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00:00भारत का संविधान तो सच्चे अर्थों में धार्मिक है, कोई बाहरी सत्ता हम पर शासन नहीं करेगी, हम अपने इधाता
00:07स्वयम हैं, मैं किसी का प्रभुत्तो स्विकार नहीं करूँगा, मैं सौवरन हूँ, मैं रिपब्लिक हूँ
00:41जानना चाहता हूँ
00:43रंच को ही तोने मरोणने पर उतार आए। आप मुझे ये बताईए कि क्या धार्मिक नहीं होना चाहिए।
00:52समस्ते अचारी जी, मैं नाम सागर है, मैं राजनीती सास्त्र का एक शोथ छात्र हूं।
00:58अचारी जी मैं देखता हूं कि सुकरात और महात्मा गांधी है।
01:03दोनों में एक बात समान है कि वो धर्म और राजनीती को अलग-अलग नहीं देखते हैं।
01:10जहां तक देखते हैं कि महात्मा गांधी ये भी कहते हैं कि धर्म में अगर राजनीती को हटा दिया जाएगा,
01:19राजनीत से अगर धर्म को हटा दिया जाएगा
01:21तो वो एक
01:24मौत का जाल हो जाएगा
01:27तो अचार जी मैं
01:28आज की जो राजनीती है
01:30इसमें वास्तविक धर्म की क्या भूमिका है
01:32यह जानना चाहता हूं
01:35और आज की राजनीती को
01:37वास्तविंग धर्म दोरा कैसे बदला जा सकता है
01:40राजनीती नहीं आदमी का कोई भी काम
01:45या तो
01:49सही के अंदर से आता है गलत के अंदर से आता है
01:55सारे ही कर्मों में करता को ही तो देखना होता है ना
02:01या सिर्फ कुछ कर्मों में करता को देखना होता है
02:08और करता सही हो
02:13किसी साधना को धर्म कहते हैं
02:18तो राजनीति हो, विज्ञान हो, व्यापार हो, खेल हो, कला हो
02:27परिवार हो, समाज हो
02:29इन सबको ही धर्मिक होना पड़ेगा
02:35राजनीति और धर्म दूर नहीं रखे जाते
02:40लोकधर्म को सबसे दूर रखना होता है
02:46राजनीति से धर्म को दूर रखने की जरूरत नहीं है
02:50हाँ, राजनीति में लोकधर्म घुसरा आओ, तो लोकधर्म को दूर जरूर करिए
03:00राजनीती तो धार्मिक होनी ही चाहिए
03:02और धार्मिक पंथ के रूप में नहीं
03:09धार्मिक होनी चाहिए इस अर्थ में कि वो करता
03:15यानि जो राजनेता है जो राजनीतिक के है
03:19उसके प्रकाश से संचालित हो
03:24आप कोई भी काम अपनी सच्चाई से करें तो वो धार्मिक है
03:31राजनीती भी आपकी सच्चाई के केंदर से होनी चाहिए
03:36तो राजनीती को भी धार्मिक होना ही चाहिए
03:38आप मुझे ये बताएए कि क्या धार्मिक नहीं होना चाहिए
03:41सब कुछ ही धार्मिक honा चाहिए
03:44भारत का समविधान ही धार्मिक है
03:49वो पंध निरपेक्ष है भाई
03:52और धार्मिक थोड़े ही है
03:56पंध निरपेक्ष का मतलब हुआ
03:58ये लोकधर्म जो आठ दस धाराएं बना कर चलता है
04:02हमारी राजनीती लोकधर्म की किसी धारा पर नहीं चलेगी
04:06हमारी राजनीती लोकधर्म की सारी धाराओं से निर्पेक्छ होगी
04:12हमारी राजनीती लोकधर्म निर्पेक्छ है
04:15ये कहता है हमारा सम्विधान
04:18बहुत बढ़िया बात कहता है
04:23अनिथा भारत का सम्विधान तो सच्चे अर्थों में धार्मिक है
04:28वो जितनी बाते कह रहा है कोई भी बात अहंकार को पसंद आएगी क्या
04:34और जो बात अहंकार को नहीं पसंद आए समझ लिजे ओ धार्मिक है
