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  • 23 minutes ago
क्या धीरेंद्र शास्त्री ने कभी पुलिस का कोई केस सुलझाया? देखें वारदात

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00:01पता नहीं मतलब हम दोनों आज क्यों बाब कर रहे हैं धर्म जब अपनी मर्यादा तोड़ता है वो जुर्म बन
00:07जाता है और जुर्म जब अपने आपको सुन कर लेता है तो धर्म बन जाता है पुलिस वालों से कभी
00:12कोई पाना पड़ा आते जाते रहते हैं पुलिस वाले इस
00:18बहुत मैलाएं भानी क्रेप करने के लिए बहुत लोग ऐसी जगे बैठती हैं ताकि वो हमारा ध्यानों की तरफ खिचे
00:26और हमारे सामने भी तीन अवरोध हैं वो हैं इस्त्री, ब्लैक मनी और गंदी पॉलिटेक्स के घोडे पे बैठा हुआ
00:33आदमी नुकिला लेकर के हमें म
00:48कभी घर नहीं गए एक चोटा बच्चा रात को गुम जाता है अध्यान करने के बाद हमने फिर से फॉन
00:56लगाया और कहा कि जो आदमी अमुक आपके साथ खोज रहा है इसी व्यक्ति को आप पकड़ो ये बता देगा
01:01हम किसी भी खेल में हालना पसंद नहीं करते हैं देश की
01:05कानून विवस्ता मकडी के जाले की तरह है दोनल्ड टरंड साब के बारे में क्या रहा है वही गुंडा को
01:12गुंड़ी बनाए रखने के लिए ये काम करने पड़ते हैं जो अमेरिका कर रहा है जिसकी मस्ती जंदा है उसकी
01:17हस्ती जंदा है बरना आदमी जवरजस्ती जंदा
01:27तो आदाब नमस्कार गुड इजनी ससेकाल एक वा फिर आप तमाम उनों का स्वागत है
01:32कहते हैं कि जुर्म और धर्म दो किनारे दोनों कभी आपस में मिलते नहीं है
01:37लेकिन कही बार ऐसा होता है कि जुर्म में धर्म भी घुश जाता है और धर्म में जुर्म भी शामिल
01:42हो जाता है
01:43अब एक्जांपल के तौर पर मैं पेशे से क्राइम जर्नलिस्ट पूरी जिंदगी क्राइम रिपोर्टिंग की
01:49और आज मेरे सामने एक धर्म की बहुत बड़ी हस्ती संत बावा बागिश्वर धाम के नाम से आप सभी इनको
01:56जानते हैं इनको प्यार करते हैं
01:58शास्त्री जी महराज बहुत सारे नाम है
02:00तो पता नहीं आज धर्म और जुरुम का ये टीवी वाला ये फिल मीडिया का संभन्द या संगम कैसा होगा
02:09इसे आदा लीजेगा भी मत इसको ये आगे बात्चीत से ही पता चलेगा
02:13बहुत-बहुत स्वागत और सबसे पहले दिल से आपका धन्यवाद शुक्रिया
02:18पता नहीं मतलब हम दोनों आज क्यों बात कर रहे हैं
02:22हाँ ये बात तो है बहुत-बहुत धन्यवाद आपका भी और आपके प्रशंशक भी है
02:28और इस बात के प्रती हमें बहुत अच्छा हमारे मन में हमें इसा एक ख्याल आता है
02:34कि हमेशा उस व्यक्ति के आसपास बैटने से जीवन में कुछ नया सीखने को मिलता है
02:39जिसने बहुत सीखे हैं को दोसरों को सिखाया हूँ
02:42तो बहुत सी चीज़ें आपकी हैं जो हमको बहुत प्रभावित करती हैं
02:46खास करके रहस में चीज़ें हमारी जिंदगी रहस में जिंदगी से ही स्टार्ड होती है
