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00:00इंसान को पता भी निलगेगा कि हुआ क्या, मेरे साथ हुआ क्या, अचानक चलते जलते बस गिर जाएगा
00:05भले ही फिर उसको तुम पीने के लिए खुद सारा पानी दे रखा है, भले ही वो पहलवान है, भले
00:10ही वो च्छाओं में बाठा हुआ है, वो मरेगा ही मरेगा
00:12और जब मैं इंसान की बात कर रहा हुँ, तो उसमें अर्बन प्रिविलेश्ट मिडिल क्लास भी आती है, या वो
00:19इंसान नहीं है, कुछ और है
00:20जो अर्बन मिडिल क्लास की हो है, वो आज भी सोचते है कि क्लाइमिट चींज एक डूल का इशु है,
00:24में भी किसानों का, गाहों का, या दूल दलास के जगों का इशु है
00:28अक्टूबर, नमेंबर, दिसमबर, जन्वरी, फर्वरी हवा में जहर है, अप्रिल आते ही इतना करम हो गया कि आप आप नहीं
00:35कर सकते हैं, और चुलाई आते ही पानी इतना भर गया कि आप आप नहीं कर सकते हैं, तो बताओ
00:39वाक करो के कब, जो मिडिल क्लास एसी चला करके
00:47आप जो आपको तापमान बताऊंगा आप उसे चौको के इतना है वो तापमान?
00:59सिर्फ एक है जो रिलेटिवली कूल कूल है और दूसरा है जो बाहर उबल रहा है उसकी खाल में पोले
01:08उठ रहे हैं
01:09काइमेट चेंज सर्फ टेंपरेचर नहीं बढ़ाता वो बारिच भी बढ़ाता है जब होती है बारिश तो जबरदस होती है वह
01:17ऐसे नहीं जैसे कि बस पोहार है ऐसा होता है जैसे कि पानी की दीवार खड़ी हो गई है जमीर
01:22और आसमान के बीच में गलेशियर पिगलेंगे �
01:25तो पहले तो कुछ साल तक नदियों में पानी बढ़ेगा और बार आएगी और उसके बाद कुछ नहीं वो नदी
01:32ही शेष नहीं रह जाएगी आपको दिखाई नहीं दे रहाएगी क्राइम कितना बढ़ेगा आपको दिखाई नहीं दे रहाएगी वो जिन्दा
01:38रहने के लि
01:53नमस्ते अच्छर जी, मेरा नम सिधार्त है, मैं क्लाइमिट चींज और सस्टेनिबिटी स्पेस मेट कमपनी में कार्ने रतू
02:02मेरा जो इंटराक्शन होते हैं, उन चुनिंदा लोगों को छोड़ी जो इस स्पेस में है, तो जो अर्बन मिल्ल क्लास
02:07लोग है, उनसे बात करके उनका जो परसेप्शन पता चलता है, कि वो आज भी सोचते हैं कि क्लाइमिट चेंज
02:14एक डूल का इशू है, में भी किसानों का
02:16गाउ का या दूल दरास के जगहों का इशू है, उनकी लाइफ में जो इस उनको मिले हुए हैं, जैसे
02:22पानी की समस्या नहीं है, एसी में बैठे हैं, सुबह हैं, तो घर मेर, ऑफिस में जा रहे हैं, तो
02:27कैब में, तो क्लाइमिट चेंज चूता हुआ भी उनको अचूता क�
02:44और वो हिट होंगे, क्योंकि अभी तो चर ऐसा नहीं हो रहा है, अर्बन मिल्ल क्लास हम जेक्स एक गुम्रा
02:48सिचूएशन में चल रहे हैं सर, नहीं ऐसा नहीं है कि आप अर्बन हैं या लोवर क्लास नहीं हैं, आप
02:57मिडल क्लास हैं तो इसलिए आप बच जाएंगे, ऐसा �
02:59भी नहीं होने वाला, और सवाल का अधार सही है, जब क्लाइमेट क्रैसिस की बात होती है, तो उसमें जो
03:09ज्यादा उल्लेख आता है, वो आता है किसानों का, वो आता है मजदूरों का, विशेशकर जो जो लैंडलेस लेबरर्स होते
03:22हैं, उनकी बात आती है, उसमें बात आत
03:28होते हैं उनकी बात आजाती है या वो लोग जो होमलेस होते हैं ठीक है उनको माइग्रेशन करना पड़ेगा इसकी
03:40बात आजाती है तो ये बिलकुल हो सकता है कि जो लोग थोड़े प्रिविलेज्ट हैं जिनको जिन्दगी में जैसा आपने
03:50कहा
03:51conveniences मिली हुई हैं उनको ये लगे कि हाँ climate change हाँ होता तो है it is real but it
03:57won't impact me that much
03:59the crisis is for somebody else crisis है मेरे लिए नहीं किसके लिए गरीब मजदूर किसान के लिए ठेले वाले
04:05के लिए रिक्षे वाले के लिए मेरे लिए नहीं है ऐसा कुछ भी नहीं है
04:09इसा कुछ नहीं है प्राइसिस सबके लिए है जो अर्बन ड्वेलर है जो जो शेहरी बाशिंदा है उस पर भी
04:18जबरदस्त चोट पड़ रही है और आगे और जोर की पड़ने वाली है
04:26आप क्लाइमेट चेंज की बाद इसलिए कर रहे हो क्योंकि अभी मई महीने का अंत चल रहा है और गर्मी
04:32बहुत है
04:36और आप यहाँ पर हो दिल्ली में, NCR में गर्मी लग रही है तो आजकल चारो तरफ क्लाइमेट की बात
04:42हो रही है
04:43लेकिन क्लाइमेट की सबसे बड़ी जो आपको मार पढ़नी है वो मई में नहीं पढ़नी है वो पढ़नी है जून
04:52जुलाई में
04:58जो हीट वेव्ज होती है, हीट स्ट्रोक्स होते है वो बाहरी तापमान मात्र पर उतना निरभर नहीं करते हैं
05:13वो निर्भर करते हैं तापमान पर और हुमिडिटी पर
05:19तो अभी हालत और खराब होगी
05:23और ये जो प्रिविलेज़्ड मिडिल क्लास अपर मिडिल क्लास है इनके लिए भी खराब होगी
05:29ये कब तक अपने अपने अपने प्राइवेट केबिन्स में बैठे रहेंगे
05:36ये कब तक आइटिफिशियल क्लाइमेट को खरीद पाएंगे
05:42ये सोचते हैं कि हम प्राइवेटली अपने लिए क्लाइमेट खरीद सकते हैं
05:46मेरे कमरे में तो 23 डिगरी है तो बाहर क्लाइमेट कुछ भी होगा
05:50मेरा तो क्लाइमेट है जो मैंने खरीद रखा है
05:52ये तुम कब तक कर लोगे
05:55ये बहुत लंबे समय तक नहीं कर सकते
05:57कमरे से बहार तो निकलना पड़ेगा न
06:01आपको पता
06:02एक टेंपरिचर ऐसा होता है
06:06जिसके बाद अगर आप पेड़ की छाओं में भी बैठे हो
06:11और आपको दुनिया भर का भी पानी उपलब्ध है
06:15तो भी आप मर जाओगे
06:18हम कितने टेंपरिचर की बात कर रहे हैं
06:22आप पेड़ की छाओं में भी बैठे हो
06:25और पानी भी आपको मिला हुआ है
06:27और आप स्वस्थ हो, आप एक healthy young individual हो
06:30आप तो भी मर जाओगे
06:32आप बच ही नहीं सकते
06:33क्योंकि आपका शरीर डिजाइन भी नहीं है
06:35उतना टेंपरिचर जेलने के लिए
06:36मैं जो आपको तापमान बताऊँगा आप उससे चौक होगे
06:41कितना है वो तापमान
06:44सिर्फ 35 डिगरी
06:47पर हम बात कर रहे हैं
06:48wet bulb temperature की
06:51wet bulb temperature जो होता है न
07:01होता है
07:03बाहर 45 डिगरी हो
07:05पर humidity
07:0710-15 परसेंटी हो आप बच जाओगे
07:09क्यों?