04:38भारत का सम्विधान कहता है समाजवाद
04:40समाजवात माने आर्थिक समानता
04:43अंकार को अच्छा लगेगा कि सबके पास एक बड़ावर पैसा हो
04:47जल्दी बोलो
04:47अंकार हमेशा क्या चाहता है
04:49मेरे पास जादा हो
04:55कोई भी सिध्धानता आप उठा लीजिए सम्विधान का
04:58वो अंकार को पसंदी नहीं आएगा
05:01हमारा सम्विधान सारी उनहीं बातों से भरा पड़ा है
05:04जो अंकार को अच्छी नहीं लगती
05:09कोई बाहरी सत्ता हम पर शासन नहीं गरेगी
05:12हम अपने विधाता स्वयम है
05:15मैं किसी का प्रभुत तो स्विकार नहीं करूँगा
05:18मैं सौवेरन हूँ मैं रिपब्लिक हूँ
05:19कोई राजा रानी कोई परंपरा मेरे उपर काम नहीं करेगा
05:23अंकार को तो यह वाद पसंद ही नहीं
05:25हंकार तो हमीशा चाहता है
05:26मेरी आजादी लेलो और मुझे सुरक्षा
05:29और सुविधा दे दो
05:34चाहता है न
05:40अंकार कभी कहता है कि मुझे पंत निर्पेक्ष होना है नहीं
05:43अंकार तो सदगी कहता है कि मेरा ही जो पंत है उस अरुशेष्ट है
05:49फिर आगे आपका सम्विधान कहेगा
05:54जस्टिस, लिबर्टी, इक्वालिटी, फ्रेटर्निटी
05:58पंत अरुशेष्ट आप अंकार विश्व बंतुट की भावना रक्ता है क्या
06:02कि सितने लोग हैं सब बंधु है मेरे रकता है क्या
06:08अंकार को तो संविधान जचेगा ही नहीं
06:10और जो कुछ अंकार को न जचे वही धर्मीक है
06:14तो आपका संविधान ही धर्मिक
06:17तो आपकी राजनीति को तो धार्मिक हो नहीं पड़ेगा
06:20अगर आपकी राजनीति सम्वैधानिक है
06:22तो इसका अर्थ हो धार्मिक है
06:24क्योंकि आपका सम्विधान ही सच्चे अर्थों में धार्मिक है
06:33Justice of status and opportunity
06:37Equality
06:42of status and opportunity
06:43Justice, legal, social, political
06:47अंकार को न्याय पसंद है कभी या
06:51अपने प्रती ही पक्षपात पसंद है
07:06Praternity, ensuring the dignity of the individual and the unity and integrity of the nation
07:11Dignity, गरिमा
07:13अंकार को कोई गरिमा होती है
07:16ये तो सारे शब्द
07:18अभी सम्विधान तो ठीक से शुरू भी नहीं हुआ, ये प्रियम्बल के शब्द है
07:21ये खच्च से
07:24चाती में धस्ते हैं अंकार की
07:26अंकार को सम्विधान नहीं पसंद आएगा
07:29इसी से प्रमाणित हो जाता है कि सम्विधान धार्मिक है
07:40हम इस सम्विधान को आत्म अर्पित करते हैं
07:45on this 26th of November 1949
07:48we give to ourselves this constitution
07:53किसी बाहरी ताकत की आउकात नहीं की राजगरे हम पे
07:57we give to ourselves this constitution
08:03नहीं चलूँगा समाज, समय, सैयोग
08:09और शरीर के चलाए
08:13अपने चलाए चलूँगा
08:15अपने विधान को आत्म अर्पित करता हूँ
08:17बाहर कोई मेरा विधाता नहीं बैठा है
08:19मैं बाहर की किसी भी विधाता को मानने से इनकार करता हूँ
08:22ये बात धार्मिक है की नहीं
08:24तो ये समविधान है आपका
08:26तो बताईए आपकी राजनीती धार्मिक होनी चाहिए की नहीं होनी चाहिए
08:30अगर समविधानिक है तो धार्मिक है
08:32उसे होना पड़ेगा धार्मिक
08:33हाँ
