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Norway Press Index पर PM Modi के दौरे के बाद क्यों छिड़ी बड़ी बहस, क्या है पूरा सच? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नॉर्वे यात्रा के दौरान ओस्लो प्रेस ब्रीफिंग में पत्रकार हेले लिंगे के सवाल और उनके अचानक बाहर जाने के बाद अंतरराष्ट्रीय नैरेटिव पर कई बड़े सवाल खड़े हो गए हैं।

Following PM Narendra Modi's official visit to Oslo, a major global debate erupted over the World Press Freedom Index and the conduct of Norwegian journalist Helle Linge during a strict diplomatic press briefing.




#PressFreedomIndex #PMModiNorwayVisit #IndiaVsNorway #HelleLinge

~HT.178~PR.514~ED.104~GR.508~VG.HM~

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00:00प्धान मंत्री नरेंद्र मोदी की नौर्वे यात्रा के दोरान एक पत्रकार का नाम अचानक पूरी दुनिया में चर्चा का विशय
00:06बन गया
00:06वजे बनी उसके एक टिपनी जिसके बाद सोशल मीडिया पर ऐसा माहौल बनाया गया जैसे भारत में प्रेस की आजादी
00:13खत्म हो चुकी है और नौर्वे लोकतंत्र का सबसे बड़ा आदर्श बन कर खड़ा है
00:18लेकिन क्या सचमुच तस्वीर इतनी सीधी और एक तरफा है क्या भारत और नौर्वे की तुलना उसी तरह की जा
00:25सकती है जैसे सोशल मीडिया पर दिखाई जा रही है और क्या वो फ्री प्रेस इंडेक्स होता क्या है जिसके
00:31आधार पर हर साल देशों को नमबर दिये जाते
00:34है आज के इस रपोर्ट में हम तत्यों के साथ समझेंगे कि आखिर पूरा मामला क्या है नौर्वे लगतार फ्री
00:41प्रेस इंडेक्स में नमबर वन कैसे बनता है उसका चयान कौन करता है उसकी प्रक्रिया क्या होती है और भारत
00:47तथा नौर्वे की तुलना करना कितना वैभ
01:19नमस्कार मेरा नाम है रिचापराशर और आप देख रहे हैं वन इंडिया हिंदू
01:22प्रेस कॉन्फरेंस नहीं थी, वह एक प्रेस ब्रीफिंग थी, दोनों चीजों में जमीन और आस्मान का फर्क होता है।
01:37जबकि प्रेस कॉन्फरेंस में खुला समवाद होता है जहां पत्रकार लगतार सवाल पूछते हैं और जवाब दिये जाते हैं
01:44डिप्लोमेटिक विजिट्स में अकसर ऐसा होता है कि पहले एक सिमित प्रेस ब्रीफिंग रखी जाती है जहां केवल तय एजेंडे
01:50पर बाचीत होती है बहाँ प्रोटोकॉल बेहद सख्त होते हैं
01:55लेकिन सोचल मीडिया पर इस फर को लगभग गायब कर दिया गया और ऐसे नेरेटिव तयार किया गया मानों किसी
02:01पत्रकार की आवाज दबा दी गई हो
02:04दल्चस बात ये रही कि बाद में जब आपचारिक प्रेस कॉनफरेंस हुई तब वही पत्रकार वहाँ से पानी के बहाने
02:10बैग उठा कर 9-11 हो गई
02:12यानि जिस मुद्दे को लेकर सोचल मीडिया पर घंटों बहस चलाई गई उसमें भी आधी तस्वीर ही दिखाई गई
02:33प्रीडम इंडेक्स जारी करती है इसी में नौर्वे कई सालों से पहले नंबर पर रहता है लेकिन यहां समझने वाली