07:11क्योंकि पसीना बहेगा
07:14पसीना बहेगा
07:15बाहर हवा में
07:17उतनी नमी नहीं है न हुमिडिटी कम है
07:19तो पसीना निकलेगा और जब बाहर हवा में
07:22हुमिडिटी कम है तो पसीना फिर भाब भी बन जाएगा
07:24इवैपुरेट हो जाएगा इवैपुरेशन से कूलिंग हो जाएगा
07:26आप बच जाओगे
07:31लेकिन अगर
07:32तापमान सिर्फ 38 डिगरी हो
07:34और 38 डिगरी तो बहुत कॉमन है
07:3638 डिगरी ते कहीं जादा
07:38तो आज भी था
07:39और हुमिडिटी 50 प्रतिशत पार कर गई हो
07:44तो आपका बचना मुश्किल हो जाएगा
07:46क्योंकि एवैपुरेशन नहीं होगा
07:51एवैपुरेशन नहीं होगा
07:52कूलिंग नहीं होगी और आपके
07:54आपके सिस्टम के पास कोई तरीका
07:56ही नहीं है खुद को ठंडा रख पानेगा
07:59जो हुमिन बॉडी है
08:00यह अपने आपको सिर्फ और सिर्फ स्वेटिंग से
08:02ठंडा रख सकती है
08:04और जो हमारा मेटबॉलिजम होता है
08:06वो लगातार हीट जनरेट करता है
08:07आप एक ऐसी मशीन हो
08:10जो इनफीशियंट है
08:11तो आप जब खाना खाते हो ना
08:13उसका मेटबॉलिजम होता है
08:14तो वो जो मेटबॉलिजम है
08:16वो एक्जो थर्मल है
08:19तो वो सिर्फ एनरजी नहीं जनरेट कर रहा
08:21जिससे फिर आप काम करते हो
08:22उससे हीट भी जनरेट हो रही है
08:23heat लगातार और हमारे पास
08:26कोई तरीका नहीं है उस heat को
08:27dissipate करने का यही तरीका है क्या
08:31sweating
08:33wet bulb temperature कहता है कि
08:36thermometer है उसमें ऐसे कपड़ा
08:38बांदो गीला और हवा
08:40चलती रहे ताकि
08:42पानी का वो जो कपड़ा है उसके गीले
08:44पानी का evaporation होता रहे फिर देखते
08:46है कि वो temperature कितना दिखाता है
08:48thermometer उसे wet bulb temperature कहते है
08:50वो 35 degree हो गया
08:52तो इंसान बच नहीं सकता
08:54भले ही फिर उसको तुम पीने के लिए
08:56खूब सारा पानी दे रखा है भले ही वो पहलवान है
08:58भले ही वो चाओं में बैठा हुआ है
09:00वो तब भी नहीं बच सकता
09:03वो मरेगा ही मरेगा
09:05अब यह आधी खबर थी पूरी खबर सुनिये
09:08दिल्ली में 32-33 degree पहले भी हो चुका है
09:1532-33 degree हो चुका है
09:20इंसान को पता भी नहीं लगेगा कि हुआ क्या
09:23मेरे साथ हुआ क्या
09:25अचानक चलते चलते बस गिर जाएगा
09:28और जब मैं इंसान की बात कर रहा हूँ
09:30तो उसमें अर्बन प्रिविलेश्ट मिडिल क्लास भी आती है
09:34या वो इंसान नहीं है कुछ और है
09:36वो भी आते हैं
09:41घर से क्या बाहर निकलोगे नहीं
09:43कितना एसी चला लोगे
09:44और सारे एसी जब एक साथ खीच रहे होंगे ग्रिड को
09:50तो ग्रिड कब तक चल जाएगी
09:53ग्रिड तो गिरेगी जब ग्रिड गिरेगी तब तो बाहर निकलोगे
09:56तब बच लोगे क्या
10:00तब बच लोगे
10:08हमारे सामने जो आम तोर पर टेंपरेचर आता है न
10:12वो होता है ड्राई बल्ब टेंपरेचर
10:14और वो बहुत काम का नहीं होता
10:16उसे बस आपको ही बताते जाता है कि साब आज 45 डिगरी था
10:19उससे कोई फर्क नहीं पड़ता
10:21उससे ज्यादा
10:23महत्वपूर्ण
10:24सिग्निफिकेंट होता है
10:25वो जिसमें लिखा रहता है
10:27फील्स लाइक पढ़ाओगा आपने कहीं पर
10:30फील्स लाइक
10:31वो फील्स लाइक बहतर है उसमें
10:34ये भी शामिल होता है कि हवा कितनी चल रही है
10:36थोड़ा उसमें हुमिडिटी को भी ले लेते हैं
10:39कई चीज़ें उसमें
10:40वो फील्स लाइक ड्राइ बल्ब से बहतर होता है
10:44लेकिन जो सबसे
10:47जबरदस्थ पॉइंटर है
10:49the most significant of all
10:50वो फील्स लाइक भी नहीं है
10:52वो है वेट बल्ब टेंपरिचर
10:55लेकिन आम तोर पर
10:57मीडिया वगेरा में
10:58वेट बल्ब टेंपरिचर की बात करी नहीं जाती है
11:00जबकि वेट बल्ब टेंपरिचर तया करेगा
11:02कि हम जीएंगे कि मरेंगे
11:06वो बताता है
11:10हमारे दो-तीन ओर्गंस हैं
11:12जो टेंपरिचर को ले करके
11:13सुपर सेंसिटिव होते हैं
11:15और उनका
11:16अल्मोस्ट सदेन शटडाउन होता है
11:19टेंपरिचर राइज होने पर
11:21जिनमें सबसे प्राइमरी है ब्रेन
11:25क्योंकि वहाँ पर
11:26सबसे डेलिकेट वेसल्स होती है
11:30वहाँ टेंपरिचर राइज बरदाश्ती नहीं होती
11:34आपका हाथ गरम हो जाए
11:35आपका पाओ गरम हो जाए
11:36आपका चल जाएगा
11:36बाकी हिस्सों में कुछ गरमा गरमी हो जाए
11:38वो भी चल जाएगा
11:41ये गरम हो गया
11:44सड़न शटडाउन होता है सिस्टम का
11:46आप चलते अलते ऐसे गर जाओगे
11:51ये के middle class नहीं होना है क्या
11:54मैं humidity की बात क्यों कर रहा हूँ
11:56मैं dry bulb की बात क्यों नहीं कर रहा हूँ
11:58मैं wet bulb की बात क्यों कर रहा हूँ
12:00क्योंकि climate change का मतलब होता है
12:02atmosphere में energy का increase होना
12:07और वो जब energy increase होगी
12:09तो उसके साथ precipitation का pattern
12:12जबरदस रूप से बदलता है
12:16ये जो आप आए दिन शहरों में पढ़ते रहते हो
12:19बाढ़ आ गई ज्यादा बारिश हो रही है
12:21वो और क्या है
12:23वो जो excess heat है atmosphere में
12:27वही excess precipitation कर रही है
12:33बंबई में क्या पहले इतनी flooding होती थी नहीं होती थी
12:37वहां का जो पूरा drainage system है
12:39वो बनाया गया है कि अधिकतम घंटे में 25 mm बारिश हो जाए
12:45तो चलेगा
12:48वहां पर अब बारिश हो रही है
12:50100 mm, 500 mm तो drainage system कैसे handle कर लेगा
12:56और दिल्ली का उतना भी नहीं बनाया गया है
12:58दिल्ली का 1976 का एक प्लान है उसके हिसाब से बनाया गया था
13:01वो है कि पूरे दिन में अगर 75 या 100 mm बारिश हो जाए
13:06तो दिल्ली का drainage system समाल लेगा
13:08बारिश हो रही है उससे दूने से भी ज्यादा
13:13climate change सिर्फ temperature नहीं बढ़ाता वो बारिश भी बढ़ाता है
13:21और वो बारिश का अभाव भी बढ़ाता है जब होती है बारिश तो जबरदस्त होती है
13:30वो ऐसे नहीं जैसे कि बस फुहार है ऐसा होता जैसे कि पानी की दीवार खड़ी हो गई है
13:35जमीन और आस्मान के बीच में, ऐसे होती है बारिश
13:42और जब वैसे बारिश होती है
13:44तो वेट बल्ब टेंपरेचर ऐसे भागता है
13:47आस्मान की ओर
13:51और जब वैसे बारिश होती है
13:52तो पानी भरता है, जल भराव होता है
