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On Day 12 of his indefinite hunger strike at Jantar Mantar, climate activist and educator Sonam Wangchuk has called for a peaceful "Chalo Sansad" march to the Indian Parliament on July 20, coinciding with the start of the Monsoon Session.Protesting alongside the CJP over the NEET paper leak scam and Ladakh's issues, a frail Wangchuk urged citizens to step off their comfy couches and join the movement for democratic accountability.

जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल के 12वें दिन, पर्यावरणविद् और शिक्षाविद् सोनम वांगचुक ने एक बड़ा संदेश जारी किया है। CJP के साथ NEET पेपर लीक और लद्दाख के मुद्दों पर आंदोलन कर रहे वांगचुक ने संसद के मानसून सत्र के पहले दिन यानी 20 जुलाई को शांतिपूर्ण 'चलो संसद' मार्च का आह्वान किया है। गिरते स्वास्थ्य के बीच उन्होंने देश की जनता से अपील की कि वे सोशल मीडिया से बाहर निकलकर लोकतंत्र और छात्रों के हक की इस लड़ाई में शामिल हों।

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~HT.318~ED.520~PR.516~GR.508~VG.HM~

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Transcript
00:00आज मैं शायद थोड़ा बेहतर दिख रहा हूँ, हलांकि आज मेरे अंशन का बारवाँ दिन है, तो मैंने कहा था
00:10कि हम 20 जुलाई को जब संसत का सत्र शुरू होगा, मार्च करेंगे संसत तक,
00:17तो बहुत से लोगों ने बोला है कि वो आएंगे, कुछ ने पूछा है क्या ये मुम्किन है, इस से
00:26पहले मैं आप लोगों को ये बताओं, कि दो हफ़ते पहले मैं स्विट्सलेंड में था, जैसा कि आपको पता है,
00:36और वहां बर्न, जो कि स्विट्सलेंड की राजदानी है,
00:40वहां पर आरा नदी में बोटिंग करने के बाद, नदी के सामने ही मैं उपर एक मार्किट प्लेस में आया,
00:50और ये देखिए तस्वीर, जहां मैं खड़ा हूँ, आप जो पीछे भवन देख रहे हैं, आपको ये जानकर हैरानी होगी,
01:01कि ये स्विट्सलेंड की संसद है, औ
01:05और इस संसद भवन में उसके अंदर से गुजरते हुए मैं आया था, कोई रोक टोक रही, सब खुला था,
01:13लोग आ जा रहे थे, और ये संसद के सामने का जो जमीन है, जहां मैं खड़ा था, वहां पर
01:21तो बच्चे खेल रहे हैं, लोग घूम रहे हैं, और ये निरधारित �
01:26जगा है परदर्शनों के लिए भी, तो कोई भी यहां परदर्शन कर सकते हैं, दरने कर सकते हैं, तो दुनिया
01:33के लोग तांत्रिक देशों में संसद तक जाना खुला छूट होता है, बलकि ज्यादा तर देशों में उसके सामने परदर्शन
01:42करने की जगा निरधारित होती ह
01:45यह लंदन में वेस्टमिंस्टर है, यहां पर भी लोग संसद तक जा सकते हैं और यहां भी परदर्शन कर सकते
01:55हैं, वैसे ही स्वीडन, डेन्मार्ट, आस्ट्रेलिया, न्यूजिलेंड, सब जगा संसद खुली जगा है क्योंकि लोग संसद में लोगों का संसद
02:05है,
02:05तो दुनिया की लोग पंतरों की माँ यहां नई दिल्ली में कैसे न संबाव हो, अब बताया जाता है कि
02:16नई दिल्ली में तो दफ़ा 144 लगा है, 163 बिनस, यहां तो परदर्शन कर नहीं सकते हैं, और हमारा समवीदान
02:26हमें अधिकार देता है, अनुछित 19 में, कि हम शांती प�
02:35अफ़ा लगाना राजदानी में और लगाए रखना स्थाई रूप में यह अपने आप में समवीदानिक नहीं है, ना ही यहां
02:46जंतर मंतर पर समय बद कर देना कि 10 से 5 तक ही कर देंगे, यह भी समवीदानिक मेरे खयाल
02:53से तो नहीं है, इसलिए मैं विंती करना चाहूंगा �
02:57इस देश के नियाए विग्यों से कि वो पुनर निरिक्षन करे क्या ये सही है, वैसे तो ऐसा कोई कानून
03:07हो नहीं सकता है, मगर फिर भी अगर ऐसा कानून है, तो वो कानून ही गलत है, और गांदी जी
03:14ने कहा था कि अगर कोई कानून गलत है, तो उसे तोड़ना बहतर है,
03:21आज बस इतना ही कहूंगा
03:23याद रखियेगा
03:2420 जुलाई
03:26जाए है
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