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  • 3 hours ago
43 साल की उम्र में  चिनमयी त्रिपाठी ओडिशी नृत्य करती हैं.इन्होंने अपनी आधी से ज्यादा जिंदगी इस नृत्य को समर्पित कर दिया. ओडिशा के इस ट्रांसजेंडर कलाकार के लिए डांस सिर्फ परमॉर्मेंस नहीं बल्कि इनकी जिंदगी भर का सफर है. चिनमयी का जन्म एक कलाकार परिवार में हुआ,  नाम गौरी शंकर त्रिपाठी था. बचपन से ही संगीत और डांस से लगाव था. शौक के तौर पर ओडिशी सीखना शुरू किया.जो धीरे-धीरे जिंदगी का मकसद बन गया...उम्र बढ़ने के साथ-साथ उन्हें अपनी अलग पहचान का अहसास हुआ. गौरी शंकर से चिनमयी त्रिपाठी बन गईं. लेकिन ये सफर इतना आसान नहीं था.मजाक, सामाजिक बहिष्कार, पिता की मौत के बाद घर छोड़ना पड़ा. लेकिन मकसद साफ था. ये रुकावटें चिनमयी के रास्ते में रोड़ा नहीं बन पाईं. डांस से प्यार बढ़ता गया. मेहनत और समर्पण से अलग-अलग मंचों पर परफॉर्मेंस जारी रहा, अलग पहचान बनी, नाम हुआ और फिर जिंदगी बदल गई. इन्होंने ट्रांसजेंडर समुदाय के दूसरे लोगों को भी इस कला को अपनाने के लिए प्रेरित किया है. आज भी ये उसी लगन और भक्ति के साथ डांस करती हैं. दिल में हमेशा भगवान जगन्नाथ बसते हैं और उनकी हर परफ़ॉर्मेंस में ओडिशा की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की झलक दिखाई देती है.

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00:04ुडिसी नृत्य करती चिनमई त्रपाथी
00:07इन्होंने अपनी आधी से जादा जिन्दगी इस नृत्य को समर्पित कर दी
00:12ुडिशा के इस ट्रांज जेंडर कालाकार के लिए डांस सिर्फ एक पफॉर्मेंस नहीं
00:17बलकि इनके जिन्दगी भर का सफर है जिसको इन्होंने जिया है
00:26अब तक अपनी जिन्दगी के 27 साल इसकला को समर्पित कर दिये है
00:30ओडिसी मेरे लिए सिर्फ एक कलात्म का विवेक्ती नहीं है
00:33जब भी मैं भगवान जगनात के सामने परफॉर्म करती हूँ तो मैं हमेशा भावोख हो जाती हूँ
00:38मैं चाहती हूँ कि मेरी म्रत्यों के बाद लोग मुझे एक ऐसी डांसर के तौर पर याद करें
00:42जिसके दिल में हमेशा भगवान जगनात पसी रहे
00:47चिनमाई का जन्म एक अलकार परिवार में हुआ
00:51नाम गौरी शंकर तुरपाथी था
00:53बचपन से ही संगीत और डांस से लगाव था
00:56शौक के तौर पर उडीसी सीखना शुरू किया
01:00जो धीरे धीरे जंदिगी का मकसत बन गया
01:03उम्र बढ़ने के साथ साथ उन्हें अपनी अलग पहचान का एहसास हुआ
01:08गौरी शंकर से चिनमाई त्रिपाथी बन गई
01:12लेकिन ये सफर इतना आसान नहीं था
01:15मजाक, सामाजिक बहिशकार और पिता की मौद के बाद घर छोड़ना पड़ा
01:25मैं गर्मा पून जिन्दगी जीना चाहती हूँ
01:28जिसके लिए मैंने एक मुश्किल लेकिन मुमकिन रास्ता चुना
01:31मैंने बिना किसी रोक्टों के आजाद रहने का फैसला किया था
01:35और ऐसा करना कोई मामुली बात नहीं थी
01:42लेकिन मकसत साफ था
01:44ये रुकावटे चिन्माई के रास्ते में रोडा नहीं बन पाई
01:48डांस से प्यार बढ़ता गया
01:50महनत और समर्पण से अलग-अलग मंचों पर पफॉर्मेंस जारी रहा
01:56अलग पहचान बनी, नाम हुआ और फिर जिन्दगी बदल गई
02:06ओडिसी मेरा जीवन और मेरी साधना है
02:09इसके बिना जीना असंभव है
02:11मुझे गर्व है कि मेरे पास नर्त की कला है
02:13या इश्वर की कला है
02:14या मेरे पिछले जन्म का सार है
02:16जिसने मुझे एक नई पहचान दी
02:18इसलिए इस कला के माध्यम से मैं अपनी भावना
02:21और नत दौरा लोगों का मनुरंजन कर रही हूँ
02:23के साथ ही पुरी की निवासी होने के नाते
02:25इस कला के जरिये समाज में मेरा स्थान भी सुरक्षित हो गया है
02:31इन्होंने ट्रांजेंडर समुदाय के दूसरे लोगों को भी
02:34इस कला को अपनाने के लिए प्रेरित किया है
02:36आज भी ये उसी लगन और भक्ती के साथ डांस करती है
02:41दिल में हमेशा भगवान जगनाथ बस्ते है
02:44और उनकी हर पफॉर्मेंस में उडिशा के समरिध संस्कृती
02:48विरासत की जलक दिखाई देती है
02:52ETV भारत के लिए भुवनेश्वर से देशमिता राउत की रिपोर्ट
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