13:55और फिर उससे डेंगू, चिकन गुनिया
13:57ये सब खड़े होते हैं
14:01मिडल क्लास को डेंगू नहीं होता क्या
14:06वैसे उसको डेंगी बोलते हैं
14:07वो ज्यादा एक्यूरेट है
14:11या मिडल क्लास को नहीं काटते हो
14:22कुछ आ रही है ये बात समझ में
14:23और जल भराओ का ज्यादा बड़ा मनजर
14:28हमें मेट्रोज में ही देखने को मिलता है
14:32गाँ वगेरा में ड्रेन है जोतनी बड़ी नहीं समस्या होती
14:34जोतनी बड़ी उदारन के लिए मुंबई या बैंगलोर में होती है
14:39आपको मालूम है
14:42मुंबई में ये शुरू हो चुका है
14:45कि प्रॉपरिटी प्राइसेज अब इस बात से तै हो रहे हैं
14:49कि वो जगह अबव फ्लड लाइन है या बिलो फ्लड लाइन है
14:55तो जब विग्यापित किया आता है कि इसी जगह को तो साथ में ये भी लिख देते हैं धीरे से
14:59कि अबव फ्लड लाइन उससे उसके रेट बढ़ जाते हैं कि यहाँ पर पानी नहीं भरेगा
15:03ये अपता है कि फ्लड तो आनी है या नहीं है फिर से अब मौनसून में
15:07तो जो बिलो फ्लड लाइन वाले हैं उनको और खासकर अगर आपका ग्राउंड फ्लोर पर है अपार्टमेंट हो गहरा तो
15:14उसकी कीमतें एकदम गिर गई है कोई नहीं खरीदेगा कोई सबको पता है कि इसमें हर साल पानी घुजएगा
15:20अब यह जो अपार्टमेंट है यह लैंडलेस लेवरर्स खरीदते हैं क्या है मिडल क्लास के हैं पूछ रहा हूँ तो
15:27मिडल क्लास को क्यों लग रहा है कि उन पर फर्क नहीं पढ़ना है क्यों लग रहा है
15:34QI का और climate change का बहुत सीधा रिष्टा है यह दो अलग-अलग समस्याई नहीं होती है
15:42जब आप QI के बात करते हो वो भी एक तरह का pollution है वहाँ dust होती है और जब
15:47आप climate change की बात करते हो वो भी एक तरह का pollution होँआ का combo dioxide होती है
15:50और ये दोनों तरह के
15:53अट्मोस्फेरिक पॉल्यूशन अंतरसंबंधित हैं
15:55इंटर्रिलेटेड हैं
16:01नवेंबर के मध्य के बाद के दिनों में
16:04ये हर साल
16:06निश्यत हो जाना है
16:08कि स्कूल बंद होंगे ही होंगे
16:10एजुकेशन डिसरप्ट होगी ही होगी
16:13क्योंकि AQI 500 पार करेगा
16:15करेगा ही करेगा
16:18मिडल क्लास के बच्चे स्कूल नहीं जाते
16:19या मिडल क्लास को लग रहा है
16:21क्लाइमिट ट्रैसिस बस गरीब हों के लिए
16:26मिडल क्लास टहलने नहीं जाती नीचे
16:27तुम कैसे टहलने जाओगे
16:29अच्छे चलो गिनना शुरू करते हैं
16:30कब टहलोगे
16:33अक्टूबर, नवेंबर, दिसमबर, जनवरी, फरवरी
16:35हवा में जहर है
16:36AQI इतना बुरा है तुम टहल नहीं सकते
16:38तुम टहलने जाओगे
16:40खास होगे लगे अग गले में मेटल घुसा हुआ है
16:43कितनों को आशास होते हैं
16:44गले में मेटलिक सा स्वाद आ रहा हूँ
16:46कितनों को होता है
16:46ऐसे लिए गले मेटल घुसा हुआ
16:48कर लो इवनिंग वॉक, मॉर्निंग वॉक कैसे कर लोगे
16:51ठीक है
16:53अप्रल आते हैं इतना गर्म हो गया
16:55कि अब आप वॉक नहीं कर सकते
16:58और जुलाई आते ही पानी इतना भर गया
17:01कि अब आप वॉक नहीं कर सकते
17:03तो बताओ वॉक करोगे कब
17:06वॉक करोगे
17:08या मिडल क्लास एसी चला करके भीतर
17:10ट्रेड मिल पर वॉक करेगी
17:15हम किस मुगालते में हैं
17:20अब एसी के लिए पावर प्लांट भी अपनी लगाओगे अपने घर में
17:25यह गैस के चूले से एसी चलाओगे
17:29वो भी नहीं होगा इरान वहां बैठा हुआ है
17:33अगरा गैस भी नहीं चलने दूँगा तुम
17:36रखे रहा अपने अर्मान
17:44क्राइम जबरदस तरीके से
17:45देखो एक बात बताओ
17:46जो रह रहा है वो टीन की छट के नीचे
17:50ठीक है
17:51जिसका एक्सपीरियेंस टेंपरेचर
17:5358 डिगरी हो रहा है
17:56वो विक्षिप्त नहीं हो जाएगा
17:58फिर वो कुछ भी नहीं करेगा क्या
18:00आप इसमें एक जबरदस
18:02सोशल टर्बुलेंस नहीं देख पा रहे हो क्या
18:08पूछ रहा हो
18:12आपकी कॉलोनी आपकी सोसाइटी के बाहर
18:14कोई गार्ड खड़ा होता है
18:15वहाँ कोई माली काम करता है
18:17आप बुलाते हो किसी को घर में
18:19हाउसल्ब की तरह है
18:20मेड की तरह है करते हो यह सब
18:23और वो जहां रह रहे हैं
18:25वहाँ पर
18:27दिन में 15 घंटे
18:28बिजली की कटौती हो रही है
18:31और टीन की छट है
18:32भीतर ग्रीन हाउस इफेक्ट हो रहा है और वो उबल रहे हैं
18:36आपको दिखाई नहीं दे रहा है कि वो जिन्दा रहने के लिए आप कुछ भी करेगा
18:43और आप उसे अब कितना दोश दे सकते हो
18:46कितना दोश दोगे बोलो न
18:51तापमान इतना बढ़ रहा है कि जान बचाने के लिए
18:54हमारे महानगरों में
18:56कीडे मकॉडे घरों के अंदर भाग रहे हैं
18:58कोई घरों के अंदर एसी है
18:59साप घरों के अंदर भाग रहे हैं
19:01कोई घरों के अंदर ठंडक है
19:06बात समझ रहे हो न
19:07जब आप ये दो केटेगरीज खड़ी कर दोगे
19:10have's और have not की
19:11एक है जो relatively
19:13cool cool है और दूसरा है
19:16जो बाहर उबल रहा है
19:19उसकी खाल में
19:20फफोले उठ रहे हैं
19:21तो क्या crime नहीं बढ़ेगा
19:25माली कब आके काम करें
19:26बताओ
19:27माली को तो दिन में काम करना होता है दिन में कर नहीं सकता
19:29उसकी आजीविका का क्या होगा
19:32construction workers कब काम करेंगे
19:34बताओ
19:35उनकी आजीविका का क्या होगा
19:38और यहां हम गरीबों की बात नहीं कर रहें
19:40अब गरीबों के साथ तुम यह सब कुछ करोगे
19:41तो उसका असर फिर अमीरों पर भी पड़ेगा
19:46जब तुम गरीबों के साथ
19:48यह होने दोगे
19:49तो वो अमीरों को छोड़ने नहीं वाले
19:51क्योंकि दिख तो उनको भी रहा है
19:53कि उनका यह हाल करा किसने है
19:59अभी पिछले साल ही हुआ था
20:01यहां जब
20:03ग्रिटर नुडा के आसपास के ही गाउं थे
20:05वहां पर लगातार पावर कट
20:07पावर कट पावर कट
20:10तो
20:11उनके मन में कहीं से यह बात आ गई होई
20:13कि अमीर लोग जो
20:14इतना AC चलाते हैं
20:16इसी के कारण गर्मी बढ़ी हुई है और इनी AC के कारण
20:19गरीबों को फिर विजली नहीं मिलती है
20:21और AC पीछे से गर्मी फेकता है
20:23तो उसके वजह से भी ये
20:25माननेता बनती है Chan
20:26जो पीछे से गर्मी फेक राए इसी ने
20:28climate change करा है ये माननेता सच नहीं है
20:31पर हा एसी भी जो गर्मी फेकता है
20:33उससे urban heat spots तो जरूर
