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Kerala और Gulf देशों का रिश्ता सिर्फ नौकरी का नहीं…पूरी एक civilization का रिश्ता है।
50 साल से लाखों Malayalis ने:
Kuwait
UAE
Saudi Arabia
Qatar में काम करके Kerala की economy बनाई।

लेकिन 2026 में Strait of Hormuz crisis ने सब बदल दिया।

इस वीडियो में देखिए:
कैसे Gulf migration शुरू हुआ
क्यों Kerala की economy remittance पर टिकी है
1990 Kuwait evacuation की असली कहानी
कैसे Air India ने दुनिया का सबसे बड़ा evacuation किया
और क्यों 2026 Gulf crisis लाखों families को प्रभावित कर सकता है

ये सिर्फ geopolitics नहीं…ये घर, परिवार और पहचान की कहानी है।

एक दिल। दो देश। और एक सवाल —अगर Gulf रुक गया… तो Kerala का क्या होगा?

00:00 खाड़ी संकट की शुरुआत
00:47 केरल और खाड़ी का रिश्ता
01:15 खाड़ी प्रवास की शुरुआत कैसे हुई
02:14 टोयोटा सनी की कहानी
02:52 हवाला और रेमिटेंस का दौर
03:20 कैसे खाड़ी के पैसों ने बदला केरल
04:20 1990 कुवैत युद्ध की शुरुआत
05:05 टोयोटा सनी का रेस्क्यू मिशन
06:11 इतिहास का सबसे बड़ा एयर एवाक्यूएशन
07:53 प्रवासियों की घर वापसी
08:21 दुबई बूम और मल्याली वर्कफोर्स
09:42 कोविड और रिवर्स माइग्रेशन
10:01 खाड़ी के पैसों पर केरल की निर्भरता
11:15 2026 ईरान-इज़राइल संकट
11:48 होरमुज जलडमरूमध्य बंद

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~HT.318~VG.AI~

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Transcript
00:02इस गाउं में एक नियम है
00:04जो जाता है वो लोटता है
00:08पचास साल से
00:10लेकिन इस घर में आज कोई नहीं लोटा
00:16और फोन तीन दिन से चुप
00:20वो उठा कर क्या करेगी
00:21जब उस पार कोई उठा ही नहीं रहा
00:25वो रोज इसी कुरसी पर बैठती है
00:27पचास साल से
00:29पती खाड़ी में
00:30और अकबार ने आज उस चुपी को नाम दे दिया
00:34होर्मूज बंद
00:36वो पतली नीली रेखा
00:38जिससे दुनिया का आधा तेल बहता था
00:40आज ठहर गई है
00:42हर रुका जहाज
00:44किसी न किसी का काम
00:45किसी न किसी का घर
00:47तो ये कहानी इतनी सी है
00:49आधी सदी
00:51खाड़ी ने केरल को बनाया
00:53और अब पहली बार
00:55खाड़ी केरल को लोटा रही है
00:57ये एक घर की चुपी नहीं
01:00ये पचीस लाख घरों की चुपी है
01:03उसके पती की नौकरी
01:05आज सुभब बंद हो गई
01:06वो अभी ये नहीं जानती
01:08तो सवाल यही है
01:10जो पचास साल में बना
01:11वो पचास दिन में बच पाएगा
01:15लेकिन इसकी जड़े
01:16दो हजार चब्बीस की नहीं है
01:18ये उननीस सो तिहत्तर में बोई गई थी
01:20उस साल ओपेक ने
01:22दाम चार गुना किया
01:24रेगिस्तान अमीर हो गया
01:25एक जटके में तेल संकट
01:28एक जटके में खाडी अमीर
01:30और एक जटके में काम की पुकार
01:33और केरल के एक छोटे से रेडियो पर
01:36ये पुकार आ पहुँची
01:37उननीस सो चोहत्तर
01:39बंबई के डॉक से एक मल्याली नौजवान निकला
01:42पीछे मा, आगे
01:44कुछ भी नहीं पता
01:46ट्रंक में दो जोडी कपड़े
01:48और एक नाम, पीतल पर खुदा हुआ
01:51तेरा दिन का सफर
01:53न जमीन दिखती है न मन्जिल
01:55और तेरवे दिन
