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  • 23 hours ago
Horror Written Story।Shortcut Road।Anjani Sadak। Horror Story। Suspence Story

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00:02एक सुनसान और लंबी सड़क पर, जहां दूर दूर तक किसी इनसान या दूसरी गाड़ी का नामो निशान तक नहीं
00:09था, अंधेरे को चीरती हुई एक कार धीरे धीरे आके बढ़ रही थी।
00:30एक संजन की धीमी गड़गड़ाहट सुनाई दी रही थी। काफी देर तक गाड़ी चलाने के बावजूद ये सुनसान रास्ता खत्म
00:36होने का नाम ही नहीं ले रहा था।
01:00कार लगातार आगे बढ़ रही थी और मधूव दीपक इस सुनसान सडक के बारे में बाते करते हुए ये समझने
01:07की कोशिश कर रहे थे कि आखिर ये रास्ता कहां जाकर खत्म होगा।
01:11उनके मन में बार-बार ये सवाल उड़ रहा था कि क्या वे सही दिशा में जा रहे हैं या
01:16फिर किसी अंजानी जगह में उलचते चले जा रहे हैं।
01:19तब ही अचानक कार की हेडलाइट की रोशनी में उन्हें रास्ते के बीच एक घायल आदमी पढ़ा दिखाई दिया।
01:27दीपक ने तुरंत कार रोग दी। वो आदमी कराहते हुए मदद की गोहार लगाने लगा।
01:32मदधू को उस आदमी पर संदे हुआ और उसने दीपक से वहां से आगे बढ़ने की बात कही।
01:38लेकिन दीपक उसकी बात अंसुनी कर उस घायल आदमी को कार की पिछली सीट पर बैठा लिया।
01:45कार आगे बढ़ी दीपक उससे बात चीत करने लगा। लेकिन कुछ देर बाद अचानक वो आदमी चुप हो गया।
01:52दीपक ने कार रोकी और पीछे देखा तो उसकी सांसे थम गई। वो आदमी मर चुका था।
01:58उस अंजान आदमी के इस तरह मर जाने पर दीपक और मधु गहरी मुसीबत में फस गये।
02:04मधु घबराई हुई आवाज में कह रही थी इस लाश को तुरंत यहीं छोड़ना होगा वरना कोई अनहोनी घट सकती
02:10है।
02:11वे दोनों कार से नीचे उतरे, दोनों के चहरे पर डर साफ जलक रहा था।
02:16शरीर में सहरन दोड रही थी, सांसे तेज हो चुकी थी और आँखों में घबराहट थी, उपर से बारिज भी
02:23रुकने का नाम नहीं ले रही थी।
02:25रात की खामोशी में अजीब अजीब आवाजें उनके कानों में गूंज रही थी।
03:23जैसे उनकी हर हरकत पर नजर रख रही हूँ।
03:25कार स्टार्ट हो गई। दोनों ने राहत के सांस ली और वहाँ से तेजी से निकल पड़े।
03:30लेकिन जैसे जैसे वे उस सुनसान जगा से दूर जाते जा रहे थे उनके दिल की धड़कने तेज होती जा
03:37रही थी।
03:37रास्ते की गहरी खामोशी और अंधेरा अभ्यों ने डराय जा रहा था।
03:42कुछ दूर कार आगे बढ़ चुकी थी सड़क पर सनाटा पसरा हुआ था। तब ही अचानक मधु का मन घबराने
03:49लगा और उसने डरते डरते धीरे से पीछे मुड कर देखा।
03:53अगले हिपल उसकी रगों में खून जम गया और गले से एक दिल दहला देने वाली चीख निकल पड़ी। पिछली
04:01सीट पर वही आदमी की लाश पड़ी थी जिसे कुछ देर पहले उन्होंने उस सुनसान पेड़ के नीचे धकिल दिया
04:08था।