20:34create होते हैं वो बाठीक है
20:37तो मालों पिछले साल क्या हुआ था
20:40बड़ी बड़ी गाडियां
20:41वहां हाईवेज पर और एक्स्प्रेस वेपर रोक करके
20:45ग्रामीडों ने उनकी ठुकाई करी थी अच्छे से
20:48अपना गुस्ता निकाला था
20:49गाडिया तोड़ी थी
20:51और जितनी बड़ी गाड़ी उसको और जादा रोका और जादा तोड़ा
20:56भीतर भाव क्या था कि यही गाड़ी है
21:00जिसमें वो अमीर बैठा हुआ है जो सारी बिजली खुद खा जाता है
21:03और यही वो गाड़ी है जितनी बड़ी गाड़ी होती है उसका इसी भी उतना बड़ा होता है यही वो गाड़ी
21:07है जो जब चलती है तो इतनी गर्मी फेकती है कि बगल वाला बगल में अगर एक बाइक वाला खड़ा
21:13हो जाए ट्राफिक सिगनल पर तो बाइक वाले को गर्मी
21:16महसूस होती है
21:17तो उन्हों ने रोक रोक रोक के
21:19गाड़िया फूरनी शुरू कर दी
21:21आपको इसमें दिखाई नहीं दे रहा है कि
21:23कितना disorder और chaos फैलने वाला है
21:26social level पर भी
21:27और इस disorder से middle class बचलेगी क्या
21:31उन्हों जाने कितने और फैल हो सकते हैं
21:34आपके पूरे दिन की कोई हरकत ऐसी नहीं है
21:37जो climate crisis से अच्छूती रह जानी है
21:41लेकिन हम दिवास उपन में जी रहे हैं
21:43हमने अपने आपको बता रखा है कि
21:45ये तो किसी और की समस्या है
21:46साब मेरी थोड़ी है
21:52भारत में आप जो
21:55quality of life enjoy करते हो
21:57उसका एक बड़ा कारण यही है
21:59कि यहाँ पर labor cheap है
22:02ठीक है ना
22:03जो लोग बाहर चले जाते हैं
22:05विदेशों में
22:06विदेशों में बहुत चीज़े हैं
22:09जिनके लुट्फ लेते हैं
22:11लेकिन एक चीज़ को miss करते हैं
22:13क्या क्या थे काम करना ले लोग नहीं मिलते
22:17भारत में बहुत चीज़े हैं
22:19जो मिडिल क्लास को बिलकुल दबा कर रखती हैं
22:22परिशान करती हैं
22:23आप्रेस करती है
22:24पर एक चीज़ा जिससे मिडल क्लास बहुत खुश रहती है
22:28डोमेस्टिक लेबर मिल जाता है असानी से
22:30धोबी
22:32माली
22:33नाई
22:35बाई
22:37अब मिल जाते हैं उसस्ते मिल जाते है
22:40जब उन पर असर पड़ेगा तो आप पर असर नहीं पड़ेगा क्या
22:45पूछ रहा हूँ
22:47क्या हालत हो जाती है
22:48जब वो काम वाली दीदी
22:50चार दिन नहीं आती है काम पर
22:52क्या हालत हो जाती है
22:56कैसे आएंगी काम पर
22:58कब आएंगी
23:01जॉगिंग हो एरा कितने लोगों को पसंद है
23:05कर लो जॉगिंग
23:06वेट बल्ब साथ लेके चलना
23:09जॉगिंग में
23:10कहां करोगे जॉगिंग
23:17आउटडोर स्पोर्ट्स कितनों को पसंद है
23:21कैसे खेलोगे टेनिस
23:22कभी गर्मी बहुत ज़्यादा है
23:24और कभी बारिश हो गई दोनों ही हालत में
23:25तुम्हारा कोट तो खराब हो गया
23:29किनके बच्चे जाते हैं
23:30कुछ भी सीखने के लिए
23:31बैडमिंटन, टेनेस या कुछ भी
23:32कब भेजोगे
23:40मेरे ही कोचे हो कहते हैं
23:41अब सवय साढ़े-पांच का बैच लगाने की नौबत आ रही है
23:44इतनी गर्मी रहती है
23:48बच्चे बिलकुल ऐसे
23:49साढ़े-छे-साथ बच्चते ही बच्चे ऐसे होनों शुरू हो जाते हैं
23:54क्योंकि एक तो एट्मोस्फरीक हीट
23:55दूसरे दौड़ भाग कर रहे हो आप कोर्ट पर जो कुछ भी खेल रहे हो उसमें
24:00और कुतन कितना उपर ले जाओगे
24:02संराइज भी और जल्दी कर दोगे क्या
24:10मिडिल क्लास सोच रही है तो कुछ नहीं
24:12मेरे पास AC है
24:13मेरा कुछ नहीं हो सकता मेरे पास तो
24:16AC है
24:18जरूर
24:22AC की सर्विसिंग कौन करेगा
24:25चला लो AC
24:34आप और विचार करेंगे आपको खुदी और उदारण मिल जाएंगे भी
24:37मैं इसमें क्या ऐसा बता रहा हूँ
24:38एजुकेशन प्रहवित होने जा रहे है
24:40ये ओफिस कम्यूट प्रहवित होने जा रहा है
24:43कैसे चले जाओगे ओफिस पानी तो भरा हुआ है
24:45कितने लोग हैं जो बरसातों में घंटों घंटों
24:48जल भराओ की जगहों पर फसे रहे हैं
24:51मैं भी फसा रहा हूँ
24:53अब क्या कर लोगे आप
24:55आप बिजनेस ओनर हो सकते हो
24:57या आप एंप्लॉई हो सकते हो
24:58आप क्या जवाब दोगे किसी को
24:59कुछ नहीं करना एक फोटो खीच के भेश दे नहीं है
25:02कोई आपको दोश भी नहीं दे सकता
25:07कितने लोगों को बड़ा अच्छा लगता है
25:08जल्दी से स्विगी से ब्लिंकेट से चीज़े मंगा लेना
25:13वो कैसे ले आएगा
25:15वो कैसे ले आएगा
25:17और कुछ हमारे दिल है की नहीं है
25:19अगर हमें दिखाई दे कि जो लेकर के आया है
25:21वो यहां से यहां तक पसीने से तरबतर है
25:24और इतना पसीना इतना पसीना
25:27कि उसकी जो काली टी-शिर्ट है
25:29उस पर नमक झहलकने लगा है
25:33इतना पसीना
25:34और आपको दिख रहा है कि वो अभी ग्यारा ही बजा है
25:38और ग्यारा बजने में उस सुवह से 25 डिलिवरीज कर चुका है
25:42और अभी पीक टेंपरेचर आना बाकी है
25:45और आप उसे पूछो गयों कहेगा अभी मेरे दिन की 40 डिलिवरीज और हो नहीं है
25:55मैं अभी 3-4 दिन पहले बाइक पर जा रहा था टेंइस खेलने
26:01तो जो मेरा टेंइस वियर है वो मैंने मुस्तल में ही पहन लिया
26:08आम तर वहां कोट पर जाकर उधान चेज़ करता हूँ
26:11मैंने का पहले ही पहन लेता हूँ
26:12उसके आग बाइक पर बैठा तो टांगे खुली हूई है
26:15और रात में बज रहे हैं 8-8 तांगे खुली हूई है
26:188-8 बजे भी बाइक चलाते हूए
26:20ऐसा लग रहा था टांगे जल रही है
26:30और यह सिर्फ आहट है
26:33खेल अभी आगे और होना है
26:36और सौ साल आगे नहीं होना है
26:38अगले साल और होना है
26:39उसके अगले साल और होना है
26:41इस साल के भी खेल की अभी बस शुरुआत हुई है
26:44अभी थुड़ी हमिडिटी बढ़ने दीजिए
26:45फिर देखिएगा
26:46वेट बल ब्याद रखिएगा
26:56कुछ पता नहीं चलेगा
26:57यह हो क्या रहा है
26:58लोग जाएंगे बारातों में नाच रहूंगे
27:00अचानक नाचते नाचते बस ऐसे गिर जाएंगे
27:10कुछ मायनों में
27:12हीट स्ट्रोक
27:13कार्डियक अरेस्ट से भी ज्यादा फेटल होता है
27:25और पैसे कांतर हो सकता है
27:27अमीर और गरीब में
27:28शरीर कांतर नहीं होता
27:29प्रक्रते ने फिजियोलोजी दोनों को एक सी दिये
27:33जो चीज गरीब को मारेगी वो
27:36अमीर को भी मारेगी
27:47अभी मैं जानवरों की तो बात करी नहीं रहा
27:53अभी मैं
27:54वन्ने प्रजातियों की
27:56पेड़ पौधों की
27:57नदियों की