02:51तो उससे मिलती जुलती थी और आपने कहा कि धर्म और जुर्म दोनों अलग अलग रास्ते हैं
02:58लेकिन धर्म जब अपनी मर्यादा तोड़ता है तो जुर्म बन जाता है
03:01और जुर्म जब अपने आपको सुन कर लेता है तो वो धर्म बन जाता है
03:05बाबा नाम जैसी सुनता है हूँ
03:06मैंने बहुत सारे बाबाओं के भी स्टोरी की और सुनता है हूँ
03:09एक तस्वीर दिमाग में आती है
03:11अच्छा बाबा ऐसे होंगे
03:13आपने वो सारी भरम तस्वीरें सारी चीजें दिमाग से निकाल दी तोड़ दी
03:17और तब एक बाबा इतना क्यूट भी हो सकता है
03:20एक बाबा इतना भोला स्मार्ट हैंसम हैर स्टायल इतना अच्छा
03:24और बाबा वाली कोई बात नहीं लेकिन फिर भी
03:27ये कैसे चमतकार हुआ
03:29हमें लगता है कि लोग इसलिए सायदम को बाबा मानते कि हम एक बाबा के पास रहे
03:34और बाबा के पास हम इसके पीछे लोग पर यह होने का कारण हमें पता नहीं
03:40इतना हमें जरूर पता है कि हम एक दीवाल को ढहाना चाहते हैं
03:45आस्तिक्ता और नास्तिक्ता की दोनों दीवालों को मिटाने के बाद
03:48हम दोनों में गैप करके एक नया संसार बनाने की परिकल्पना बहुत करते हैं
03:54जिसका नाम है वास्तिविक्ता
03:56हम जिंदगी में प्रैक्टिकली लाइफ पर बहुत भरोशा करते हैं
04:00और व्यक्ति से जब भी हमें कोई व्यक्ति मिलता है, उसको एक ही सीख देते हैं, तो देखो हम कोई
04:05चमतकार निकलते हैं, हम एक जलती हुई लालटेन, जसमें कुछ अनभव संसार से लिए, कुछ ध्यान से लिए, जाधा तर
04:13हमारे अनभव अंधर के थे, जो हमें इंसाइड
04:15में मिले, जो हमें अपने गुरूर से मिले, पावर ट्रांसपर करें, कोई सक्ती कह लिजे, सिधी कह लिजे, या फियों
04:23कह लिजे, एक औरा, या कोई ब्रेंड का मैनेजमेंट कह लिजे, conscious mind या सब conscious mind की पावर कह
04:28लिजे, यह पतानी क्या है, पर कुछ तो है, यह रहस हमें �
04:32पर हम आपको नास्तिक बनाना चाहेते हैं, नास्तिक बनाना चाहेते हैं, आस्तिक तापे भी हमारा भरोशा नहीं, और नास्तिक तापे
04:41भी भरोशा नहीं, हमारा भरोशा है वास्तिक तापर, आप शास्तिक हैं, महराज हैं, लाकों आपके सब धालू हैं, कभी आपके
04:49साथ क
05:02आते जाते रहते हैं पुलिस वाली भीड में तस्वीर होती हैं बहुत सारे फिर आते हैं एक भक्त के तौर
05:07पर भी
05:09सब प्रकार के भाव की लोग आते हैं और ज्यादा दर हमारे पास आस्थाबान लोग आते हैं
05:14दो परकार के लोग हमारी सामने होते हैं, एक वो जो हम पर भरोशा करते हैं, एक वो जो भरोशे
05:21के कगार में संदेह की नजर से देखते हैं, वो दौनों हमारी सामने की संबदाय में बैठे होते हैं, और
05:27हमें दौनों को जबाब देना होता है, एक भरोशा वाले का भरोशा द
05:44तो आप ही कुछ बता दीजिए अपने उस शक्ति से कि क्या करूं ऐसा बहुत बार घटित हुआ पर हमारा
