00:00सबसे पहले एक लाइन में अगर इसको कहें तो बीजेपी जो है वो गलती करने से बच गई है अगर
00:05विजय को अभी भी लटकाया जाता या फिर और गुमाया जाता या किसी तरह से रोकने में सफल रहते तो
00:14यह बहुत बड़ा नुकसान होता बीजेपी की इमेज के लिए और
00:17कहीं न कहीं यह आरोप उन पर लगते कि राजविवन का इस्तमाल वो एक सेंट्रल टूल की तरह कर रहे
00:23हैं तो इससे बीजेपी बच गई है और बीजेपी को यह सब नहीं करना चाहिए था जो परदे के पीछे
00:29से करवाने के आरोप उन पर लग रहे हैं अब एक में एक ची
00:46के हैं ओट सेरेमनी और इसके बाद अब यह तीसरी बार कहा जा रहा है कि कल शायद शपत ले
00:52सकते हैं चूंकि सारे लेटर स्वाप दिये गए हैं इन सब के बावजूद राजय पाल आर लेकर की जिम्मेदारी बनती
00:59थी कि लेटर अगर आपको मिल गए हैं तो आप सरकार ब
01:15इसको मजबूत करके वापस आएं और फ्लो टेस्ट करें बहूमत साबित करें लेकिन ऐसा नहीं हुआ तो यह भी कहीं
01:21न कहीं इतिहास में जब लिखा जाएगा कि किस तरह से एक सिंगल लार्जस पार्टी को गुमाया गया मौका तक
01:27नहीं दिया गया तो इस पर हमेशा कही
01:36इसा नहीं हुआ कि जिनके पास बहुमत नहीं था उन्होंने शपत नहीं ली आप चाहे ताजा उदारन देवेंदर फढ़न भी
01:42इसका देख लीजिए सुबह पांच बजे शपत होती है तो यह कहीं न कहीं आप सीधी सीधी तस्वीर हैं कि
01:48केंदर के कहने पर यह सब होता है
01:50अब राजपाल आरलेकर पर आ जाते हैं इससे पहले यह साथ-साथ अभी जो हैं वो कारिवाह के राजपाल हैं
01:58तमिलनाडू के और केरल के राजपाल रहे हैं अभी भी हैं और इससे पहले बिहार और हिमाचल प्रदेश जैसे राजव
02:06में भी बत और राजपाल यह रह चु
02:20बीजेपी के लिए पार्टी मजबूत की और जब 2014 के असपास जब केंदर में बीजेपी 14 में आई और सोला
02:29में ग्वाँ में जब तुनाउब वनुहर परिकर को केंदर में लाया गया तो प्रमूत सावंद की जगे ये चर्चा भी
02:36थी कि कहीं न कहीं आरलेकर को सीम बनाया जा
02:49राजपाल बन के ये विहार पहुंचते हैं, तब नितिश कुमार उन्देनों आरजवेटी के साथ होते थे, तो उस ताइम पर
02:55जो एजुकेशन मिनिस्ट्री के सेक्रेटरी होते थे, केके पाठक, उनके साथ भी इनका टकराओ लंबा चला, इतना चला कि जो
03:03बैठके होती थी
03:05राजपाल जो होता है, वो स्टेट की सारी यूनिवर्सिटी का वीसी भी होता है, चांसलर होता है, तो वहाँ सारी
03:13मीटिंग जब ये लेते थे, तो एक दूसरे से देखना तक पसंद नहीं करते थे, हिमाचल प्रदेश का इनका जो
03:19कारिकाल रहा, वो ठीक रहा, इन्होंने
03:21कई सारे अच्छे वहाँ पर काम भी किये हैं, जनता के लिए राजभावन के दर्वाजे कोले, लेकिन जैसे ही ये
03:28केरल पहुंचते हैं, तो केरल में सीधा इनका टकरा होता है, पीनरे विजियन की सरकार से, वहाँ पर आप देखिए
03:34कि जो बजट भाशन होता है विधान स�
03:48ना थी, नतीजा क्या होता है कि राजपाल का भाशन एक मुख्यमंत्री पढ़ रहा है विधान सभा के अंतर, अब
03:55मैसेज देखिए कि यहां से कितना गलत जाता है, तो ये इनके साथ रहा, इसके अलावा कई सारे भाशन जो
04:01केरल के असेंबली में केंदरे खिलाफ होते थे
04:04तो ये उनको एक्सपोंच करवाने की, यानि की वहां से हटवाने की, रिकॉर्ड से हटवाने की कोशिश करते थे, जो
04:11बिल आते थे, जो पिनरे विजियन बिल लेकर आते थे, बिल पास होते थे, पास होने के बाद राजपाल के
04:18हस्ताक्षर होना जरूरी है, तो ये सिर्फ
04:21उस पर मन्थन के नाम पर उन्हें कई हफ्तों तक लटका रहते, कई दिनों तक लटका रहते, ताकि जो है
04:28कही न कही सरकार चलाने में पीनर रिविजिन को मुश्किल हो, या जो वो काम करना चाहते हैं, कम स्कुम
04:33उसको तो अठकाया जा सके, तो ये सारी चीज़ है रही, इनक
04:50कि दिन में दो बार जाते हैं, कुछ हासिल नहीं होता, लोटा दिया जाता है, उसमें विजय की भी थोड़ी
04:55गलती है, विजय चुकि फर्स टाइमर पॉलिटीशन है, तो वो इसके साथ पहुंचे कि मेरे पास परसेंटेज है, जबकि किसी
05:02राज में परसेंटेज के आदार
05:16कर सकते हैं, और यह सलहा उन्हें एक ब्यूरोक्रेक्ट ने दी में उनका नाम लेना नहीं चाहूंगा, लेकिन उनकी तरफ
05:24से इनको सलहा में ली कि आप ऐसा कर ली जे, ऐसा होता नहीं है, इसके बाद विजय फिर से
05:29जाते हैं अगले दिन लेकिन अगले दिन उनको फिर से �
05:32दिया जाता है, अब यहां पर विजय जो है वो फेड़ा को चुके थे कहीं ना करी राजपाल के रवाईए
05:38से और तब से लेकर यह रस्ता कसी चल रही थी, पिल्कुल, सिदार जी इसमें एक सवाल ये भी है
05:46कि पांच दल अबाद चुके हैं विजय के साथ में, पहले कॉं�
06:01जाता है कि इतने छोटे-चोटे दलों के साथ सरकार चला पाना थोड़ा मुश्किल होगा विजय के लिए, क्योंकि आपने
06:06ही कहा कि वो भी नए-णए है रादिंती में?