02:40बात यह है कि यह कोई संयुक्त राष्ट या फिर अंतराष्ट्रिय अदालत का अधिकारिक सरकारी इंडेक्स नहीं है यह नीजी
02:48संस्था द्वारा तय
02:49प्यार किया गया इंडेक्स है जो कई पैरामेटर्स पर देशों का मुल्यांकन करती है तो अब सवाल उड़ता है कि
02:55चैन प्रक्रिया क्या होती है
02:57इस संस्था के पास अलग-अलग देशों के विशशग्य, चोध करता, समाजी कारे करता और मीडिया से जुरे प्रशनावली भरते
03:05हैं
03:05उसके बाद राजनितिक माहौल, पत्रकारों की सुरक्षा, मीडिया पर अर्थिक दबाब, कानूनी धाचा, इंटरनेट स्वतंतरता और सेंसर्शिप जैसे पैरामेटर्स पर
03:15स्कोर दिया जाता है
03:16यानि ये पूरी तर है, डेटा अधारित, मशीन स्कोरिंग नहीं होती, बलकि काफी हद तक परसेप्षन, यानि धाराओं पर भी
03:24अधारित होती है
03:26इसके एक साधारन स� referenced, भारत में दो तरह की मीडिया है, जो एक पर्टी को सपोर्ट कर सकती है
03:33और दूसरी चोंडूसरी पार्टी को सपोर्ट कर सकती है
03:35आला कि मीडिया का ये काम नहीं, मीडिया को न्यूट्रल होना होता है, लेकिन आपको पता है विचारधारा इस देश
03:39में या फिर दुनिया में कहीं न कहीं एक जैसी ही है, तो अगर मुझे किसी free press index के
03:45लिए अगर बिठाया जाएगा, guest बना के या उसका member बना के, तो शायद �
03:49वहाँ पर मेरा जो thought process है, वो भी वहाँ पर दिखाई पड़ सकता है, इसलिए कई बार अलग-अलग
03:55संस्थाओं की ranking में बड़ा अंतर दिखाई जेता है, यानि कि जो free press index एक संस्था देती है, जरूरी
04:02नहीं है कि वो दूसरी भी दे, और सबसे बड़ी बात किये को international regulatory body द्
04:06ये नीजी संस्था द्वारा दिये जाता है, उदाहरेन के तौर पर कुछ अंतराश्य संस्थाएं भारत को लोक्तांतरिक मजबूती और digital
04:13पहुंच के मामले में सकरात्मक rating देती है, जबकि दूसरी संस्थाएं press freedom पर सवाल उठाती है, उसका बतलब ये
04:20है कि कोई भी index अंत
04:34देशों में गिना जाता है, वहां कि आबादी लगभग 55 लाग है, क्राइम रेट कम है, सामाजिक असमानता कम है
04:41और सरकारी संस्थानों पर लोगों का भरोसा बहुत ज्यादा है, वहां मीडिय संस्थानों को सरकारी और सामाजिक स्तर पर काफी
04:48सुरक्षा और आर्थिक स्�
04:53संख्या बहुत ही सिमित है, भाषाई विविदिता बहुत कम है और राजुनितिक द्रोवी करण भी भारत जैसा तो बिल्कुल भी
05:00नहीं है, इसलिए वहां मीडिया एको सिस्टम का मैनेज करना अप एक शकृत बेहद आसान होता है, अब भारत को
05:07देखिए, भारत दुनिया
05:20हैं, डिजिटल पोर्टल हैं, सोशल मीडिया प्लाटफॉर्म से एक्टिव हैं, और हर दूसरा व्यक्ति फिलाल, क्योंकि उसके हाथ में फोन
05:27है, और डिजिटल इंडिया की वज़े से हर दूसरा व्यक्ति व्लॉगिंग कर रहा है, और कहीं न कहीं सोशल मुद्दों
05:32को भी
05:33उठा रहा है और पत्रकार भी बन जा रहा है भारत में हर दिल धान मंत्री मुख्य मंत्री सेन अन्या
