00:00राम राम साथियों जैहिन दोस्तों साथियों सबरडों की आपसी फूट के कारण ग्राम सभाई काई का छुनाव कैसे प्रभावित होता
00:09है ये अपने कानों सुना हाल मैं आज आपको कविता के माध्यन से सुनाती हूं
00:13मेरी कविता को लाइक करके मेरा मनोबल बढ़ाईएगा और मेरे चैनल को सब्सक्राइब कीजिएगा ताकि धरातल के भावनाओं के संबाद
00:23आप तक पहुचते रहें और आप उसका रसा स्वादन करते रहें
00:30कि आज दुवरा में परधानिन दिखाए गई
00:58काका काका बोल के बहुत मुसकाए गई
01:01काका काका बोल के बहुत मुसकाए गई कनवा मा खुसर खुसर बतलाई गई
01:08काका काका बोल के बहुत मुसकाए गई कनवा मा खुसर खुसर बतलाई गई
01:13अब तो हमार बड़ा भाव आवयवाला है लागत है परधानी का चुनाव आवयवाला है
01:20अब तो हमार बड़ा भाव आवयवाला है लागत है परधानी का चुनाव आवयवाला है पिता पुत्र की वारता में पुत्र
01:32कहता है कि नहीं पिता जी इस बार प्रधान बदलेंगे पूर परधान ने कोई विकास कारे नहीं किया है
01:41पिता तुरंत डाट लेता है कहता है नहीं नाली यव सड़क नहीं बनी कवनो बात नहीं
01:55पुत्र आत्म ज्यान का प्रियोग करता है पढ़ा लिखा था समाजिक बातें करता है
02:00और पिता तुरंत डाट लेता है और कहता है सुनो नाली और सड़क नहीं बनी कवनों बात नहीं
02:09मिली नहीं हमका कलोनी कवनों बात नहीं
02:12नाली और सड़क नहीं बनी कवनों बात नहीं
02:15मिली नहीं हमका कलोनी कवनों बात नहीं
02:28बनवबयन पण्डित परधान के तो कि प्णाव बेवस्था से भले सरोकार नहीं
02:44लूटिगा है गाव खुल।
03:09अपने सबाइके पीछे फिछे भाए आज देखा अपने सबाई के पीछे फिछे भाए आज देखा
03:15भाई रूपिया अदारू का बहाव आवे वाला है लागत है परधानी का चुनाव आवे वाला है और फिर से उसके
03:31दिल में सवरणों की प्रती इर्षया जागुर्पी है
03:34कि आपनों का बाड़ा चाहे बना रहें पंडितन आपसों में इनके हमेशा रहाया न बना
03:52अब बोकरी हमार कतो घुसी खेते बारी तो सुने के सहा है बेटावा हजार गारी तो
04:03बोकरी हमार कतो घुसी खेते बारी तो सुने के सहा है बेटावा हजार गारी तो
04:10अब भूल के जो कतहूं जिताए जिंहे पंडित जी फिर से हमाए अगुआए जिंहे पंडित जी
04:27ये नहीं के फिर से जिताव देई भाला है
04:30ये नहीं के फिर से जिताव देई भाला है अब तो हमार बड़ा भाव आवे वाला है
04:50रूपी ये दारू का बहाव आवे वाला है लागत्ह प्रधानी का चुनाव आवे वाला है
04:56लागत प्रधानी का चुनाव आवेवाला है
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