01:58पूर्थोल से एक अजनबी देश की पहली जलक
02:02धूप सौ डिग्री
02:03पानी राशन में
02:05और हर हाथ को काम
02:07उन चहरों में से कई
02:09आज तक वहीं है
02:11पचास साल हो गए
02:12लेकिन इन सबसे पहले
02:15एक आदनी आ चुका था
02:161956 में
02:19नाम
02:19मटुन्नी मैथ्यूस
02:21उम्र 20
02:24उसने कुवैत को इतना अपना बना लिया
02:27कि कुवैत उसे अपने नाम से बुलाने लगा
02:29साट का दशक
02:31मटुन्नी अब
02:33टोयोटा सनी है
02:34और कुवैत की सरकों पर
02:36हर तीसरी गाड़ी उसकी
02:39अलसायर परिवार के साथ
02:40भरोसा शुरू हुआ
02:42जो आज तक चलता है
02:441989
02:46सनी रिटायर हुए
02:47लेकिन कुवैत में
02:49सनी का मतलब अब भी टोयोटा है
02:51और इधर
02:53पैसा घर पहुँचने लगा
02:54बैंक के रास्ते नहीं
02:56दोस्तों के हाथ
02:58हर लिफाफे में दो चीजें होती थी
03:01चिठ्थी पत्नी के लिए
03:03और डॉलर खुदा के लिए
03:05इसका नाम था
03:07हवाला
03:07कोई कागजात नहीं
03:10कोई पहचान नहीं
03:11बस भरोसा
03:13और सरकार को
03:15साट साल तक इसका पता नहीं चला
03:19उन्निस सो पचासी
03:21और केरल का पहला
03:22खाडी घर खड़ा हो रहा है
03:24पाथ साल की कमाई
03:26एक छत
03:27बच्चों के लिए खेल
03:29मा के लिए
03:30पाथ साल की दूरी
03:32उन्निस सो अठासी
03:34और खाडी का पैसा
03:35अब किताबों में बदल रहा है
03:38पितारेगिस्तान में
03:39बेटा कक्षा में
03:41दोनों एक ही सपना
03:42दो देशों में
03:45उन्निस सो अठानवे
03:46और तब राज्ज ने पहली बार पूछा
03:49हमारे कितने लोग बाहर है
03:5014 लाक
03:52फिर 22 लाक
03:53फिर 25 लाक
03:55विदेश में मल्याली
03:57और गाउं बदलने लगे
03:59मिट्टी की छटें
04:00नीली टीन की हो गई
04:02हर खाडी घर के सामने
04:04एक पिता खड़ा है
04:05बेटा चुट्टी पर लोट रहा है
04:09धीरे धीरे
04:10पैसा हाथ से निकल कर
04:11बैंक में आ गया
04:13रसोई की मेज पर
04:14दिरहम, रियाल, दीनार
04:17एक घर, चार मुद्राएं
04:19लेकिन 2 अगस्त 1990
04:23रेद पर एक परच्छाई पड़ी
04:25और सब कुछ रुख गया
04:28इराग का टैंक कुवेट में घुश चुका था
04:30और कुवेट सिटी
04:31एक रात में युद्ध छेत्र बन दई
04:34बालकनी पर एक मल्याली पड़िवार
04:37और उनका सब कुछ अब घेरे में था
04:40टीवी पर खबर अर्भी में थी
04:42डर हर भाशा में एक है
04:44और फोन पूरे देश का
04:48एक जटके में कटा
04:49उस दिन कुवेट में हर छटा आदमी मल्याली था
04:53एक लाख सक्तर हजार
04:55फसे हुए
04:56हर मल्याली घर में वही द्रिश्य
04:59सिर्फ जरूरी सामान
05:01बाकी छोड़ देना
05:03लेकिन एक आदमी ने फोन नहीं छोड़ा
05:06साट साल का सनी
05:08कुवेट में सब उसी को जानते थे
05:11पहले राजदूत
05:12फिर कंपनी फिर रिष्टेदार
05:15एक के बाद एक
05:16और चाबियां अपनी टोयोटा की उठाई
05:19सनी अकेले निकले
05:21कुवेट से बगदाद
05:23साथ सो किलोमीटर
05:24रास्ते में दुश्मन की सेना
05:27एक रात की ट्राइव
05:28एक आदमी
05:30एक लाख सत्तर हजार के लिए
05:33बगदाद में भारती राजदूत के साथ
05:35बैठक और एक योजना
05:37कागस पर बननी शुरू हुई
05:38नक्षा हाथ से बना
05:40क्योंकि असली नक्षों पर अब रास्ते बंद थे
05:43बस से बसरा
05:44फिर बगदाद, फिर अम्मान
