00:00पर जब हम पूरे वैश्विक पटल पर देखते हैं तो हम देखते हैं कि भारत सबसे कम बढ़ातरी वाला देश
00:05अभी बना हुआ है अमेरिका में अगर हम देखे 40-50% आस्ट्रेलिया आस्ट्रिया जैसे देशों में भी आप देखेंगे
00:12आंकड़ा यही 50% तक नजर आने वाल
00:28है तो केम तो में बढ़ातरी मिली बिल्कुल मुकुन साथ वान इंडिया पे हो इसलिए इस बात को ज्यादा इस
00:36परस्ता से बोल सकता हूं कि जो तमाम दूसरे जो निउस चैनल्स हैं वो यह क्या रहें कि हमारे यहां
00:41पे बहुत कम ही बढ़ा है इसलिए खोश हो जाना चाह
00:58करिता था तब युनाइटिट स्टेट सब्तर रुपें में करिता था इंडियन रुपीज की बात कर रहा हूं और ऐसे मैं
01:04भारत के आदमी के आया देखिए एक अमरिकान के आया देखिए बहुत ज्यादा फरक है तो भारत पे इसका असर
01:10होगा दूसरी बात यह कि चीन और �
01:12भारत की तुलना करें तो चीन केबल अपनी जरूतों का 50% के क्या आसपास बैड सब्साकर करता है वो
01:25पत्यास प्रतीशन प्छ?
01:26कुछ और दूसरे साथ नौस है जिसमें पंद बिचली है या वो सौर उज्जा है या तमाम चीज़ा है भारत
01:34सौर उज्जा के मामले में क्योंकि एक अपनी जोग्रिफिकल कंडिशन के कारण का पर बुरी खबर यह कि भारत में
01:41हमारी जो पेट्रोलियम पे जो उज्जा के मा
01:56अच्छी खबर नहीं है क्योंकि इसका असर भारत की जीडीपी और ऑल अवर भारत की डेलप्मेंट पर भी पड़ेगा और
02:02इससे वे लोग सारे बरी हो जाते हैं जिनों ने भारत की एनर्जी सेक्यूर्टे के लिए कुछ नहीं किया जो
02:10खासकर पश्ची में खेमे ने भार
02:24अच्छी में भारत को हमेशा से मुक्साम हुआ है कहीं न कहीं तो कांटर करना पड़ेगा न हमें या कुछ
02:29ऐसी चीज है कि जहां नहीं तो भारत का डेलप्मेंट हो जाएगा बिना उर्जा के कौन सा विकास उर्जा है
02:37तभी तो विकास होगा तो यह सब चीजों का जवा�
02:53पूल, डीजल, उसके बाद CNG और फिर दूद की कीमते हैं यह तीन चार फैक्टर्स हैं तीन चार ऐसे रोज
02:59मर्रा की जरूरते हैं जिनकी कीमतों में बढ़ात की हमने देख लिए आर्थिक, तूफान, खिस्तिति जो प्रधान मंतरी खुद भी
03:05कहते हैं वो नजर आ रहा है
03:06और कौन से आप कह सकते हैं ऐसे प्रोड़क्ट आने वाले वक्त में क्योंकि इनमें ही दूसरी चीजों की कीमतों
03:12बढ़ने की कह सकते हैं बिसाच छिपी होती है, कोई सीधा सीधा आप ऐसा कोई समान, कोई ऐसा प्रोड़क्ट देख
03:18पा रहे हैं जो कि आने वाले दिनों मे
03:19और महंगा होने वाला है
03:20इसी आर्थिक को था पुथल के बाद
03:24जीजी जो सबसे मैधफून है
03:25वो तो औरवराग पेट्रॉलियम है ही
03:27पर ये है कि
03:30केवल इन प्रोड़क्ट के दाहम बढ़ने कई नहीं है
03:32और चीज पर असर होगा
03:34मुकुन साब जैसे कि
03:35जो हमारे जो गुजरात में
03:37जो कार खाने चलता है
03:40जा प्रोड़क्शन होता है
03:41तो वो पेट्रॉल ये माधारी तक है
03:43तो अगर वहां नहीं है
03:45पेट्रॉल पासकर अंबानी साहब के
03:48है ना तो उनके अगर नहीं है
03:49तो उनके सारी की सारी जो इंडस्ट्रीज ने वो ठब पढ़ जाएगी तो मुश्किल हो जाएगा वहां पर ऐसा खाली
03:56गुज्रात का ही मामला नहीं है तमाम क्योंकि गुज्रात एक तरीके से व्यापार और सब चीजियों के मामले में अग्रणी
04:03है समुद्र के नजदिक भी
04:04है और और काफी भारत के तमाम जो खास कर आप देखिए जो हमारे दिल्ली आसवास नोईडा गुर्गा में जो
04:12काम करते महां पर प्रोडक्शन की पॉस्ट बढ़ेगी तो घटेगा इसका असर आप हर इंडस्ट्री पे देख रहे हैं क्या
04:19हॉस्पिटिलिटी इंडस्ट्र
04:20पर इसका असर नहीं आ रहा है जहनत तोर पर आ रहा है दाम बढ़ने से आप देखेंगे कि लोगों
04:27ने घूमना कम कर दिया है तो उसका असर होगा शायद ही कोई ऐसा कुछ बड़े इस तर पर हम
