • 10 hours ago
मायके vs ससुराल की रसोई के 150 बर्तन ||Cartoon Videos||150 Kitchen Utensils: My Parental Home vs..

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00:00माईके वर्से ससुराल की इरसोई के 1.500 बरतन
00:03हे भगवान ये बरतन धोते धोते तो मेरे हात भी किसी दिन खिस जाएंगे
00:08हर दिन 1.500 से भी ज़ादा बरतन धोने पड़ते हैं
00:11होटल खोल रखा इतना बढ़ा लेकिन एक बरतन धोने वाला नहीं लगवा सकते
00:14तीन मंजिला घर के फर्स फ्लोर पर बने होटेल के सारे बर्तन घर के पीछे बैठी घर के बेटी कीर्ती
00:20धो रही थी
00:21तब भी वहां कीर्ती के चाचु आते
00:23अरे ओ बर्तन लेकर जूम क्या रही है अपना जल्दी जल्दी हाथ चला
00:27तेरी वज़ा से ग्राक खड़े हैं प्लेट कम पड़ रही है जल्दी बर्तन धो
00:30चाचा जी बर्तन ही तो धो रही हूँ इतने सारे बर्तन है थोड़ा टाइम तो लगेगा
00:35जबान ज्यादा चल नहीं रही है तेरी चाची की तरह छुरी लेकर काट दूँगा चुप चाप जल्दी जल्दी सारे बर्तन
00:40धो
00:51किर्टी इतना कहती है कि तब भी वहां मीनाक्षी आ जाती है
01:08जे ठानी जी आपने पैदा भी तो एक लड़की की है और उसे भी इस तरह बैठा कर रखा
01:13कम से कम कोई काम करवा थोड़ा तो फायदा हो इससे
01:17चाची तब से बरतन ही धो रही हूं और काम तुम्हें करती हूं घर का
01:21ये बड़ा बरतन धोकर आ रही हूं जब नीचे और जूठे बरतन पड़े हैं उसे भी धो दे
01:26फर्स फ्लोर पर बने घन में ही एक छोटे से होटेल के सारे बरतन धोते धोती कीरती परिशान हो जाती
01:31है और नमाकों से अपनी मा की तरफ देखती है
01:34आप मुझे क्या देख रही है मेड़ा की तरह जा जाकर काम कर थोड़े बरतन धो देगी तो छोटी नहीं
01:39हो जाएगी
01:40कीरती अपनी मा की बात सुन रही थी कि तब ही मीनाक्षी गुस्टे में पानी लाकर कीरती के मुँपर फेग
01:44देती है
01:45जा और भी काम पढ़ें उसे कर जी जी अभी अभी करती हूं जा रही हूं किर्टी घबरा के तुरंट
01:53नीचे बरतन धोने चली जाती है do
01:55किर्थी अपनी मा सुमित्रा के साथ अपने चाचा चाची के साथ रहा करती थी।
01:59चाचा चाची हमेशा किर्थी को तंग करते हुद्यल का सारा काम करवाते और वहीं किर्थी की मा भी बेटे पाने
02:04की खुआईश में किर्थी को हमेशा ताने मारती।
02:07इसी तरह फिर एक दिन
02:08क्या हुआ जी कहा जा रहें आप
02:10कहीं नहीं बस वो आज सेलरी आ गई थी न तो भावी को सेकंड फ्रोर पर देने जा रहा था
02:16कोई जरूरत नहीं अपने भावी को पैसे देने की
02:18अब उनके पती मर गएं तो उनकी जिम्मेदारी हमने थोड़ी न ली है
02:21जो हर महीने दो उर्पे मिले उसमें भी चार आना उन्हें देना पड़े
02:25मैं तुम्हारी बात को समझ रहा हूँ लेकिन अगर मैंने पैसे नहीं दिये तो वो अपना खर्च कैसे सभालेंगी
02:38मिनाक्षी और विरेंद की बाद दरवाजे के बाहर खड़ी समित्रा सुनती है और गुसे में कमरे में जाती है जहां
02:47कीरती बैठकर रो रही थी
02:48मा भी मुझे नहीं समझती है मेरे हाथ इतने जादा दर्द करें पूरित छिल गए हैं बरतनों की वज़ा से
02:55तब ही समित्रा आगे बढ़ती है और केरती को खीच कर एक थपड़ लगाती है
02:58मा मत बोल अपने इस मन हूँ सुबान से मुझे मा क्या जरूरत थी तुझे पैदा होने की एक लड़का
