00:00फोन करके मम्मी को डाटना बड़ी आसान बात है
00:03तुम्हें कितनी बार समझाया मा?
00:06तुम्हें गठिया है उसके बाद भी तुमने ये सब चीजे खाई है
00:11क्यों खाई मा?
00:12या ज्यान देना कि ये किया करो वो किया करो
00:15चलो तुम पिताजी को सुभे टहलाने ले जाया करो अब ये करो वो करो ये सब
00:20तुम खड़े हो गए हो बिलकुल मर्यादा शिरुमनी बन कर
00:24और कह रहे हो आपके शरीर का मैं ये ख्याल रखूँगा वो ख्याल रखूँगा बताईए
00:28कौन सी दवाई चाहिए और आप यहां आ जाईए ना वहाँ छोटे शहर में वहाँ ठीक से देख भाल नहीं
00:35हो पाती
00:35और फिर यही सब बेटे बेटियों को शिकायत हो जाती हो कहते हैं देखो
00:40कि इनको हम उठा करके अपने साथ लेके आए रहने के लिए लेकिन तब भी ये खुश नहीं है
00:46इनकी शगाल उतरी ही रहती है वो कुछ इसले नहीं नजर आते हैं क्योंको तुम उनके लिए जो कर रहे
00:52हो बहुत छोटी चीज़ है
00:53माबाप पास आएं पास सही दूर है दूर सही वो जो असली दूरी है जो हमारे जीवन का दर्द है
01:05उसको मिटाओ न अपनी निकटता देकर क्या करोगे
01:09जिसकी निकटता के लिए हर जीव प्यासा है उसकी निकटता दो न अपने माबाप को
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