Skip to playerSkip to main content
Dalit History Week पर श्रृंखला की इस तीसरी कड़ी में लेखक व सामाजिक कार्यकर्ता राज वाल्मीकि बता रहे हैं कि क्यों बाबासाहेब भीमराव आंबेडकर को उनकी जयंती पर याद करने का मतलब है संविधान बचाने की लड़ाई में हिस्सेदारी करना क्योंकि यही इस समय का सबसे जरूरी संघर्ष है...
#news #latestnews #newsanalysis #bebaakbhashashorts #shortvideo #shortsvideo #shorts #babasahebambedkar #dalitvoices #dalitrights #dalithistory #annihilationofcaste #ambedkarjayanti

Category

🗞
News
Transcript
00:00साथियो बी आर अंबेटकर का मतलब है संभिदान बाबा सहब ड़क्टर भीमराव अंबेटकर एक मातर ऐसे नेता हैं जिनकी संसत
00:10से लेकर सहरों, गाउँ देहात, कस्मों में मूर्ती संभिदान के साथ होती है
00:18यानि इस देश की जनता के लिए बाबा साब और सम्विधान साथ साथ है और सम्विधान ही वह सकती है
00:27जिसकी बज़ा से हम दलितों, महलाओं और आदिवासियों को वो अधिकार मिले जो पहले कभी नहीं थे
00:36इसलिए सम्विधान हमें गैर बराबरी, असमानता और भेदभाव के खिलाप लड़ना सिकाता है यह सम्विधान ही है साथियों जिसकी बज़ासे
00:47हम बराबरी और गर्मा का जीवन जी सकते हैं
00:52लेकिन इस सम्विधान गिरोधी कुछ सक्तियां की वज़ा से हमारा सम्विधान खत्रे में है और इसकी लड़ाई के लिए सम्विधान
01:02को बचाने के लिए बाबा साथ भीम्राव अंबेट कर हमारे पोस्टर वोई हैं
01:07सम्विधान जारी रहे सम्विधान सई अर्थों में लागू हो इसके लिए हमें निरंतर संगर्स करना होगा और हम लोग कर
01:16रहे हैं
01:17हाल ही में कॉंग्रेस नेता प्रतिपक्च राहुल गांधी ने भी मैं हूं अंबेट कर नाम से मैरा थन निकाली
01:28साथियों आज समय यही है कि हम भी कहें मैं हूं अंबेट कर और हम अपने सम्विधान को बचाने के
01:36लिए संकल्प लें
01:38सम्विधान हमें जान से प्यारा है और हमें सम्विधान बचाना है जै भीम जै भारत जै सम्विधान
Comments

Recommended