03:05होता तेरी जगा तो आज बुढ़ापे का सहारा होता
03:24सुमित्रा सिर्फ पर हाथ रखकर बैट जाती है और कीरती किचन में जाकर रोने लगती है इसी तरह फिर अगले
03:28दिन
03:34कीरती यही सोच रही थी कि तब भी वहाँ मीनाक्षी सर्फ का पैकेट लेकर आती है
03:53मीनाक्षी गुस्टे में वहाँ से चली जाती है और पिर कीरती सर्फ से बैट कर सारी बरतन दोने लगती है
03:58तब भी वहाँ कीरती के भाई आ जाते है अरे क्या हुआ नौकरानी बरतन दो रही है क्या चलिए बरतन
04:07भी दो
04:09वैसे मुझे बहुत तेज प्यास लगी है इतना कहकर सुमित जान बूच कर जूटे बरतन करके रखने लगता है
04:15भाई आप ये क्या कर रहे हैं हर बार अलग-अलग ग्लास में पानी क्यों पी रहे हैं
04:20तुझे क्या तेरा काम बरतन दोना है ना बरतन दो अब क्या हम हाथ में पानी लेकर पियेंगे
04:51किर्ती खुद रोकर खुद ही अपने आसू पोच लेती है अब इसी तरह दिन बीचते हैं और फिर एक दिन
04:56होटेल चला रहे है कुछ बावर्ची आपस में बाते कर रहे थी
05:00अरे बही आज पहली बार होचल में इतनी ग्राग आए है वरना दिन भर बैटकर मक्खी मारते रह जाते हैं
05:06हाँ और फिर आज हमारी पगार भी मिलने वाली है कमाई इतनी अच्छी होई है मालिक पगार दे देंगे
05:13हाँ बस एक बार काम खतम हो जाए फिर शाम को मालिक से पगार ले कर जाएंगे
05:20आपस में बाते करते हुए सभी हंसते हुए काम करते हैं और फिर शाम को
05:24क्या हुआ अब तक घर क्यों नहीं गई खड़े खड़े मेरा मूँ क्या देख रहे हो
05:29मालिक, आज हमारी सेलरी देने का दिन है, इसलिए पैसों का इंतजार कर रहे हैं, आज आप हमें पूरे महीने
05:35की पगार दे दीजिए
05:37ए भगवान, अब इन तीनों को पगार भी देना पड़ेगा, मेरे तो सारे पैसे ऐसे ही लोट जाएंगे
05:46इतने पैसे देने की क्या जरूरत है, काम तो इन लोगों ने ठीक से किया नहीं है, और पैसे लेने
05:51के टाइम पर मूँ उड़ा कर आ जाते हैं, रुको मैं देती हूँ इन्हें पैसे
05:54इतना कहकर मिनाक्षी विरेंद्र के हाथों से पैसे ले लेती है, और सभी को उनकी आदी अदूरी सैलरी देकर घर
05:59बेज देती है
06:15इतना कहकर मिनाक्षी वहाँ से चली जाती है, वहीं घर जा रहे है बावरची
06:19अरे यह हमारे मालक और मालकिन कितने जागा कंजूस है
06:23दो रुपई बचाने के लिए हमारी कमाई खाने पर तो ले रहते है
06:26अरे इनका बस चले तो दूसरे के पैसे भी हड़ब कर बैठ जाएं
06:29पैसे बचाने के लिए तो होटेल के मालकिन को ही नोकरानी मना कर रख दिया है
06:34अरे वो ही तो जब घर का सारा बटवारा होगा तो उसी के हिस्से में जाएगा
06:38यह होटल और बिचारी खुद के ही होटल में नोकरानी मन कर जैसे बरतन गिस्ती है दिन भर
06:43कंजूस कहीं के
06:44ये नहीं कि एक स्टाफ रख ले
06:46अरे कैसे रखेंगे हमारे पैसे तो उनकी जेव से निकलते रही है
06:50नई स्टाफ को क्या खाक देंगे
06:52स्टाफ से लेकर हर किसी को ये बात पता चल जाती है
06:55कि मिनाक्षी बहुत ज़्यादा कंजूस थी
06:56इसी तरह एक राज सभी लोग बैठ कर आपस में बाते कर रहे थे
06:59कुछ दूर पर अकेले कीर्ती डेड़ सो बरतंद हो रही थी
07:20कीर्ती खुद से बढ़बढाते हुए दिन भर काम करने की वज़ा से बैठे बैठे ही गहरी नीन में डूब जाती
07:25है
