00:00प्धान मंत्री नरेंद्र मोदी की नौर्वे यात्रा के दोरान एक पत्रकार का नाम अचानक पूरी दुनिया में चर्चा का विशय
00:06बन गया
00:06वजे बनी उसके एक टिपनी जिसके बाद सोशल मीडिया पर ऐसा माहौल बनाया गया जैसे भारत में प्रेस की आजादी
00:13खत्म हो चुकी है और नौर्वे लोकतंत्र का सबसे बड़ा आदर्श बन कर खड़ा है
00:18लेकिन क्या सचमुच तस्वीर इतनी सीधी और एक तरफा है क्या भारत और नौर्वे की तुलना उसी तरह की जा
00:25सकती है जैसे सोशल मीडिया पर दिखाई जा रही है और क्या वो फ्री प्रेस इंडेक्स होता क्या है जिसके
00:31आधार पर हर साल देशों को नमबर दिये जाते
00:34है आज के इस रपोर्ट में हम तत्यों के साथ समझेंगे कि आखिर पूरा मामला क्या है नौर्वे लगतार फ्री
00:41प्रेस इंडेक्स में नमबर वन कैसे बनता है उसका चयान कौन करता है उसकी प्रक्रिया क्या होती है और भारत
00:47तथा नौर्वे की तुलना करना कितना वैभ
01:19नमस्कार मेरा नाम है रिचापराशर और आप देख रहे हैं वन इंडिया हिंदू
01:22प्रेस कॉन्फरेंस नहीं थी, वह एक प्रेस ब्रीफिंग थी, दोनों चीजों में जमीन और आस्मान का फर्क होता है।
01:37जबकि प्रेस कॉन्फरेंस में खुला समवाद होता है जहां पत्रकार लगतार सवाल पूछते हैं और जवाब दिये जाते हैं
01:44डिप्लोमेटिक विजिट्स में अकसर ऐसा होता है कि पहले एक सिमित प्रेस ब्रीफिंग रखी जाती है जहां केवल तय एजेंडे
01:50पर बाचीत होती है बहाँ प्रोटोकॉल बेहद सख्त होते हैं
01:55लेकिन सोचल मीडिया पर इस फर को लगभग गायब कर दिया गया और ऐसे नेरेटिव तयार किया गया मानों किसी
02:01पत्रकार की आवाज दबा दी गई हो
02:04दल्चस बात ये रही कि बाद में जब आपचारिक प्रेस कॉनफरेंस हुई तब वही पत्रकार वहाँ से पानी के बहाने
02:10बैग उठा कर 9-11 हो गई
02:12यानि जिस मुद्दे को लेकर सोचल मीडिया पर घंटों बहस चलाई गई उसमें भी आधी तस्वीर ही दिखाई गई
02:33प्रीडम इंडेक्स जारी करती है इसी में नौर्वे कई सालों से पहले नंबर पर रहता है लेकिन यहां समझने वाली
02:40बात यह है कि यह कोई संयुक्त राष्ट या फिर अंतराष्ट्रिय अदालत का अधिकारिक सरकारी इंडेक्स नहीं है यह नीजी
02:48संस्था द्वारा तय
02:49प्यार किया गया इंडेक्स है जो कई पैरामेटर्स पर देशों का मुल्यांकन करती है तो अब सवाल उड़ता है कि
02:55चैन प्रक्रिया क्या होती है
02:57इस संस्था के पास अलग-अलग देशों के विशशग्य, चोध करता, समाजी कारे करता और मीडिया से जुरे प्रशनावली भरते
03:05हैं
03:05उसके बाद राजनितिक माहौल, पत्रकारों की सुरक्षा, मीडिया पर अर्थिक दबाब, कानूनी धाचा, इंटरनेट स्वतंतरता और सेंसर्शिप जैसे पैरामेटर्स पर
03:15स्कोर दिया जाता है
03:16यानि ये पूरी तर है, डेटा अधारित, मशीन स्कोरिंग नहीं होती, बलकि काफी हद तक परसेप्षन, यानि धाराओं पर भी
03:24अधारित होती है
03:26इसके एक साधारन स� referenced, भारत में दो तरह की मीडिया है, जो एक पर्टी को सपोर्ट कर सकती है
03:33और दूसरी चोंडूसरी पार्टी को सपोर्ट कर सकती है
03:35आला कि मीडिया का ये काम नहीं, मीडिया को न्यूट्रल होना होता है, लेकिन आपको पता है विचारधारा इस देश
03:39में या फिर दुनिया में कहीं न कहीं एक जैसी ही है, तो अगर मुझे किसी free press index के
03:45लिए अगर बिठाया जाएगा, guest बना के या उसका member बना के, तो शायद �
03:49वहाँ पर मेरा जो thought process है, वो भी वहाँ पर दिखाई पड़ सकता है, इसलिए कई बार अलग-अलग
03:55संस्थाओं की ranking में बड़ा अंतर दिखाई जेता है, यानि कि जो free press index एक संस्था देती है, जरूरी
04:02नहीं है कि वो दूसरी भी दे, और सबसे बड़ी बात किये को international regulatory body द्
04:06ये नीजी संस्था द्वारा दिये जाता है, उदाहरेन के तौर पर कुछ अंतराश्य संस्थाएं भारत को लोक्तांतरिक मजबूती और digital
04:13पहुंच के मामले में सकरात्मक rating देती है, जबकि दूसरी संस्थाएं press freedom पर सवाल उठाती है, उसका बतलब ये
04:20है कि कोई भी index अंत
04:34देशों में गिना जाता है, वहां कि आबादी लगभग 55 लाग है, क्राइम रेट कम है, सामाजिक असमानता कम है
04:41और सरकारी संस्थानों पर लोगों का भरोसा बहुत ज्यादा है, वहां मीडिय संस्थानों को सरकारी और सामाजिक स्तर पर काफी
04:48सुरक्षा और आर्थिक स्�
04:53संख्या बहुत ही सिमित है, भाषाई विविदिता बहुत कम है और राजुनितिक द्रोवी करण भी भारत जैसा तो बिल्कुल भी
05:00नहीं है, इसलिए वहां मीडिया एको सिस्टम का मैनेज करना अप एक शकृत बेहद आसान होता है, अब भारत को
05:07देखिए, भारत दुनिया
05:20हैं, डिजिटल पोर्टल हैं, सोशल मीडिया प्लाटफॉर्म से एक्टिव हैं, और हर दूसरा व्यक्ति फिलाल, क्योंकि उसके हाथ में फोन
05:27है, और डिजिटल इंडिया की वज़े से हर दूसरा व्यक्ति व्लॉगिंग कर रहा है, और कहीं न कहीं सोशल मुद्दों
05:32को भी
05:33उठा रहा है और पत्रकार भी बन जा रहा है भारत में हर दिल धान मंत्री मुख्य मंत्री सेन अन्या
05:40इपालिका विपक्ष चुनाव आयोग और यहां तक कि खुद मीडिया संस्थानों के भी खुलकर आलोचना होती है
05:45टीवी डिबेट्स में लगतार सरकार के खिलाफ तीखी बहसे रोज दिखाई देती हैं सोशल मीडिया पर ट्रेंड्स चलते हैं मींस
05:52बनते हैं सरकार पर सवाल उठते हैं
05:54अगर कोई देश पूरी तरह से प्रेस को दबा रहा होता है तो क्या वहां रोज एतने खुले राजनीतिक विवाद
06:00दिखाई देते हैं
06:01चलिए ये सब भी अटा देजिए प्रधार मंतरी की बात करते हैं
06:18उस पद्र की पर बैठे व्यक्ती की अलोशना करते करते हूं उस पद्र की भी अलोशना करने लगते हैं लोग
06:22तो ये फ्री प्रेस कहां दबा हुआ है भाय बारत में हर दूसरा व्यक्ती जो चाहए वो बोल सकता है
06:29धान मंतरी तक को अबी� lost कर देते हैं लोग
06:33तो मुझे नहीं लगता है कि प्रेस की कहीं जो समानता है वहाँ पर दबी हुई है
06:39इसका मतलब यह नहीं कि भारत में चुनौतिया नहीं है
06:41पत्रकारू की सुरक्षा, फेक निउस, ट्रोलिंग, राजुनितिक दबाब और मीडिया के कॉर्पोरेट नियंत्रम जैसे मुद्धे भारत में भी मौजूद है
06:49लेकिन केवल चुनौतियों को दिखाकर पूरे मीडिया सिस्टम को अनफ्री घोशित कर देना भी पूरी तस्वीर तो नहीं हो सकती
06:56एक और बड़ा पर्क है जनसंख्या और स्केल का
06:59भारत की सिर्फ दिल्ली की आबादी ही नौर्वे से कई गुणा ज्यादा है
07:05तो अगर आप फ्री प्रेस इंडेक्स में अगर नौर्वे और भारत को कमपेर कर रहे हैं
07:09तो यह बिल्कूल भी मुझे नहीं लगता है कि यह राइट कॉमपेरिजन होगी
07:12तो सिर्फ आप दिल्ली की मीडिया से और नौर्वे की मीडिया को कमपेर कीजिए
07:16फिर भी दिली का population जादा है, पत्रकार दिली में ज्यादा है, सिर्फ पूरे नौर्वे से पत्रकार ज्यादा दिली में
07:22है
07:22तो comparison किस बात की आप कर रहे हैं?
