00:00सर हमारे स्राउंडिंग के में जब आखों के सामने बहुत सारे कपल्स होते हैं और मन में केरियर के लिए
00:06के बहुत वारा डर होता है
00:08नी मैं ना समझ हूँ मैं समझा नहीं कि एक कपल को देखके तुम्हें केरियर में क्या डर लग जाता
00:14है
00:18ऐसा कौन सा केरियर बना रहे हो जिसके लिए कपल खतरा है
00:27जिस जगह पर तुम हो जिस परिवेश में तुम हो
00:30तुम्हारी उम्र और तुम्हारी ही परिवेश की
00:33तुम्हारी ही संख्या की लड़कियां मौजूद होंगी
00:36तो जैसे प्रक्रति में लड़की लड़का नरनारी पैदा हो जाते हैं
00:41वैसे ही प्रक्रति में उं मिल भी लेंगे
00:43तो अब इनका सवाल ये है कि मिलती क्यों नहीं
00:46और मेरा सवाल भी यही है जरा से बदल के कि मिली क्यों नहीं
00:50इतनी सीधी सी बात है, सांस लेने जैसी बात है, दिल के धड़कने जैसी बात है, हो गया तो ठीक
00:56है, कुछ उसमें इतना विशेश नहीं, कुछ इतना बड़ा नहीं कि उसका हुआ बनाया जाए, तुम बताओ, ये साधारण सी
01:01बात भी तुम्हारी जिंदगी में हुई क्यों
01:03नहीं कौन आड़े आ रहा है हम उसका नाम जानना चाहते हैं वो कौन है जो एक सहज प्राक्रतिक मिलन
01:11को भी असंभाव वे इंप्रॉबेबल बना देता है वो कौन है उसको बोलते हैं इगो और वो चलती है
01:18बिलीफ्स पर माननेताओं पर धारणाओं पर वही है दे फिक्टीशियस सेल्फ दे बिलीफ सिस्टम कॉल दे इगो वो कहता है
01:28ऐसी वाली चाहिए अपनी जातिकी चाहिए शर्मीली चाहिए और जैसा हमारा उत्तर भारत में चलता है एक और कौनसेप फर्स्ट
01:37हैंड चाहिए
01:38और ऐसी चाहिए जिसके सामने हम ना आये वो खुद आ करके हमारे चरणों में लोट करके प्रणय नवेदन करे
01:45बोले है प्राणनाथ मैं मनी मन तुमें अपना पति मान चुकी हूँ
01:50तुम इतनी भारी शर्ते रखोगे तो कौन मिलेगी
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