00:00मुझे समझ भी नहीं आता हूँ, मैं घड़ी भी नहीं पहन पाता हूँ, मुझे लगता है बंधन है आथ में,
00:04आप इतनी सारी चीज़ें कैसे पहन लेते हो, मतलब उक्ताइट नहीं होती,
00:11पात साथ यहां गले में डाला है, इधर छेद मारा, इधर किया, पहले कमर में भी डालते थे, और पैर
00:18में भी डालते थे, पैरों की उंगलियों में डाल रहे हैं, यहां पायल पहन रहे हैं, पुरुषों पर भी लागू
00:24होती हैं, बैठे तो हैं गुठी बास,
00:30पहलाने ने बताया था ये पहन लोग है तो
00:32फलाने ने बताया था ये पहन लोगे तो
00:33मेटल हम ईए Alright, मेटल
00:33घिसता नहीं है
00:36लगता नहीं है
00:38शरीर को इतनी चीजों से बांधने की आदत डालते हो
00:42तो क्या चेतना भी बंध नहीं जाती
00:44इसका सौंदर किसमे है
00:56और इसमें और शरीर जितना ज्यादा मासल होगा न उतना हो सकता है पुरुषों के काम का तो हो उन्हें
01:06मास चाहिए
01:07पर आप के लिए लायबिलिटी है तो उधर से तो शायर आके तारीफ कर देंगे कि नागिन सी चाल इसकी
01:14पर समहालना ढोना आपको ही है वो सबनागिन वाला मामला मासल शरीर कोई अच्छी बात नहीं है
01:22जैसे सुगठित चेतना चाहिए वैसे ही शरीर भी सुगठित चाहिए
01:27बहुत मास चरबी ढोना किसी को लग सकता है आकरशक आपके लिए लेकिन शुभ नहीं है
01:34इसका सौंधर्य कंगन नहीं होता है इसका सौंधर्य ताकत होती है ताकत इसमें ताकत होने चाहिए
Comments