06:10देखिए, आम तोर पर क्या होता है कि छोटे दलों के साथ सरकार सलाना मुश्किल भी हो सकता और आसान
06:16भी हो सकता है, यह सब डिपेंड करता है कि आप उन्हें ओफर क्या दे रहे हैं और कैसे उन्हें
06:21बचा के रखा है, क्योंकि छोटे दलों का तूटना बहुत आसान है, �
06:25बहुत ही छोटी चीज है जब चाहे बड़ी पार्टिया उनको तोड लेती है अपने हिसाब से लेकिन यहाँ पर तमिलाडू
06:32की राज नहीं तो पूरे देश में सबसे ज़्यादा पार्टियों वाला मैं कहूंगा राज है तकरीवन डेर सौ के आसपास
06:40पार्टियां एक जमा
06:550.29 प्रतिशत है जबकि नोटा का वोट प्रतिशत यहाँ पर 0.41 है नोटा का प्रतिशत IUML से ज्यादा
07:04है ऐसी कई और पार्टियां है जो 0 से मतलब 0.0 कुछ-कुछ में आती है अपना वोटिंग परसेंटेज
07:12लेकर और फिर वो केंग मेकर की भूमिका निभाती है अब य
07:19या तो उन्हें अच्छा ओफर दें ताकि उनका सत्ता में बने रहने का मन भी बना रहे साथ ही साथ
07:25विजह को एक चीज़ और करना पड़ेगी कि उन्हें जो केंद्रिये ताक्ते हैं केंद्रिये सरकार की तरफ से जिस तरह
07:32की कारवाईया हो जाती है अक्सर कि जब जाच मे
07:35कोटे ललों की विधाया करप्शन में या दूसरे चार्जिस में पकड़े जाते हैं तो उन पर फिर मुकदमे बाजी होती
07:42है और फैसले भी कई बार आ जाते हैं कोट की तरफ से तो उनकी विधाया की चली जाती है
07:47ताजा मामला आप अगर देखें तो हाल ही में मधिपरदे
07:51इसमें बीजेपी रिपीट जरूर हुई लेकिन ग्रहमांतरी नौत्रमिशा अपनी सीट धतिया हार गए थे अभी पिछले पंदरा दिन में वहाँ
07:59पर जो संतोष भारती थे उनके ऊपर मुकदमा चल रहा था और उस मुकदमे में फैसला आया और उनकी विधाय
08:08की चली अ�
08:15फुख फुख कर कदम रखना पड़ेगा हाला कि उनके पास डीमके के कई विधायक हैं जिनके पास लबा चौड़ा राज
08:21जीतिक एक्सपिरियंस है लेकिन विजय उस एक्सपिरियंस से कितना सबक लेते हैं तो वो भी एक देखने वाली बात होगी
08:28साथी एक चीज और है कि
08:30कोर्ट वाला रस्ता जो है विजय का जो कोर्ट वाला पैतरा कहें या मूग कहें वो कहीं ना कहीं विजय
08:38के काम में आया विजय ने जब अपने करीबी हैं उनके IPS रहे हैं रामा सुबरमणी उनसे मिलकर सला की
08:47कि हमें क्या करना चाहिए राजपाल जिस सरीके से लटका रहे ह
08:50तो फिर उन्होंने सलाह दी कि हमें अब सुप्रिम कोट की तरफ मूब करना चाहिए
08:55और इनफेक्ट याचिका भी सुब्रमणी की तरफ से डाली गई
08:59तो इन सारे पैतरों से विजह को अभी ही अच्छा खासा अनुभा मिल गया है
09:05कि पांच साल उनके कैसे होने वाले
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