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"राम-राम साथियों!
इस वीडियो में एक नेता और एक कवि के बीच के संवाद को कविता के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है। जब अहंकार में डूबे एक नेता ने कवि से अपनी पहचान पूछी, तो कवि ने अपनी कलम की ताकत से उन्हें मानवता और कर्तव्य का पाठ पढ़ाया।
​यह कविता समाज के वर्तमान परिदृश्य, लोकतंत्र की सच्चाई और गरीबों के संघर्ष को दर्शाती है। यदि आपको यह रचना पसंद आए, तो वीडियो को लाइक करें और हमारे चैनल "अनसुनी रचना '' को सब्सक्राइब करना न भूलें।"

यह कविता नेता के उस अहंकार पर प्रहार करती है जहाँ वह स्वयं को सर्वोपरि समझने लगता है। कवि स्पष्ट करता है कि वह समाज की पीड़ा, झोपड़ियों की आहट और मानवता की परिपाटी को समझता है, जबकि नेता केवल सत्ता और भीड़ के पीछे भागता है। अंत में, यह कविता संदेश देती है कि असली ताकत जनता (जनमत) के पास है।

वीडियो के मुख्य अंश:
​[00:09] नेता और कवि का आमना-सामना और अहंकार की शुरुआत।
​[00:43] "तुम खुद को कहते नेता हो..." - कविता का आरंभ।
​[01:33] कवि की प्रभुता बनाम नेता की लघुता का वर्णन।
​[02:18] शब्दों की शक्ति और भावों की अमरता।
​[03:35] नेता के लिए भीड़ का महत्व और जनता का असली मूल्य।
​[04:15] अंगूठों की ताकत (वोट) से सत्ता पाने का सत्य।

​हिंदी व्यंग्य कविता (Hindi Satire Poetry)
​नेता और कवि संवाद (Neta and Kavi Dialogue)
​लोकतंत्र पर कविता (Poem on Democracy)
​समाज का दर्पण कविता (Samaj Ka Darpan)
​राजनीति पर कटाक्ष (Political Satire Hindi)
​कलम की ताकत (Power of Pen)
​जनता की शक्ति (Power of Common Man)
​हिंदी साहित्य (Hindi Sahitya)
​मार्मिक कविता (Heart Touching Hindi Poem)

https://youtu.be/BCA9ASK51Tk?si=a1B2J4hEgXLNELc3

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Transcript
00:00राम राम साथियों जैहिन दोस्तों
00:02दोस्तों एक दिन एक नेता जी और एक कवी आमने सामने होते हैं
00:08तो नेता जी सोचते हैं कि कवी मुझे सलाम करें
00:11और कवी सोचते हैं कि मैं समाज का दर्पण हूँ
00:15मानावता की राह दिखाता हूँ
00:18नेता जी मुझे सलाम करें
00:20इसी गर्व के चलते
00:22कवी को मौन देखकर
00:24नेता जी ने कहा
00:25कि क्या तुम मुझे नहीं जानतें
00:28तब कवी कलम के माध्यम से क्या जवाब देता है
00:32आपके सामने जवाब है सुनिएगा
00:33और मेरी कवीता को लाइक करके
00:36कि मेरा होसला बढ़ाईएगा
00:37मेरे चैनल को सब्सक्राइब कीजिएगा
00:39ताकि मेरी सारी रचनाएं आप तक पहुंचती रहें
00:43कि तुम खुद को कहते नेता हो
00:46तुम को क्या जानू तुम क्या हो
00:49तुम खुद को कहते नेता हो
00:51तुम को क्या जानू तुम क्या हो
00:53ये दुनिया परिडाम से जाने, अभी नेता को नाम से जाने, नेताओं को काम से जाने, कौन काम तुमने कर
01:00डाला, किसे खिलाया एक निवाला, लक्ष कौन तुमने संधाना, मूल कौन सा तुमने जाना,
01:07मूलकौन सा तुमने जाना
01:09हकदारों का छीन छीन हक
01:11तुमने अपना घर चमकाया
01:13लोकतंपर के दीपदान से
01:16अपने घर का दिया जलाया
01:18तुम खुद को नेता माने हो
01:20कब दुख्यों का दुख जाने हो
01:26और तुम से अच्छी लगुता मेरी
01:29तुमसे बढ़कर प्रभुता मेरी, तुम खुद को नेता माने हो, कब दुखियों का दुख जाने हो
01:35तुमसे अच्छी लगुता मेरी, तुमसे बढ़कर प्रभुता मेरी
01:39तुम बगुले सा ध्यान लगाते, मैं हनसिनी हूँ, चुनकर मोती
01:44तुम जिसका शिकार कर लेते मैं उसका दुख दर्ब की होती
01:49तुम खुद को नेता माने हो तब दुखियों का दुख जाने हो
01:53मैं खुद को कभी त्री मानू अपनी जन्मत काबल जानू अपनी धरा धरा तल जानू
01:59दिनों दुख्यों की घबराहट जानू जोपडियों की आहट गाउं की सब रस्ता जानू जीवन की नीरस्ता जानू चूले का अनुराग
02:09जानती गलियों का दुरभाग जानती कर्मों का उन्नयन जानती सही गलत का चैन जानती बोट नहीं मुझको लेना है चोट
02:19नहीं मुझ
02:19को देना है मैं शब्दों की अमर्विधायक मैं भाओं की सची नायक जीत जानती हर जानती काल चक्र का वार
02:29जानती नफरत की तलवार जानती प्रेम सधा की धार जानती सत्रु जानती मीत जानती मैं करुणा का गीत जानती मैं
02:39करुणा का गीत जानती तुम खुद को नेता मान
02:45कभी कही respectfully के इता परियाय बताओ जिसमें कुछ सदकर्म लिखा अपना एक अध्याय बताओ
03:06कभी बेटियों की राहों का बढ़कर कोई शूलच ना
03:12या करुणा से भरी हुई आँखों की दुख का मूल सुना
03:18कभी गरीबों के हिसे का खेत और खलियान दिखा
03:21माटी के दीवट में जलते दिये का अर्मान दिखा
03:25माटी के दीवट में जलते दिये का अर्मान दिखा
03:28रीण तोड़ कर सब की अपनी कमर बचाना सीखे हो
03:41भीड बचाना सीखे हो तुमको भीड चाहिए केवल रैली में चिलाने को तुमको भीड चाहिए आगे पीछे आने जाने को
03:50तुमको भीड चाहिए केवल सिंगासन हत्याने को
03:55भीर दिखाई देती है केवल नीले मोहर की छाप तुम्हें उसी उसी हुर्दें के भीतर वाला नहीं दिखा अंत्राप तुम्हें
04:11बन बैठे राजा तो भुजबल अपना नहीं लगाया है इन्हीं अंगूठों की ताकत से तुमने सत्ता पाया है
04:24जन्मत की ताकत होती है जन्मत की सत्ता होती है जन्गण ने पैगाम दिया जाओ जय बोलो जन्ता की जिसने
04:36तुमको नाम दिया
04:39जाओ जय बोलो जन्ता की जिसने तुमको नाम दिया जय हिंद
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