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बेबाक भाषा के ख़ास कार्यक्रम Decoding RSS में प्रसिद्ध लेखक और मानवाधिकार कार्यकर्ता राम पुनियानी ने बात की बंगाल और RSS की। 1930 के दशक से RSS का बंगाल में काम है, लेकिन वह आज तक बंगाली समाज को नहीं तोड़ पाई है। हालांकि इसकी कोशिशें जारी हैं और RSS किसी भी तरह बंगाल को BJP के लिए जीतना चाहती है।
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00:03दोस्तो बेबाग भाशा पर आपका स्वागत है
00:06Decoding RSS की श्रंखला में आज हम बात करेंगे
00:10RSS का क्या प्रभाव है West Bengal में
00:13अभी West Bengal में चुनाव चाने वाला है
00:16वोटिंग होने वाली है चुनाव को माहोल है
00:19इसमें RSS ने अपना काम किस प्रकार से किया है
00:23और उनके प्रभाव से बीजेपी को कितना फायदा होगा इसके बारे हमें हम बात करेंगे
00:33वैसे दिखा जाए तो RSS जो है ये बंगाल में इसने काम 1930 के दशक में चालू किया
00:43कलकत्ता में ये उसकी शाखा बनी वो पहले 1949 में बनी और उसके बाद इसका प्रभाव दीरे दीरे बढ़ने लगया
00:51जैसा ये करते हैं
00:52शाह खाएं लगा के और दूसरा काम करके खैर ये एक जो जीमी गत्टी पे इनकी चाल चल रही थी
01:00उसकृआ जो और एक धीमा पनाया
01:04वो बंगाल के कल्चर के कार लाया
01:07बंगाल में जादातर वाम पंथ विचार ये जादा रहे हैं
01:12और उसी के साथ साथ जब बाद में वाम पंथी सरकार करीब 34 साल तक सप्ता में रही
01:19उस दोरान RSS एकदम दवी दवी सी रही
01:22क्योंकि RSS का मुक्च जो काम रहता है
01:26नफरत फैना कर शाखाइं बना कर उस पे काम करना
01:30ये उस समय बिलकुल नदारत रह
01:34अब उसके बाद जब 2011 से इसका फिर से एक बार इस ने अपने को बढ़ाने की कुछशिश की
01:41और इस बढ़ाओं में इसने मुक्च जो जो जो द्योर दिया
01:44वो शाखाओं पर दिया, शाखाओं के माध्यम से जैसे मैंने बताया पहले शाखाओं बहुत कम सग्ध्या में थी, कोई कहते
01:52हैं पहले करीब 2000 शाखाओं थी, एक आकड़ा है कि 5 साल पहले वहाँ 6000 शाखाओं थी और आज वो
02:0112000 शाखाओं हो गई, इसी बीच राजनीतिक शि
02:06यसे वर्चा सुबढ़ा, उसको सपोर्ट करने के लिए RSS ने अपनी नीती बनाई और उसके आधार पर उन्होंने जो बुद्दे
02:15उठाए, उसमें सबसे पहला तो धार्मिक सांस्क्रतिक था, बंग्लाल में मुख्य रूप से जो दुर्गा पूजा और ये टेवार रहते
02:25हैं, उसके बदले इन्होंने हनुमान जैन्ती, राम का जन्म दिन, राम नौमी, क्रेशन जन्माष्टमी, ये तेवारों को मनाने की इन्होंने
02:38बहुत तेजी से शिरुवात की, और ये उनका पहला तरीका था लोगों से जुड़ने का, क्योंकि इस आधार पे वो
02:46जल्दी �
02:47जुड़ पाए लोगों के साथ, वहां वामपंती विचारधारा का प्रभुतु होने के कारण, ज्यादा तर लोग इनके धार में की
02:55इस प्रकार की चीजों में नहीं आते थे, अब खैर इसके बाद जो प्रक्रिया हुई, अब पिछले कुछ सालों में
03:02इन्होंने देखा कि
03:04बीजेपी की जो हालत है उतनी अच्छी नहीं है, तो उसके बीच में कोडिनेशन लाने के लिए आरेसेस के प्रशारक
03:11और खुद सरसंग्शालक मोहन भागवत ये भी वहीं गए, लंबे-लंबे दोरे किये और उन्होंने बीजेपी के साथ अपनी मीटिंग्स