27:58पहाडों की तो बात करी नहीं रहा
28:00मैं पिघलते हुए
28:02ग्लेशियर्स की
28:03समुद्रों की
28:03मचलियों की तो बात
28:05करी नहीं रहा
28:08मैं इस पर तो भी जाई नहीं रहा कि ये सब जब हो रहा होगा तब ये सब होने के
28:12बावजूद हम CO2 कॉंसेंट्रेशन और बढ़ा ही रहे होंगे कम नहीं कर रहे होंगे ये सब बाते तो भी मैं
28:18करी नहीं रहा
28:20ये बातें अभी करी नहीं रहा कि कैसे माना उत्ता खुद कोई धोखा दे रही है और राश्ट्र एक दूसरे
28:27को धोखा देने की प्रतिसपरधा लगा रहे हैं
28:31सबके अपने अपने नेशनल टारगेट से हैं पेरिस संधी के अंतरगत कि तुम्हें इतना कम करना है तुम्हें इतना कम
28:37करना है
28:38कोई कम नहीं कर रहा और सब एक दूसरे से कहते हैं पहले तुम कम करो ना तो हम करेंगे
28:44कम करने हैं तो छोड़ दो
28:45कार्बन एमिशन साल दर साल और बढ़ रहे हैं
28:48अभी मैं अमीरों की तो बात करी नहीं रहा
28:50जो अपना साल भर का एमिशन कोटा
28:53कोई हफते में, कोई दस दिन में, कोई बीज दिन में पूरा कर देता
28:56जितना उनको अनुमत था
28:58जितना उनको allowed था कि 365 दिन में emission करो
29:01वो 10 दिन में करके बैट जाते हैं
29:03और बागी 355 दिन वो excess emission करते हैं
29:06अब उनकी तो हम कोई बात करी नहीं रहे
29:07वो सब अलग एक कहानी है
29:12और flooding से हम समझ ली जाएगी कुछ अच्छा होगा
29:14चलो बर्खा बहार आई पानी पानी तो भर जाएगा
29:30और ये बात सिर्फ उस जलकी नहीं है
29:34जो हमें वरशा से मिलता है
29:36ये बात उस जलकी भी है जो हमें नदियों से मिलता है
29:40ग्लेशियर पिहलेंगे
29:41तो पहले तो कुछ साल तक
29:43नदियों में पानी बढ़ेगा
29:45और बार आएगी
29:46और उसके बाद कुछ नहीं
29:48वो नदी ही शेश नहीं रह जाएगी
29:52एबर आपसे कहा था मैंने
29:53कि जिन नदियों से हमें
29:55प्यार हर जिनको हम पवित्र मानते हैं
29:58जा करके उनसे मिल लो
29:59जुलो स्नान कर लो
30:01तस्वीरे ले लो वीडियो बना लो
30:02अपने ही जीवन काल में कहीं
30:05ऐसा नहो कि हम उन्हें विलुप्त होता देखें
30:07और हम कहें कि यहाँ पर
30:09कभी मेरी प्यारी नदी बहा करती थी
30:11अब यहाँ पर कुछ भी नहीं है
30:12खाली जगह है
30:12लोग उस पर चल फिर रहे हैं
30:16और ऐसा बहुत नदियों के साथ
30:19हो चुका है
30:23और हर बीते साल
30:24कुछ छोटी नदियां
30:27हमेशा के लिए
30:28मिठती जा रही है
30:32जो लोग पहाड़ों से परिचित हैं
30:34आते हैं जाते हैं
30:35उन्होंने ऐसी नदियां देखी भी होंगी
30:37और कहेंगे कि अरे चार साल पहले
30:38यहाँ तो नदी थी और कहां गई
30:39अब वहाँ पर जा करके बलेरो की पार्किंग हो रही है
30:44उस पर राफ्ट लदे हुए है
30:48यहाँ तो नदी होती थी नदी कहां गई
30:50नदी नहीं है अब अब नहीं है नदी
31:00आप इस बात पर रिलाए कर रहे हो
31:02कि आप प्राइविट क्लाइमिट के कॉंजियूमर बनोगे
31:05यही है ना उम्मीद
31:08यही है ना
31:09बाहर जो हो रहा हो उसा हो रहा होगा
31:11मैं तो अपने लिए प्राइविट क्लाइमिट कंट्रोल के बिन खरीद लूँगी
31:16नट फॉर लॉंग मैम नट फॉर लॉंग
31:25नो
31:30बारेश और गर्मी
31:31इनका सीधा संबंद उस चीज से होता है
31:34जिससे मिडिल क्लास का भी शरीर बनता है
31:36क्या अन
31:39अन
31:45अब मिडिल क्लास बहुत बड़ी रेंज होती है
31:47बहुत बड़ी रेंज होती है मिडिल क्लास
31:49मिडिल क्लास में वो भी आते हैं
31:51कि जिनका अगर आपने फूड बजट बिगाड दिया
31:55तो उनको nutritional deficiency शुरू हो जानी है
31:58Middle class माने
31:59वही नहीं होते सब की
32:01महीने में आपके पास अगर
32:025 लाग भी आ रहा है तो भी technically या middle class ही हो
32:08मेरे खाल से middle class की परिभाशा
32:09तो ये भी है महीने में अगर आप 10-15 लाग
32:11भी 20 लाग भी कमारे हो तो भी आप शायद technically
32:13middle class हो जो भी उसकी definition है
32:15दिखनी पड़ेगी एक बार
32:18पर अगर आप
32:2135 लाग पर महीने का कमारे हो तो भी आप middle class ही हो
32:26भारत में मेरे ख्याल से
32:29lower middle class
32:32महीने के शायद 15 लाग बीस हजार तक जाती है
32:35उसके नीचे फिर lower income शुरू होता है
32:42कहने का आश्या ये है
32:43कि middle class में वो लोग भी आते हैं
32:48कि जिनको
32:50खाने के लाले पड़ जाएंगे
32:52अगर food prices एक सीमा से आगे बढ़ गए
32:55वो भी middle class में ही आते हैं
32:58ऐसा नहीं कि फिर भूखे मरेंगे खाएंगे
33:00पर सब optimally खाएंगे
33:03कुछ ऐसा खाएंगे जिससे
33:04उनकी nutritional needs पूरी नहीं होंगी
33:12इंसान आसानी से मरता नहीं है
33:13कुछ भी खाकर के जिन्दा रह लेता है
33:15भारत में बड़े बड़े दुर्भिक्ष पड़े
33:17बंगाल वाला याद कर लो
33:19बिहार वाला याद कर लो
33:21जैसा थोड़ी है कि सब मरी गए थे
33:22पर कैसे हो जाते है
33:24फिर वो ऐसे हो जाते है कि
33:26एक पीड़ी के अंदर
33:27जो average height है वो कुछ
33:30inch कम हो जाती है एक पीड़ी के अंदर
33:38इतना malnutrition होता है
33:46अच्छा आप में से कितने लोगों
33:48के साथ ऐसा हुआ है या अपने आसपास होता
33:50देखा है कि जब किसी food item के
33:52दाम बढ़े हैं तो kitchen से
33:54वो food item फिर हटा दिया गया है
33:56कितने लोगों ने ऐसा किया है या देखा है
33:59ये आगे और ज्यादा frequency से होने वाला है
34:03frequency भी intensity भी
34:04पहले अगर ऐसा सिर्फ मान लीजिए
34:06प्याज के साथ आपने होता देखा है
34:08या मटर के साथ होता देखा है
34:12तो हो सकता है कि आगे आप
34:14ऐसा कहीं गेहूं के साथ भी होता ना देखें
34:20क्योंकि उगना तो उसे जमीन पर ये ना
34:22या जमीन को भी AC देदोगे
34:24कहोगे जमीन तुझे भी गर्मी न लगे
34:26चल तुझे भी AC देदेते हैं
34:28जमीन तो exposed है न
34:32जमीन कैसे
34:34बे मौसम की बारिश सहलेगी
34:36जल भराव सहलेगी
34:38गलत temperature pattern बरदाश्ट कर लेगी
34:41और फिर वही अन उगा देगी
34:42उगेगा ही नहीं उस पर
34:57ये हमारी आपकी सबकी समस्या है
35:00कोई इस गलत फैमिये न रहे
35:01कि हम बच जाएंगे
