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  • 11 hours ago
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पूरा वीडियो : लड़‌कियों से बात करते घबराता हूँ — दोस्तों की गर्लफ्रेन्ड हैं, मेरी नहीं || आचार्य प्रशांत, IIT-पटना
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Transcript
00:00सर हमारे स्राउंडिंग में जब आखों के सामने बहुत सारे कपल सोते हैं और मन में केरियर के लिएक बहुत
00:07वारा डर होता है
00:07नी मैं ना समझ हूँ, मैं समझा नहीं कि एक कपल को देखके तुम्हें केरियर में क्या डर लग जाता
00:14है
00:18ऐसा कौन सा केरियर बना रहे हो जिसके लिए कपल खतरा है
00:23सब बहुत ऐसा एक्टिविलीज है जो लगता है कि मैं भी करूँगा
00:27जिस जगह पर तुम हो जिस परिवेश में तुम हो तुम्हारी उम्र और तुम्हारी ही परिवेश की तुम्हारी ही संख्या
00:34की लड़कियां मौजूद होंगी
00:36तो जैसे प्रक्रति में लड़की लड़का नरनारी पैदा हो जाते हैं
00:41वैसे ही प्रक्रति में वो मिल भी लेंगे
00:43तो अब इनका सवाल यह है कि मिलती क्यों नहीं
00:46और मेरा सवाल भी यह है ज़रा से बदल के कि मिली क्यों नहीं
00:50इतनी सीधी सी बात है, सांस लेने जैसी बात है, दिल के धड़कने जैसी बात है, हो गया तो ठीक
00:56है, कुछ उसमें इतना विशेश नहीं, कुछ इतना बड़ा नहीं कि उसका हुआ बनाया जाए, तुम बताओ, ये साधारन सी
01:01बात भी तुम्हारी जिंदगी में हुई क्यों �
01:03नहीं, कौन आड़े आ रहा है, हम उसका नाम जानना चाहते हैं, वो कौन है, जो एक सहज प्राक्रतिक मिलन
01:11को भी असंभाव वे हैं, इंप्रॉबेबल बना देता है, वो कौन है, उसको बोलते हैं इगो, और वो चलती है,
01:19बिलीफ्स पर, माननेताओं पर, धारणाओं पर,
01:22वही है, the fictitious self, the belief system called the ego, वो कहता है, एसी वाली चाहिए, अपनी जातिकी चाहिए,
01:32शर्मीली चाहिए, और जैसा हमारा उत्तर भारत में चलता है, एक और concept, फर्स्ट हैंड चाहिए, और ऐसी चाहिए, जिसके
01:39सामने हम ना आए, वो खुद आ करके, हमारे चरणों में लोट क
01:43करके, प्रणय ने वेदन करे, बोले, हे, प्राणनाथ, मैं मनी मन तुमें अपना पति मान चुकी हूँ, तुम इतनी भारी
01:51शर्ते रखोगे, तो कौन मिलेगी?
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