00:00छोटे थे तुम टिफिन लेके जाते थे स्कूल में और उसमें से कोई थोड़ा सा खा लेता था तो बुरा
00:06लगता था
00:07कुछ नहीं था टिफिन था पूरी जिन्दगी किसको दे आये हो
00:17बताओ ना आम आत्मी के जिन्दगी देखो कितनी मेहनत करता है
00:22एक आम मध्यमवर्गी आदमी होता है किसी भी वर्ग का हो छोड़ो मध्यमवर्ग उसकी शकल देखो
00:28तुमको वह तरोताजा दिखा ही देता है प्राण उसके दिखते हैं कि एकदम उफन रहे हैं छल चला रहे हैं
00:37आनंद सराबोर
00:38कुछ ऐसा आता है
00:40इगाम आत्मी की शकल देखो
00:42दिन का कोई भी समय हो
00:44और कहीं पर भी हो
00:45उसी शकल पर क्या होती है
00:47वो थकान उदासी
00:49महनत खूब करी उसने सिंदगी पर
00:51जिंदगी पर महनत कर रहे हो
00:53लगातार महनत करते ही जा रहे हो
00:54पराई कामनाएं पूरी करने के लिए
00:57अपना जीवन जला रहे हो
00:59तो बुद्धिमानी का
01:01शायद यही एक मात्र मानदंड है
01:05जिंदगी जियो
01:06अपने हित के लिए
01:08दूसरे के स्वार्थ के लिए नहीं
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