35:03सिर्फ बिचारे रिक्षे वाले और ठेले वाले
35:05यही मारे जाएंगे
35:07नई नई नई नई नई
35:08हाँ हाँ उन पर असर ज्यादा पड़ेगा और पहले पड़ेगा
35:11ये बात ठीक है
35:12पर बचोगे तो आप भी नहीं
35:14ये जो आग लगेगी
35:16ये जब फैलेगी तो हर घर को चपेट में लेगी
35:21लगेगी नहीं
35:22भविश्य की बात नहीं
35:23ये लग चुकी है
35:24फैल रही है
35:26हर साल और ज्यादा बढ़ रही है
35:37इससे ही सम्मंदित कोई बात करिये
35:39ये मुद्दा बहुत जरूरी है
35:44अचारी जी नमस्ते
35:45अचारी जी जैसे आप की
35:47कलाइमेंट चेंज की बाते हम करते हैं पडोस में
35:49तो वहाँ पर ऐसे अब ये बाते होने लगी है
35:51कि अब तो पहड़ों मकान लेना ज्यादा अच्छा रहेगा
35:54बना लोगे तो आगे चल करके
35:55जितनी भी गर्मी होंगी उसके लिए च्छा रहेगा
35:57और दूसरा ये है कि जैसे ये तक भी बताते है
36:00कि वहाँ पर ऐसे कुछ दस बार लाग रुबे नाली
36:03क्या जाब होता है आज लेना का पर अच्छा रहेगा
36:05ये सब सलाय मतलब आने लगी है
36:08मैं कई तलों पर इसका जवाब दे सकता हूँ
36:12पर पहली बात तो ये कि हम نाधान है नासमज है
36:17भोले हैं इतने की भूंदू है कि क्या है
36:22हम कितने हैं और पहाडों पर जमीन कितनी है
36:25और जो ये बाते बोल रहे हैं और कहा के धन्नासेठ है
36:30जब पहाडों पर
36:31जमीन की इतनी मांग बढ़ेगी
36:34तो जो पहाड पर भी
36:36जमीन का मालिक बैठा है
36:39वो तुम्हें उसी दाम पर दे देगा
36:42उसी रेट पर दे देगा जो आप रेट बता रहे हो
36:45वो जमीन भी
36:47अमीरों के ही हत्थे लगनी है
36:52आप बस जा करके इदरोदर घुमते रहे जाना कि
36:54मैं पहाड पर जमीन लेने आया हूँ
36:58पहाड पर इतनी रेसिडेंशियल जमीन है नहीं
37:03पहाड इतने ज्यादा हॉस्पिटेबल है नहीं
37:08और नियम कानून भी पहाडों पर
37:11रेसिडेंशियल प्रोजेक्ट्स को
37:12एक सीमा से ज्यादा अनुमती देते हैं नहीं
37:16पर एं मिडल क्लास मुंगेरी लाल के हसीन सपने
37:19जब दिल्ली में गर्मी बहुत बढ़ जाएगी
37:22तो हम पहाडों पर मकान खरी देंगे
37:24तुम्हें दिल्ली में जितने मिलता है
37:26उसे चार गोना कीमत पर मिलेगा पहाड पर मकान
37:31क्योंकि प्राइस बढ़े गाई भाई
37:34सप्लाई एकदम लिमिटेड है
37:36जोग्रिफिकली लिमिटेड है
37:40आप लैंड मैनुफैक्चर नहीं कर सकते
37:43सप्लाई लिमिटेड है
37:45और डिमांड करने वाले इतने करोड लोग खड़े है
37:48तो तुम्हें दामों को क्या लग रहा है
37:50क्या होने वाला है
37:52पर मिडिल क्लास दिल को बहलाने को घाली भी खयाल अच्छा है
37:55अरे कोई बात नहीं खूब पॉल्यूशन कर लो
37:57कोई फर्क नहीं पड़ता
37:58जब यहाँ टेंप्रेचर बढ़ेगा
38:00तो हम नैचुरल एसी में चले जाएंगे
38:03खरीदना तो छोड़ दो
38:05होटेल भी ठीक से अफोर्ड कर पा रहे हो
38:10पूछ रहा हूँ
38:11और जो होटेल है मिडिल क्लास वाँ अफोर्ड कर पा रही है
38:15वहाँ पर नौटंकियां
38:32बैठो बैठो स्विफ्ट निकालो
38:33अपनी वैगन आर निकालो क्रेटा निकालो
38:35हम जा रहे हैं नैचुरल एसी में
38:37और वहाँ पर उस शहर में घुसने के लिए
38:40पहले दो घंटे का जाम है
38:41उसके बाद एकदम कोई बहुत साधारन सा
38:44बलकि सड़ा सा होटल होगा
38:45वो भी आप कहेगा हाँ बारा हजार रुप है
38:49एक कमरे का
38:52भाड़ा देने में हालत खराब हो जा रही है
38:54और सपने हैं मकान खरीदने के
39:00कुछ सप्लाई डिमांड प्राइसिंग को
39:02एकनॉमिक्स को समझते भी हो
39:03क्या सपने ले रहे हो
39:06छूने को नहीं पाओगे पहाड़ों को
39:08क्योंकि वो प्राइम प्राइम प्राइम प्राइम एसेट्स होंगे
39:13जिस पर प्राइम लोगों का कबजा होगा
39:18जो भी जगह ऐसी होगी
39:20जो ठंडी होगी, सुन्दर होगी
39:24उस पहां middle class को कौन खुसने देगा भाई
39:29आपको कौन खुसने देगा
39:30क्यों खुसने देगा
39:33आपके पास क्या है
39:35या ऐसे बस मूठा आगे पहुचोगे और कहोगे
39:37अब हम भी आ गए हैं यहां पर
39:40काली बिछाओ glacier पर
39:47क्या बोल रहे हो
39:53गंगा किनारे आप रिशिकेश से आगे चलिए गंगा किनारे
39:57पहले साधारन कैम्प लगते थे जहां आम आत्मी भी जा सकता था
40:01पहले लगते थे वहां बिलकुल साधारन कैम्प
40:04वहाँ पर हमने अच्छे दस-पंदरा साल पुराने बहुत सारे कैम वहीं शेविर वहीं पर लगाए थे
40:10वहने बड़ा बढ़ियां रहता था
40:12वो साधारन कैम्प होते थे
40:16टेंपरेरी स्ट्रक्चर्स वो तंबू है उसको गाड़ा आप वहीं पर हो
40:19और फिर वहाँ से वो हट जाता था
40:22वहीं अपना बैठो खाओ पियो
40:24NGT ने उसा बंद करा दिया और अच्छा गिया कि बंद करा दिया
40:28क्योंकि लोग वहाँ आते थे गंदगी करते थे
40:31बोतले फोड़ते थे और बहुत तरह का प्रदूशन
40:33आवाजे भी करते थे धुआ भी छोड़ते थे
40:38तो इसका क्या मतलब है कि वो जो सुन्दर रमणीक जगह है
40:42गंगा तट
40:44उसकी एकसेस सबको बंदो गई
40:46नहीं सबको नहीं बंदो गई
40:47अब वहाँ बड़े बड़े होटेल है और बहुत बड़े बड़े होटेल है
40:51जाईए आप वहाँ पे
40:52एक रात का पचाहसार रुपिया एक लाग रुपिया दीजिए
40:55कैम्पो में आप एक रात का पांसार रुपिया देते थे
40:58आम आदमी जा सकता था, आम आदमी अभी भी सोच रहा है
41:00कि उसे गंगा तट सुलब हो जाएगा, उपलब्ध हो जाएगा,
41:03सॉरी सर, नो एक्सेस, नहीं मिलेगा आपको,
41:06उनको मिलेगा जो एक रात का एक लाग रुपया दे सकते हैं,
41:10आप नहीं दे सकते,
41:19हम जाएंगे अब जब यहाँ गर्मी बढ़ेगी,
41:23वो कोई नहीं है, वो तो फ्रीदाबाद का 2BH के छोड़के,
41:27सीधे पहाड पे दो बीघा जमीन लेंगे,
41:32वा भीटा वा, वा,
41:38और वहाँ प्राइवेट एक्सेस रोड बनवाएंगे,
41:41उसमें सिर्फ हमारी आइटेन खड़ी होगी,
41:47वा भीटा वा,
41:51ये एक तल था,
41:54जिसमें मैं economic constraint की बात कर रहा था,
41:57अब दूसरी बात आती है,
41:58कि अगर किसी तरह ऐसा हो भी सकता हो,
42:00हो भी जाए, तो बात पहाडों के लिए कितनी बुरी होगी,
42:07क्योंकि डिमांड के प्रिशर के चलते,
42:10अगर forest land को,
42:13या agricultural land को,
42:15residential land में पहाडों की सरकारों ने convert कर दिया,
42:18तो इसमें पहाडों का कितना बड़ा नाश है,
42:21आप समझ रहे हो?
42:24आप समझ रहे हो?