07:25और अपने सपनों की आलिशान दुनिया में खो जाती है
07:29मैम ये लिजिए आपके लिए ठेंडी ठेंडी कोल्ड कॉफी
07:44कीर्ती की बास सुनकर काजल कीर्ती का सर दबाने लगती है
07:57कीर्ती अपने सपनों की दुनिया में खोई थी तबी मिनाक्षी आकर ठेंडा ठेंडा पानी कीर्ती के ऊपर फेग देती है
08:08इतना कहकर मिनाक्षी कीर्ती के बाल पकड़ कर खीचने लगती है
08:16क्यों जान अपनी सपनों की दुनिया में खोगई जादा सपने देखने का शौक है ना
08:30किर्ती कापते हुए हाथों से दुबारा बर्तन धोने लगते है और अब धीरे दीरे उसके आंसु भी सूखने लगते है
08:36फिर एक दिन
08:49किर्ती ये सोचते हुए आगे बढ़ रही थी कि तभी उसकी नजर एक बड़े मैदान पर लगी भीड़ पर जाती
08:53है
08:58ये सोचकर किर्ती जैसे उस भीड़ के अंदर जाती है तो देखती है कि एक कार उल्टी हुई है और
09:03उसके अंदर एक और बेहुश पर जिसके सिर से लगातार खोन बैटा जा रहा था
09:07लेकिन वहां मौजूद कोई भी उसकी मदर नहीं कर रहा था बलकि सब वीडियो बना रहे थी
09:11ये भागवान कैसा कल यूगा गया है लोग तो फॉलोवर्स के लिए किसी की जान जाते हुए देख सकते हैं
09:17लेकिन मैं ऐसा नहीं होने दूँगी
09:19ये सोचकर कीरती तुरन तो उस औरत को गार से निकालती है और रिक्षे में वैठा कर हॉस्पिटल पहुँचाती है
09:25दॉक्टर प्लीज इनका चेक अप जल्दी से जल्दी कीजिए इन्हें कुछ नहीं होना चाहिए
09:31देखे हम जल्दी इनका ओपरेशन शुरू कर देते हैं बस आप इस फॉर्म पर साइन कर दीजिए और इतना बता
09:36दीजिए कि आप पेमेंट कैश कीजिएगा या ओनलाइन
09:39देखे मेरा नाम कीरती है मैं नहीं जानती वो कौन है रास्ते में इन्हें बेहोश देखा तो अस्पताल ले आई
09:47आप प्लीज इनके परिवार वालों को बुला लीजे
09:51क्या बात है अन्जान होने के बाब जोद आप इनके लिए इतनी परिशान थी ठीक है आप चिंता मत कीजिए
09:56मैं इनके घरवालों से कॉन्टेक्ट कर लेता हूँ
09:58डॉक्टर की बास उनकर केरती थोड़ा हिम्मत करती है और वापस घर लोडती है
10:05मीनाक्षी के बाब जूद बस बरतन धो जोड़ा है
10:32खुद से बड़बडाती हुए कीरती हमेशा की तरह बरतन धो रही थी तो वहीं दूसरी तरफ हॉस्पिटल में
10:37क्या हुआ डॉक्टर मेरी माँ ठीक तो है न उनने कुछ हुआ तो नहीं
10:42नहीं नहीं उनका ओपेशन बहुत अच्छी तरह से हो गया है और अब उन्हें थोड़ी देर में होश भी आ
10:46जाएगा
10:46वो तो भला उस लड़की का जिसने आपकी मा को सही सवे पर अस्पताल पहुचा दिया
10:51वन्ना कर ज्यादा खून लॉस हो जाता तो कुछ भी हो सकता था
10:55क्या एक लड़की ने मेरी मा की जान बचाई थी तो क्या आपको बताए डॉक्टर वो लड़की कौर है
11:00मैं उसे मिलना चाहता हूँ उसने मेरी मा की जान ही नहीं बलके मेरी पूरी दुनिया बचाई है
11:06उन्होंने मुझे अड्रेस या फिर अपने नमबर फोन नमबर नहीं दिया है बस अपने नाम बताया था कीर्थी
11:13इतना कहकर डॉक्टर चला जाता है और वैवब सोच में पड़ जाता है
11:17जिसने मेरी मा की जान बचाई है उसे तुमें पाताल लोग से भी ढूर निकालूँगा
11:21मैं उसे एक बार जरूर मिलूँगा
11:23वैवब खुद में ही एक फैसरा लेता है और कीर्थी की खोश शुरू कर देता है
11:27अब इस तरह दिन बीचते हैं और कुछ दिनों में वैवब की मा भी ठीक हो जाती है