05:40इपालिका विपक्ष चुनाव आयोग और यहां तक कि खुद मीडिया संस्थानों के भी खुलकर आलोचना होती है
05:45टीवी डिबेट्स में लगतार सरकार के खिलाफ तीखी बहसे रोज दिखाई देती हैं सोशल मीडिया पर ट्रेंड्स चलते हैं मींस
05:52बनते हैं सरकार पर सवाल उठते हैं
05:54अगर कोई देश पूरी तरह से प्रेस को दबा रहा होता है तो क्या वहां रोज एतने खुले राजनीतिक विवाद
06:00दिखाई देते हैं
06:01चलिए ये सब भी अटा देजिए प्रधार मंतरी की बात करते हैं
06:18उस पद्र की पर बैठे व्यक्ती की अलोशना करते करते हूं उस पद्र की भी अलोशना करने लगते हैं लोग
06:22तो ये फ्री प्रेस कहां दबा हुआ है भाय बारत में हर दूसरा व्यक्ती जो चाहए वो बोल सकता है
06:29धान मंतरी तक को अबी� lost कर देते हैं लोग
06:33तो मुझे नहीं लगता है कि प्रेस की कहीं जो समानता है वहाँ पर दबी हुई है
06:39इसका मतलब यह नहीं कि भारत में चुनौतिया नहीं है
06:41पत्रकारू की सुरक्षा, फेक निउस, ट्रोलिंग, राजुनितिक दबाब और मीडिया के कॉर्पोरेट नियंत्रम जैसे मुद्धे भारत में भी मौजूद है
06:49लेकिन केवल चुनौतियों को दिखाकर पूरे मीडिया सिस्टम को अनफ्री घोशित कर देना भी पूरी तस्वीर तो नहीं हो सकती
06:56एक और बड़ा पर्क है जनसंख्या और स्केल का
06:59भारत की सिर्फ दिल्ली की आबादी ही नौर्वे से कई गुणा ज्यादा है
07:05तो अगर आप फ्री प्रेस इंडेक्स में अगर नौर्वे और भारत को कमपेर कर रहे हैं
07:09तो यह बिल्कूल भी मुझे नहीं लगता है कि यह राइट कॉमपेरिजन होगी
07:12तो सिर्फ आप दिल्ली की मीडिया से और नौर्वे की मीडिया को कमपेर कीजिए
07:16फिर भी दिली का population जादा है, पत्रकार दिली में ज्यादा है, सिर्फ पूरे नौर्वे से पत्रकार ज्यादा दिली में
07:22है
07:22तो comparison किस बात की आप कर रहे हैं?
07:24भारत में हर राज्य अपने आप में कई देशों जितना वड़ा है
07:28उत्तर प्रदेश अकेले कई यूरूपिय देशों से ज्यादा आबादी वला राज्य है
07:32ऐसे में मीडिया से जुड़े विवादों, कानून, विवस्था और राजनितिक दबाव का स्तर भी अलग-अलग होगा
07:37भारत में नकसल प्रभावी शेत्र है, सीमावर्ती इलाके है, आतंकवाद प्रभावी शेत्र है, संप्रदाईक तनाव वाले इलाके है
07:46यहां मीडिया को कई बार सुरक्षा एजिंसियों, स्थानिय राजनिति और जमीनी हिंसा जैसी जटिल परिस्तितियों में काम करना पड़ता है
07:53वहीं नौरवे, अपेक्षा कृत, शान और स्थिर समाच है
07:57इसलिए दोनों देशों की तुलना एक ही पैमाने पर करना कई विशेशग्यों को भी तरक संगत नहीं लगता है
08:05अब जरा सोशल मीडिया की राजनिति को भी समझे
08:07आज के दौर में किसी भी अंतराश्ट्रियमंच पर भारत को लेकर अगर कोई अलचनात्मक बयान आता है
08:14तो कुछ लोग उसे तुरंद भारत की हार और लोकतंतर खतम होने जैसी नेरेटिव में बदल देते हैं
08:20वहीं दूसरी तरफ कुछ लोग हर विदेशी आलोचना को साजिश बता देते हैं
08:24जबकि सचाई अकसर इन दोनों के बीच कहीं होती है