04:34सीधा-सीधा कह सकते हैं कि ओल वर यह वो कुछ नाम गिना के कह सकते हैं कि ह
04:40इसका असर व्यापक होगा और एक तरीके से जो सच बात है कि कहीं न कहीं उस बात में सच
04:56तो है
04:57बिल्कुल मुकुद साहब जो सुरुई साहब ने जो बात कि उनमें से काफी मैथ़ून बात यह है कि जो नेवल
05:05ब्लॉकेड लगाए गया है वो किस के लिए जब चीनी जहाद जा रहे हैं दक्षिन कोरिया जा जा रहे हैं
05:11तो क्या भारत के लिए नेवल ब्लॉकेड है तो �
05:14यह अपने आप में काफी मैथफून बात हैं दूसरी बात यह कि अमेरीका इस लड़ाई को किस हद तक ले
05:21जाना चाहेगा या क्या युद्ध या हमले की जो हम आशंका जता रहे हैं पहली बात तो यह है कि
05:27जो अमेरिकन कॉंग्रेस है उसमें उस युद्ध को जायज नहीं
05:41कम है पर यह है कि अगर उन्हें कुछ आगे नहीं करना है तो वहां से उनके वार्शिप्स वहां से
05:47रवाना हो चुके होते हैं जब तक कि खासकर जो दक्षिंग चीन सागर में अमेरीका की इस्तती या उपस्तिती बहुत
05:55ही कम हो गई है वहां से सारे वार्शिप्स और सारे
05:59जो स्थानी कोंग को इधर मंगाने के बाद में काफी वहां पे
06:02अमरीका थोड़ा सा कम जो रिस्ति में आ गया है
06:05चीन के मुकाबले और वहां पे भी चैलेंजेस कम नहीं है
06:08अमरीका के लिए यह हैं
06:10तो प्रिजिडेंट ट्रम भले तुरंट कुछ न करें
06:13पर अगर आने वाले समय में वह हमला करते हैं
06:16तो उसके कोई नुकसान नहीं है उनको कोई कास
06:18कारण यह कि ऐसा है कि अमरीका वो इरान से प्रितिक्रिया का उन्हें डर होती है
06:24प्रितिक्रिया यही हो सकती है कि वह आस पास के जो तमाम उसके
06:27जो अमेरिक किसानिक अड़े हैं उस पर हमला करेगा और उस पर काफी नुकसान भी पहुंचा है पर अमरीका को
06:33अगर फुल एंड फाइनल लड़ाई लड़नी है तो वह उसके लिए वो सारे जोखिम और जो तैयारिया चाहिए वो अमरीका
06:41करेगा तो इसमें कोई दोराय नही
06:42हैं पर देखते हैं अभी फिलाल तुरंटना हो पर अगर वहां से लंबे समय तक यह नहीं हटता है तो
06:49किसी दिन योजना बना कर अमेरिका इरान के हमला कर सकता है इसकी समावना पूरी-पुरी है और इरान इसी
06:56की तयारी कर रहा है मुकुल सार्थ
06:58हमले की सर्थ अगर हम बात करते हैं हमला तो पहले भी हुआ है और दोनों पक्षों से हुआ है
07:03तो सर्थ वो कौन सा हमला हम समझने कोशिश करें कैसे समझें कि वो आखरी पड़ाव होगा उसके बाद कोई
07:09युद्ध नहीं होगा या तो इरान पीछे हट जाएगा या फिर �
07:12ट्रम्प ही मानने लेंगे कि इसके बाद अवें कोई अटेक नी करना उसके सर्थ जोलंतदा कितनी होनी चाहिए या कैसा
07:17हम देख सकते हैं भविश्य में अगर ऐसा ही महाल रहा देखिए यह हमले होंगे वो होते रहेंगे लंबे समय
07:25तक होते रहेंगे और अभी हुआ फिर
07:39ही देशों के हित अलग है जब तक अमेरिका में जो नियो कॉलोनियल पोर्सेज वहां पे ताकतवर हैं और वो
07:46रहेगी कापी लंबे समय तक क्योंकि कोर्परेट्स के हित उससे जुड़े हुए हैं तो बहुत हम क्यायते हैं कि दोनों
07:53ही देशों में कोई स्थाई समझोता हो
08:09कोई प्रभाव न हो जो कि कॉर्परेट्स खराने वगरा तब यह हो सकता है पर यह कभी होने वाला नहीं
08:16है या कि इरान में कोई ऐसी सरकार बन जाए जो प्रो अमेरिकन हो जैसे रेजा पहल भी वगरा इनको
08:23वहां पे प्लांट करने की कोशिश की गई थी पर इरान की जंत
08:39स्वास्थिक्ता को हमें साथ में लेकर ही हमें मानना पड़ेगा और कोई बहुत लंबी या एप्सुलूट लड़ाई हो जाएगी इसकी
08:47संभावना काम है यूँकि दोनों ही देश और वो पूरा ही क्षेत्र इस स्थति में है नहीं एक तम एप्सुलूट
08:54लड़ाई की ज�
09:08हुआ
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