11:31और फिर वैवब अपनी मा को सारी सच्चा ही बताता है
11:35बेटा मैं बस एक बार उस लड़की से मिलना चाहती हूँ
11:38क्या तुझे उस लड़की के बारे में पता है
11:40मा अब तक मैं उससे नहीं मिल पाया आपको कैसे मिलवाऊंगा
11:44और मुझे उसके नाम के सिवा कुछ और पता भी नहीं है
11:47ठीक है बेटा लेकिन अगर कहीं भी तुझे वो लड़की मिले तो एक बार उसे मुझे से जरूर मिलवाना
11:52जब उसने मेरी जान बचाई थी तो मैं थोड़ा होश में थी
11:55मैंने देखा किस तरह उसने सब के खिलाव सबसे अलग जाकर अपनी जान पर खेल कर मेरी जान बचाई थी
12:02ठीक है माँ मैं उसे ढूरने की पूरी कोशिश करूँगा
12:05इतना कहकर वैभब कीर्थी की खोश शुरू कर देता है
12:08वहीं केर्थी के घर पर विरेंद रू उसके चाचा फोन पर बात कर रहे थे
12:12विरेंद अगर तेरी नजर में कोई बरतन थोने वाली हो तो जड़ा मुझे खबर करना
12:16यह मेरे दोस्त का काफे है ना वहाँ स्टाफ ने छुट्टी ले ली है
12:21अरे भगवान दिन भर घर में पड़ी रहती है अगर जाकर बरतन थो जाएगी तो कम से कम थोड़े पैसे
12:28तो आएंगे
12:34इतना कहकर विरेंद फोन कट कर देता है और यह खबर पूरे घर वालों को सुनाता है
12:38क्या आप घर में बरतन थोती तो ते पाहर भी दोना होगा
12:50जिसकी वज़ा से कीरती को घर के साथ अब दूसरों के कैफे जाकर भी बरतन होने पड़ते हैं इसी तरह
12:55एक दिन कैफे में
12:58कीरती टेबल नमबर 10 पर यह पाव भाजी और बिर्यानी दे आओ
13:01ठीक है सर
13:02कीरती हाथ में बिर्यानी और पाव भाजी लेकर टेबल की तरफ बढ़ती हैं तब यह वहाँ कैफे का उनर चश्मा
13:07पहन कर जो बाहर जा रहा था वो पीछी मुड़ कर देखता है
13:10कीरती
13:12सुरिए क्या आप ही केरती हैं जिन्नोंने मेरी मा की जान बचाई थी एक रोड एक्सिदेंट पर याद कीजिए
13:17हाँ मैंने एक औरत की जान तो बचाई थी क्या वो आपकी मा थी
13:21अच्छा तो वो आप कैसी हैं
13:23हरे आपकी बज़ा से वो अभी सही सलामत है
13:26थैंक यू सो मज़ जो आपने मेरी मा के इतनी कदर की
13:29आप क्या प्लीज उनसे चल कर एक बार मिल सकती है
13:32देखिए मैं इस तरह आपके साथ नहीं
13:34प्लीज मना मत कीजिएगा
13:35मेरी मा आप से मिलने के लिए बहुत दिनों से बेताब है
13:37आप एक बार उनसे मिल लीजिए
13:39वैवब की बात सुनकर कीर्थी वैवब के साथ उसके आली शान से घर में जाती है
13:43जहां कौशलया कीर्थी को पहचान कर तुरंद गले लगा लेती है
13:47थैंक यू सो मज बेटी
13:48मेरी जान बचाने के लिए
13:50मुझे बहुत अच्छे से याद है तुमने कितनी मुश्किल परिस्तिती में मेरी जान बचाई थी अगर तुम ना होती
13:55तो ना जाने आज मैं
13:57नहीं आंटी ऐसा मत कहिए
13:59मुझे आप में अपनी मां की छवी दिखती है
14:01बस इसलिए मैंने आपकी जान बचाई
14:03कौशलया कीर्टी से काफी देर तक बाते करती है
14:05और पिर कीर्टी थोड़ी देर बाद कौशलया के पैर छोकर वापस अपने घर चली जाती है
14:09फिर रात को
14:10बेटा मैं सोच रही थी जब वो अंजान लड़की में ले इतना सब कुछ कर सकती है
14:14तो अगर वो हमारे घर की बहु बन जाएगी
14:16तो हमारे घर के लिए क्या कुछ नहीं करेगी
14:19संसकार भी उम्र से बड़े हैं उसके
14:21क्योना मैं उसकी शादी तेरे साथ करवा दू
14:24हरे मा, आपकी पसंदी मेरी पसंद है
