00:00माताजी यहां बैठी है, मेरे ननिहाल की तरफ कहावज चलती है, एक ऐसी इसी थी अजीब सी, वो उमेट में
00:06छुपी रही, किसी ने उसको देखा नहीं, तो ब्या हो गया, वो आ गई, बाद में पता चलाई, तो बड़ी
00:10गड़बड है, तो वो मचल के कहती है, भयो बिया, म
00:27को भी करना पड़ेगा, वैसे ये भयो जनम, मोर करे हो का, अब तो बच्चा पैदा हो गया है, तो
00:33तब मजबूरी गनाते हो, सब कुछ करोगे, जो समाजिक कोड औफ कंड़क्ट है, वो तुम्हें करना पड़ेगा, समाज में तुम
00:40अमीर कहलाते हो, और यही तुम्हारी म
01:01तुम उसे बोलो, आप मुझे सरकारी पार्टशाला में डाल दो, चनौती है, डाल के दिखाओ, तुम्हारे हिम्मत नहीं है, प्यार
01:10के नाते नहीं कर रहे हो, यह प्यार नहीं है, यह तुम्हारे अल्गॉरिदम का नेक्स्ट स्टेप है, अल्गॉरिदम प्रोसेस होता
01:20है
01:20स्टेप बाई स्टेप, शंखला की एक कड़ी, फिर अब यह होना है, फिर यह होना है, यह होना है, तो
01:26यह तुम्हारे अल्गॉरिदम का नेक्स्ट स्टेप है, और प्यार अल्गॉरिदमिक नहीं होता है.
Comments