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Transcript
00:00एक जैन बोध कथा है, यह एक लड़की थी, बहुत सुंदर थी, आकर्शत, उसमें ग्यान की ललक उठी, तो वो
00:05एक के बाद एक गुरूओं के पास, मास्टर्स होते हैं, उनके पास जाने लगी, उनके अपने डेरे एडे आश्रम होते
00:12थे, उनमें ज्यादा तर्द उनके श
00:29स्विकार कर लिया, तो हमारे आश्रम में अनाचार फैल जाएगा, मैं अपने इन चेलों को जानता हूँ, इन्हें दो दिन
00:36नहीं लगेंगे बहकने में, तो उसको कोई स्विकार ना करे, वो जहां जाए, सब उससे कहें कि हम बहुत कद्र
00:41करते हैं, तेरी ग्यान पिपासा क
00:42और काश की किसी तरह तुझे ग्यान उपलब्ध हो जाए, लेकिन हम तुझे स्विकार नहीं कर सकते, तुझे स्विकार गिया
00:47तो बड़ी गड़बड हो जाएगी, तो कहानी कहती है कि उसने एक गरम सलाक ली और अपने चेहरे पर एक
00:53बार इधर निशान लगा लिया, एक �
00:57बहुत उची बात है, अगर मेरा शरीर ग्यान के आड़े आ रहा है, तो मैं शरीर को सुन्दर ही नहीं
01:01नहीं दूँगी, अगर ग्यान पाने की शर्त यही है, कि शरीर सुन्दर ना हो, तो मैं शरीर को सुन्दर ही
01:07नहीं दूँगी, अब बात ना इंसाफी की है, लफंगे �
01:10है वो चेले चपाटे गुरुजी के और सजा मिल रही है इस लड़की को पर लड़की की दृष्टी से खोड़तों
01:15कह रही है मैं इंसाफ की क्या बात करूं मेरे पास एक जनम है और मुझे जानवर की तरह नहीं
01:19जीना है मुझे उची बाते जाननी है और उची बाते में इसने
01:22नहीं जान पा रही क्योंकि ये देह बड़ी आकरशक है बोली मैं इस देह को नहीं रहने दूंगे आकरशक
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