14:27मुझे इस रिष्टे से कोई आतराज नहीं है
14:29हम, हम, सीधे सीधे कहिए न देवर जी
14:33हाँ, आपको भी वो लड़की पसंद है
14:35मैंने देखा था, जब वो आई थी
14:36तो आप उसे कैसे देख रहे थे
14:38चलो, आसे मजाग तो होता रहेगा
14:40कल ही हम उस लड़की के घर रिष्टा लेकर जाएंगे
14:43फिर कौशलया सभी के साथ खाना खाते हुए
14:45किर्टी की तारीफ करती है
14:47और अगले दिन अपने पूरे परिवार के साथ
14:48किर्टी का रिष्टा लेकर किर्टी के घर पहुंचती है
15:04इस तरह चानक
15:05का रिष्टा उस मनहूस के लिए क्यों आया है ये तो काफी बड़े लोग है अगर ऐसी बात है तो
15:11हमें भी ये रिष्टा मनजूर है काफी बाते सुनिये हमने आप लगों के बारे में चेठानी जी इस रिष्टे के
15:16लिए हां कहने की क्या ज़र होते है कोई गरीब घर का रि�
15:34किर्थी की शादी धूमधाम तरीके से कर दी जाती है फिर ग्रह प्रवेश के वक्त जा बड़ी बव तु अपनी
15:40देवरानी का ग्रह प्रवेश करवाते वैसे भी अब इस घर की जिम्मेदारियां तो ही संभालती है ठीक है ममीजी मैं
15:47अभी करवाती हूँ प्यार इसी दे�
16:02मेरे साथ है वैसे मुझे बहुत नीन आ रही है क्या हम सोने जा सकते हैं हाँ हाँ तो नीन
16:07आएगी है देवर जी आपको अच्छा चलिए मैं देवरानी जी को कमरे में छोड़ देती हूँ सेचल थोड़ा हंसी मजाग
16:13करती है और अपने देवर देवरानी को उनके कमरे तक �
16:15पहुचा देती है और फिर दोनों सो जाते हैं इसी तरफ पूरी रात बीचती है और फिर अगली सुभा आज
16:21मेरे सस्वराल का पहला दिन है सुभा के पांच बजे चल दी से उठकर नहा दोकर तयार हुचाती हूँ उपर
16:26से आज मेरी पहली रसोई भी है ये सोचकर केरती त
16:43बरतन धोने लगते हैं और बरतनों की आवाज से बगल के कम्ने में सोई कोशिल्या की नीद खुल जाती है
16:48इतनी सुभा सुबा कौन बरतन धो रहा है इतनी सुभा तो विमला भी काम करने नहीं आती है कहीं किचन
16:54में बिली तो नहीं आ Byheroian नहीं आज भी है चूच सोचकर का
17:13परचार की क्या बात है जूटे बरतन ही है धूनी तो पढ़ेंगे इ बहु थोड़ी देर में विमला आएगी और
17:19सारे बरतन धोते के तुझे परेशान होने की जरूरत नहीं है तू चल मेरे साथ और वैसे भी बहु घर
17:24की लक्षमी होती है और लक्षमी से कोई घर के जूटे
17:26बरतन नहीं दुलवाता इतना कहकर कोशलया केरती का हाथ पकड़ कर अपने साथ हॉल में ले जाती है और तबी
17:33घर की नौकरानी विमला आती है क्या हुआ दीदी आज इतनी सूबा क्यों उठ गए कुछ नहीं दीदी बस मेरी
17:39बहु है न वो चली कही थी बरतन धोने तो उस
17:55के सबी लोग उठ जाते हैं बताईया मैडम खाने में क्या बना दूँ आज तुम लोग मेरी बहु के पसंद
18:01का खाना बनाओ हाँ भाभी जल्दी बताईया आपको क्या क्या पसंद है और आज हम भी तो चाहिए अपनी भाभी
18:06के पसंद का खाना मुझे कुछ खास तो नहीं
18:10बस मट्र पनीर की सबजी, रोटी, दाल सब पसंद है
18:13ठीक है बहू, तो फिर आज खाने में यही बनेगा
18:16इतना कैकर मनीश नौकरों से कीर्थी की पसंद का खाना बनवाता है
18:20और पूरा परिवार साथ बैठ कर डाइनिंग टेबल पर खाना खाना शुरू करता है
18:23तबी कौशलिया सबसे पहला निवाला कीर्थी को खिलाती है
18:27हरे मम्मी जी, इसकी क्या सरूरत थी?
