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राम राम मित्रों,

इस वीडियो में राधा रानी और श्री कृष्ण के प्रेम के उस पक्ष को दर्शाया गया है जहाँ कान्हा के जाने के बाद राधा एकांत में कदम के पेड़ के नीचे बैठकर उन्हें याद कर रही हैं।
​कविता के माध्यम से राधा जी प्रश्न करती हैं कि उन्होंने न तो सीता की तरह स्वर्ण मृग की कामना की और न ही कोई मर्यादा लांघी, फिर भी उन्हें यह विरह क्यों मिला? वह कान्हा से अपने पुराने दिनों को याद करते हुए कहती हैं कि अब यह मधुवन उन्हें अग्नि के समान लगने लगा है।
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यह कविता राधा जी के विरह और कृष्ण के प्रति उनके अटूट प्रेम पर आधारित है।
​राधा का विरह: मेरे कान्हा मेरे मोहन
​क्यों छोड़ा मुझे देकर विरह का राग: श्री राधा रानी की व्यथा
​कान्हा की याद में राधा के हृदय के प्रश्न - एक हृदयस्पर्शी कविता

https://youtu.be/3ocWOOkQmtw?si=T4jjLi9A3SMep-5Q
https://youtu.be/BCA9ASK51Tk?si=crgawWGrGqmiNhwf
https://youtu.be/XrbStwIf56M?si=WD944qc0TAzsNJt1
https://youtu.be/pDf0ipIAfZs?si=zWEz132Za6sxZtae

​राधा कृष्ण कविता (Radha Krishna Kavita)
​मेरे कान्हा मेरे मोहन (Mere Kanha Mere Mohan)
​राधा का विरह संदेश (Radha Virah Message)
​श्री कृष्ण भक्ति कविता (Shri Krishna Bhakti Poetry)
​राधा रानी के प्रश्न (Radha Rani Questions to Krishna)
​भावपूर्ण हिंदी कविता (Emotional Hindi Poem)
​बरसाने की राधा (Barsane ki Radha)
​कदम के नीचे राधा (Radha under Kadamba Tree)

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Transcript
00:00राम राम साथियों जैहिन दोस्तों
00:04साथियों
00:06बरसाने की राधा
00:08एक बिन एकांत में कदम के पेड की नीचे जाकर
00:12कनहया की याद में डूवी थी
00:14और उनसे मन ही मन प्रश्न कर रही थी
00:18कि प्रभू मुझे से क्या गलती हो गई
00:21कि आप मुझे छोड़ कर इसे चले गए उनके दुखी हुए मन के प्रश्न को मैं कविता के माध्यम से
00:29आप तक पहुचाती हूं
00:31कविता को लाइक करके मेरा होसला बढ़ाईएगा और मेरे चैनल को सब्सक्राइब कीजिएगा
00:36ताकि मेरी सभी रचनाएं आप तक पहुचती देनी
00:40कि मेरे कानहा मेरे मोहन मेरे घन शाम वै प्रियतम
00:59नसीता की तरह मैंने हिरण की काम ना की थी
01:07नरेखा लांग ने जैसी कोई अव मान ना की थी
01:15अपणना की तरह कैलाश पती से जिद नहीं खानी
01:24नाच ती थी तेरी उंगली में तेरी राधिकारानी
01:33तो क्यों छोड़ा मुझे देकर विरह काराग ये दारुन
01:43मेरे कानहा मेरे मोहन मेरे घन शाम वै प्रियतम
02:03बनाकर सुमन आभूशन न प्रभू मुझे को सजाते तुम
02:11न जूला बाहुओं का कदम के नीचे जूलाते तुम
02:28मेरा स्रंगार चरणों का वो रज लाकर मुझे दे दो
02:38न तुम से वीरत जीवन गरल अब आकर मुझे दे दो
02:47मुझे दावागनी सा लगने लगा चारो तरफ मधुवन
02:56मेरे कान हा मेरे मोहन मेरे घन शाम ऐ प्रियतम
03:05मेरे कान हा मेरे मोहन मेरे घन शाम ऐ प्रियतम
03:14मेरे कान हा मेरे मोहन मेरे घन शाम ऐ प्रियतम
03:23मेरे कान हा मेरे मोहन मेरे घन शाम ऐ प्रियतम
03:32झाल
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