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Dalit History Week पर श्रृंखला की इस दूसरी कड़ी में लेखक व सामाजिक कार्यकर्ता राज वाल्मीकि बता रहे हैं कि क्यों बाबासाहेब आंबेडकर जाति व्यवस्था के उन्मूलन की बात करते थे और मौजूदा प्रधानमंत्री से लेकर कोई मुख्यमंत्री तक- सब जाति की संरचना में अपना हित देखते हैं, उसे नष्ट करने की बात नहीं कहते...
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00:00जैभीम साथियों, अमबेटकर जनती के अबसर पर आप जानते ही हैं कि चाहे PM हो, चाहे CM हो, बावा साब
00:09की मूर्ती पर सभी माल्यार्पन करते हैं और बावा साब की प्रसंसा के पुल बांगते हैं
00:15लेकिन साथियों, बहुत दुखद है कि बावा साब के बिचारों को बिलकुल नहीं अपनाते हैं, बावा साब की एक पुस्तक
00:23है, एनिरेशन ऑप कास्ट यानि जाती का बिनास, इस पुस्तक के माध्धम से उन्होंने एक नियायपूर्ट समाज की आधार सिला
00:33रखी हैं, ले
00:45निभाते हैं, आपको बताएं साथियों कि बावा साब ने जाती के बिनास में ये लिखा है कि जाती कोई इटों
00:53की दीवार या तारों का बाड नहीं है, यह एक धारना है, मन की अवस्ता है, उन्होंने कहा है कि
01:01जाती सिरफ सामाजिक समस्या ही नहीं, बलके एक मानसिक बीम
01:15कि दलित जिस और भी जिस रास्ते पर भी जिस तरक्की के पत्पर आगे बढ़ते हैं उन्हें जाती का राक्षस
01:25रास्ता रोके खड़ा मिलता है और यही वज़ा है कि वह अपने जीवन में तरक्की नहीं कर पाता
01:33आपको याद होगा सातियो बाबा साब ने ये कहा था इस हिंदू धरम की विवस्ता पर जाती पर कि इस
01:42धरम में यानि हिंदू धरम में जन्म लेना मेरे बस में नहीं था लेकिन मैं हिंदू होकर मरूंगा नहीं और
01:50यही कारण है कि उन्होंने 14 अक्टूबर 1956 को बौत धरम अ
02:03करती हैं पहली है सामाजिक गति हिंता दूसरी बात है भाईचारे का अभाव तीसरा कारण है बहुत धिक पतन तो
02:11ऐसे समय में बाबा साब जब चाहते थे कि सामाजिक समानता हो स्वत्वंत्रता हो बंधुत हो इसकी कल्पना नहीं की
02:20जाती और मनुस्मिर्थी का जब तक ख
02:24हात्मा भी नहीं होगा साथियों क्या आप इसके लिए तयार हैं
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