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Transcript
00:00संत रविदास निर्गुणी भक्ति से थे, उनका उपास अद्वैत है, वे उच्चकुल के नहीं गिने जाते थे, चर्मकार समाच से
00:11थे, उनका जो साहित्य है वो उच्चतम कोटिका है, जनम जात्मत पूछिये, का जात रुपात रैदास पूत सब प्रभु के,
00:25कोई नहीं �
00:26गुचात, तो जात मने जनमा हुआ, जिसका जनम हुआ हो, उसको कहते हैं जात, किया रहें यह प्रक्रति ही है,
00:35और सब इसी से उठते हैं, तो गहरें जब सबकी माँ एक है, तो सबका फिर जनम, अलग-अलग कैसे
00:43माना जा सकता है, उपर और नीचे की शेणिया कैसे स्था�
00:51चुनाओं में आ सकता है, जेतना करते हैं चुनाओं तो हम कहां तक उठ पाते हैं, वो हमारे फैसले की
00:57बात होती है, कोई चुनता है कि हाँ मुझे मुझे मुक्ति प्यारी है, आजादी प्यारी है, मैं दाम चुकाऊंगा, मुफ्त
01:05नहीं मिलती है मुक्ति, मैं दाम चुकाऊ
01:17हो नहीं हो सकते हैं लेकिन जन्म के आध談 पर कोई अलग अलग हो सकता
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