05:47फिर हवाई जहास से घर
05:48और दिल्ली में विदेश मंतरी गुजराल
05:51फोन पर सद्दाम हुसेन से बात कर रहे थे
05:54एक तरफ एक ताना शाह
05:56दूसरी तरफ एक लाख सत्तर हजार लोग
06:00बातचीत आसान नहीं थी
06:02कई दिन, कई रातें
06:04कई बार नहीं
06:06लेकिन तीसरी रात दरवाजा खुला
06:08और सद्दाम ने हां कह दी
06:10और कुवेट से पहली बस निकली
06:13सैकणों बसें थी
06:14हजारों लोग
06:16हर बस में कोई न कोई बच्चा
06:18जिसे अभी नहीं पता कि घर क्या है
06:21हर रेडियो पर एक ही शब्द सुनना था
06:24इजाज़त
06:27राद भर रेगिस्तान
06:29और हर मील पर एक नया डर
06:33इराग जॉर्डन सीमा
06:35अब सब कुछ एक कागस पर निर्बर था
06:38हर ट्रंक खुलवाया गया
06:40हर चहरा देखा गया
06:41और हर सांस रुकी हुई थी
06:45फिर एक मोहर
06:46और बीस लाग जिन्दगियों का अगला कदम
06:49और जॉर्डन की मिट्टी पर पैर रखने के बाद
06:52पहली बार किसी ने सांस पूरी ली
06:56अमान का हवाई अड़ा अब भारत का दर्वाजा था
06:59हर परिवार के पास
07:01सिर्फ वो जो उठा कर ले जा सके
07:03बाकी सब छूट गया
07:05एक औरत ने दर्वाजे पर रुक कर हाथ जोड़े
07:0845 साल का कुवैत पीछे छूट रहा था
07:11एर होस्टेस गिन्ती थी
07:13तहीं कोई पीछे न रह जाए
07:15और इंजन गरजे
07:17हर बार जैसे आखरी हो
07:19हर उडान एक चमतकार
07:22और एर इंडिया ने ऐसी उडाने भड़ी
07:25488 बार
07:27बंबई का एपरन
07:28और 65 दिन बाद
07:30पहले पैर जमीन पर
07:31किसी ने जमीन को चूम लिया
07:34क्योंकि कुछ धन्यवाज शब्दों में नहीं आते
07:36और एक बच्चा
07:38फिर से अपने पिता के कंधे पर
07:4064 दिन बाद
07:42488 उडाने
07:4463 दिन
07:451,70,000 लोग
07:47और गिनीज बुक में दर्ज
07:49मानव इतिहास का सबसे बड़ा हवाई निकास
07:53सनी कुर्सी पर बैठे
07:54उम्र 60
07:55काम पूरा
07:57और शायद सबसे बड़ा काम जो किसी ने
08:00अकेले किया
08:00केरल में ढोल बजे
08:02माला पहनाई गई
08:04लेकिन सबसे चुप वो थे जो लोट आए
08:07और एक शब्द भारत में पहली बार आया
08:10प्रवासी
08:111992 और कुवैत फिर खुला
08:14और केरल फिर तयार था
08:16नए ट्रंक, नए नाम
08:18वही समुद
08:192000 के दशक
08:21और खारी का सबसे नया शहर
08:24खड़ा हो रहा था
08:25हर इट मल्याली हाथ की
08:28जितनी जादा क्रेन
08:30उतनी जादा चिक्ठियां केरल को
08:32क्रेन के नीचे
08:34एक भाषा जो रेत में बस गई
08:36मल्यालम
08:382005
08:39और अब डॉक्तर की जुबान भी मल्याली थी
08:42मरीज अर्भी
08:44नर्स मल्याली
08:46नाम सिस्टर अनिता
08:48कुल्लम से
08:50बीस साल पहले आई थी
08:52वाड का बोड दो भाषाओं में लिखा था
08:55दोनों जरूरी
08:571996
08:58और राज्ज ने पहली बार माना
09:01कि प्रवासी एक नागरिक है
09:03सत्यमेव जयते
09:05और अब प्रवासी मेव जयते
09:08पहली कॉल आई
09:10और तब से कभी रुकी नहीं
09:132010
09:14और खाडी का पैसा
09:16अब केरल में शादिया कर रहा था
09:18हर चूडी खाडी की
09:20एक रात की कमाई
09:22दुलहन के पिता ने 30 साल तक
09:24चूडिया नहीं सीमेंट की बोडिया उठाई थी
09:292018
09:30और जब केरल डूबा
09:32तो जमीन से जादा मदद आसमान से आई
09:35एक हफ़ते में 2000 करोड