05:50पहला जबाब यही रहा कि अधि हम यह सब करने लगेंगे तो हर पुलिश स्टेशनों में पुलिश बाला नहीं पदस्त
05:55किया जाएगा बागेश और बाबा पदस्त क
06:12जिसकी किसम खार रखी है आपका दहत्य कि आप अंतिम स्रेनी तक चाओ जाने की कोशिश करो जानने की कोशिश
06:20करो हम असे जो बदद बन पड़ेगी हम आपको हिंट करें
06:23जिसे दिली का चर्चित केसे आरूशी केस, निठारी केस बड़े बड़े ऐसे केसे जो आज भी एक रहस सही है
06:29और रहस में आपकी दिल्चसपी है तो कभी यह कि आपकी बीजिए दिल्चसपी है चलो इनकी थोड़ी मदद कर देता
06:35हूं यह हर तरफ से हार गये, कौट से भ
06:42दो तीन बार हुआ, जहां हम रहते थे, तो आएक कोई बहुत पहले की घटना है, हम उनका जिक्र नहीं
06:48करेंगे, पर वो घटना भी भी हमारे छेत में बहु पर चेते, कि एक छोटे बच्चा रात को गुम शदी
06:54की तलास होती है, कि एक छोटा बच्चा रात को गुम जाता है
06:57तो हमारे पास में एक जगह है, बमीठा, हमारा थाना लगता है, वहाँ एक बालक गुम जाता है, और वो
07:03बालक जब गुमता है, तो उस वक्त के एक पुलिस के आला रदकारी हमारी बहुत प्रिये थे, किश्मत से वो
07:09हमारे धाम पर थे, और दरसल ज़्यादा तर हमारा रा
07:24आई हुए थे, वो बैठी रहते हैं, तीन सार गंटे बाद मित्र, और हमें भी बहुत देर हो गई थी,
07:28जाना था सौने के लिए, तो हमने पूछा कि जड़ा पता करो, बापस आएंगे, कोई काम जरूरी आ गया हो,
07:33और उन्होंने फॉन लगाया, तो उन्होंने कहा कि जड
07:46दुकान की बात है, दुकान चलाते हैं वो, और यहीं बमीठा से, वो अभी अभी लापता हुआ साम के समय
07:52से, कुछ आप अधी हिंट दे सकें, कोई दिसा बता सकें, लोकेशन ना बताएं, या एक्जेक्ट ना बताएं, लगबग में
07:58अधी बता सकें, तो हमने पड़ी प�
08:15के बाद हमने फिर से फोन लगाया, और कहा कि जो आदमी अमुक आपके साथ खोज रहा है, इसी व्यक्ति
08:20को आप पकड़ो, ये बता देगा, और वो विदिन सारे तीन घंटे में रहस उजागर होता है, वहीं के कुए
08:26में बुलर का मृत पाया जाता है, और वो पकड़ा जा
08:45आजकर हमारे जैंजी, जो वह सारे सवाल पूछते हैं, तो ये आपको मतलब कभी शुरुवात तो ही होगी, तो कैसे
08:53आपको लगा कि मैं बाकी से अलग हूँ, बाकी लोगों से अलग होने का अनभाव तो हमें होंस होने के
08:59बाद ही आया, हमारी अवस्ता नौवर्ष की थी,
09:03हमारी गुरु बहुत ध्यानी गुरु थे, बहुत पहुची हुए गुरु थे, दादा गुरु ग्राणफादर, उनके पास हनमान जी की पावर
09:11थी, करपा थी उन पर, उस रात हम जब गुरु के पास गए और पगडंडी के सहारे बारिस का मोसम
09:17था, हलकी हलकी बिजली कड
09:19पकडंडी थी खेतों के बीच से एक रास्ता बागे शुर्धाम का गया था जहां बाला जी बैठे हैं जोपड़ी में
