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ये वीडियो श्रीमद्भगवद्गीता 10 जनवरी 2026, अध्याय 6 श्लोक 45 पर हुए लाइव सत्र से लिया गया है।
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Transcript
00:00अमेरिकी विश्विद्याल है
00:02वहाँ पंदरवी शुदापदी से पहले क्या था? कौन रहता था?
00:07कभीले
00:09और आज वहाँ
00:13दुनिया की सबसे बड़ी उनिवरस्टीज खड़ी हुई है
00:16और वहाँ पर बस भौतिक विश्यों में नहीं
00:21दर्शन में, मनो विज्ञान में
00:24सबसे ज़़ा काम वही हो रहा है
00:26और उनके पास ग्यान की कोई परंपरा नहीं है
00:28वो नहीं कह पाएंगे कि हम विश्यों गुरू थे
00:30पर आज के गुरू वही है
00:35आपके बच्चों को भी पढ़ना होता है
00:37तो आप कोशिश करते हो कि उन्हें किसी अमेरिकन युनिवरस्टी में दाखिला मिल जाए
00:40और उनको वो गुरूता परंपरा से नहीं मिली है
00:43कैसे मिली है?
00:45अपने प्रहत्म से, अपनी निष्ठा से
00:47अपनी निष्ठा दिखानी पड़ती है भाई
00:49भारत में तो हम बस ढोलना गाड़ा बजाओ
00:51और हरीके गुणगाओ
00:53कहां कुछ जानना समझना है हमें
00:55हमारे लिए तो परंपरा ही परयाप्त है
00:57यहां हर आदमी यही मान के बैठा है
00:59कि हम इस मिट्टी से पैदा हुए हैं
01:02तो ग्यानी है ही
01:04विशेशकर पूरवी भारत में
01:08बनारस से लेकर के कलकत्ता तक
01:10वहां नुकड़ पर पनवाडी की दुकान पे
01:13सब खड़े होंगे ब्रहम ग्यानी
01:15सरकारी दफसरों में चले जाओ
01:16वहां कुछ नहीं हो रहा बस ब्रहम चर्चा चल रही है
01:19पढ़ा किसी ने आधा उपनिशद नहीं आज तक
01:22जीवन में किसी के प्रकाश नहीं दिखाई दे रहा
01:24पर सब अपनी नजर में क्या है
01:27महा ग्यानी
01:27क्यों? क्योंकि हम भारत भूमी की आउलाद है
01:30तो हम तो ग्यानी होंगे ना
01:32बुद्ध को ग्यान अपने पिता से मिला था गया
01:35तो आपको अपने पूरवजों से ग्यान कैसे मिल जाएगा
01:39स्वयम साधना करनी होती है
01:43निजी तपस्या से मिलता है
01:45भूमे और देश के इतिहास और विरासत से नहीं मिलता
01:49शूने से शुरुआत करिए
01:51कुछ बहुत अच्छा सुन्दर और सच्चा शायद सामने आये
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