03:21करके बीजे�
03:26देखते हैं कि अभी मार्च में उनकी एक अखिल भारती प्रतिनीती सवा, जो आरेसेस का सबसे बड़ा अंग होता है,
03:37सब प्रतिनीती उसमें रहते हैं, आरेसेस के जो ब्रांचेस हैं, जो उसके अलग-अलग संताने हैं, उसके प्रमुकुस में रहते
03:43हैं, और उन्होंने �
03:45इस बात पर जोर दिया कि RSS के जितने भी दूसरे संगठन हैं वो भारती जनता पार्टी की मदद करने
03:53के लिए बंगाल में ज्यादा सक्री हो जाएंगे और उन्होंने जैसे बुद्धे उठाए पहले मैंने बताया एक तो तेहुरों के
04:00आधार पे उन्होंने लोगों को जो�
04:14है और उसके एक गुसपैठी के नाम पर इन्होंने काफी वहां प्रचार किया और साथ ही साथ अभी जो बंग्लादेश
04:23में शेख हसीना के बाद जिस प्रकार का उठा हुआ शेख हसीना को वहां से भागना पड़ा और कुछ हिंदूों
04:33पर थोड़े अत्याचार हुए उसक
04:38दोंके नाम पर इन्होंने तेज कर लिया कि हिंदू यहां कितना खत्रे में हैं और ये बाट नोने बंग्ल से
04:46लेके वैस्ट बंग्लाक में फैल आई
04:49कि बंगलादेश में हिंडू असुरक्षित हैं फिर दूसरा इन्हों ने जो जैसा मैंने बताया कि इनकी एक तो सेवा का
04:57तरीका इनका है लोगों को जोडने का तो बंगाल में ने सेवा के आधार पे फिर तेवारों के आधार पे
05:04और तीसरा मुसल्मानों के खिलाफ नफरत ब
05:12गुस्पैठी हैं ये नारा उन्होंने बार-बार जमीनी स्तर पर लोगों के बीच मिले गए जिसके कारण एक तुरूवी करण
05:23की प्रक्रिया वहां मजबूत होती चली
05:26बंगाल में बढ़ता हुआ इस वाले इस्लामिक कटरवाद हिंदों के प्रती हुंसा की घटना है पांगला देश की परिस्थिती वहां
05:36की घटना और मुझदाबाद की घटना मुसलिम घुषपैट ये सब जो बाते हैं उन पर वो तो बंगाल को प्रवाइद
05:49कर रही रही ह
05:49अब ये बड़ी रोचक है कि जब वानपंथ की सरकार थी तो RSS काफी दबा दबा था क्योंकि एक और
05:58बात हुई वानपंथ की सरकार के दोरान कि उन्होंने सामप्रदाइक दंगों पर पूरी तौर से रोक लगा दी थी और
06:06ख्याल किजिए कि जब भी सामप्रदाइक दंग
06:18साल तक वहां RSS का विकास नहीं हो पाया और 2011 के बाद उन्होंने कमर कसकर यहां तेवारों के आधार
06:29पे और दूसरे आधार पे अपनी पैट को गहरा करने की कोशिश की है और यह जो कोशिश है अब
06:36यह चुनाव में किस प्रकार से सामने आएगी वो देखने की बात है पर �
06:41रूप से एक संप्रदाइक महोल इन्होंने विस बेंगॉल में खड़ा कर दिया है विस बेंगॉल जहां संप्रदाइक का काफी कम
06:50थी नहीं के बराबर थी थोड़ी बहुत बढ़ने लग दई और पिछले 15-20 साल से यह तेजी से बढ़
06:57रही है इसके कारण भी हमें सोचना
06:59चाहिए और RSS ने अपनी नीतियों को किस प्रकार से बदला ताकि वो विस बेंगॉल जैसे प्रदेश में जहां इनका
07:09कोई वैचारिक आधार नहीं है जहां हिंदू राष्ट की बात अतनी गहरें नहीं पैठती जहां लोग अपने सवालों के बारे
07:17में ज्यादा चिंतित �
07:18हैं वहां भी इन्होंने अपना रास्ता बना लिया अलग अलग तरीकों से और आज RSS वेस बेंगॉल में 12,000
07:26शाखाओं के साथ एक बड़ी मजबूत थाकत है जो वीजेपी को एक बड़ा आधार देगी संबल देगी और उसके आधार
07:34पे वहां की राजडियती को इन्फिल
07:50हैं
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