09:37बैंक नहीं रुका क्योंकि खाडी नहीं रुकी
09:412020
09:42और जब दुनिया रुकी
09:44सिर्फ एक उडान चल रही थी
09:46प्रवासी की
09:47खाली हवाई अड़ा
09:49मास्क
09:50अकेला यात्री
09:51पहली बार खाडी डर रही थी
09:54और केरल ने अप्रेल में
09:56धाई लाक बिस्तर बनाए
09:57एक राज एक हफ़ता
10:002023 तक
10:0225 लाक मलियाली विदेश में
10:04केरल की हर चौथी जवान आबादी
10:07और इनमें से नवासी फीसद
10:09सिर्फ खाडी में
10:102,16,893 करोड
10:13एक साल का रेमिटेंस
10:15केरल के बजट से बड़ा
10:17और देश के NRI डिपॉजिट का
10:1921 फीसद एक राज्य से
10:26मलपुरम का एक घर
10:27और हर चीज की कहानी
10:29खाडी से शुरू होती है
10:30फ्रिज पर मेड इन साउदीज
10:33स्कूटर पर मेड इन UAE
10:35बच्चा मेड इन केरल
10:41तीन पीडिया
10:42तीनों ने खाडी देखी
10:44तीनों उसी से बने
10:46घर का सबसे पुराना फोटो
10:49एक कुवैती दफ्तर का
10:511962 का
10:56हर साल एक तेवहार
10:58प्रवासी दिवस
11:00पूरा केरल इखटा
11:02और नक्षे पर केरल नहीं दिखता
11:04खाडी दिखती है
11:06केरल खाडी है
11:08सब कुछ ठीक था
11:10कम से कम फिलहाल
11:14फिर एक रात
11:1628 फरवरी 2026
11:18तेहरान
11:20और एक मिसाइल ने
11:2250 साल का भरोसा तोड़ दिया
11:24अमेरिका, इसराइल, इरान
11:27बीच में 25 लाख
11:30केरल की हर चाय की दुकान
11:32आज एक न्यूज रूम बन गई
11:34क्योंकि हर मेज पर कोई न कोई
11:37जिसका बेटा खाडी में है
11:39चाय भूल गई
11:40क्योंकि अब फोन की घंटी का इंतजार था
11:43दो मार्च
11:44और इरान ने वो बोल दिया जिसका
11:46सब को डर था
11:48होरमुज बंद
11:49नक्षे पर दो शब्द
11:51केरल पर पचास हजार करोड का सवाल
11:54हर जहाज अब एक तैरता संग्रहाल है
11:57ना आगे न पीछे
11:59ब्रेंट क्रूड
12:01एक रात में सक्तर डॉलर से
12:03एक सो बीस
12:04और हर डॉलर पर एक मल्याली नौकरी का सवाल
12:07दुबई की
12:0932 वी मंजिल
12:10एक इंजीनियर और एक फोन
12:12जो रुकता नहीं
12:14बीस अन्रीड एक संदेश
12:16घर का बा रहे हो
12:18वाटसाप परिवार ग्रुप
12:2025 साल का बेटा मा
12:22जवाब दे
12:24और साओधी में 500 मजदूर
12:27एक फोर मैन और एक कागज
12:29जो किसी ने नहीं पढ़ना चाहा
12:31कागज पर एक वाक्य था
12:33काम रुक गया है
12:34अगला आदेश कब पता नहीं
12:37और अबुधाबी का दूतावास
12:39लाइन में 100 नहीं
12:401000 नहीं
12:425000 लोग
12:44और एक बच्चा
12:46उसे नहीं पता
12:48वो कहा जा रहा है
12:50तिरुवननदपुरम में
12:529 कंटोल रूम
12:53और 3 दिन से
12:55कोई सो नहीं रहा
12:56हर हेटसेट के पीछे
12:58एक सोयम सेवक
12:59और हर कॉल के पीछे
13:01एक मा
13:039 देश
13:049 खाडी देश
13:05और हर एक की पिन
13:07आज जल रही थी
13:08एक कॉल
13:10UAE से
13:12आवास काप रही थी
13:14फ्लाइट नहीं मिल रही
13:16टिकेट के दाम
13:17पाच गुना
13:19स्टाफ ने नाम लिखा
13:20और एक वादा
13:22कोशिश कर रही है
13:25साथ मार्च
13:26और भारत सरकार ने
13:27पहली बार माना
13:28हम युद्ध में हैं
13:30बिना सेना के
13:32प्रवक्ता ने एक संख्या बोली
13:34पूरा देश रुख गया
13:35बावन हजार
13:38कोचीन और सूटकेस का पहाड
13:40हर एक एक टूटा सपना
13:43एक माँ अपने सूटकेस पर बैठी थी
