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Rami al-Jamarat is one of the most significant rituals performed during the annual Hajj pilgrimage in Islam. The ritual involves pilgrims throwing pebbles at symbolic walls in Mina near Mecca, representing the rejection of evil and the defiance of Satan. The practice is linked to Prophet Ibrahim’s unwavering faith and his resistance against Satan’s temptations while obeying Allah’s command. Today, millions of pilgrims perform the ritual at the specially designed Jamarat Bridge under strict safety and crowd-management arrangements by Saudi authorities.

हज यात्रा के दौरान निभाई जाने वाली ‘Rami al-Jamarat’ रस्म इस्लाम की सबसे महत्वपूर्ण और प्रतीकात्मक धार्मिक परंपराओं में से एक मानी जाती है। इस रस्म में हज यात्री मक्का के पास मीना में स्थित प्रतीकात्मक दीवारों पर कंकड़ मारते हैं, जो शैतान को ठुकराने और बुराई पर विजय का प्रतीक है। यह परंपरा हजरत इब्राहिम की उस अटूट आस्था से जुड़ी है जब उन्होंने अल्लाह के आदेश का पालन करते हुए शैतान के बहकावे को पत्थर मारकर अस्वीकार किया था। आज यह रस्म Saudi Arabia द्वारा बनाए गए आधुनिक Jamarat Bridge परिसर में लाखों श्रद्धालुओं द्वारा सुरक्षा और अनुशासन के साथ निभाई जाती है।

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~HT.318~GR.122~ED.106~VG.HM~
Transcript
00:08प्रती इसे को पत्थर मारना जिसे रमी अल्जमारत कहा जाता है एक बेहद महत्रपूर्ण पवित्र इस्लामी रसम है ये मेका
00:15के पास मीना शहर में निभाई जाती है इसमें हज यात्री तीन दिवारों के पहले खंबो पर कंकर मारते हैं
00:21जो शेटान का प्रतीक है ये रस्मा
00:23हसرت इबराहिम के बलिदान और अल्ला के प्रती अटूट निश्टा की याद में की जाती है
00:28जब अल्ला की हुकम पर वो अपने बेटे की कुर्बानी देने जा रहे थे
00:32तब शेतान ने उन्हें बहकाने की कोशिश की थी
00:34इबराहिम ने उसे पत्थर मार कर भगा दिया था
00:37यह रस्म बुराई के त्याग और विश्वास की जीत को दर्शाती है
00:40मेरा नाम है रिताना मित्तुल और आज में बताऊंगी आपको इस रस्म के बारे में
00:51इसलाम में हज यात्रा को जीवन के पांच संबों में से एक माना गया है
00:55और रमी अल्जमारत इस यात्रा का एक अनिवार्य हिस्सा है
00:59यह रस्म इद उल अहजा बकरीद से दिन शुरू होती है और अगले दो या तीन दिनों तक चलती है
01:04इस पूरी प्रक्विया को गहराई से समझने के लिए इसकी एतिहास भार्विक महत्व और आज के समय में इसकी अर्योजना
01:11कैसे करी जाती है उसको समझना जरूरी है
01:15एतिहासिक और धार्मिक प्रिष्ट भूमी के अरुसार ये प्रमपरा पेगामबर अबराहिम के जीवन से जुड़ी है
01:20माना जाता है कि अल्ला ने अबराहिम की परिक्षा लेने के लिए उनसे उनकी सबसे प्रियाचीज यानि उनकी बेटे हजरत
01:26इसमाईल की कुरबानी मांगी थी
01:28जब अबराहिम के आदेश को पूरा करने के लिए वजा रहे थे तो रास्ते में मीना के स्थन पर शेतान
01:33ने तीन अलग अलग जगाव पर उन्हें रोकने और अल्ला की आदेश की अवेल ना करने के लिए बहकाया
01:39उसने इबराहिम के मन में शंका पैदा करने ही कोशिश की कि कोई पिता अपने ही बेटेई करुबानी कैसे दे
01:44सकता है
01:45तब अल्ला के फृरिष्टे जबराहिम से कहा कि शैतान पर पत्थर फेक है
01:49इबराहिम ने जगा पर साथ साथ कंकर मार कर शैतान को दुटकार दिया और आगे बढ़ गए
01:54इबराहिम के इसी दृत संकल्प और अल्ला के प्रती उनकी अटूट शद्दा को याद करते हुए
02:00हर साल लाखो हज यातरी इस रस्म को धुराते हैं
02:03यह रस्म केवल एक शारी क्रिया नहीं है बलकि इसका बहुत गहरा अध्यात्मिक महत्व भी है
02:09पत्थर मारना इस बात का प्रतीक है कि इनसान अपने अंदर का लालच अहंकार और शैतानी प्रवतियों को दूर कर
02:15सकता है खुदी से
02:16यह रस्म यात्रियों को याद दिलाती है कि जीवन में जब भी बुराई या कोई गरत विचार उनके सही रस्ते
02:22से भटकाने की कोशिश करे तो उन्हें पूरी ताकत से उनका मुकाबला करना चाहिए
02:26आज के समय में भीड के प्रभंदन और सुरक्षा के लिए इस रस्म को बहुत व्यवस्तित रूप से दिया गया
02:33है
02:33साओधी अरब सरकार ने मीना में जमारत ब्रिज का निर्मान किया है जो एक बहु मनजला परीसर है
02:39पहले यहां केवल तीन कंबे हुआ करते थे लेकिन अब सुरक्षा कारणों से उनके जगा दिवारे बना दी गई है
02:45ताकि कंकड असानी से उपर लग सके और धुरकटनाओं की आशंका कम हो
02:50यात्री मीना के मैदान से छोटे-छोटे कंकड एक खटा करते हैं और ते नियमों के अनुसार उने निश्चित करम
02:56में दिवारों पर मारते हैं
02:57इस प्रकारी रस्म अनुशासन एक्ता और बुराई के खिलाफ सामूहिक संकल्प का एक बड़ा संदेश देती है
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