08:37वो पंथवादी नहीं हो सकती
08:40सम्विधान कहता है राजनीति धार्मिक जरूर हो लोकधार्मिक नहीं होनी चाहिए
08:49उसमें ये सब नहीं हो सकता कि
08:53मेरा रिलिजिन मेरा मज़भ तुम्हारे से बहतर है
08:59तो जैसे मैं चाहता हूँ देश वैसे चलेगा ये नहीं चलेगा
09:05कानून की दृष्टे में सब पंध एक बराबर होंगे
09:16फिर से गह रहा हूँ राजनीती छोड़ो इनसान के हर कर्म का आधार धर्म ही होना चाहिए
09:22राजनीती तो धार्मिक होनी ही चाहिए
09:25सारे कर्म धार्मिक होने चाहिए
09:27चोटे से चोटा कर्म भी धार्मिक होना चाहिए
09:30और धार्मिक मतलब यह नहीं कि तुम कर्म करोगे तो शंक फूकोगे
09:33और घंटा घड़ियाल वजाओगे तब धार्मिक होगा
09:36जो भी तुम्हारे बोध से आ रहा है वो धार्मिक है
09:40जो भी तुम्हारे सही केंदर से आ रहा है वो धार्मिक है
09:44आप यहां खड़े हो यह धार्मिक कृत्त है
09:47मैं आपको उत्तर दे रहा हूँ अपनी पूरी निष्ठा के साथ
09:52तो यह धार्मिक उत्तर है
09:55आप ध्यान से सुन रहे हो
09:57तो ये धार्मिक काम है क्योंकि ध्यान ही धार्मिक है
10:03धर्म का मतलब यह नहीं कि विशेश लिबास पहनोगे
10:06विशेश जगय जाओगे विशेश कर्मकांड करोगे तब धर्म होगा
10:10चलते फिरते होता है धर्म
10:13एक-एक सांस का आधार होना चाहिए धर्म
10:23आरे बात समझने है
10:24जी अचारी
10:26अचारी जी डॉक्टर भीम राम बेटकर
10:28कहते हैं कि सम्मिधान
10:29कितना भी अच्छा हो किसी देश का
10:31लेकिन सम्मिधान चलाने वाले जो है
10:33वो अच्छे होने चाहिए तब ही
10:36बिलकुल है
10:39सम्मिधान
10:44बाहरी
10:45शोशण से आपको बचा सकता है
10:49लेकिन आप खुद
10:50अपने शोशण बन जाओ तो समविधान क्या करेगा
10:54समविधान आपको Liberty दे रहा है
10:56आप उस Liberty का इस्तिमाल अपनी खिलाफ कर लो
10:58तो समविधान क्या करेगा
11:00एक बार मैंने इसलिए कहा था
11:02कि दूसरे आपका शोशण ना करें, इसके लिए सम्विधान है, और आप खुद अपना शोशण ना करो, इसके लिए अध्यात्म
11:09है, इनसान ही अगर पगला गया हो, तो फिर सम्विधान भी बेबस हो जाता है,
11:25अजयर जी सुकरात कहते हैं कि state is individual writ large और महात्म गांदी कहते हैं कि be the change
11:33that we want to see in this world, दोनों एक ही बात कहते हैं, कि लोगों को बदलिये, individual को
11:39बदलिये, तो क्या सम्मिधान से हम individual को बदल सकते हैं या सिर्फ अध्यात में भी आपको पैदा कर सकते
11:47हैं, देखो आपको खराब करन
11:49याली परिस्थितियां बाहरी होती है न अनुकूल परिस्थितियां रहे तो बहतर होने में
11:55मदद मिलती है न कुझा दारण के लिए���ין के अभी हो डि
12:15आप भी घर में को ठेस लेगी आप ठीक से सुन भी नहीं पाऊगे
12:19समविधान ये सुनिश्चित करता है कि बाहरी इस्थितियां
12:23व्यक्ति समाज और राष्ट की प्रगति के लिए अनुकूल रहें
12:30बाहरी हालात ऐसे दे देता है कि देखो बेटा तुम्हें अच्छे हालात दे दिए
12:34जाओ، तरक्की करो अब उसके बाद भी बेटा तरक्की करेगा कि नहीं करेगा ये बेटा जाने
