00:00मेहनत मजदूर की सायोग सरकार का सड़क सेटकी
00:04जी हाँ उम्प्रकाश वालमी की कविता ठाकुर का कुआ कुआ कुआ कुआ बदल कर पढ़ा जाना चाहिए
00:09पबलिक स्कूल सेटके
00:10सारी के स्कूल भी सेटके, कंपनी सेटकी, खेत, खलियान, ख़दान, जंगल सेटके, गली महुले सेटके, तो फिर अपना क्या गाउं,
00:19शहर, देश, या कविता गंगा एक्सप्रेस वे को लेकर याद आई कियों, क्योंकि मेरट से प्रियागराज, याने इलाबाद तक के
00:26594 क
00:39किलोमेटर प्रति घंटा की रखे गई है रफ्तार, और कहा जा रहा है कि मेरट से प्रियागराज जाने में इसमें
00:445-6 घंटे की बचत होगी, इस एक्सप्रेस वे को PPP मॉडल यानि पब्लिक प्राइवेट पार्टनर्शिप के तहद बनाया गया
01:06है, उसमें सरकार की एजन
01:09या 30 साल तक उनके ही खाते में जाएगा, टोल भी ऐसा वैसा नहीं है, हजारों में है, गंगा एक्सप्रेस
01:15पर टोल की दर 2 पईया, 3 पईया और टेक्टर के लिए 1 रुपए 28 पैसे 5 किलोमेटर रखी गई
01:21है, कार, जी, बैन के लिए 2 रुपए 55 पैसे, हलके कॉमरिशल वा
01:37साथ सो साट रुपया, और कार से जाने पर पंदरा सो पंदरा रुपया, चुकि यह एक्सप्रेस 12 जिलो को जोड़ता
01:45है, और अगर आप अपनी यात्रा ब्रेक करके जाएं, यानि एक जिगे उतर जाएं, और फिर इस एक्सप्रेस पे पर
01:49चढ़ें, यानि मेरट से बताई
02:05बढ़ेगा और वो किस से वसूला जाएगा, आम यात्रियों से, लोग कमेंड कर रहे हैं, इस से अच्छा तो ट्रेन
02:10या फ्लाइट से चले जाएं, वही सस्ती पड़ेगी, आप में से बहुत लोग कहेंगे कि विकास की कीमत तो चुकानी
02:15ही होगी, लेकिन असल सवाल इसी �
02:17विकास के मॉडल पर है, जिसमें विकास का मतलब कुछ फ्लाई ओवर, एक्सप्रेस वे और उची इमारते मान लिया गया
02:24है, इसमें ना महंगाई की बात होती है, ना प्रतिवक्ति आय की बात होती है, ना जीवन इसतर की बात
02:30होती है, खैर इतने ज़्याद है टोल पर गो�
02:47सकते हैं मोदी हैं योगी हैं और उनके परमित्र सेड़ जी हैं तो फिर सब कुछ मुमकिन है
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