13:45तीस साल का जीवन एक बैग में
13:49गेट पर कोई बीस साल पुरानी पकड
13:52पहली बार दोनों एक ही देश में
13:55बेटी का पिता गया था
13:57पैतिस की उम्र में
13:58लोटा साठ का
13:59उसके चहरे पर पचास साल का रेगिस्तान
14:03पचास साल की धूब
14:04मार्च के अंथ तक
14:07दो लाख बीस हजार
14:08और रुकाव नहीं
14:10नाम मिल गया
14:11रिवर्स माइग्रेशन
14:13पचास साल की दिशा उलट गई
14:16केरल के एक घर में
14:17एक आदमी सूट केस पर बैठा
14:19उसने अभी खोला भी नहीं
14:21पतनी सामने
14:22कुछ नहीं बोली
14:23क्योंकि शब्द उस दर्द के लिए बने ही नहीं
14:27N.I.P.F.P की लेखा चकरवर्ती
14:29कागज पर
14:31एक डर का नाम
14:32लेबर शौक
14:33केरल को कम लोग नहीं चाहिए
14:36कम पैसा नहीं चाहिए
14:37और बैंक मैनेजर ने पहली बार देखा
14:40डपॉजिट गिर रहा है
14:41चड़ नहीं रहा
14:43हर रसीद अब एक सवाल
14:45अगले महीने आएगा क्या
14:50अप्रेल का अनुमान
14:51दस लाग और लोट सकते है
14:54पच्चिस लाग का चालिस फीसद
14:561990 में डेड़ लाग लोटे थे
15:002026 का अनुमान
15:02छे गुना
15:04पूर्व राजदूत अनिल वाधवा
15:06टीवी पर
15:071990 जैसा निकास नहीं हो सकता
15:10उस वक्त सब वहां थे
15:12आज सब यहां है
15:15कुवेट में
15:16सनी की डीलर्शिप
15:1760 साल का घर बंद
15:19एक टोयोटा चादर के नीचे
15:22कोई चलाने वाला नहीं
15:24और केरल के नक्षे पर
15:26खाडी की पिन
15:28एक-एक करके बुझ रही थी
15:29एक विद्वा थी
15:31उसके पती की नौकरी मिसाइल से पहले गई थी
15:34मलपुरम की मस्जिद
15:36दुआ में अब एक नई पंक्ती
15:38खाडी सलामत रहे
15:41अखबार, ट्विटर, टीवी
15:43हर माध्यम पर एक सवाल
15:45अब क्या?
15:47और प्रवासी खुद बोल रहा था
15:49पहली बार चुप नहीं रहा
15:52और शाम का केरल
15:54पचास साल में पहली बार
15:56बत्तियां कम जल रही थी
15:59इर्वी पेरूर
16:00वही गली, वही नीली छटे
16:03लेकिन इस बार
16:04दर्वाजे बंद
16:05खिरकी पर एक नई औरत
16:07और एक नई प्रतीक्षा
16:09शायद आखरी
16:10गोद में फोन
16:12और एक संदेश का इंतजार
16:14जो शायद कभी नहीं आएगा
16:16एक बूढ़ा चाय की दुकान पर
16:19उसने 1974 में पहली नाव देखी थी
16:22अब आखरी देख रहा है
16:24और एक चाया पुराने दफ्तर में
16:27तोयोटा सनी
16:291990 में जो किया
16:31आज कोई नहीं कर सकता
16:32क्योंकि उस वक्त एक सनी काफी था
16:35आज सनीयों की पूरी फौज चाहिए
16:37दोहा में एक नई पीढ़ी
16:40लैपटॉप पर पुराना नक्षा
16:43नई समस्या
16:44नौ देश
16:45नौ हजार कॉल
16:47और एक ही सवाल
16:48कब घर
16:49और एक पिता बेटे को नाव सिखा रहा
16:52पचास साल बाद फिर वही पाठ
16:5520 फीसद रेमिटेंस खत्रे में
16:57पचास हजार करोड
16:59केरल की रीड
17:00बैक वाटर पर शाम
17:02एक एक करके बत्तियां जल रही
17:04कुछ बत्तियां अब कभी नहीं जलेंगी
17:07हर बत्ती एक घर
17:09हर घर एक कहानी
17:11हर कहानी खाडी से शुरू
17:13एक दिल दो देश
17:15और एक आखरी छवी
17:17सूट केस
17:18सुभा, केरल की गली
17:21प्रवासी फिर निकल रहा है
17:23प्रवासी अब भी चल रहा है
17:41प्रवासी अब भी चल रहा है
17:45झाल
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