18:29खाली जे देवरानी जी, मम्मी के हाथों का खाना खाने बहुत मुश्किल से मिलता है
18:42सभी की बातों में केर्थी को अपना पन लगता है
18:44और फिर वो खुशी-खुशी कोशलिया के हाथ से खाना खाती है
18:47और इसी तरह दोपैर को
18:49अरे मम्मी जी, जेठानी जी आप यहाँ?
18:52हाँ देवरानी जी, वो मम्मी जी ने आज आज आपकी कलाईया खाली देखी
19:04खाली अच्छे नहीं लगते, ला मैं तुझे कंगन पहना देती हूँ
19:07इतना कैकोशलिया कीर्थी के हाथों में सोने के कंगन पहनाती है
19:11अरे बहु, तेरे हाथ इतने खुर्दोरे क्यों है, उपर से इतनी सारी चोट के निशान भी है
19:34कोशलिया और सेजल कीर्थी से प्यार से बाते करते हैं, और उसे कंगन पहना कर वहाँ से चले जाते है
19:39अब इसी तरह पूरा दिन बीचता है, फिर रात को
19:52कीर्थी सभी के साथ अपने ससुराल में खुशी-खुशी रहने लगती है, और फिर एक दिन दो पहर को
20:09इतना कहकर सेजल कॉशलिया सहित, सभी को लेकर शॉपिंग पर पहुंचती है, जहां कॉशलिया कीर्थी को एक से बढ़कर एक
20:15साड़िया दिलवाती है
20:16आप पैसो की चिंता मत कीजे, बस कपड़े दिखाए, मेरी बहु जिस पर हाथ रख देगी, मैं उसे वही दिला
20:21दूँगी
20:43इस तरह सेजल सहित, सभी लोग कीर्थी को अच्छी तरह से शॉपिंग करवाते हैं, और फिर देर रात बाहर डिनर
20:48करके सभी वापस घर लोडते हैं, फिर अगली सुभा
20:52ये लीजिये मैम, आप सब के लिए आम
20:54हाँ, यहीं रख दो
20:56क्या आम? ममी जी इतने सारे आम, मुझे आम बहुत पसंद है
21:00किर्थी सारा नाश्टा छोड़ कर सबसे पहले बड़े चाव से आम खाती है
21:04हरे हरे बस करो, अब गुठली भी खाओगी क्या?
21:09वैसे, तुम्हें इतना जादा आम पसंद है क्या?
