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SIR के नाम पर जैसे देश के कई राज्यों में नागरिकों से वोट देने का अधिकार छीना जा रहा है, वह सीधे-सीधे देश के संविधान पर चोट है, जिसे बाबासाहेब आंबेडकर ने सबको बराबरी का अधिकार देने के लिए गढ़ा था। लेकिन जब संविधान की हिफ़ाजत करने के लिए जिम्मेदार संस्थाएं दगा दे जाएं तो संविधान बचाने की जिम्मेदारी किस पर आती है?
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00:00बाबा साहब डाक्टर भीम्राव अम्बेटकर के सपनों का भारत एक ऐसा भारत है जहां देश के सभी नागरिक बरावरी का
00:09जीवन जीते हैं, समान्ता का जीवन जीते हैं।
00:12इसके लिए ही उन्होंने तीन सब्द दिये थे लिवर्टी, इकुलिटी, एंड फ्रेटर्निटी यानी स्वतंत्रता, समान्ता और बंधित्तो इसके साथ ही
00:24उन्होंने सम्विधान के आर्टिकल 326 में हमें राइट टू वोट का यानी वोट देने का अधिकार दिया था इस अ
00:42पुरुसों सब के वोट का मूली बरावर है इसलिए उन्होंने एक व्यक्ति, एक वोट और एक मूली की बात कही
00:52थी इसके कारण हमें अपने लोक तंत्र को जिन्दा रखने में सामाजिक जीवन जीने में बरावरी से जीने का हक
01:01उन्होंने हमें दिलाया था लेकिन आज जो
01:12सम्मिधान की बजाए मनुविधान को लागू करना चाते हैं यही बज़य है कि सम्मिधान में हमें जो आरक्षण का प्रावधन
01:20किया गया है उसका वो ग्रोध करती है असर में आरक्षण कोई भीक नहीं है वो हमारा अधिकार है बाबा
01:28साब ने आरक्षण को प्रतिन्दित
01:30तो कहा था, क्योंकि दलिज जातियों की उपस्तिती सरकार में, सरकारी व्यवस्ता में, सासन में ना के बराबर थी
01:40और इसलिए बाबाचा चाते थे कि सभी जातियों को सासन व्यवस्ता में, सरकार में प्रतिनित तो मिले
01:48तो आज जैसे आप देखी रहे हैं कि आज आरष्छन का बिरोध सबरणबादी ताक्तम द्वारा किया जा रहा है।
01:56आर्थिक असमानता होगी, अमीरी गरीबी होगी, जातिगत भेदवाओ होंगे और उन्होंने ये चेतावनी भी दी थी कि अगर ऐसा चलता
02:05रहा तो जादा दिनों तक राजनितिक लोकतंत्र नहीं टिक पाएगा, वो भी खत्रे में पर जाएगा।
02:12इसलिए आज जो हम देख रहे हैं, आज हमारा सम्मिधान खत्रे में हैं और हम चाहते हैं कि हमारा देश
02:19सम्मिधान से चले, मनुविधान से नहीं।
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