09:25वो धूना रमा करके उस रात हमारे गुरू बड़े वियस्त थे दादा जी हमारे पिता जी को देखने के बाद
09:31कुछ देर बाद ही उन्होंने हमारे पिता
09:33जी से कहा नाम लेकर कि करपाल तुम घर जाओ फूजी पिता जी का नाम शीराम करपाल है तो पिता
09:40जी हमारे बापशाद है और हमारे लिए बोले कि धीरू को छोड़ो धीरेंदर को यहीं छोड़ दो
09:46साड़े बाद आपोंने एक किलगभग रात्री में वो समय आता है कि जब एक छोटे से बालक की जिन्दगी में
09:52एक नई आत्रा शुरू होती है
09:55साड़े बारापोने एक के लगबग हमारे गुरू ने हमसे कहा
09:58कि जाओ तुम इशनान करके आओ
09:59तो गाओं के पास में एक हैड़ पंप था हम इशनान करते हैं
10:02फटी हुई तौलिया थी वो हमने पहनी
10:04बाल्टी में पानी इसलिए भर लिया कि उपर काम आएगा
10:06थोड़ी सी पहारी है आपने कभी वीडियो पे देखा होगा
10:10बागेश्व धांपर मंदर एक छोटी सी उंचाई पर है
10:13हम जाकर के ठंड़ लगती है तो बैठ जाते हैं धूना तपते हैं
10:18एक चाए की खोपड़ी जो हम अकसर पीते हैं
10:23आज तो नहीं वो रखी है तो अकसर हम उसमें चाए पीते हैं
10:26तो उसमें उन्होंने हमें चाए दी वो बड़े विएस्थ थे कुछ लिख रहे थे
10:29कागजों से कुछ कर रहे थे कुछ पुड़िया जैसी बना रहे थे पता नहीं क्या था
10:34यहां उन्होंने बाजू पकड़ी और पौने एक के लगभग वो मंदिर छोटा सा मंदिर था वहां गए
10:41बारिस तो होई रही थी हावा चल रही थी ठंड भी लग रही थी हम वो तौलिया ही पहने है
10:46और वो पूरे कपड़े पहने थे
10:48वो एक पैर के बल पर खड़े हुए और चालीस मिनट तक होने कुछ बोला तो हम कुछ समझ नहीं
10:57पाए एक विलू कलर की लाइट गिलती है अब वो कोई सक्ती थी या भिजली थी या उनकी कोई लीला
11:10थी ये कहपाना बहुत कठीन है हमारे लिए आयू बहुत कम थी तो हम �
11:15दर जाते हैं और चिवक जाते हैं उनसे तब वो ऐसी बड़ी जोर की थपकी मार के कहते हैं कि
11:21कह दो तुम हमारे और हम तुमारी और उस रात के बाद फिर हम कभी घर नहीं गए उसी स्थान
11:31पर रहें परिवार आया मार आया समने कहा भी पर फिर जानिये पाए इसके बाद �
11:36आपको ऐसास हुआ कि आपके अंदर कुछ उसके बाद हमें तुरंत कुछ इसास नहीं हो आचा कई दिनों बाद एक
11:42बड़ी अजीब सी घटना हमारे साथ घटती है और वो घटना ये घटती है कि हमको बिना सोच विचारे अपने
11:51आप इंट्यूशन मिलना स्टार्ट होते ह
11:53इंट्यूशन बड़े साधारन से होते हैं कि हम खेल रहे हैं तो ये बच्चा लड़ जाएगा अब वो लड़ जाता
12:02है अब हम सोच रहे हैं कि आप स्कूल पढ़ते थे कभी स्कूल जाते थे तो उस बक्त हमारे टीचर्स
12:09होते थे डर के मारे वो बात नहीं बोल पाते थे �
12:12पर जैसी बैठे तो जरूरी नहीं कि रो जाए पर कभी कभी इंट्यूशन आया कि अब ये आएंगे और मैथमेटक्स