12:41क्योंकि समविधान के बाद अपनी कोई जीवीच चेतना तो है नहीं
12:44अब तो वो एक किताब है उसको एक राश्ट्री एक रंथ हम कह सकते है उसने अपना काम भखू भी
12:52निभाया है उसने हमें वो सही इस्थितियां दे दी हैं वो बाहरी हालात दे दी हैं कि अगर हम बहतर
13:01होना चाहें अगर हम फैलना चाहें पसरना चाहें उड़ना चाहें तो ह
13:14बाहरी ही न, आप यहां अपने भीतर बैठे हो, अब भीतर बैठ करके सम्विधान आपको जो बाहर छूट दे रहा
13:22है, आप उस छूट का दुरुपयोग भी कर सकते हो, आप तो यहां तक कर सकते हो कि सम्विधान, मैं
13:32पूरी तरीके से तब्दीली ले आदो, सब कुछी पद
13:34सल दो, ऐसा संशुधन कर दो, आपको मालूम है, चलिए आप लोग इस पर करिये गया, सरकार, केश्वान अंदभारती के
13:44सुना है, सरकार चाह रही थी कि, तमविधान में ऐसे ऐसे परिवर्तन कर दे, कि समझ लो कि, उसकी बुनियाद
13:58ही हिल जाए,
14:00तो फिर, आज से करीब पचास साल पहले, सुप्रीम कोर्ट ने बेसिक स्ट्रक्चर की डॉक्ट्रीन दी थी, कि और तुमको
14:14जितने अमेंडमेंट्स करने हैं, कर लेना, और हो गए, बहुत अमेंडमेंट्मेंट हो गए, कॉंस्टिटूशन के, कितने हो गए, सवा सवत
14:20हो �
14:20गए थे, अब कितने, 200 हो गए, 100, नहीं, 100, तो बहुत पहले पार कर गए थे, जितने भी हैं,
14:28चलो, तो संशोधन तो हम उपरी करते ही रहते हैं सम्विधान में, हम कहीं उसकी बुनियाद ही नहिला दें, तो
14:39इसके लिए सरोच ने ने कहा कि कुछ बाते हैं, जो आप सम्व
14:48हो सकता है, कि जो ग्रंथ उसको समानता, बंधुत और स्वतंतरता दिलाने के लिए लिए लिखा गया हो, वो उस
15:01ग्रंथ को ही तोड़ने मरोडने पर उतार आए, हरोच नेयले को हस्तक शेप करके रोक लगानी पड़ी कि भाई, सम्विधान
15:12को अमेंड करने के वी एक सीमा ह
15:13होती है, इस से आदा मत कर देना, इंसान बड़ी बेहुदी चीज है, उसे तुम सम्विधान क्या अध्यात्मिक गरंथ दे
15:25दो, वो उसका भी दुरुपयोग कर डालता है, और दुरुपयोग ही नहीं करता है, वो उसको काट छाट के बदल
15:32भी देता है,
15:40अचार जी हमारे नेता ये जानते हैं, कि सुकरात और गांधी जी इंडिवीज्वल को फीडम की बात कर रहे हैं,
15:51अध्यात्मिक बात कर रहे हैं, फिर भी जो अभी इस समाज में, हमारे देश में, जो मुझे सबसे बड़ा फिलोसफर
16:00दिखता है, वो आप हैं, जो अध्या
16:02आत्मिक तोर से चीजें बदल रहे हैं, राजनीदी को भी बदल सकते हैं, ये चीज दिख रही है, तो क्या
16:08ये नेताओं को नहीं दिख रहा है हमारे देश के, कि आपके पास उन्हें आना चाहिए, आप से सीखना चाहिए,
16:14क्योंकि मुझे और कोई भी इस समय इस देश में
16:19नहीं दिख रहा है, जो अध्यात्म से राजनीदी को बदल सकता हो, आपके अलावा, जितना आपको दिख रहा है, इस
16:31से ज्यादा उनको दिख रहा है, और ये मेरे लिए बहुत खत्रे की बात है, आपको तो फिर भी नहीं
16:38समझ में आ रहा है, कि मेरे होने का मतलब क्या है,
16:42नेताओं को बहुत साफ साफ दिखाई दे रहा है कि मेरे आगे बढ़ने का परिणाम क्या होगा
16:51आप नहीं देख पा रहे हो, आपको पता भी नहीं चलेगा कि क्या हुआ क्यों हुआ