08:27बिल्कुल ग्रे और वाइट और ब्लैक तो नहीं हो सकता है
08:50अचानक उनका नाम ट्रेंड करने लगा कुछ लोगों ने उन्हें फ्री प्रेस की आवाज कहा तो कुछ ने एजिंडा पत्रकार
08:55भी बताया
08:56लेकिन एक बात तो साफ है इस पूरे विवाद से सबसे ज्यादा अंतराष्ट्रिय पब्लिसिटी उसी पत्रकार को मिली
09:02तो अब सवाल पूछना गलत नहीं है पत्रकारिता का मूल काम ही है सवाल पूछना लेकिन पत्रकारिता को एक्टिविस्म के
09:10बीच एक बारीक रेखा होती है
09:12जब किसी घटना को आधा दिखा कर पूरा नेरेटिव बनाया जाए तब विवाद खड़ा होना स्वभाविक है
09:17विदेश मंत्राले की तरफ से भी यही कहा गया कि कारक्राम का स्वरूप प्रेस ब्रीफिंग था नकी खुली प्रेस कॉन्फरेंस
09:23यानि प्रोटोकोल पहले से तय थे लेकिन सोशल मीडिया पर इस तक्नीकी अंतर को लगभग नजर अंदास कर दिया एक
09:31और दिल्चस्प बात समझे पशिमी देशों में भी प्रेस और सत्ता के बीच टक राव होते हैं
09:36अमेरिका में वाइट हाउस प्रेस ब्रीफिंग के दौरान कई बार पत्रकारों को रोका गया है यूरूप में भी राष्टिय सुरक्षा
09:42आतंकवाद और यूद जैसे मामलों में मीडिया एकसिस्सिमित किया जाता है लेकिन जब वही चीज़ भारत में होती है तो
09:48उसे कई
09:49बार लोकतंद्र खत्रे में है कि तरहें पेश कर दिया जाता है भारत में आज डिजिटल मीडिया का वस्पोर्ट हुआ
09:56है कोई भी व्यक्ति मोबाइल फोन से सरकार की आलोचना कर सकता है वीडियो बना सकता है लाई जा सकता
10:02है लाखो राजजितिक content creators खुले तोर पर हर वि
10:18चुनाती दुनिया के लगवग हर लोकतंद्र के सामने है अमेरिका से लेकर यूरोप तर हर जखे सरकारे सोशल मीडिया रेगुलेशन
10:25और फेक नियूस से जूज रही है असल मुद्द यही है कि भारत और नौर्वे दो बिलकुल अलग सामाजिक राजनीतिक
10:33और जनसंख्य
10:33वाले देश है एक छोटा स्केंडिनेविया देश और दूसरी दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंद्र दूनों की चुनातिया मीडिया संरचना और
10:41सामाजिक जटिलताएं बिलकुल अलग अलग है इसलिए नौर्वे नंबर वन भारत पीछे हो सकता है जैसी लाइने सुनने म
10:48भले ही आकर्शक लगें लेकिन वास्तविक्ता उससे कहीं ज्यादा जटिल है और शायद यही वज़े है कि प्रेस फ्रीडम जैसे
10:56विशयों पर केवल रैंकिंग देखकर निशकर्श निकालना परयाप्त हो ही नहीं सकता किसी भी देश की वास्तविक स्थिती समशने के
11:04लि
11:16मीडिया और सोशल मीडिया तीनों एक दूसरे से गहराई से जुड़े हुए हैं और कई बाद एक छोटा सा सवाल
11:22भी वैश्विक बहस का रूप ले लेता है इस खबर में इतना ही लेकिन आप क्या सोचते हैं कि भारत
11:28और नौर्वे की प्रेस फ्रीडम की तुलना करना सही ह
11:31है हमें कॉमेंट करके जरूर बताईएगा और हमारा एक्स्प्लेनेशन पर आप क्या सोचते हैं ये भी अपने विचार जरूर बताईएगा
11:37और देश-दुनिया की बाके खबरों के लिए देखते रहे हैं वन इंडिया हिंदू
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