12:18के ये टीचर इस बिद्यार्थी को इस बात पर पीटेंगे और वो पिट जाता था तो हम बड़ा चौकते थे
12:27कि ये तो अपन को पता था है कभी अपने
12:43हमारी भी खटिया कड़ी हो जाती थी कई बार डाट खाते थे तो ये चीज हमको परिशान करती थी तो
12:49हमने अपने गुरू को एक डेट साल गुरू रहे तो हमने अपने गुरू को बताया तो वो कुछ खास जबाब
12:54नहीं थी वो सिर्फ पर हाथ रखके बोले कि ठीक है तो
13:10बात ये थी भाई कि एक सपना हमको आता है, बहुत सपने कम आते हैं, एक सपना आता है, उस
13:16सपने में अब हमको लगभग पूरा कनफर्म है कि हमारी पूर्व जनम से सम्मंदित हैं और उसके बहुत से हमको
13:22तत्थ प्राप्त हुए, जिनकी खोज हम अभी भी कर रहे हैं, पू
13:38कीला लेकर के हमें मारने की कोशिश करता हैं, और हम दोड़ते हैं, उसी दोड़ते दोड़ते में हमारी नीद खुलती
13:44है, और हम पसीना से लगभपत होते हैं, उस रात हमें नीद नहीं आती हैं, और ये घटना हमको हर
13:494-5-6 महीने में, आज जरूरी नहीं के बात कर लिए �
13:53या जरूर नहीं पर यह है के अब दो चारर शे दस दिन पंदरा जन में, उससे हम बच्पन से
13:59परिशान है।
14:00यह परिशान है, मतरब पांचे वर्ष की आयू से, सपने से, और पहले से ही परिशान होगे, पर पांचे वर्ष
14:06से हमें याद, आपको पुनर जनम पर अपने कुछ, हमें बरोशा है, और कुछ हमें तब थैसे मिले हैं, जिन
14:14से हमें लगता है, हम ये थे, और उस जगह भी हम क
14:30चूने का चूने का बड़ा मन करता है
14:32पर वो कहां है कभी किलियर हुआ
14:33ये किलियर तो हुआ पर हम चाहते हैं कि वो
14:36पर आप गए नहीं तत्थ में
14:37हम वहाँ गए एक बाँ
14:39तो जो सपने में चीजे दिखाई
14:41हाँ वो पूरी वो उत्सेम मिली
14:43पर हम उस खोज में हैं कि वो थे कौन है
14:46अपने गुरूव से कई वार पूछने की कोशिश की
14:48इसका जवाब हमें अपना उपर नहीं मिला
14:50पर इसकी हम खोज में
14:51ये रहसमें चीजों ने हमको हमेशा
14:55परेशान किया
14:57पिछले कुछ सालों में
14:58आचनिक पिसले 10-12 सालों से इस देश में
15:00हमारा देश जो है वो बहुत
15:01लोगों की आस्थाएं बहुत होती है
15:03बहुत सारे ऐसे बाबा हैं
15:05लेकिन चंद बाबा जो मुठी भर
15:07जो इस वक जेल में बड़े बड़े नाम थे कभी
15:10उनकी में जैसे लगता है आप लोगों की जैसे आप जैसे लोग आए तो एक जाता एक दबाव भी महसूस
15:17होता है
15:17कि यह लोग मुझे भी कहीं शक की नजर से ना देख रहा हूं
15:20मेरे बारे में भी कुछ ना पीट पीछे बोल रहा हूं
15:22तो क्या फरक पड़ता है तो लोगों की जैसे देख ही रहे लोग
15:27चाहे वह कमेंट हो चाहे वह सोसल मेडिया पर हो चाहे वह पीट पीछे बात हो
15:30जब हम होते नहीं हैं जब चार लोग बात करते तो लगबख दो लोग हमारे विरोद में बोलते
15:34किस अब ऐसे ही है यह तो पाखने कुछ तो आप अपनी पता है कि यह दौर है.