16:58जी अचारे जी लेकिन मैं ये बोल सकता हूँ कि शायद हमारी संख्या जादा हो, उनकी संख्या कम हो
17:05आपके लच्छन ऐसे है नहीं, आपकी संख्या अभी जादा होगी, संख्या बहुत इसके लिए निष्ठा चाहिए
17:16बहुत निष्ठा चाहिए
17:21अभी तो
17:27चंद लोग भी ऐसे हो जाएं, जो ढंके हैं, तो मुझे थोड़ा चैन पड़े
17:33अभी तो वो हाल भी नहीं दिख रहा है, अभी तो आप लोग बहुत तितर बितर हो, एकदम बिखरे हुए
17:40हो
17:48किसी ने कहा था कि हजार भेडे हों, हजार भेडे हों वो जीच जाएंगी हजार शेरों से
18:00अगर इन हजार भेड़ों का नितरत तो एक शेर कर रहा हो, और उन हजार शेरों का नितरत तो एक
18:05भेड़ कर रही हो
18:08अभी तो कुछ शेर मिल जाएं जो भेड़ों का नितरत तो कर सके हैं, इसकी तलाश है
18:18देखते हैं
18:21हालत नहीं देख रहे हो, क्या संख्या बल
18:28यहां
18:30साधारण इमानदारी ही नहीं है
18:32बातों को समझने की, उनको
18:34कार्यानवित करने की
18:47एक और संख्या बढ़ती जा रही है
18:49दूसरी और मैं
18:52एक छोटे
18:54समुह से बात करना पसंद करूँगा
18:58बड़े आयोजनों में जहां सब खुला हुआ है
19:01कोई भी आजाए, गीता कम्यूनिटी का है नहीं है
19:03तो ठीक है चलो वहां पर
19:04हजारों की भीड लग गई
19:06पर जहां आत्मी ये बात करनी है
19:10वहां मैं
19:11कम लोग चाहूंगा
19:13इस बार भी कड़ी शर्त रखी थी
19:15इस बार जितने लोगों को मना किया गए
19:17आने से, इतना आमने कभी नहीं मना करा
19:19आगे और कड़ी शर्त रखूंगा
19:22मैं अपना
19:23सब कुछ दे रहा हूँ
19:26मैं ऐसो
19:29के सामने
19:30क्यों खड़ा हूँ
19:32जो
19:33आधे अधूरे मन से मेरे पास आए हैं
19:35मैं तो अपना सब कुछ दे रहा हूँ
19:37बात बरावर की होनी चाहिए
19:42बात बरावर की होनी चाहिए
20:07जिनको भी और दो-चार नावों पर सवारी करनी है
20:14जिनके भी और बहुत इधर-उधर के इरादे हैं
20:27पंक्याबल का होना और भीड का होना अलग बाते हैं
20:31भीड से कोई काम नहीं होने वाला
20:33ना भीड से मुझे कोई सुरक्षा मिलने वाली है
20:36भीड बलकी घातक है मेरे लिए
21:00कोई नाटक थोड़ी करना है कि मैं ऐसे ही कुछ काम कर रहा हूं आप कुछ कर रहे हैं और
21:05यूँ ही आके नाटक कर दिया
21:07यह मामला गंभीर है भई
21:12आपका पता नहीं पर मेरे लिए यह मेरी
21:19जिन्दगी का सार है यही है इसके रावा और कुछ नहीं है
21:27जहां मामला इतना गहन गंभीर होता है वहाँ
21:34अन्मने साथियों के साथ आगे नहीं बढ़ा जाता
21:52यह कोई आउनलाइन नॉलेज कोर्स थोड़ी चल रहा है कि
21:58हाँ हाँ हमने भी रेजिस्टर कर रखा है
22:01हम भी देख रहे हैं कुछ नॉलेज गेन कर लेंगे
22:04इस तरह के लोगों को
22:10मैं सख्त हो करके विदा करने वाला हूँ
22:23और विदा कर पाऊंगा
22:26इसके लिए आभारी हूँ उन लोगों का
22:30जो मुझे पता है विदा नहीं होंगे
22:35उन्हीं का साथ है इसलिए बहुतों को मैं कहा सकता हूँ तुम जाओ
22:38तुम्हारी जरूरत नहीं है
22:44ये जो कुछ ढ़ंग के लोग होंगे
22:46भले ही सौ हो पांच सौ हो ना हो एक लाख एक हजार हो बस