07:24भारत में हर राज्य अपने आप में कई देशों जितना वड़ा है
07:28उत्तर प्रदेश अकेले कई यूरूपिय देशों से ज्यादा आबादी वला राज्य है
07:32ऐसे में मीडिया से जुड़े विवादों, कानून, विवस्था और राजनितिक दबाव का स्तर भी अलग-अलग होगा
07:37भारत में नकसल प्रभावी शेत्र है, सीमावर्ती इलाके है, आतंकवाद प्रभावी शेत्र है, संप्रदाईक तनाव वाले इलाके है
07:46यहां मीडिया को कई बार सुरक्षा एजिंसियों, स्थानिय राजनिति और जमीनी हिंसा जैसी जटिल परिस्तितियों में काम करना पड़ता है
07:53वहीं नौरवे, अपेक्षा कृत, शान और स्थिर समाच है
07:57इसलिए दोनों देशों की तुलना एक ही पैमाने पर करना कई विशेशग्यों को भी तरक संगत नहीं लगता है
08:05अब जरा सोशल मीडिया की राजनिति को भी समझे
08:07आज के दौर में किसी भी अंतराश्ट्रियमंच पर भारत को लेकर अगर कोई अलचनात्मक बयान आता है
08:14तो कुछ लोग उसे तुरंद भारत की हार और लोकतंतर खतम होने जैसी नेरेटिव में बदल देते हैं
08:20वहीं दूसरी तरफ कुछ लोग हर विदेशी आलोचना को साजिश बता देते हैं
08:24जबकि सचाई अकसर इन दोनों के बीच कहीं होती है
08:27बिल्कुल ग्रे और वाइट और ब्लैक तो नहीं हो सकता है
08:50अचानक उनका नाम ट्रेंड करने लगा कुछ लोगों ने उन्हें फ्री प्रेस की आवाज कहा तो कुछ ने एजिंडा पत्रकार
08:55भी बताया
08:56लेकिन एक बात तो साफ है इस पूरे विवाद से सबसे ज्यादा अंतराष्ट्रिय पब्लिसिटी उसी पत्रकार को मिली
09:02तो अब सवाल पूछना गलत नहीं है पत्रकारिता का मूल काम ही है सवाल पूछना लेकिन पत्रकारिता को एक्टिविस्म के
09:10बीच एक बारीक रेखा होती है
09:12जब किसी घटना को आधा दिखा कर पूरा नेरेटिव बनाया जाए तब विवाद खड़ा होना स्वभाविक है
09:17विदेश मंत्राले की तरफ से भी यही कहा गया कि कारक्राम का स्वरूप प्रेस ब्रीफिंग था नकी खुली प्रेस कॉन्फरेंस
09:23यानि प्रोटोकोल पहले से तय थे लेकिन सोशल मीडिया पर इस तक्नीकी अंतर को लगभग नजर अंदास कर दिया एक
09:31और दिल्चस्प बात समझे पशिमी देशों में भी प्रेस और सत्ता के बीच टक राव होते हैं
09:36अमेरिका में वाइट हाउस प्रेस ब्रीफिंग के दौरान कई बार पत्रकारों को रोका गया है यूरूप में भी राष्टिय सुरक्षा
09:42आतंकवाद और यूद जैसे मामलों में मीडिया एकसिस्सिमित किया जाता है लेकिन जब वही चीज़ भारत में होती है तो
09:48उसे कई
09:49बार लोकतंद्र खत्रे में है कि तरहें पेश कर दिया जाता है भारत में आज डिजिटल मीडिया का वस्पोर्ट हुआ
09:56है कोई भी व्यक्ति मोबाइल फोन से सरकार की आलोचना कर सकता है वीडियो बना सकता है लाई जा सकता
10:02है लाखो राजजितिक content creators खुले तोर पर हर वि
10:18चुनाती दुनिया के लगवग हर लोकतंद्र के सामने है अमेरिका से लेकर यूरोप तर हर जखे सरकारे सोशल मीडिया रेगुलेशन
10:25और फेक नियूस से जूज रही है असल मुद्द यही है कि भारत और नौर्वे दो बिलकुल अलग सामाजिक राजनीतिक
10:33और जनसंख्य
10:33वाले देश है एक छोटा स्केंडिनेविया देश और दूसरी दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंद्र दूनों की चुनातिया मीडिया संरचना और
10:41सामाजिक जटिलताएं बिलकुल अलग अलग है इसलिए नौर्वे नंबर वन भारत पीछे हो सकता है जैसी लाइने सुनने म
10:48भले ही आकर्शक लगें लेकिन वास्तविक्ता उससे कहीं ज्यादा जटिल है और शायद यही वज़े है कि प्रेस फ्रीडम जैसे
10:56विशयों पर केवल रैंकिंग देखकर निशकर्श निकालना परयाप्त हो ही नहीं सकता किसी भी देश की वास्तविक स्थिती समशने के
11:04लि
11:16मीडिया और सोशल मीडिया तीनों एक दूसरे से गहराई से जुड़े हुए हैं और कई बाद एक छोटा सा सवाल
11:22भी वैश्विक बहस का रूप ले लेता है इस खबर में इतना ही लेकिन आप क्या सोचते हैं कि भारत
11:28और नौर्वे की प्रेस फ्रीडम की तुलना करना सही ह
11:31है हमें कॉमेंट करके जरूर बताईएगा और हमारा एक्स्प्लेनेशन पर आप क्या सोचते हैं ये भी अपने विचार जरूर बताईएगा
11:37और देश-दुनिया की बाके खबरों के लिए देखते रहे हैं वन इंडिया हिंदू
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