21:12एक तुम्हारी जिठानी है जिसे आम नहीं पसंद है
21:14और एक तुम हो आम की दिवानी हो
21:17मुझे बचपन से ही आम बहुत पसंद है
21:20आमों को देखकर मैं खुद करूप नहीं पाती
21:22बाइदवी, सौरी
21:24आरे नहीं बहु सौरी क्यूं सबकी अपनी पसंद होती है
21:28अब तुझे पहले आम खाना है या नाष्टा करना है
21:31वो तेरा डिसिजन है
21:32चलो अब सब नाष्टा शुरू करो
21:34कौशलिया की बाद सुनकर केरती बहुत खुश होती है
21:36और सबी नाष्टा करते हैं फिर शाम को
21:38जा कीरती बहु सरा गेट खोलते तेरे ससौर जी आये होंगे
21:42जी ठीक है
21:43फिर इतना कहकर केरती तुरन दर्वाजा खोलती है
21:46तो वो हैरान रह जाती है
21:47क्योंकि मनीश अपने हाथ में दो-दो थैलियां लेकर खड़ा था
22:06आम लेकर आया हूँ बहु
22:07यह सुनकर कीरती बहुत ज्यादा खोश हो जाती है
22:10और तभी कोशलिया अपने हाथों से आम काटकर कीरती को खिलाती है
22:14माई के में मुझे बरतन दोने से फुरसत नहीं मिलती थी
22:17और आज मम्मी जी के हाथ से आम खा रही हूँ
22:19क्या हुआ बहु कहां खो गई
22:21ममी जी भगवान करे आप जैसी सास और ऐसा ससुराल सब को मिले
22:25इतना कहकर कीरती कोशलिया को गले लगा लेती है
22:28अब इसी तरह दिन बीचते हैं और फिर एक दिन रात को
22:38कीरती घबरा कर जली जली सारे बरतन दोने लगती है
22:41जिसकी वज़ा से उसके हाथों से खून भी निकलने लगता है
22:44आह खुन नहीं बचे बचे खुन से बहुत डर लगता है
22:47तेरे गंदे खुन की वचे से सारे बरतन फिर से गंदे हो गए
22:51अब इन सारे बरतनों को फिर से धो और तुझे खुन से डर लगता है
22:54रुक रुक तेरा डर अभी निकालती हूँ
23:01मिनाक्षी केर्थि के ऊपर खौलता हुआ पानी फेगती है और तभी केर्थि चीक कर विस्थर से उठती है
23:05क्या हुआ केर्थि तुम ठीक तो हो सुबब सोब कोई बुरा सपना लेकर कैसा
23:10आओ आओ बैठो मेरे पास
23:12क्या मतलब वो एक सपना था
23:15अब तो चाची मेरे सपने में भी आकर मुझसे बर्दन धुलबा रही है
23:18तबी वैभब केर्थी को भी इस्तर पर बिठाता और उसका हाथ लेकर कहता है
23:22हरे केर्थी सच में तुम मेरे लिए बहुत ज़्यादा लगी हो
23:25मैं तुम से बहुत प्यार करता हूँ
23:28मैं भी आप से बहुत प्यार करती हूँ
23:31आपकी वज़े से ही मुझे खुश रहने और अपनी जिंदकी खल कर जीने की आज़ादी मिली है
23:46क्या ये सब कुछ मेरे लिए है
23:49हरे अब तुम ही मेरी पद्नी हो तो तुमारे लिए ही होगा ना
23:53थांक्यू थांक्यू थांक्यू सो मच
23:55लिकिन सच कहूं तुम मेरे लिए तुमारा प्यार इंपोर्टन्ट है
24:00ये महंगे गिफ्ट्स नहीं
24:02इस तरह कीर्ती और वैवब के बीच भी प्यार बढ़ने लगता है
24:05दुनों एक दूसरी के साथ समय विताते हैं
24:06और कीर्ती अपने माईके के ट्रॉमा से बाहर निकल कर
24:09ससुलाल की खुशियों में खुश रहने लगती है
24:11फिर एक दिन
24:31सभी की बाते सुनकर कीर्ती थोड़ा परिशान होकर कमरे में आती है
24:35और तयार होने लगती है
24:47कीर्ती सोच्टे सोच्टे तयार होती है
24:49और वैभब कीर्ती को ले जाकर उसके माईके छोड़ देता है
24:52ये देखिये आगई महरानी जी अपना 36 किलो का गहना पहन कर
24:57चाची वो
24:58बंदकर अपना मू
24:59और ये अपने तेवर साथ लेकर अपने ससुराल तकी रखना
25:02ये तेरा माईका है यहां तुझे बरतन ही धोने
25:04चल जा किचन में जितने बरतन रखे हैं सब धोकर साफ कर दे
25:07हाँ हाँ जाती हूँ
25:10कीर्ती घबराते हुए किचन में जाती है और अपने माईके के सारी बरतन धोने लगती है
25:14और तबी वहाँ एक नई बर्तनों का धेर लेकर मीनाक्षी आती है
