00:00वो जन कहानी है कि गुरु था वो धार्मिक था चेला कच्चा था अभी अनाडी तो वस गुरु की नकल
00:05करे तो गुरु चेला चले जा रहे है तो खुबसूरत जवान लडगी उनको मिली वो उसी रास्ते पर ठके कहीं
00:10केनारे बैढ़ गई थी उसके चोटोट भी लग गई थ
00:14और एकदम आकर्शक है तो गुरु ने उसको देखा वाल क्या है यहां क्यो बैठी है बुली मुहीं उजाना है
00:19जिसर को आप जा रहे हैं लेकिन ठक भी गई है और यह खून बहरा है तो वो गुरु बोलता
00:24अच्छा तेरे खून बहरा है तो चल नहीं सकती तुझे जाना भ
00:44उतार दी आपना चलते गए अब वो चलते जा रहे हैं दो गंटा तीन घंटा बीत गया गुरु जे पर
00:49सह चलते जा रहे हैं चेले के भीतर खलबली मची हुई है उथल पुथल उपगलाया जा रहा है उसे चला
00:55भी ना जाए इधर उधर गिरे कुछ करे तो गुरु ने कहा
01:14झाल झाल
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