15:50अब अपनी इर्द-गृट कोई सुरक्षा रखता है कि काकर कई किसी तरीके से बंदाम ये फिर्साने के लिए
16:00बहुत इस्तर तक हमारे पीछे साजसे हुई और भगवान ने कम समय में उन साजसों से बाहर किया।
16:06स्पाइसी कैमरा लेकर के बहुत लोग आए बहुत महिलाएं आई और बहुत महिलाएं धनले करने के लिए हाँ बहुत लोग
16:13धनले करके आए भगवान की कृपा जो गौड गिप्टेट कृपा थी या यू कह लीजे कि एक ऐसा ब्रेंग जिसके
16:19द्वारा ये संकित आ जाता ए
16:21लग बग एक महिने तक दाम रुकी रही बड़ा मेकप लगाती थी बड़ी लाली तो हमारे चेलों को वो फॉन
16:26देया करती थी जो आसपास रहते थे फिरी में न्यू फॉन तो हमारे चेलों ने बताया कि एक बहन जी
16:33बड़ी भक्तिनी है वो जोली माला डालती है और तिलक �
16:36हैं बड़ा मेकप लगाती है और हम रोज निकलते थे तो दरबार में वो सबसे आगे बैठी दिखती थी एब्रीडे
16:42रोज बैठी दिखती तो कभी बीच में कभी ऐसी जगे बैठती थी कि ताकि वो हमारा ध्यानों की तरफ खिचे
16:49ऐसी वो कोशिश ने करती थी तो समझ आ
17:06कि बहिंजी पधारों तो एक रामदरवार है हमारा रामदरवार में रामजी बैठे वहां पर आया लोगों को जिन जो कोई
17:13देश से संबंध या कोई ऐसे विशय पर हमसे सामाधान लेना चाहे था तो वहां और लेडी कैमरा लगा वहां
17:20बैठे उसमें उस वक्त वाइस रि
17:36आपा कुछ नहीं है वही जो बड़ी प्रेम बाली बात है हम तुमारी लिए चांद तारे तो उड़ा हैं तो
17:42हम समझ के हैं तो हमने कहा बेहन जी चमा करो आप गलच जगए आगे हैं और कुछ बातें होई
17:48जिन बातों से हमने फिर उनको बहुत अच्छे तरीके से लटाड
17:54यू कह लिजे सक्ती का प्रियोग भी किया फिर हमने कहा कि आप जिस स्कूल में पड़ी है वहां प्रिंस्पल
18:01है और यह जो आपका बकल है हैर बकल है तो बड़ा जूटा बना करके उसमें हैर बकल बगा थी
18:08थी कैमरा था उसमें फिर उन्होंने छमा मांगी एक नाम बताया
18:13वसाध्मी से माजभी सावधान इंचे माजब का नाम बताया वो होगे घर्म जगत के कहा के हैं तो आपके अपने
18:23इसमें भी एक दूर ँक्लs कुषा यहां ऊवस्धर सए यह हमारा कोई को उता नहीं है क्योंको दो दर्म को
18:30उतलग हो जाए तो दहर्म नहीं बचेगा जिए
18:33में competition होता नहीं, धर्म में competition हो जाए, तो धर्म किसी काम का नहीं, बहुत सारे लोग यह जानना
18:39चाहते हैं, और यह ऐसे ही जो अगर बकल में लगा कर आ रही हैं, तो कुछ सब को पता
18:43हैं, आप को आ रहे हैं, तो फिर एक safe guard आप एक ऐसा ले लिजेगी, जिसके बाद यह ची�
18:52तो तीन अवरोध हैं, अनमाजी जब लंका गए तो तीन अवरोध है, शिंघ का, लंकनी, सुर्षा, और हमारे सामने भी
19:00तीन अवरोध हैं, वो है istri, black money और गंधी politics.
19:07तो ब्लेक मनी और गंधी पॉलिटिक्स तो चलिए आप उससे अगर ठान लेंगे तो दूरी रहेंगे इस्त्री वाला जो मसला
19:15है वो साधी करके दूर हो जाएंगे तो क्या दोहदार शब्विस शब्विस तो नहीं पर हां बहुत जल्दी अधर ऐसा
19:25किलियर नहीं कह सकते पर
19:26यह कह सकते जादा जादा दो साल रहाई साल खिचेगा और अपने जीवन में ग्रहस तो जीवन में प्रवेश करके
19:31ऐसा होता है कि आपके इतने लाखों करोड़ों भगते चाहने वाले हैं कभी कोई पैरेंट्स आ जाये और कहा कि
19:37शाती आमारी बेटी आया है आते है संसकार
19:50माता जी पता जी आगे लेंगे बहुत खेल रही हैं तो फिर क्या नहीं हमने इस बृतर स्टीशन ही देखा