22:51इनके दम पर कुछ काम आगे भी बढ़ सकता है
22:56वेर्थ की भीड तो वस यूँ है अपना आ गए है विंडो शॉपिंग करने के लिए
23:05मामला सस्ता लगा
23:06150 में काम हो रहा है आके खड़े हो गए है
23:09इनकी ना कोई निष्ठा ना कोई इमान
23:11ना कुछ सीखने बदलने का इनका इरादा यूँ ही वस
23:18और इनके उपर मेरी शक्ति बहुत खराब हो रही है
23:27कल कहरा था है मुझसे कि आपको स्वार्थी होने की जरूरत है
23:32आप समझ नहीं रहें शायद कि आप एक दो साल में पचास के हो जाएंगे
23:40आपने बहुत अपनी उर्जा अपना समय अपना स्नेह बरबाद करा है
23:47नाकाबिल लोगों पर
23:51गैर जिम्मेदार
23:56और अन्ग्रेटफुल लोगों पर
24:00ये गलती मैंने चलो तब कर ली खूब जब 30 का था 35 का था
24:06अपने आपको जितना मैं लोटा सकता था लोटाया
24:09अब वही गलती मैं आगे करता ही रहा हूँ
24:12तो फिर मैं ही मूर्ख हूँ
24:28संख्याबल कह रहे हैं आप संख्याबल का मतलब ये नहीं है कि बहुत सारे
24:34ऐसे ही आपने लाकर के रस्ते की भीड खड़ा कर दी और वो जो भीड है वो
24:42ना तो कोई इरादा रखती है ना हिम्मत रखती है
24:52चलिए वैसी भीड प्रवेश ले भी ले 6 महीने तक उनको हम स्टान भी दे दे परख भी ले
24:59उनका क्या करें जिनके ड्ड़ देड़ दो दो तीन तीन साल हो रहे हैं
25:03पर अभी भी उनके भीतर कुछ हिल नहीं रहा
25:09उनका क्या करें उनका तो यही है कि उनको विदाई दो
25:22आप लोगों से मैं अग्रिम माफी मांगे लेता हूँ
25:29अगर आप संस्था के नियमों को अब और और सक्त होता देखें तो
25:38बहलाना, पुछकारना, हाथ जोड़ना यह सब बहुत हो गया
25:44और यह सब बहलाने, पुछकारने, हाथ जोड़ने का, ढोने का
25:48कोई अच्छा नतीजा निकलता नहीं है
25:52जिसको नहीं रुकना हूँ, नहीं रुकरेगा
25:54बत इतना ही होगा कि वो तो भगेगा ही
25:56आपको बस यह अफसोच रह जाएगा कि मैं इतने सालों तो कि इसको ढोता क्यों रहा
26:03आपको इतना सिखाता हूँ कि कर लो गलती पर एक ही गलती
26:06बार-बार मत करना
26:07थोड़ा बहुत खुद भी तो सीखूंगा
26:14नहीं सीखूंगा
26:26यहाँ कोई बादार थोड़ी लगा
26:28यह सब चीदे वैकल्पिक थोड़ी ही है
26:30सत्रों में उपस्थिते
26:31बोधकारे क्या मदाक है नहीं कर रहे है
26:33तो बाहर निकलो यार
26:38कई लोग तो आकर के
26:39वहाँ पर संस्था के विरुद्ध कुछ लिख रहे होते है
26:43ना नाम अपने लगा रखा है
26:44ना फोटो अपनी लगा रखी है
26:46अटेंडेंस भी कुछ नहीं है
26:47इतनी हिम्मत कहां से आ गई
26:49कि इस तरह की प्रोफाइल के साथ
26:52आकर के
26:53फिर उची आवाज में लिख रहे हो कुछ
27:03जाओ जहां से आयो वापस जाओ
27:06मैं यहां कुछ देने आया हूँ
27:08तुम्हें लेना है लेलो नहीं लेना मतलो
27:11मेरा क्या बिगड़ जाएगा
27:22तो संख्या बल ठीक है अपनी जगे है
27:26और उस संख्या में कुछ गुणवत्ता भी होनी चाहिए
27:29अब संस्था गुणवत्ता की ओर काफी ध्यान देने वाली है
27:36लोगी संख्या तो आही जा रही है
27:38लगभग निशुल्क कर दिया है तो संख्या तो आही जाती है
27:41विलकुल भीड की तरह उमण के आती है संख्या
