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Transcript
00:00अच्छा है रिजी आप कहते हैं वेजिटेरियन बनो लेकिन पेड़ पोदे में तो जान होती है तो उसे कैसे खाएं?
00:06अरे पोधों को हो सकता है दुख होता हो
00:13तो जो इतना सम्वेदन शील होगा कि पोधों के दुख की भी परवाह करेगा
00:19वो बकरा मार के खाएगा क्या?
00:21पोधों के लिए तो इतनी सहान उभूती उठ रही है
00:38और मैं बीच में आकर के
00:41साइद अली प्यार का दुश्मन हाए हाए
00:45ये दोनों आपको से मिल जाना चाहते हैं
00:48सौ साल बाद क्या बता विज्ञान ये सिद्ध कर दे
00:50अभी हम क्या कर रहे हैं?
00:54सौ साल बाद पोधे के सूख्ष्पंदन का इतना ख्याल है
00:58और आज आखों के सामने वो जो मचली तड़प कर मर रही है
01:01उसको कह रहे हो लाओ लाओ माचभात लाओ
01:04तो ये क्या है?
01:07ही बोलो तो
01:10पोधों का इतना ख्याल है
01:12पोधों की ही खातिर बकरे को खाना छोड़ दो
01:14तो कि बकरे का अगर एक किलो मास खाते हो
01:17तो उस बकरे ने पहले पोधा कितना खाया?
01:19बीस किलो
01:20तो पोधे ही बचाने की खातिर
01:23क्या खाना छोड़ना पड़ेगा?
01:25बकरा जो ती सामने है उसका ख्याल करो ना
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