00:00Welcome to Vetta Mind Channel.
00:30पर्वरिश के तीन स्पष्ट चरण होते हैं.
00:32हर चरण में अलग विधी,
00:34अलग उद्देश्य और अलग द्रिष्टिकोन होता है.
00:37चलिए, इन तीन चरणों को समझते हैं.
00:40शास्त्रों और आधुनिक विज्ञान की मदद से.
00:42चरण एक, जीरो से पांच वर्ष, स्नेह और सुरक्षा.
00:47शास्त्रों में कहा गया है पंच वर्षानी लालियेथ.
00:50अर्थात, पहले पांच साल तक बच्चे को केवल स्नेह और सुरक्षा दीजिए.
00:55इस अवस्था में बच्चा तर्क नहीं, भावनाओं से सीखता है.
00:59यहीं उसके आत्म विश्वास और सामाजिक शमता की नीव पढ़ती है.
01:03आधुनिक नियूरो साइंस कहता है, सिक्क्योर अटाच्मेंट, यानि भावनात्मक सुरक्षा, बच्चों के दिमाग के विकास में सबसे एहम भूमिका निभाता
01:12है.
01:13इस उम्र में डर या दंड नहीं देना चाहिए, बलकि आई कॉन्टाक्ट, प्यार भरी आवाज और स्पर्ष से सिखाना चाहिए.
01:21खेल के जरिये सिक्षा दें. यही सबसे असरदार तरीका है.
01:25चरण दो, छे से पंद्रा वर्ष, सिक्षा और अनुशासन.
01:29शास्त्रों में लिखा है, दश वर्षानी तू ताडियेत. इसकार्थ है, अब सिक्षा और अनुशासन की जरूरत है. यह आयू चारित्रिक
01:38निर्मान की होती है. बच्चे अब तर्क करना सीखते हैं, सही गलत को समझने लगते हैं.
01:43हावर्ड की रिपोर्ट बताती है कि इस उमर में प्लानिंग, फोकस और सेल्फ कंट्रोल जैसे गुण विक्सित होते हैं. यही
01:51समय है जब नैतिकता, समय प्रबंधन और सेवा भाव सिखाये जा सकते हैं. उपनयन संसकार और गुरुकुल परंपरा इसी चरण
01:59में आती थी.
01:59आज की संदर्ब में नैतिक कहानिया, समवाद और प्रेम पूर्वक अनुशासन सबसे जरूरी हैं. बच्चों को क्यों का उतर दें
02:07ताकि वे नियमों को केवल माने नहीं, समझें भी.
02:10चरण तीन, सोला वर्ष से आगे. समवाद और मित्रता. अब बालक को केवल आदेश नहीं, दिशा की जरूरत होती है.
02:19शास्त्रों में है शोडशे, वर्षे, पुत्रम, मित्रवत, आचरितव्यम. इसकार्थ है, ये किशोरा वस्था का समय है. जब बच्चा स्वतंत्रता �
02:28चाहता है, पहचान खोचता है. अगर आप सिर्फ नियंत्रन करेंगे, तो वो विद्रोही या निराश बन सकता है. American Psychological
02:36Association के अनुसार इस उमर में निर्ने लेने और नैतिक सोच की क्षमता तेजी से विक्सित होती है. इसलिए, अब
02:43समवाद सबसे जरूरी है. बच्चे की र
02:56आते जो आज भी प्रासंगिक हैं. संसकार, जैसे गर्भ संसकार, नामकरण और उपनयन. बच्चे की मानसिक और सामाजिक विकास की
03:04नीव रखते हैं. शास्त्र कहते हैं, यतो दरम तथा सुतम. जैसा गर्भ और जैसा घर का वातावरण वैसा ही बालक
03:12बनता है. इसलिए, �
03:14आचरण, दिनचर्या और समवाद सब कुछ सिखाते हैं. और सबसे बड़ी बात, बच्चे को केवल सक्सेस्फुल नहीं, मूल्यवान इंसान बनाईए.
03:23सक्सेस विद वैल्यूज. यही है हिंदू दृष्टिकोन. आज की दुनिया में इसकी जरूरत क्यूं है? आज बच्
03:37में तनाव बढ़ रहा है. शास्त्र कहते हैं भक्ती, परिवार और समवाध ही उपाय है. बुरी संगती और आत्मगौरव की
03:45कमी, तो नीती कथाएं, सत्संग और वैदिक सिक्षा जरूरी है. निशकर्ष. हमें वापस अपनी जड़ों की और लोटना होगा. हिंदू
03:53शास्
04:07लगा हो, तो वीडियो को लाइक करें, कमेंट में अपनी राय दें और वेटा माइंट को सब्सक्राइब करना न भूलें.
04:13फिर मिलेंगे एक और ज्यान वर्धक विशय के साथ. धन्यवाद, जै हिंद, जै सनातन.
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