27:44मुझे देखना यह है कि जो भीड की तरह से वोमण के आए थे
27:47अगर इनका दस महीना डेड़ साल
27:49दो साल हो रहा है
27:51तो ये कुछ सीख भी रहे हैं
27:53कुछ आगे बढ़ रहे हैं
27:55किसी संघर्ष के लिए तैयार हो रहे हैं
27:57अगर नहीं हो रहे हैं तो
28:00जा राम जी की
28:11कम्यूनिटी पर अब आप पोस्ट नहीं करोगे
28:13तो भी खत्रा है और पोस्ट करोगे
28:15और उल्टा उल्टा पोस्ट कर दिया
28:19तो भी खत्रा है
28:20करना तो दोने ही काम पड़ेगा
28:25लिखना भी पड़ेगा
28:28सच भी लिखना पड़ेगा अपना
28:30और जो लिखोगे
28:32उसमें गुणवत्ता नहीं है
28:35तो धरे भी जाओगे
28:53आप अपनी यात्रा पर हैं
28:55मैं भी तो अपनी यात्रा पर हूँ न
28:57या मैं जैसा दो साल पहले था
28:59वैसे ही रहा हूँ
29:01बुलिये
29:02आपको अबर मैं बोलता हूँ
29:04कि मुक्ति कोई बिंदू नहीं होती
29:05यात्रा होती है
29:06तो मेरी भी तो यात्रा चल रही है
29:11और मेरा काम
29:12स्पीड कर रहा है हमेशा
29:14मेरी यात्रा में
29:16मुझे आप तेजी से बदलता देखें
29:18तो आश्यर्यमत करिएगा
29:21कि आपने बंधन पाल रखे होंगे
29:24आपको एक जगह
29:26चिपक कर बैठना होगा
29:27मैंने कुछ नहीं पाल रखा
29:32मैं क्यों कहीं रुकूं
29:34मुझे आगे बढ़ना है
29:37प्रेम से चाहता हूँ
29:39कि सब मेरे साथ आगे बढ़ें
29:41पर जो आगे बढ़ना भी नहीं चाहते
29:43और आगे बढ़ने वालों को पकड़कर
29:44पीछे खीच रहे हैं
29:46ऐसों को अब मैं छोड़ना बहतर समझूँगा
30:02ठीक कर रहा हूँ न
30:05आप नहीं भी बोलो कि तो भी यही करूँगा
30:11जन्वरी दो हजार पच्चेस में
30:13पिछले साल यानि की
30:15मैंने बारहा सो मिनिट बोला था
30:17मैं जो कुछ बोला होता है
30:18यह उसकी मिनिट बाई मिनिट उसको दर्ज करते
30:20इनकास ट्रैकर है जिसमें
30:23किसने सवाल पूछा
30:24क्या सवाल है
30:25संक्षिएप में उत्तर क्या दिया
30:27यह सब लिखते हैं
30:29और किस जगह हुआ किस तारीक को हुआ
30:31और यह भी लिखते हैं कितने मिनिट का था
30:33तो उसमें पूरा ट्रैकर में कॉलम ही होता है
30:35मिनिट का उससे हम जोड़ते हैं
30:38पिछली जन्वरी में 1200 मिनट था
30:42इस जन्वरी में
30:431200 मिनट हो चुका है
30:49अगर मैं अपने आपको
30:50अलग हट करके
30:51अबजेक्टिवली वैसे ही देखूँ जैसे मैं आपको देखता हूँ
30:54और मैं कहता हूँ कि
30:56आपके साथ कुछ अच्छा ही होना चाहिए
30:58तो इतना आधिकार
31:00तो मेरा भी है कि मैं खुद को भी बोलू ना
31:02कि तेरे साथ कुछ अच्छा ही हो
31:051200 मिनट भी बहुत था
31:07उसको बढ़ा करके
31:081200 मिनट कर दिया
31:11और ये तब है जब मैं यात्रा करे ही जा रहा हूँ
31:16करे ही जा रहा हूँ
31:27और अभी जब तक ये तूर मैं आगे बढ़ूँगा
31:29उसमें और कुछ जुड़ी जाना है
31:33मैं सचमुच अपनी जान दिये दे रहा हूँ
31:36और उसके बाद ऐसे मिल रहे हैं आगर के
31:40तो मेरे पाद सब सहनशीलता बची नहीं है
31:43मैं जेल नहीं पाऊंगा
31:45बहुत सहलिया
31:50एक तरह से देखूं तो exploitation सहाए मैंने बहुत
31:54अब और नहीं करवाना
