00:00चारे जी ऐसा कहा जाता है कि हमारे पूर्वज शौरेवान थे तो हम भी तो शौरेवान हैं क्योंकि ये हमारे
00:06खून में है
00:07अशोक के राज्य और सामर्थ की तुलना में कलिंग देश शुटा था सामर्थ कम थी
00:14अशोक ने सोचा था असानी थे जीत लेंगे फिर भी कहा जाता है कि जान लगाकर लड़ी यहां की सेना
00:21इसलिए भारी रखत पात हूँ
00:23अशोक अहिंसक हो गया राजा क्योंकि उसके सामने एक जीवित बुद्ध खड़ा हुआ था
00:29बुद्ध नहीं जीवित थे पर बहुत हाल के थे उस समय बुद्ध की वाणी अभी भी गूंज रही थी और
00:35अशोक जहां का था बुद्ध वही टहला करते थे
00:37तो इसलिए अशोक के भीतर अज्यान हट पाया और हिंसा हट पाई तब बुद्ध का ताजा ताजा जला हुआ दिया
00:46था तो अशोक के समय तक भी उसकी जीवित बाकी थी
00:50आपने बुद्ध के सुभाव को जाना ही नहीं आपने एक तरह से जाती विवस्था में यकीन कर लिया कि पंडित
00:59की अउलादे हैं न हम सब तो पंडिताई तो हमको खून में मिलिये
01:04कि पूरवज हमारे शौर्यवान थे ना लड़ाके थे ना उन्होंने ये करा वो किया तो वीरता तो हमको खून में
01:13मिलिये विरासत में मिलिये
01:14ऐसे नहीं मिलती
01:17ये तो जाते बाद हो गया
01:18आप सोचरों शरीर से आ जाएगा आप में
01:21बहुत शरीर से बहुत कहां से आ जाएगा
01:23कोई भी उंची चीज शरीर से नहीं आ जाती
01:25हाँ बीमारी ओ मावा आप में तो वह आ जाएगी
01:28ये बाते तो व्यक्तिके स्तर्की होती है
01:31ये फैसला हर इंसान को अपने लिए करना होता है
01:35कि उसे अपनी जिंदगी में प्रकाश चाहिए कि नहीं चाहिए
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