00:00एक दोस्त मेरा, इसको स्कूल के समय से जानता हूँ, उसकी ही एक क्यांपस की रड़की थी, उसको पसंद थी,
00:09उनका लगभग तीन साल वहां पर रिष्टा चला, दो काम हुए इसके साथ, रड़के के साथ, पहला तो रड़की की
00:17जाती दूसरी थी, तो बाप ने और परिव
00:25हो गए, इन्होंने शादी नहीं करी, ये पहला काम हुआ इनके साथ, दूसरा काम ये कि, ये कंप्टिटर साइंस से
00:32थे, पोडिंग वगएरा बढ़ियां करता था, शुरू से ही, लेकिन बाप का काम ठेकेदारी का, और उसमें भी उनको सरकारी
00:40प्रोजेक्स मिनने शुरू
00:53गई, करीब आठ दस साल पहले ये मुझे मिला, मैं गुडगां गया हुआ था, वहीं उसका ओफिस था, उसमें बुलाया,
01:02मस्ट, स्वैंकी ओफिस, मैं गया, मैंने तारीफ करी, मैंने गा, ये तो बड़ा तुमने भव्वे खड़ा कर रखा है मामला,
01:10तो मालू में हो, क्य
01:19और चुप, इसके बाद लगभद पांच मिनित तक मेरे और उसके बीच में सर्नाटा रहा, उसको ये तो पता ही
01:27था कि उसने मुझे सब कुछ बता दिया, उसको ये भी पता था कि मैं सब कुछ समझ गया, दो
01:35ही चीजे थी जिनके लिए जीता था, और दोनों ही चीजे छिन
01:40गई तो और क्या करता और उसके बाद से भी मैं उससे बीच-बीच में संपर्क में रहा हूं एक
01:48आदमी बाहर से
01:50सजा सवरा होकर भी भीतर से तबाह कैसे हो सकता है यह मैंने उसकी जंदगी में देखा है तूटा हुआ
01:59बिखरा हुआ सहमा रोता हुआ और खाली
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