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  • 5 months ago
10/- Rs Maggi Noodles Street Food Tasty Masala Maggi Comedy Hindi Kahaniya Moral Stories

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Transcript
00:01गाउं का एक साधारन बस्ट है
00:03संजे हमेशा की तरह मुस्कुराते हुए
00:05अपनी मैगी की ठेला लगा रहा है
00:10बगल में ही रिशी की सबजी की दुकान है
00:12रिशी स्वभाव से थोड़ा चिड़ चड़ा है
00:14और अपने महेंगे बैंगन सजा रहा है
00:17ठेले पर एक छोटा सा बोर टंगा है
00:19संजे की मैगी सिर्फ 10 रुपे
00:22पेट भरेगा नियद भी
00:29रिशी गुस्से में ताना मारते हुए कहता है
00:31क्या तमाशा लगा रखा है संजे
00:3310 रुपे में मैगी
00:34बाजार में प्याज का भाव आसमान चू रहा है
00:37और तो 10 रुपे में दावत दे रहा है
00:39दिमाग खराब हो गया है कह तेरा
00:42अरे रिशी भाई
00:43मेरी मैगी में प्याज थोड़ा कम
00:45और प्याज जादा होता है
00:46इसलिए सस्ती है
00:48प्याज जादा है तो इन बैंगनों पे लगा के बेच
00:50सो रुपे के लो बिक रहे हैं ये
00:52ये दस-दस रुपे के चक्कर में
00:54दो दिन में बरतन बेच कर भागेगा तू
00:56देख ले न
00:59रिटा एक चुलबली कॉलेज स्टूडेंट
01:02अपना बैक टांगे वहा दी है
01:03संजे काका चल्दी से एक लेट मैगी देना
01:06क्लास के बाद पेट में चुहे कबड़ी खेल रहे है
01:09अभी लो बिटिया
01:10बस दो मिनिट में हाजिर
01:12संजे भूर्ती से एक ग्यास जला कर मैगी बनाता है
01:16और रिटा को देता है
01:18रिटा मज़े से खाती है
01:19वाह काका
01:20स्वात तो एकदम जगास है
01:22पर दस रुपे में आपको क्या बचता है
01:24ग्यास का खर्चा भी नहीं निकलता होगा
01:26संजे हस्ते हुए कहता है
01:28मुझे क्या बचाना है बिटिया
01:29तुम जैसों के चहरे की ये खुशी ही
01:31मेरी असली कमाई है
01:33सुन रही है रिटा
01:34ये बाबा जी का ज्यान दे रहा है
01:36पक्का कहीं से एक्सपायरी वाला माल
01:39या चोरी के पैकेट उठा के लाता है
01:40वरना दस रुपे में आज के जमाने में कौन देता है
01:43अरे रिशी अंकल
01:45आप भी न हमेशा शक करते
01:47संजे काका बहुत अच्छे है
01:49काका आप इनकी बातों पर ध्यान मद दो
01:51आपकी मैगी नमबर वन है
01:54संजे के ठेले पर अभी कोई ग्रहक नहीं है
01:58रिशी अपनी सबजियों पर पानी चड़क रहा है
02:00पारवती जो रिशी की पत्नी है
02:02एक टिफिन लेकर आती है
02:03थोड़ी तेज है लेकिन दिल की साफ है
02:07लो जी, खाना खा लो
02:11आज तुम्हारी पसंद की बैंगन की सबजी बनाई है
02:14रिशी खुश हो कर टिफिन लेता है
02:16आहाँ, पारवती, तेरे हाथ की बैंगन की सबजी के क्या कहने
02:22और टिफिन खोल कर खाना शुरू कर देता है, मैं कोड कर संजे तक जाती है, हो लंबी सांस खीचता
02:27है
02:27वाह, क्या खुजबू है, बैंगन की सबजी मुझे भी बहुत पसंद थी, जबसे मेरी घरवाली गई है, बैंगन का स्वाध
02:35ही भूल गया हूँ
02:37पारवधी तरस खाते हुए कहती है, अरे संजे भाया, तुम्हें बैंगन की सबजी पसंद है, तो कल मैं तुम्हारे लिए
02:43भी थोड़ी सी लियाओंगी
02:45क्या, सौ रुपए किलो के बैंगन इसे खिलाएगी, घर लोटाने का इरादा है क्या
03:05संजे के ठेले पर रीटा और दो तीन अन्ने लोग मैंगी खा रहे है, रिशी अपनी खाली दुकान पर बैठा
03:11जल भुन रहा है, रिशी खुद से बड़बडाते हुए कहता है
03:14मेरी दुकान पर मख्या भिन भिना रही है, और इसके यहाँ मेला लगा है, यह दस रुपए के चक्कर में
03:20मेरा धंदा चोपट कर रहा है, इसे तो सबक सिखाना ही पड़ेगा
03:24रिशी चुपके से अपनी दुकान से एक सड़ा हुआ कीड़े वाला बैंगन उठाता है, वो दबे पाओ संजे के ठेले
03:31के पास जाता है, और मैगी के भरतन में उसे डालने की कोशिश करता है, थभी संजे पलड़ जाता है
03:38संजे हरानी से कहता है, अरे रिशी भाई, ये सड़ा हुआ बैंगन मेरी मैगी में क्यों डाल रहे हो, मेरी
03:44मैगी में तो बैंगन नहीं पड़ता