19:59तो वह आपने किसे और पे छोड़ रखा कि हमने परिवार पर छोड़ रखा यह विससे जैसे ही आता है
20:05तो एक ही जबाब निकलता मा जी को आप लो पिछले एक मह
20:09मेना दस दिन लगबख हो गए होंगे, जंग चल रहे है दुनिया में, ये डोनल्ड ट्रम जो है, कभी हमारे
20:15अच्छे देश के प्रधान मंत्री साब के दोस्वा करते हैं, वो हर सुवा जब उठते हैं, तो ये कजीब सी
20:21कुछ लाई नहीं आती है, यहां बम गिराएंगे, आ
20:37उसका समाधान बगवान भी नої दे सकता है, और इस जंग के बारे में क्या रहा है? जंग के बारे
20:43में अभी तही ही रहा है, कि ये स्रफ एगो की लडाई है, और हक जमाने की लडाई है, और
20:49एरन अपना अस्त्वत बचा रहा है, इस्राइल और अमेरिका अपनी इज्जित �
20:53बचाने के दावाँ पर अब लग गया पहले लड़ाई एक सीमा तक थी अब ये लड़ाई ये सीमेत इसलिए हो
20:59गई है कि दोनों को अपनी नाक और शाक बाई गुंडा को गुंड़ाई बनाए रखने के लिए ये काम करने
21:04पड़ते हैं जो अमेरिका कर रहा है गुंड़ाई
21:06बनाए रखने के लेकिन अब दिक्कत ये हो गई कि गुंड़ाई को भी रिस्पॉंस बराबर गुंड़ा नहीं मिल रहा है
21:12जबाब बराबर मिल रहा है तो इनकी गुंड़ाई पर खत्रा है तो अब इनकी अस्तत्य की बात आ गई है
21:17तो ये तभी पानेंगे जब या तो इ
21:33विजद बचाए रखने के लिए युद्ध लड़ रहे हैं, दोनों का मन नहीं है, इरान की मजबूरी है, और अमेरिका
21:39की अब हालत यह है कि अगर नहीं लड़ते हैं, तो गुंड़ी खतम होती है
21:43हमारे देश की पुलिस, जेल और अधालते हैं, इनके बारे में आपकी वेक्तिगत रहे हैं, कुछ कहेंगे तो कई बार
21:53लोगों को तोहिं लगेगा, पर आपने कहा कि आप, बोलने से हम चुकते नहीं, आप कुत्ता को कुत्ता जी नहीं
22:00बोलते हैं, पर एक बात हम कहना चाहे
22:05कि इस देश की कानून विवस्था मकडी के जाले की तरह है, भारी चीज निकल जाती है, चोटी फस जाती
22:15है, वन लाइनर में यदि आप हम से जवाब मांगे, तो वरतमान में इस देश की कानून विवस्था ऐसी है,
22:23कि भारी चीज, पहुँचे हुए लोग, प्रशिद लो
22:28निकल जाते हैं, और उस से भी घटिया इस तरके जुर्म में थे, लोग आजीवन का रावास पाते हैं, बड़े
22:37पहुचे हुए लोग, करोनों का घुट डाला करकर देश से भाग जाते हैं, और कानून को पता नहीं लगता, और
22:43दो सो रुपिया का जुर्म करने बाला, चा
22:59लग भग हमको वह बाकी आयाद है, क्योंकि हम कहानियों पर बहुत भरोशा करते हैं, और चीजों को पढ़ने में
23:05हमें बड़ा सौक है, और सेतिस सालवाद सो रुपिया के जुर्म में वह बाहर निकलता है, और बाईजद बरी निकलता
23:12है, यह इस देस का कानून है, हम मानत
23:25है कि अदालती कारवाई पर हम कोई भी टिपनी करेंगे, तो हो सकता कि म्याए-पालगा की मर्यादा के खिलाफ
23:30हो, पर इस देस के बहुत से ऐसे केस हैं, जो केस होने लाइक नहीं, और इतने लबी खीचने लाइक
23:37नहीं, अदालत के फैसले बुड़े टाइम लेते हैं, बह
24:04बहुत बहुत बहुत सुटंतरता से जीते हैं, और जो भी मिलते हैं, हम उनसे भी गहते हैं, आपको हमारी बाते
24:11बुरी लगें, तो आप अपनी भावना झालिचे, हम अपने कहने की भावना ना बदलें
24:17बहुत बहुत शुक्रिया तो मुझे उमीद है कि आज बावा बावा घिश्वत धाम जी के साथ पूरी आपने बात्युत तुनी
24:22इसमें धर्म भी मिला और आप उज्वर्म भी मिला थैंक यू सुमत
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