42:26कि जंगल काटे जा रहे हैं,
42:28कि अब यहाँ पर बन रही है,
42:29societies, और जब societies बनेंगी,
42:31तो access road भी बनेंगी,
42:33और बड़ी बड़ी बसें भी चलेंगी,
42:34फिर वहाँ shopping complexes भी बनेंगे,
42:36फिर वहाँ railway भी पहुँचेगी,
42:38फिर आसपास कहीं छोटे मोटे हवाई अड़े भी बनाए जाएंगे,
42:41आने सारी दुर्दशा,
42:43अगर ऐसा हो भी सकता है,
42:45कि पहाडों पर और जमीन निकल लोगों के बसने के लिए,
42:47तो ऐसा होना नहीं चाहिए,
42:50पहली बात तो हो नहीं सकता,
42:51terrain allow नहीं करेगी,
42:55हो सकता हो तो होना नहीं चाहिए,
42:57पहाडों में कुछ हिस्सों में ऐसा हुआ भी है,
42:59जहां हुआ हुआ है वहाँ की दुर्दशा आप जानते हैं,
43:04आप मैंसे कितने लोगों ने 20-30 साल पहले का शिमला देखा है,
43:08या 20-30 साल पहले का नैनिताल मसूरी देखे हैं,
43:12आप समझ रहे होंगे मैं क्या बोलना चाह रहा हूँ,
43:16पहाड एकलोजिकली बहुत सेंसिटिव होते हैं,
43:19मैदान तो फिर भी पॉपुलेशन प्रेशर बरदास कर लेते हैं,
43:22पहाड पॉपुलेशन प्रेशर बिलकुल नहीं जहल सकते,
43:26खास कर जो हमारी हिमाले अन रेंजेज हैं,
43:30ये दुनिया के अभी सबसे नवजात पहाड हैं,
43:33आपको लगता रहे बुढा हमाले, बुढा हमाले नहीं है,
43:36वो शिशु हमाले है, उन्हें हम बोलते भी हें Young Fold Mountains,
43:41उनका नाम है, क्योंकि वो अभी अभी बन रहे हैं,
43:49वो अभी बनते ही जा रहे हैं,
43:53हिमालय परवत इतने नए हैं कि वो अभी भी हर साल एकाद दो इंच और बढ़ जाते हैं
44:02वो पता नहीं हिमालय कैसे बने हैं वो एक तरह की क्रीज हैं जैसे ऐसे आए ये तो यहां पे
44:08उट जाएगा ना ये ऐसे बने हैं वो
44:13एक तरफ ये जो एशियन मास है वो था और दूसरी तरफ नहीं यूरेशियन नहीं
44:22ये बहता हुआ आया अफ्रीका से तूट करके और आकरके टकराया है
44:30जहां तिब्बत है वहाँ पर तो उसके टकराने से ये ऐसे ये दो टकराई हैं तो ऐसे हैं
44:37ये बहुत अभी फ्रेजाइल हैं इन पर आप पॉबुलेशन प्रेशर दोगे लैंड्सलाइड्स ये वो दुनिया भर की दुरदशा होगी
44:53तो ये सपना सपना ही रहे तो अच्छा है साकार नहीं होना चाहिए
44:57कि हम अब जाएंगे और पहाडों को बरबाद करेंगे हम मिडिल क्लास हैं
45:02अभी उस दिन तो दहरादून में जब हमारा खुला मंच था तो मैं कह रहा था कि उल्टा है
45:09लगाओ भारी टैक्स उसने ही मत दो पहाडों पर तुमने जो दुरदशा करी है मैदानों की तुम मैदानों पर ही
45:18रहो और जेलो अपनी दुरदशा को
45:19अब आगर के पहाडों को भी क्यों खराब कर रहे हो
45:27हम बताईए
45:29सरी आपने बोला के बाहर को जानना वो फिर भी हो जाता है
45:34लेकिन बाहर को जानना भी नहीं होता
45:36अगर आपने खुद को नहीं जाना और अभी जो बात हो रही है वो भोग वाली बात ही हो रही
45:41है
45:41कि पहाड पर जाकर के भोग ही करना है हमें
45:44और उसमें हम पहाड को भी नहीं जानते
45:47और पहाड में जो जीवन है वो इतना आसान नहीं है
45:51जो गंगा के मैदान में है
45:52और दूसरा जो फ्रजिलिटी वाली आपने बात करी
45:55गंगा के मैदान बहुत स्टेबल है
45:59पहाड बहुत फ्रजाइल हैं
46:01आप सुन्दरबन चले जाएं आप कच चले जाएं
46:03वो बहुत फ्रजाइल एरिया है
46:05क्योंकि वो बहुत कॉंपलेक्स चीजों से बने हुएं
46:10इसमें एक चीज जो मुझे याद आ रहे थी
46:13वो ये भी था कि जो फूड की क्वांटिटी है
46:18वो तो आपने बोली
46:19लेकिन उसकी जो न्यूट्रिशनल वैल्यू है
46:22तेंपरेचर के साथ में उसका भी बहुत बड़ा कनेक्शन है
46:26बलकि वो और वाइडर मुद्दा बन जाएगा
46:29क्योंकि फूड का जो न्यूट्रिशनल कॉंस्टिटूशन है
46:33वो वास्तव में हर लिविंग और्गेनिजम के कॉंस्टिटूशन से रिलेटेड है
46:39देखिए हम सब एक खास एको सिस्टम की पैदाईश होते हैं
46:46प्रत्वी जितनी बड़ी है उतनी बड़ी ना होती
46:49तो इंसान जितना लंबा है उतना लंबा ना होता
46:52ठीक है
46:53प्रत्वी पर जितना तापमान है उतना ना होता
46:56तो हमारी खाल जितनी मोटी है उतनी ना होती
47:00हम जैसे दिखते हैं
47:02उसका सीधा संबंध प्रत्वी की स्थितियों से है
47:09बास समुझ रहे
47:10जोग्रफिकल एंड एट्मोस्फिरिक
47:12उसी ने एवॉल्यूशन को ड्राइव करा है
47:14तो इतना ही नहीं है
47:18कि सबजियों का फलों का
47:20पेड़ पौधों का कॉंस्टिटूशन ही बदल जाएगा
47:23जब एट्मोस्फिरिक कंडिशन्स बदलेंगी
47:28मेरे वाकिय पूरा करिये
47:30इंसान भी बदल जाएगा
47:32जैसे आलू बदल जाता है न अगर गर्मी जादा हो
47:35वैसे आदमी बदल जाएगा अगर गर्मी जादा हो
47:40एक होता है देसी चनाई होता है
47:42काबुली चनाई दोनों अलग-अलग क्यों होते है
47:44एक होता है इंडियन एलिफेंट एक होता है
48:02इसलिए वही सबजी या वही फल भारत में भी उत्तर में मिलता है, तो एक तरह का होता है, दक्षण
48:06मिलता है, एक तरह का होता है, और पहाणों पे मिलता है, तो तीसरे तरह का हो सकता है, केला
48:11देखा है, दक्षण में कैसा होता है, और उत्तर में कैसा होता है, क्या वज़े है
48:18केला ही तो है क्या हो गया
48:19कुछ नहीं है तापमान बदल गया हवाएं बदल गया
48:22मौसम बदल गया बारिश बदल गया
48:25तो वो जो जीव है
48:28उस जीव की
48:29पूरी हस्ती ही बदल गयी
48:33nutritional value
48:34तो गोभी की आलू की पालक की
48:36मेथी की यो तो बदलेगी बदलेगी
48:37मुझे ये बताओ इंसान का क्या क्या बदलेगा
48:41इंसान का भी सब बदल जाना है
48:45hormonal secretions बदल जाएंगे
48:50आपको नहीं पता चलेगा कि आपका
48:51brain दूसरे तक से क्यों काम करने लग गया
48:54ये mood ऐसे से
48:55ऐसे क्यों होने लग गया है
48:57इंसान बदल जाएगा
49:00जितनी भी cyclical activities होती है
49:03body के अंदर
49:04periodic वो सब बदल जाएंगी
49:06क्योंकि वो सब
49:07एक खास atmospheric input का
49:11नतीजा थी
49:14and to top that आप जो खारे हो वो भी बदल रहा है
49:17आप जो गहूँ खारे हो दिखने में गहूँ जैसा है
49:20पर वो चीज आप कुछ दूसरी हो चुका है
49:21क्योंकि वो जिस मिट्टी से आ रहा था
49:23वो मिट्टी बदल गई है
49:24जब atmosphere बदलेगा, temperature बदलेगा
49:26तो उसके भीतर, जो microorganisms है
49:29उनका भी balance बदल जाएगा
49:31कुछ ऐसे होंगे
49:32जो ज़्यादा heat को और ज़्यादा humidity को
49:35बहतर adapt करेंगे
49:36तो उनका proportion बढ़ जाएगा
49:39कुछ ऐसे होंगे जो ज़्यादा heat और अगरा
49:41को adapt नहीं कर पाएंगे
49:42तो उनका proportion कम हो जाएगा
49:44तो माने मिट्टी बदल गई
49:45मिट्टी माने बस minerals ही नहीं होता
49:47मिट्टी माने वो सब bacteria और भी होता
49:50algae fungus जो वहाँ हैं
49:52और वो crops के लिए ज़रूरी होते है
49:55पानी भर दोगे
49:56उनमें से कई हैं जो खत्म हो जाएंगे
49:58एकदम dry कर दोगे उनमें से कई हैं जो खत्म हो जाएंगे
50:01यहां तक कि अगर
50:03हवाई भी on an average
50:05जिस गति से चलती रही है
50:06अगर वो average ज्यादा बदल जाएगा
50:08तो जो superficial life है
50:11वो बदल जाएगी
50:13जब वो सब बदल जाएगा
50:15तो हमारे पास यह जो चावाल आता है
50:16जो गेहूं आता है
50:17यह क्या वैसे ही रहेगा
50:19और middle class कुछ और खाती है क्या
50:22आप सोचोगे कि अपने बच्चे के लिए
50:24आज मैंने इडली बनाई है
50:26चावल की
50:27वो पता नहीं आपने उसे क्या खिला दिया