04:09ये खौफनाक और अकल्पनीय द्रिश देखकर मधु का पूरा शरीर कांपने लगा। उसकी सांसे बेतर्तीब हो गई और वो चीकते
04:17चीकते दीपक की और गिर पड़ी। पूरी तरह पेहोश।
04:21मधु अचानक जोर से चीक मार कर बेहोश हो गई थी और जब दीपक ने कार की पिछली सीट पर
04:27पड़ी उस लाश को देखा तो उसकी भी रूह कांप उठी मानो पैरो तले जमीन खिसक गई हो। उसका पूरा
04:33शरीर पसीने से भीग गया, हाथ कांपने लगे और आँखे फ�
04:51पूसरी साड़क पर आ चुकी थी, ये देखकर उसका दिल और भी तेज धड़कने लगा, कांपती हुई आवाज और डरी
04:58हुई आँखों के साथ मधु ने दीपक की ओर देखा और हकलाते हुए पूछा, दीपक ये सब कैसे हुआ, आखिर
05:06हुआ क्या था, वो लाश कहा ग�
05:19तब मैं भी उस लाश को देखकर सहम गया था, मुझे यकीन हो गया कि इस रास्ते पर जरूर किसी
05:25भूत प्रेत का साया है, मैंने किसी तरह हिम्मत जुटाई और डिकी से पिट्रॉल का डिबबा निकाला और उस लाश
05:32को जला दिया, उसके बाद जैसे तैसे कार में बैठा �
05:35और गाड़ी आगे बढ़ाई, थोड़ी दूर गय थे कि वो सुनसान रास्ता खत्म हो गया और हम इस मुसीबत से
05:41निकल पाए, शायद उस लाश के जलने से ही हमें उस भयानक रास्ते की पकड़ से आजाद किया, इस घटना
05:48ने दीपक के विवहार को कुछ बदल सा दिया थ
05:50वो मधु से बात करते समय परेशान और घबराया हुआ दिखाई दे रहा था, वे दोनों अब शहर के करीब
05:58पहुचने वाले थे, कार की पिछली सीट पर बैठी मधु हलकी सी खौफनाक मुसकान लिए अब तक घटिद घटनाओं को
06:05याद कर रही थी, वो क्षण जब उन्ह
06:08उस अंजान आदमी की लाश जाडियों में छोड़ती थी, और वो आँखें जो समय उन्हें घोर रही थी, वो कोई
06:15साधारन नजरे नहीं, बलकि एक पिछाचनी की थी, जो वर्षों से उस पेड़ पर अपना बसेरा बनाये हुए थी, जैसे
06:23ही दीपक और मधु उस लाश को
06:25वहीं छोड़कर कार से दूर निकल गए, पिशाचनी धीरे धीरे पेड़ से उतर कर जमीन पर आ गए, उसने सूनी
06:32नजर से चारों ओर देखा, फिर रिंगती हुई, उस छोड़ी गई लाश तक पहुँची और उसमें समा गई, देखते ही
06:39देखते वो लाश जीवित होटी
06:42इसके बाद वो अद्रिश रूप से उनके साथ कार तका पहुँची, जब मधू ने अचानक वो एहसास किया, तो उसे
06:51लगा मानो कार के भीतर कोई अद्रिश साया मौजूद है, घबरा कर उसने पीछे देखा, तो पाया कि वही लाश
06:58कार में फिर से मौजूद थी, भय से क
07:08पकते ही उसकी मौत हो गई, दीपक को लगा कि मधू बस बेहोश हो गई है, लेकिन वो मर चुकी
07:16थी, जब दीपक लाश को जलाने की तयारी कर रहा था, तभी पिशाचनी उस अंजान आदमी के शरीर से बाहर
07:24निकली और नया शरीर तलाशते हुए मधू के मृत शरीर में प
07:38उसकी पतनी मधू नहीं, बलकि एक पिशाचनी है, जिसने चालाकी से मधू का रूपधारन कर लिया था और अब उसकी
07:46अनभिग्यता का लाव उठा कर अपने किसी भयानक मनसूबे को अंजाम देने के लिए उसके साथ चा रही थी
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