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राम-राम साथियों!
इस वीडियो में एक कविता के माध्यम से यह दर्शाया गया है कि ग्राम पंचायत चुनावों के दौरान गांव का माहौल कैसा हो जाता है। कविता में पिता और पुत्र के बीच के संवाद के जरिए बताया गया है कि कैसे चुनाव आते ही प्रधान जी घर-घर आने लगते हैं, 'काका-काका' बोलकर खुशामद करते हैं और कैसे विकास के मुद्दों को दरकिनार कर आपसी फूट, जातिवाद और लालच (रुपया-दारू) का खेल शुरू हो जाता है।

यह कविता केवल एक व्यंग्य नहीं है, बल्कि ग्रामीण भारत की लोकतांत्रिक विफलता का एक दस्तावेज है। यह बताती है कि जब तक मतदाता जातिवाद, आपसी ईर्ष्या और मुफ्त के लालच (दारू-रुपया) से ऊपर नहीं उठेगा, तब तक "नाली और सड़क" जैसे बुनियादी विकास के मुद्दे गौण ही रहेंगे।
​यह कविता 'अनसुनी रचना ' चैनल द्वारा समाज की धरातली सच्चाई को आईना दिखाने का एक सशक्त प्रयास है।

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​कविता के मुख्य अंश:
​चुनाव के समय प्रधान का अचानक घर आना [00:30]
​विकास कार्य (नाली, सड़क, कॉलोनी) की अनदेखी [01:43]
​जातिवाद और आपसी फूट का चुनाव पर असर [02:30]
​वोट के लिए शराब और पैसों का वितरण [03:11]

https://youtu.be/tU_f7HkRa8g
https://youtu.be/d4OXZQ8zjL0
https://youtu.be/POoekhXmvow
https://youtu.be/6bgzG-mYvew
https://youtu.be/3ocWOOkQmtw

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Transcript
00:00राम राम साथियों जैहिन दोस्तों साथियों सबरडों की आपसी फूट के कारण ग्राम सभाई काई का छुनाव कैसे प्रभावित होता
00:09है ये अपने कानों सुना हाल मैं आज आपको कविता के माध्यन से सुनाती हूं
00:13मेरी कविता को लाइक करके मेरा मनोबल बढ़ाईएगा और मेरे चैनल को सब्सक्राइब कीजिएगा ताकि धरातल के भावनाओं के संबाद
00:23आप तक पहुचते रहें और आप उसका रसा स्वादन करते रहें
00:30कि आज दुवरा में परधानिन दिखाए गई
00:58काका काका बोल के बहुत मुसकाए गई
01:01काका काका बोल के बहुत मुसकाए गई कनवा मा खुसर खुसर बतलाई गई
01:08काका काका बोल के बहुत मुसकाए गई कनवा मा खुसर खुसर बतलाई गई
01:13अब तो हमार बड़ा भाव आवयवाला है लागत है परधानी का चुनाव आवयवाला है
01:20अब तो हमार बड़ा भाव आवयवाला है लागत है परधानी का चुनाव आवयवाला है पिता पुत्र की वारता में पुत्र
01:32कहता है कि नहीं पिता जी इस बार प्रधान बदलेंगे पूर परधान ने कोई विकास कारे नहीं किया है
01:41पिता तुरंत डाट लेता है कहता है नहीं नाली यव सड़क नहीं बनी कवनो बात नहीं
01:55पुत्र आत्म ज्यान का प्रियोग करता है पढ़ा लिखा था समाजिक बातें करता है
02:00और पिता तुरंत डाट लेता है और कहता है सुनो नाली और सड़क नहीं बनी कवनों बात नहीं
02:09मिली नहीं हमका कलोनी कवनों बात नहीं
02:12नाली और सड़क नहीं बनी कवनों बात नहीं
02:15मिली नहीं हमका कलोनी कवनों बात नहीं
02:28बनवबयन पण्डित परधान के तो कि प्णाव बेवस्था से भले सरोकार नहीं
02:44लूटिगा है गाव खुल।
03:09अपने सबाइके पीछे फिछे भाए आज देखा अपने सबाई के पीछे फिछे भाए आज देखा
03:15भाई रूपिया अदारू का बहाव आवे वाला है लागत है परधानी का चुनाव आवे वाला है और फिर से उसके
03:31दिल में सवरणों की प्रती इर्षया जागुर्पी है
03:34कि आपनों का बाड़ा चाहे बना रहें पंडितन आपसों में इनके हमेशा रहाया न बना
03:52अब बोकरी हमार कतो घुसी खेते बारी तो सुने के सहा है बेटावा हजार गारी तो
04:03बोकरी हमार कतो घुसी खेते बारी तो सुने के सहा है बेटावा हजार गारी तो
04:10अब भूल के जो कतहूं जिताए जिंहे पंडित जी फिर से हमाए अगुआए जिंहे पंडित जी
04:27ये नहीं के फिर से जिताव देई भाला है
04:30ये नहीं के फिर से जिताव देई भाला है अब तो हमार बड़ा भाव आवे वाला है
04:50रूपी ये दारू का बहाव आवे वाला है लागत्ह प्रधानी का चुनाव आवे वाला है
04:56लागत प्रधानी का चुनाव आवेवाला है
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