32:10आप मेरे साथ हो तो मेरे तरीके से रहो
32:13मेरी टर्म्स पर रहो
32:14नहीं तो ठीक है आपका अपना रास्ता
32:16मेरा अपना रास्ता
32:18आप यह नहीं करोगे कि आपकी टर्म्स यहें
32:20कि आप मेरे पास आये हो
32:21कुछ नॉलेज ले लोगे
32:23और उसके बाद कहोगे हाँ ठीक है थोड़ा बहुत सीख लिए
32:25आप जा रहा हूं मैं अपनी अपनी जिन्दगी देखूंगा
32:28अगर आपकी यह टर्म्स है तो अलविदा
32:36नहीं पर हम सीखने ही तो आये है ना और सीखने के बाद तो
32:39अप दीपो भाव करना पड़ता है
32:41शिक्षक को कभी ने कभी छोड़ना पड़ता है
32:43यह तुम्हें ग्यान किसने दे दिया
32:44शिक्षक को छोड़ा नहीं आता है शिक्षक के साथ एक हो याते है
32:48यह सब ग्यान किसने दे दिया
32:50यह दुकान में होता है यह
32:51कि जब सौदा पूरा हो गया तो दुकान छोड़ दी जाती है
32:55सौदा ले लिया पूरा हो गया पैसे दे दिया तो अपने घर आ जाते है
32:57कि तो दुकान में होता है यह सब किसने बता दिया कि छोड़ देना होता है
33:00जो यहाँ पर इसलिए आये हैं कि सौदा करके माल लेगे अपने घर चले जाएंगे और पकाएंगे खाएंगे वो पहले
33:07ही अब अपने घर चले जाए आगर गुरूद कहते हो तो गुरू से अलग होने की शर्त यह होती है
33:17कि
33:18अब भीतर से गुरू से एक हो गए
33:20अब अलग होना संभव ही नहीं रहा
33:24अब अलग होना संभव ही नहीं रहा
33:25तब फिर चाहे बुद्ध हो कि नानक हो
33:28वो अपने शिश्यों को बोलते थे कि अब तुम जाओ दूर दूर जाओ
33:30और मेरी बात का प्रचार करो
33:35क्योंकि अब तुम मुझसे अलग होई नहीं सकते
33:38अब मैं तुम्हारे खिदे में हूँ
33:40तुमसे अलग होई नहीं सकता अब जा सकते हो
33:43जो इस हिसाब से आई है कि आई है छे महीना देखेंगे
33:46साल भर कुछ गीता का नॉलिज ले लेंगे
33:48उसके आद अपना कुछ देखेंगे
33:49या कि आफिस में ये सब सुनाके
33:51इंप्रेस करेंगे किसी को
33:52जिनका अपना कुछ हसाब किताब
33:54अपनी दुकान चलानी है
33:56दिखता है साफ साफ कि
33:57वो बहुत जिद के साथ
33:59कम्यूनिटी पर अपनी टर्म्स रखना चाहते है
34:02जो अपनी टर्म्स रखना चाहते है
34:04उनके दिन लच चुके है
34:08यहाँ टर्म्स चलेंगी
34:10तो मेरी चलेंगी नहीं तो नहीं चलेंगी
34:11ठीक है ना
34:14जबरदस्ती कर रहा हूँ
34:15कर रहा हूँ
34:17और मान लो
34:19आपके भले के लिए ये कर रहा हूँ
34:22और नहीं माननी तो मतमानों यारा
34:24मैं तो यही करूँगा
34:29आपको खुशी होगी
34:30इसनाते जो हमारी अपनी एप है
34:33जिसमें हमारी गीता और बाकी सब कारेकरम चलते हैं
34:36यहाँ पर बुद्ध हैं, गीता हैं, उपनिशद हैं, अष्टावक्र हैं
34:40यह मुझे मिले मेरी जिन्दगी बदली
34:42यह तुम्हें मिलेंगे तो महरी जिन्दगी भी बदलेगी
34:44सच पूछी हो तो मतलब लाखों नहीं
34:47कम से कम हजारों जिंदियां तो हैं जो बिलकुल बदली हैं
35:19कि और मॉंदे घ्सी ठतैक सूपी मगए सब्द दे का हैं
35:22कि लए हम देक हमेदियां dalुपर भी मॉंदें सुपरणा भी मॉंदे दो numéro 2
35:24झाल झाल
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