03:45रिटा और बाकी लोग रुख जाते हैं, और रिशी को घूरते हैं, रिशी रंगे हाथों पकड़े जाने पर सकपका जाता
03:51है
03:59रिटा गुस्ते में कहती है, सड़े हुए बैंगन से स्वाद बढ़ेगा, रिशी अंकल, आपको शरम नहीं आती, संजे काका दस
04:05रुपे में सब का पेट भरते हैं, और आप जलन के मारे हो, उनके ठेला बंद करवाना चाते हो, रिशी
04:10शर्मिंदा हो कर सिर जुकाता है
04:12नहीं रिटा, मेरा ऐसा मतलब नहीं था, संजे रिटा को शांत करते हुए कहता है, कोई बात नहीं बिटिया, गुस्सा
04:19मत करो, लगता है रिशी भाई को भी जोरों की भूक लगी है
04:23क्या, मैं तेरी मैगी खराब करने आया था, और तू मुझे मैगी खिलाएगा
04:28संजे मुस्करा कर कहता है
04:29आपने मेरी मैगी खराब नहीं की रिशी भाई
04:32बस अपने बिना बिके बैंगनों का गुस्सा निकाला है
04:35लो ये गर्मा गरम मैगी खाओ
04:37गुस्सा थूख दो
04:39संजे का ठेला आज बंद है
04:40रिशी अपनी दुगान पर उदास बैठा है
05:01तभी रिटा आती है
05:02वो भी परिशान दिख रही है
05:05रिशी अंकल
05:06संजे काका कहा है
05:07मुझे उनकी वाली मैगी की बहुत याद आ रही है
05:10दस रुपए में बेचे गा तो यही होगा ना बेटा
05:12घाटे में आ गया होगा बेचारा
05:14बंद कर दी होगी थेली
05:16मैंने तो पहले ही कहा था
05:17कि यह धंधा नहीं तिकेगा
05:21तभी पीछे से एक जानी पहचानी आवाज आती है
05:24संजे खड़ा है
05:25थोड़ा थाका हुआ है
05:26पर चेहरे पर वही पुरानी मुस्कान है
05:29क्या बात है
05:30आज मेरी बहुत याद आ रही है सबको
05:33खाका
05:34कहां गायब थे दो दिन से
05:35हमने आपको कितना मिस्स किया
05:37कहीं नहीं बिटिया
05:38मौसम बदल रहा है न
05:40थोड़ा बुखार था तो घर पर ही आराम कर रहा था
05:43तो सच सच बता संजे
05:4510 रुपए में तुझे मिलता क्या है
05:47क्यों अपना नुकसान कर रहा है भाई
05:51संजे गंभीर होकर शांत स्वर में कहता है
05:54रिशी भाई बात पैसों की नहीं है
05:56सालों पहले मैं अपनी छोटी बेटी को लेकर
05:59शहर के अस्पताल गया था
06:01लोट्टे वक्त उसे भूख लगी
06:03एक थेले पर उसने मैगी खाने की जिद की
06:05लेट पचास रुपए की थी
06:07और मेरी जेब में वापसी के किराय के बाद
06:09सिरफ दस रुपए बचे थे
06:11जब मैं उसे रोता हुआ लेकर लोट रहा था
06:13तो एक अजनभी ने आगे बढ़कर
06:15उसे मैगी खरीद कर दी
06:20उस दिन मैंने तय किया था
06:21कि जब भी मैं कुछ काम करूँगा
06:23तो ये सोच कर करूँगा
06:25कि किसी की जेब में अगर सिरफ दस रुपए भी हो
06:27तो भी वो भूका ना लोटे
06:29मुझे शायद मुनाफ़ा नहीं होता
06:31पर जो सुकून मिलता है न
06:32वो लाखों रुपए से भी बढ़कर है
06:36रिशी आखों में आसू लिये कहता है
06:38मुझे माफ कर दे संजय
06:40मैं तो सरफ अपना फाइदा देख रहा था
06:42पैसों के लालच में मैंने इंसानिया
06:44तो देखी ही नहीं
06:45तो मुझसे बहुत बड़ा है भाई
06:48अरे रिशी भाई माफी कैसी
06:51हम सब पडोसी ही तो है
06:53और वैसे भी मुझे आपके बैंगन बहुत पसंद है
06:56चलो चलो ये सब छोडो
06:58संजय भाईया आज दोपहर का खाना हमारे घर पर
07:01तुम्हारे लिए मैं खुद गर्मा गरम बैंगन की सबजी बनाऊंगी
07:05संजय खोशो कर कहता है
07:07अरे वाह बैंगन की सबजी मज़ा आ जाएगा
07:10और मेरे लिए क्या काका मैं क्या खाऊंगी
07:14तुम्हारे लिए मेरी स्पेशल दस रुपे वाली मैंगी गर्मा गरम
07:18सब जोर से हस परते हैं
07:21संजय अपना गैस जलाता है
07:23रिशी एक सबसे बड़ा और एकदम ताजा बैंगन लाकर संजय के हाथ में रखता है
07:28ये ताजा बैंगन मेरी तरफ से संजय
07:31कल जब पारवती सबजी बनाएगी
07:32तो इसमें मेरी तरफ से थोड़ा प्यार भी मिला लेना
07:35संजय मुस्कुरा कर बैंगन ले लेता है
07:38बस स्टैंड पर फिर से वही रौनक लोटाती है
07:42तो देखा कोई भी काम छोटा या बड़ा नहीं होता
07:45भलकि उसे करने की नियत और भावना बड़ी होती है

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