25:29कीरती घबराकर डरते हुए सारे बर्तन साफ करती है
25:32और एक घंटे बाद अपनी मा से मिलने सैकंड फ्लोर के कमरे में जाती है
25:35आरे कीरती बेटी तुँ आ गई सच बताऊं तो तेरी कमी मुझे बहुत खली
25:40क्या हुआ मा सब ठीक तो है न बेटी का आश मैं तेरी बात बहुत पहले समझ ली होती
25:47बेटा बेटी में फर्क करना बंद कर देती तो शायद आज मेरी ये हालत ना होती
25:52मैंने तो पहली आपको कहा था लेकिन आपने मेरी सुनी कहा वैसे अप क्या हुआ जिसकी वज़े से आपकी आँखे
25:58कुल गई
25:59तेरी चाची है न उनके बड़े बेटे ने एक लड़की के साथ भाग कर सारे जेवरात लेकर उन्हें छोड़ दिया
26:05सच कहूं बेटी तो मुझे ऐसा लगा बेटा हो या बेटी होते दोनों बराबर ही है
26:11काश मा आपने ये बात पहले समझ ली होती तो शायद आज हम दोनों को इतना सब कुछ सहन ना
26:16करना पड़ता
26:17खैर अब बहुत देर हो चुकी है
26:19इसी तरह कीरती अपने माईके में तो रहती है लेकिन माईके का प्यार नहीं पाती और अपनी मां से नाराज
26:24रहती है
26:25लगातार बिना किसी से कुछ कहे वोही दर्द सहती है और दिन रात बरतन दोती है
26:29फिर कुछ दिनों बाद उसके लोटने कम वक्त आ जाता है और उसके सस्तुराल वाले उसे लेने आते है
26:34अरे हाप लोग इस तरह बैटे क्यों हैं चाहे तो बीजे कम से कम
26:38जी जी है सब तो होता रहेगा आज पहले हमारी बहु को तो बलाईए
26:42इतने दिन हो गए है उसके बिना तो हमारा घर भी अब सूना सूना लगने लगा है
26:46हाँ क्यों नहीं अब भी बलाता हूँ
26:49तुरंत वीरेंटर कीर्टी को बलाता है कीर्टी साड़ी पहने सजी धही आकर सोफे पर बैठती है
26:55हरे कितने दिन हो गए थे हमारी बहु को देखे, अब जाकर सास में सास आई है
27:00सच में कीर्टी तुम्हारी बिना तो पूरा घा, सूना सूना हो गया था
27:04हाँ हाँ, अब देवरानी जी के बिना, देवर जी का दिल कैसे लगेगा
27:08सभी हसी मजाग करते हुए आपस में बाते करते हैं, तब ही मिनाक्षी इशारे से कीर्टी को किछन में बुलाती
27:14है
27:14अपने ससुराल वालों के सामने जादा महान बढने की जरूरत नहीं है, शान्ती से यहां जितने बरतन रखे धोकर ही
27:20जाना समझी
27:22मिनाक्षी की बाद सुनकर कीर्टी बरतन धोने लगती है, तब ही वहाँ नाश्टे की प्लेट रखने कोशल्या आती है
27:42इतना कहकर कोशल्या गुसे में कीर्टी को हटा कर खुद ही बरतन धोने लगती है, जिसे देखकर पूरा परिवार किचिन
27:47में खटा हो जाता है
27:48अरे समधन जी आप ये क्या कर रही हैं दीजे मैं कर देती हूँ
27:52कोई जरूरत नहीं है इसकी जुमा अपनी बेटी के लिए खड़ी ना हो सकी
27:55वो मेरी मदद क्या करेगी
27:58आपको ये नाटक करने की जरूरत नहीं है
28:00अगर पैसे बचाने के लिए हम इससे बरतन धुलवा भी लेतें तो उससे आपको क्या
28:04क्योंकि अब ये हमारे घर की बहु है
28:06और पैसे बचाने के चकर में क्या आप इसकी जान ले लेंगे
28:09हाथों की हालत देखिए आपने इसकी
28:28कीरती पहली बार खुद के लिए स्टैंड लेती है और अपनी सास का हाथ पकड़ कर घर से बाहर जाने
28:32लगती है
28:50कीरती के जाने का एसास सभी को थोड़ा होने लगता है वहीं कीरती अपने ससराल में खुशी खुशी रहने लगती
29:00है
29:00तो दोस्तो क्या लगता है आपको क्या एक लड़की को सिर्फ घर की चार दीवारों के बीच में बरतन धोने
29:05और घर के काम करने के अलावा अपनी जिन्द की खुलकर जीने का हग है या नहीं
29:10अपनी राय हमें कॉमेंट बॉक्स में जरूर बताए
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