00:00राम राम साथियों जैहिन दोस्तों
00:04साथियों
00:06बरसाने की राधा
00:08एक बिन एकांत में कदम के पेड की नीचे जाकर
00:12कनहया की याद में डूवी थी
00:14और उनसे मन ही मन प्रश्न कर रही थी
00:18कि प्रभू मुझे से क्या गलती हो गई
00:21कि आप मुझे छोड़ कर इसे चले गए उनके दुखी हुए मन के प्रश्न को मैं कविता के माध्यम से
00:29आप तक पहुचाती हूं
00:31कविता को लाइक करके मेरा होसला बढ़ाईएगा और मेरे चैनल को सब्सक्राइब कीजिएगा
00:36ताकि मेरी सभी रचनाएं आप तक पहुचती देनी
00:40कि मेरे कानहा मेरे मोहन मेरे घन शाम वै प्रियतम
00:59नसीता की तरह मैंने हिरण की काम ना की थी
01:07नरेखा लांग ने जैसी कोई अव मान ना की थी
01:15अपणना की तरह कैलाश पती से जिद नहीं खानी
01:24नाच ती थी तेरी उंगली में तेरी राधिकारानी
01:33तो क्यों छोड़ा मुझे देकर विरह काराग ये दारुन
01:43मेरे कानहा मेरे मोहन मेरे घन शाम वै प्रियतम
02:03बनाकर सुमन आभूशन न प्रभू मुझे को सजाते तुम
02:11न जूला बाहुओं का कदम के नीचे जूलाते तुम
02:28मेरा स्रंगार चरणों का वो रज लाकर मुझे दे दो
02:38न तुम से वीरत जीवन गरल अब आकर मुझे दे दो
02:47मुझे दावागनी सा लगने लगा चारो तरफ मधुवन
02:56मेरे कान हा मेरे मोहन मेरे घन शाम ऐ प्रियतम
03:05मेरे कान हा मेरे मोहन मेरे घन शाम ऐ प्रियतम
03:14मेरे कान हा मेरे मोहन मेरे घन शाम ऐ प्रियतम
03:23मेरे कान हा मेरे मोहन मेरे घन शाम ऐ प्रियतम
03:32झाल
Comments