00:00राम राम साथियों जैहिन दोस्तों
00:02दोस्तों एक दिन एक नेता जी और एक कवी आमने सामने होते हैं
00:08तो नेता जी सोचते हैं कि कवी मुझे सलाम करें
00:11और कवी सोचते हैं कि मैं समाज का दर्पण हूँ
00:15मानावता की राह दिखाता हूँ
00:18नेता जी मुझे सलाम करें
00:20इसी गर्व के चलते
00:22कवी को मौन देखकर
00:24नेता जी ने कहा
00:25कि क्या तुम मुझे नहीं जानतें
00:28तब कवी कलम के माध्यम से क्या जवाब देता है
00:32आपके सामने जवाब है सुनिएगा
00:33और मेरी कवीता को लाइक करके
00:36कि मेरा होसला बढ़ाईएगा
00:37मेरे चैनल को सब्सक्राइब कीजिएगा
00:39ताकि मेरी सारी रचनाएं आप तक पहुंचती रहें
00:43कि तुम खुद को कहते नेता हो
00:46तुम को क्या जानू तुम क्या हो
00:49तुम खुद को कहते नेता हो
00:51तुम को क्या जानू तुम क्या हो
00:53ये दुनिया परिडाम से जाने, अभी नेता को नाम से जाने, नेताओं को काम से जाने, कौन काम तुमने कर
01:00डाला, किसे खिलाया एक निवाला, लक्ष कौन तुमने संधाना, मूल कौन सा तुमने जाना,
01:07मूलकौन सा तुमने जाना
01:09हकदारों का छीन छीन हक
01:11तुमने अपना घर चमकाया
01:13लोकतंपर के दीपदान से
01:16अपने घर का दिया जलाया
01:18तुम खुद को नेता माने हो
01:20कब दुख्यों का दुख जाने हो
01:26और तुम से अच्छी लगुता मेरी
01:29तुमसे बढ़कर प्रभुता मेरी, तुम खुद को नेता माने हो, कब दुखियों का दुख जाने हो
01:35तुमसे अच्छी लगुता मेरी, तुमसे बढ़कर प्रभुता मेरी
01:39तुम बगुले सा ध्यान लगाते, मैं हनसिनी हूँ, चुनकर मोती
01:44तुम जिसका शिकार कर लेते मैं उसका दुख दर्ब की होती
01:49तुम खुद को नेता माने हो तब दुखियों का दुख जाने हो
01:53मैं खुद को कभी त्री मानू अपनी जन्मत काबल जानू अपनी धरा धरा तल जानू
01:59दिनों दुख्यों की घबराहट जानू जोपडियों की आहट गाउं की सब रस्ता जानू जीवन की नीरस्ता जानू चूले का अनुराग
02:09जानती गलियों का दुरभाग जानती कर्मों का उन्नयन जानती सही गलत का चैन जानती बोट नहीं मुझको लेना है चोट
02:19नहीं मुझ
02:19को देना है मैं शब्दों की अमर्विधायक मैं भाओं की सची नायक जीत जानती हर जानती काल चक्र का वार
02:29जानती नफरत की तलवार जानती प्रेम सधा की धार जानती सत्रु जानती मीत जानती मैं करुणा का गीत जानती मैं
02:39करुणा का गीत जानती तुम खुद को नेता मान
02:45कभी कही respectfully के इता परियाय बताओ जिसमें कुछ सदकर्म लिखा अपना एक अध्याय बताओ
03:06कभी बेटियों की राहों का बढ़कर कोई शूलच ना
03:12या करुणा से भरी हुई आँखों की दुख का मूल सुना
03:18कभी गरीबों के हिसे का खेत और खलियान दिखा
03:21माटी के दीवट में जलते दिये का अर्मान दिखा
03:25माटी के दीवट में जलते दिये का अर्मान दिखा
03:28रीण तोड़ कर सब की अपनी कमर बचाना सीखे हो
03:41भीड बचाना सीखे हो तुमको भीड चाहिए केवल रैली में चिलाने को तुमको भीड चाहिए आगे पीछे आने जाने को
03:50तुमको भीड चाहिए केवल सिंगासन हत्याने को
03:55भीर दिखाई देती है केवल नीले मोहर की छाप तुम्हें उसी उसी हुर्दें के भीतर वाला नहीं दिखा अंत्राप तुम्हें
04:11बन बैठे राजा तो भुजबल अपना नहीं लगाया है इन्हीं अंगूठों की ताकत से तुमने सत्ता पाया है
04:24जन्मत की ताकत होती है जन्मत की सत्ता होती है जन्गण ने पैगाम दिया जाओ जय बोलो जन्ता की जिसने
04:36तुमको नाम दिया
04:39जाओ जय बोलो जन्ता की जिसने तुमको नाम दिया जय हिंद
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