50:29क्योंकि ओ चावल ओ चावल ही नहीं जो चावल होता है
50:32तो दिखेगा वैसे ही
50:34बस महंगा होगा खूब
50:35और महंगा हो गया होगा पर वो चावल चावल नहीं है
50:38और इसमें ऐसा नहीं किसीने धांदली कर रही है, यही बदल गया
50:50और यह अल्रेडी हो चुका है, यह 40% जो है nutrition डाउन जा चुका है, major crops में
50:57और human body में भी 50% से जादा जो है हमारे cell bacterial है, bacteria है हम लोग, वो
51:05change होगा
51:05तो absorptive capacity वो सब भी change होगा
51:12जो आत के भीतर सब बैठे हुए हैं, छोटे छोटे जन्तु
51:17वो भी एक particular oxygen concentration मांगते हैं, carbon dioxide होगी की नहीं होगी मामला
51:23aerobic होगा, anaerobic होगा, वो यह सब भी होता है, आपका जो temperature है
51:29अगर वो average से ज्यादा deviate करने लगेगा, तो आपकी उपर से नीचे तक पूरी वेवस्था बदल जाएगी
51:39आप इंसान दूसरे हो जाओगे, एक तरह से आप प्रजाती दूसरी हो जाओगे
51:42क्योंकि जिसको हम homo sapiens बोलते हैं, वो एक colony होती है, जिसके भीतर जैसा आपने का
51:48हजारों तरीके के दूसरे जीव बैठे हुए हैं, वो सब मिल जुला करके
51:53cumulatively कहलाते हैं human being
51:57आप सोचती human being माने बस ये, ये नहीं, इसके साथ में हजार और species हैं जो यहां भीतर बैठी
52:03हुई हैं
52:04तो उन सब को जब जोड़ते हो तो जो निकल के आता हो उसको गयता है human being
52:07अब आप दिखने में ऐसे ही रह गए, पर भीतर का जो मामला था बदल गया
52:11तो क्या आप same species कहलाओगे, species ही बदल जा नहीं, आप कुछ और हो जाओगे
52:18पर million glass को लगता है नहीं नहीं, ये सब तो गरीब मज़दूर के साथ होगा, हमाई साथ थोड़ी होगा
52:28कहीं तो मैंने पढ़ा था, verify कर लीजएगा, नहीं तो misinformation हो जाएगा
52:33fertility rates बहुत तेजी से drop या तो हो रहे हैं या होने वाले, पुरुशों में sperm count बहुत तेजी
52:42से गिर रहा है
52:45महिलाओं में menstrual irregularities बढ़ रही हैं, बच्चियों के periods ज्यादा early शुरू हो रहे हैं
52:56जब सब कुछ बदलेगा, तो शरीर क्या पुराने जैसा ही रह जाएगा
53:03यूपी के अंदर में कुछ relative किसान है, उनके पास मिलना हुआ तो नोने बताया कि गेहों के दाना इस
53:08बारी
53:09बहुत पहले से पतला हुआ है और पैदवार बहुत कम हुई है
53:13आप इस बात का मतलब समझ रहे हो, किस स्तर तक जाएगी अराजकता
53:20जिसको खाने को नहीं है, जिसके सामने मौत प्रकट खड़ी है
53:26क्या वो पुलिस के डंडे या आर्मी की गोली से भी घबराएगा
53:31वो तो पूरा सिविलाइजेशन ही उखाड फेकेगा न, वो कहेगा कि
53:35अरे मैं क्या law and order का सम्मान करूँ
53:39ऐसा law, ऐसा order, ऐसी विवस्था, ऐसा देश, मेरे किस काम का, जा मैं भूखा मर रहा हूँ
53:47और आप सोच रहे हो कि आप अपने अपने gated apartment में रहते हो
53:52और बाहर दो guards खड़े हैं, तो security हो जाएगी
53:56वो दो guards खड़े रहते हैं न, वो जो भी लोग आएंगे वो पहले उनसे register पर entry करवाएंगे
54:03गाओं के गाओं उठतर के आएंगे
54:08क्योंकि वो भूखे होंगे
54:11और भूखे आदमी को डराना बहुत मुश्किल होता है
54:15उसके पास अब खोने के लिए कुछ नहीं बचा, आखरी चीज़ थी शरीर
54:18वो शरीर भी उसका आप जा रहा है भूख से, उसको आप गोली से भी नहीं डरा पाओगे
54:34अब हो गया, सबको बहुत डरा दिया, हो गया
54:38देजो देजो अच्छा चलो
54:41अच्छारी जी जो अर्बिन मिडिल क्लास ऐसा कह रहा है
54:44अब ये अल्रडी एक बार अपनी बे एक बार डिसकस किया था कि जो एरलाइन्स की जो फंक्शनिंग है और
54:49जो रनिंग है
54:49वो अफेक्टेट होती है और
54:51तुम अब खोजो के यार तो क्या-क्या नहीं निकल के आएगा
54:54क्या-क्या नहीं निकल के आना है मैं क्या बताऊ इसमें
54:58जिस स्तर की टर्बुलेंस चुरू होगी जब एक्मॉस्फेरिक एनरजी बढ़ेगी
55:02हीट माने एनरजी जब एक्मॉस्फेरिक एनरजी बढ़ेगी तो विंड स्पीड भी बढ़ेगी ना
55:08जो करेंट्स होती है इट्मॉस्फिरिक उनकी इंटेंसिटी भी बढ़ेगी ना आपके प्लेंस डिजाइंड नहीं उतनी टर्बुलेंस जेलने के लिए
55:16जरूरी नहीं है कि मतलब प्लेन मिड एर स्प्लिट हो जाएगा या उसका विंग क्रैश कर जाएगा वो जरूरी नहीं
55:22है
55:23बस यह होगा ऐसे ऐसे ऐसे ऐसे ऐसे अब मिडिल क्लास भीतर बैठी होई है और
55:32ऑठाश जाए ज्याइक ये जेसे से मेरा ज़ंशन है कि equipment जो डिजाइन होती
55:36है Health Care में भी तो थर्मो संसेटिव रहल होती है तो अगर मता सब कुछ ही है मिडिल क्लास
55:44हो ये और फिर अक हो गरम कर दो
55:50दिखाई देना कम हो जाएगा
55:53आपका कुछ भी ऐसा
55:54नहीं है
55:55जो heat और humidity पर
55:58dependent नहो
55:59कुछ भी नहीं है आपका ऐसा
56:04सबकी जो कैसे
56:06वो function करेंगे इन दोरो parameters पर
56:08का के इंजन
56:09air conditioners
56:11ये भी एक temperature range में
56:14operate होने के लिए designed होते है
56:17आपको लगर
56:1748 degree पार करने वाद आपका AC काम करेगा
56:22रखे रो
56:22हाँ कुछ AC होते हैं
56:24जो एकदम desert conditions के लिए बने होते हैं
56:27वो 55 पर भी चल जाते हैं
56:29पर फिर उनकी कीमत 2 गुना 3 गुना होती है
56:31afford करो middle class
56:35ये जो हमारी कारे होती है
56:37ये कारे आपको लग रहा है चल जाएंगी
56:42आप कहते हो EV
56:43EV की batteries भी
56:46कोई infinite temperature range हेलने के लिए नहीं बनी होती है
56:51हर तरह के vehicle
56:53चाहे वो petrol हो, diesel हो, EV हो
56:55इनमे sudden explosions के लिए तयार रही है
56:57कि गाड़ी खड़ी है और फट गई
57:03या explosion नहीं भी हो रहा है
57:05इतने मढ़ डरी है
57:06explosion नहीं भी हो रहा है
57:07तो malfunction के लिए तो तयारी रही है
57:09और छोड़ो ना, यह जो mobile phone है
57:14आप बाइक चला रहे हो
57:16उसको जेब में रखा हुआ है
57:19blast नहीं भी होगा
57:20तो shutdown तो होई जाएगा
57:22उसके भीतर यह mechanism होता है
57:24कि उसका temperature जादा बढ़ेगा
57:25तो automatically shutdown हो जाएगा
57:27अच्छा है कि shutdown हो जाए
57:28shutdown नहीं हो तो जल्दी फटेगा
57:31और रखते भी उसको यहाँ पर हो
57:36sperm count वैसे ही लोग हो रहा था
57:48इसको ऐसे शक से देखा करो
57:51यह ही है
57:56वन्ष का दुश्मन
58:01आपको खुशी होगी
58:02इसना पर जो हमारी अपनी एप है
58:05जिसमें हमारे गीता और बाकी सब कारेकरम चलते है
58:07यहाँ पर बुद्ध है, गीता है, उपनिशाद है, अश्टावत्र है
58:12यह मुझे मिले मेरी जिन्दगी बदली
58:14यह तुम्हें मेलेंगे तुम्हारी जिन्दगी भी बदलेगी
58:16सच पूछियों तो मतलब लाख हो नहीं
58:18कम से कम हजारों जिन्दगी है तो हैं जो बिलकुल बदली है
58:21दो लाख से अधिक गीता प्रतिभागियों के साथ जुड़े
58:24आचार्य प्रशान्थ एप पर
58:26पहला महीना बिलकुल फ्री गीता मिशन का पूरा एक्सिस
58:30एप पर आपको मिलेंगे नियमित लाइफ सत्र
58:33हर दिन आचार्य प्रशान्थ के विशेश समभाद
58:36गीता कम्यूनिटी का एक्सिस, गीता परिक्षा, चैनित समाचार, ओडियो बुक्स, कोट्स और भी बहुत कुछ
58:44गूगल प्ले स्टोर या एपल एप स्टोर पर आचार्य प्रशान्थ सर्च करें और अभी दाउनलोड करें
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